विक्टर ओरबान की हार को पुतिन के लिए झटका क्यों माना जा रहा है?

    • Author, पॉल किर्बी
    • पदनाम, बुडापेस्ट में यूरोप डिजिटल एडिटर
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

पीटर मागयार ने कहा है कि वह पहले ही 10 यूरोपीय नेताओं से बात कर चुके हैं. यह बात उन्होंने अपनी उस ज़ोरदार जीत के एक दिन बाद कही, जिसने हंगरी में विक्टर ओरबान के 16 साल से चले आ रहे शासन को ख़त्म कर दिया.

लेकिन उन्होंने साफ़ किया है कि वो रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फ़ोन नहीं करेंगे. पुतिन, ओरबान के क़रीबी सहयोगी रहे हैं. हालांकि मागयार ने यह भी कहा है कि अगर पुतिन फ़ोन करते हैं, तो वह उनसे बात ज़रूर करेंगे.

रविवार को तिस्ज़ा पार्टी के चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद मागयार ने तीन घंटे लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा, "अगर पुतिन कॉल करते हैं, तो मैं कॉल ज़रूर उठाऊंगा."

"मुझे नहीं लगता कि ऐसा होगा. लेकिन अगर हमारी बात हुई, तो मैं उनसे कहूंगा कि प्लीज़, चार साल बाद, इस हत्या को रोकें और इस युद्ध को ख़त्म करें."

रूस ने कहा है कि वह मागयार की जीत का सम्मान करता है और हंगरी के साथ 'व्यावहारिक' संबंध बने रहने की उम्मीद करता है.

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ट्रंप के भी अहम सहयोगी रहे ओरबान

ओरबान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भी एक अहम सहयोगी रहे हैं. ट्रंप ने रविवार के चुनाव में उनकी जीत का समर्थन किया था. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पिछले हफ़्ते दो दिन के चुनावी दौरे के ज़रिए इस समर्थन को और मज़बूत करने की कोशिश की.

मागयार ने पत्रकारों से कहा कि वह ट्रंप को फ़ोन नहीं करेंगे, लेकिन अगर ट्रंप उन्हें फ़ोन करते हैं, तो वह कहेंगे कि उन्हें ख़ुशी हुई, क्योंकि वो 'नेटो में मज़बूत सहयोगी' हैं.

साथ ही, मागयार ने कहा कि वो ट्रंप को अगले अक्तूबर में सोवियत कब्ज़े के ख़िलाफ़ हुए हंगरी के विद्रोह की 70वीं वर्षगांठ के समारोह में शामिल होने का न्योता भी देंगे.

ओरबान की अपनी पार्टी 'फिडेज़' के ही एक पूर्व सदस्य रहे मागयार ने, सरकार में फैले भ्रष्टाचार और परिवारवाद को ख़त्म करने के लिए एक ज़मीनी स्तर पर आंदोलन शुरू किया था.

शुरुआती नतीजों के मुताबिक़, तिस्ज़ा पार्टी को 136 सीटें मिली हैं. यह अनुमान लगाए गए 138 सीटों के आंकड़े से कम है, लेकिन फिर भी संसद में दो-तिहाई सीटों की एक मज़बूत 'सुपर मेजॉरिटी' है. इस जीत से पार्टी संविधान में बदलाव कर सकती है.

मागयार ने कहा कि अभी लगभग चार लाख वोटों की गिनती बाकी है और उन्हें उम्मीद है कि उनकी पार्टी बाकी बची कुछ सीटें हासिल कर लेगी.

उन्होंने कहा कि हंगरी के मतदाताओं ने सिर्फ़ सरकार बदलने के लिए नहीं, बल्कि 'पूरी तरह से सत्ता में बदलाव' के लिए वोट दिया है.

सोमवार को यूरोपीय नेताओं के बीच मागयार की काफ़ी चर्चा थी. इसकी वजह रविवार को मतदाताओं के नाटकीय ढंग से उनकी पार्टी का ज़ोरदार समर्थन करना रही.

