होर्मुज़ से लेकर पनामा तक, दुनिया के किन जलमार्गों पर लगता है 'टोल'

    • Author, अली रमज़ानियन
    • पदनाम, पत्रकार
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

अमेरिका और इसराइल के ईरान पर किए गए हमलों और जंग की शुरुआत के बाद ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट पर प्रतिबंध लगा दिए.

ईरान के इस कदम से क्षेत्र में ज़्यादातर यातायात रुक गया. इस कार्रवाई पर दुनिया भर की सरकारों, फ़ाइनेंशियल सेक्टर्स और एनर्जी सेक्टर्स से बड़े पैमाने पर प्रतिक्रिया देखने को मिली.

इन घटनाक्रमों के बीच, ईरान ने रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाज़ों पर टोल लगाने की योजना की घोषणा कर दी.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में इस पर तीख़ी प्रतिक्रिया जाहिर की. हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि वे इस योजना को गंभीरता से आगे बढ़ा रहे हैं और इसे क़ानून में शामिल करने के लिए काम कर रहे हैं.

इस संबंध में, इस्लामी एडवाइज़री काउंसिल के राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग ने 17 अप्रैल से "होर्मुज़ स्ट्रेट में इस्लामी गणराज्य के संप्रभु अधिकारों का प्रयोग" शीर्षक से एक योजना को मंज़ूरी दी.

इस योजना में रियाल, सुरक्षा, समुद्री परिवहन और पर्यावरण प्रदूषण से संबंधित शुल्कों सहित विभिन्न शुल्कों के संग्रह का प्रावधान है.

कुछ ईरानी अधिकारियों ने घोषणा की है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों की "सुरक्षित आवाजाही" सुनिश्चित करने के लिए, कुछ जहाज़ों पर 20 लाख डॉलर तक का शुल्क लगाया जा सकता है.

इस संबंध में, तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल निर्यातकों के संघ के प्रवक्ता हामिद हुसैनी ने ज़ोर देकर कहा है, "ईरान जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही के लिए शुल्क लगाने के प्रोटोकॉल को लागू करने के लिए दृढ़ संकल्पित है और यह नीति युद्धविराम सहित राजनीतिक घटनाक्रमों से प्रभावित नहीं होगी."

इन घटनाक्रमों ने ऐसी योजना के क़ानूनी आधार और लागू होने संबंधी कई सवाल खड़े किए हैं. आगे हम दुनिया के उन जलमार्गों के बारे में बात करेंगे जिन पर टोल जैसे शुल्क लगते हैं.

किन जलमार्गों पर टोल लगता है?

अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से टोल वसूलना कोई नई पहल नहीं है. दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इसके कई उदाहरण मौजूद हैं जिनका लंबा इतिहास है.

स्वेज़ नहर लाल सागर को भूमध्य सागर से जोड़ती है, जिससे एशिया और यूरोप के बीच यात्रा का समय कम से कम दस दिन कम हो जाता है. यह जलमार्ग विश्व के समुद्री व्यापार का क़रीब 10 प्रतिशत हिस्सा संभालता है.

इसमें कंटेनर यातायात का 22 प्रतिशत, वाहन यातायात का 20 प्रतिशत और कच्चे तेल का 10 प्रतिशत शामिल है.

स्वेज़ नहर में टोल शुल्क मिस्र का स्वेज़ नहर प्राधिकरण इकट्ठा करता है. यह राशि जहाज़ के आकार, प्रकार और माल के आधार पर निर्धारित की जाती है और कई लाख डॉलर तक पहुंच सकती है.

मिस्र के नियंत्रण वाली यह नहर प्रत्यक्ष और आसा ख़तरे में नहीं आती है. हालांकि, यह दुर्घटनाओं से बची हुई नहीं है. साल 2021 में एक बड़े जहाज के फंसने की घटना से ये साफ़ हो गया था. इस घटना के कारण नहर छह दिनों तक बंद रही और लगभग 10 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ.

इस रणनीतिक बिंदु का सबसे संवेदनशील हिस्सा लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित बाब अल मंदेब स्ट्रेट है.

साल 2023 से 2025 के बीच यमन में ईरान समर्थित समूह हूती विद्रोहियों ने ग़ज़ा में हमास के ख़िलाफ़ इसराइल के युद्ध के जवाब में कमर्शियल जहाज़ों पर हमले किए.

कई जहाज़ों को अपना रास्ता बदलने और अफ़्रीका से होकर गुजरने के लिए मज़बूर होना पड़ा.

इसके परिणामस्वरूप स्वेज़ नहर से गुजरने वाले जहाज़ों की संख्या जो 2023 में क़रीब 26 हज़ार थी वो 2024 में घटकर लगभग 13 हज़ार रह गई.

पनामा नहर

पनामा नहर, जो प्रशांत और अटलांटिक महासागरों को जोड़ती है, विश्व के समुद्री व्यापार का लगभग 2.5 प्रतिशत हिस्सा संभालती है.

ये अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा है, लेकिन इसमें कंटेनर वाले माल, कार और अनाज जैसे रणनीतिक और अन्य उच्च मूल्य वाले सामान का आवागमन होता है.