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, "हंगरी ने यूरोप को चुना है."

मागयार ने हंगरी और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के सामने बताया कि वॉन डेर लेयेन उन नेताओं में से एक थीं जिनसे वे पहले ही बात कर चुके थे.

मागयार ने कहा कि निवर्तमान सरकार की योजनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता, हंगरी यूरोपियन यूनियन में ही है. उन्होंने यह भी कहा कि यूरोज़ोन में शामिल होना उनके देश के हित में है.

उन्होंने अपनी पहली राजनयिक यात्राओं की योजना पहले ही बना ली है. वो पोलैंड, ऑस्ट्रिया और जर्मनी की यात्राएं करेंगे. मागयार ने कहा कि ये ऐसे देश हैं जिनके साथ हंगरी के गहरे संबंध हैं.

'मेरी सलाह पर युद्ध ख़त्म नहीं होगा'

45 साल के मागयार ने हंगरी के हारे हुए प्रधानमंत्री से बिल्कुल अलग रुख़ अपनाया. प्रधानमंत्री ओरबान लंबे समय से यूक्रेन में चल रहे युद्ध के लिए यूरोपियन यूनियन और यूक्रेन के वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की को दोषी ठहराते आ रहे थे.

ओरबान के कैंपेन ने दावा किया कि वे यूक्रेन में रूस के युद्ध को लंबा खींच रहे हैं. पिछले महीने उन्होंने यूक्रेन को दी जाने वाली 90 अरब यूरो की यूरोपियन यूनियन की सहायता राशि को रोक दिया, जिसके चलते उन पर यूरोप की ओर से विश्वासघाती होने के आरोप लगे.

मागयार ने पत्रकारों से कहा कि हंगरी के लोग जानते हैं कि रूस के साथ युद्ध में यूक्रेन ही पीड़ित है.

उन्होंने कहा, "रूस के नज़रिए से भी इस युद्ध का कोई मतलब नहीं था. क्योंकि रूस के हज़ारों लोगों ने अपनी जान गंवाई है. हज़ारों या शायद लाखों रूसी परिवार बर्बाद हो गए हैं, जिनमें यूक्रेन में रहने वाले रूसी-भाषी लोग भी शामिल हैं."

"शायद पुतिन के साथ यह एक छोटी सी फ़ोन कॉल होगी. मुझे नहीं लगता कि वे मेरी सलाह पर युद्ध ख़त्म करेंगे."

यूरोपियन यूनियन में ओरबान के सहयोगी थे. लेकिन वे अकेले ऐसे नेता थे जिन्होंने एक ऐसे कर्ज़ पर वीटो लगाने की कोशिश की, जिस पर वे पहले सहमत थे. दिसंबर में हुई एक शिखर बैठक में हंगरी के बाद स्लोवाकिया और चेक गणराज्य ने इससे अलग रहना चुना.

उनकी सरकार के रूस के साथ संबंधों पर तब और ज़्यादा बारीकी से नज़र रखी जाने लगी, जब विदेश मंत्री पीटर सिज्जार्टो ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने यूरोपियन यूनियन की पाबंदियों से जुड़ी बैठकों से पहले और बाद में रूसी अधिकारियों के साथ जानकारी साझा की थी.

एक मौके पर सिज्जार्टो पर यह आरोप लगा कि उन्होंने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से कहा था, "मैं आपकी सेवा में हाज़िर हूं."

इस जानकारी के लीक होने के बाद ओरबान ने फोन टैपिंग की जांच के आदेश दिए.

सोमवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हंगरी के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री को एक नोट दिया गया. ये नोट मिलने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि निवर्तमान विदेश मंत्री उस दिन मंत्रालय की इमारत में रूस से जुड़े प्रतिबंधों से संबंधित गोपनीय दस्तावेज़ों को नष्ट कर रहे थे.

हालांकि, मंत्रालय की ओर से इस पर कोई टिप्पणी नहीं की गई.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.