अमेरिका में कंटेनर कार्गो का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी नहर से होकर गुजरता है. इसकी सलाना मूल्य क़रीब 270 अरब डॉलर है.

पनामा नहर में जहाज़ों को गुजरने के लिए टोल देना पड़ता है. ये उनके प्रकार और आकार के आधार पर अलग-अलग होता है और लाखों डॉलर तक हो सकता है.

पनामा नहर में टोल की वसूली पनामा नहर प्राधिकरण करता है, जो देश की एक सरकारी एजेंसी है.

इस नहर की संवेदनशीलता जलवायु परिस्थितियों और राजनीतिक मुद्दों दोनों से जुड़ी है. साल 2023 और 2024 में गंभीर सूखे के कारण नहर के मीठे पानी के जलाशयों का स्तर काफ़ी घट गया, जिससे संचालकों को जहाज़ों की संख्या और आकार सीमित करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

मलक्का स्ट्रेट

मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है. लगभग 24 प्रतिशत वैश्विक समुद्री व्यापार इससे होकर गुजरता है. इसमें समुद्र के रास्ते ले जाया जाने वाला कच्चा तेल और 26 प्रतिशत वाहन शामिल हैं.

इसी रास्ते पर सिंगापुर स्थित है. वहां दुनिया का दूसरा सबसे व्यस्त कंटेनर बंदरगाह है.

मलक्का, एक प्राकृतिक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है. यहां जहाज़ों के आने-जाने पर कोई प्रत्यक्ष शुल्क नहीं लिया जाता.

मलक्का चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में ऊर्जा प्रवेश का मुख्य द्वार है. चीन के लगभग 80 प्रतिशत तेल आयात इसी रास्ते से होकर आते हैं. इसी निर्भरता को बीजिंग 'मलक्का दुविधा' कहता है.

इस इलाक़े में समुद्री डकैती अब भी एक स्थायी चिंता है. साल 2025 में इस स्ट्रेट में 130 से अधिक घटनाएं दर्ज की गईं. फिर भी सबसे बड़ा ख़तरा राजनीतिक और भू-राजनीतिक मुद्दों से है.

चीन और अमेरिका या भारत के बीच समुद्री प्रभुत्व को लेकर किसी भी तरह का तनाव इस मार्ग से गुजरने को गंभीर रूप से बाधित कर सकता है.

जर्मनी में कील नहर दुनिया की सबसे पुरानी नहरों में से एक है और कई बार यह सबसे व्यस्त कृत्रिम नहर भी बन जाती है. सालाना 25 हज़ार से अधिक जहाज़ इससे गुजरते हैं.

यह नहर उत्तरी सागर को बाल्टिक सागर से जोड़ती है और जहाज़ों को डेनमार्क का चक्कर लगाए बिना छोटा रास्ता मुहैया करवाती है.

इस कृत्रिम नहर में जहाज़ के वजन और आकार के आधार पर जर्मनी का संघीय जलमार्ग प्राधिकरण टोल वसूलता है. यह आय रखरखाव की लागत का एक हिस्सा पूरा करती है. इस नहर का शुल्क स्वेज़ और पनामा नहर की तुलना में अपेक्षाकृत कम है.

ये दोनों नहरें मिलकर वैश्विक व्यापार का लगभग 10 से 15 प्रतिशत संभालती हैं और इनके शुल्क से अरबों डॉलर की आय होती है.

तुर्की के जलमार्ग

तुर्की के जलमार्ग भी महत्वपूर्ण हैं. बोस्फोरस और डार्डानेल्स तुर्की के दो अहम स्ट्रेट हैं. ये काला सागर और भूमध्य सागर के बीच का एकमात्र समुद्री मार्ग हैं.

लगभग 3 प्रतिशत वैश्विक समुद्री व्यापार इनसे होकर गुजरता है. यह हिस्सा भले ही छोटा लगे, लेकिन इसमें यूक्रेन, रूस और रोमानिया से आने वाले वैश्विक गेहूँ निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा शामिल है.

बोस्फोरस और डार्डानेल्स में, मॉन्ट्रो कन्वेंशन के मुताबिक, जहाज़ों के आने-जाने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता. हालांकि मार्गदर्शन या सुरक्षा जैसी सेवाओं के लिए कुछ लागत लग सकती है.

यह मार्ग अपने सबसे संकरे हिस्से में केवल 700 मीटर चौड़ा है और तुर्की के इस्तांबुल शहर के बीच से गुजरता है. इसी कारण परिवहन जटिल है और छोटे-मोटे टकराव आम हैं.

मॉन्ट्रो कन्वेंशन के अनुसार, तुर्की को इन स्ट्रेट में सैन्य नियंत्रण का अधिकार है. ये अधिकार अंकारा ने 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद युद्धपोतों के आने-जाने को सीमित करने और साथ ही कमर्शियल यातायात बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किया गया.

काला सागर क्षेत्र में तनाव बढ़ने से यह संतुलन बिगड़ सकता है और वैश्विक अनाज बाज़ारों में उथल-पुथल मच सकती है. साथ ही, इस क्षेत्र में तीव्र भूकंपीय गतिविधियों का होना भी एक ख़तरा है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.