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लाइव, महिला आरक्षण बिल पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार को चिट्ठी में क्या लिखा

भारत के महिला समूहों और सामाजिक संगठनों से जुड़े क़रीब पांच सौ लोगों ने 'महिला आरक्षण' और 'परिसीमन' से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों पर सवाल उठाए हैं.

सारांश

लाइव कवरेज

रौनक भैड़ा

  1. महिला आरक्षण बिल पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार को चिट्ठी में क्या लिखा

    भारत के महिला समूहों और सामाजिक संगठनों से जुड़े क़रीब पांच सौ लोगों ने 'महिला आरक्षण' और 'परिसीमन' से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों पर सवाल उठाए हैं.

    इन्होंने केंद्र सरकार को लिखे एक पत्र में कहा कि संसद का विशेष सत्र (16-18 अप्रैल 2026) जल्दबाज़ी में बुलाया गया है.

    495 लोगों के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में लिखा है, "हम इस सत्र पर आपत्ति जताते हैं, क्योंकि कई राज्यों में चुनाव चल रहे हैं और आचार संहिता लागू है. हम यह भी मानते हैं कि सरकार ने महिलाओं के समूहों को अपनी सिफ़ारिशें देने का पर्याप्त समय नहीं दिया."

    हस्ताक्षरकर्ताओं ने केंद्र सरकार से बिलों के ड्राफ़्ट को सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि सलाह-मशविरा हो सके.

    पत्र में कहा गया है, "इस सत्र का ध्यान केवल नारी शक्ति वंदन अधिनियम में आवश्यक संशोधनों तक सीमित रखा जाए, तो इससे कुछ सकारात्मक परिणाम हासिल हो सकते हैं. महिला आरक्षण को जनगणना के परिणामों और परिसीमन से दूर रखा जाए."

    इन्होंने निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी चिंता जताई है, विशेष रूप से आरक्षित सीटों की पहचान को लेकर.

    इस याचिका के प्रमुख हस्ताक्षरकर्ताओं में अमु जोसेफ़, अंजना प्रकाश, कल्पना कनबीरन, रोमिला थापर, नंदिनी सुंदर और योगेंद्र यादव शामिल हैं.

  2. ईरान ने इन देशों से की युद्ध में हुए नुक़सान की भरपाई की मांग

    ईरान ने अपने पड़ोसी देशों सऊदी अरब, यूएई, क़तर, बहरीन और कुवैत से जंग में हुए नुक़सान की भरपाई की मांग की गई है.

    ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत अमीर सईद इरवानी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को एक पत्र भेजा है.

    इस पत्र में कहा गया है कि इन पांच देशों ने अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन किया और अब इन्हें ईरान को हुए नुक़सान की पूरी भरपाई करनी चाहिए.

    बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, ईरानी राजदूत अमीर सईद इरवानी के लिखे गए पत्र को न्यूज़ एजेंसी आईआरएनए ने प्रकाशित किया है.

    पत्र में लिखा है, "इन पांच देशों ने अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन किया है और ईरान के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा नहीं किया है. इसलिए अब उनकी अंतरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारी तय हो चुकी है."

    "इन्हें ईरान को हुए सभी नुक़सान की पूरी भरपाई करनी चाहिए, जिसमें भौतिक और मानसिक दोनों तरह के नुक़सान शामिल हैं."

    यह पहली दफ़ा नहीं है जब ईरान ने इस तरह की मांग की है. इससे पहले ईरान ने अमेरिका से भी युद्ध में हुए नुक़सान का मुआवज़ा मांगा था.

  3. ईरान और अमेरिका के बीच फिर होगी बातचीत? पाकिस्तान ने ये बताया

    पाकिस्तान का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच जल्द ही बातचीत का अगला दौर शुरू हो सकता है.

    पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा है कि युद्धविराम जारी रहने और सकारात्मक हालात को देखते हुए ईरान और अमेरिका के बीच अगली बातचीत जल्द होने की उम्मीद है.

    बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, सोमवार को इस्लामाबाद में संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए आसिफ़ ने कहा, "हाल की बातचीत के बाद संतोषजनक माहौल है और अब तक कोई नकारात्मक स्थिति सामने नहीं आई है."

    उन्होंने आगे कहा, "सामान्य हालात ही देखे गए हैं और इसे इस बात का संकेत माना जाए कि कूटनीतिक कोशिशें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं."

    इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा था कि दोनों पक्षों के बीच हुए युद्धविराम ने आगे बढ़ने की उम्मीदें जगाई है.

    गौरतलब है कि बातचीत का पहला दौर पाकिस्तान के इस्लामाबाद में रखा गया था, इसमें ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि शामिल हुए, लेकिन यह बेनतीजा रही थी.

  4. अमेरिका ने अब ईरान के किस ऑफ़र को ठुकराया, रिपोर्ट में सामने आई ये बात

    ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की बातचीत को लेकर कयास जारी हैं. इसी बीच ईरान ने पांच साल तक यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) रोकने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन अमेरिका ने इसे ठुकरा दिया और 20 साल तक रोकने की मांग की है.

    यह जानकारी न्यूयॉर्क टाइम्स ने ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दी है.

    रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में हुई बातचीत के दौरान अमेरिका और ईरान ने परमाणु गतिविधियों को रोकने के अलग-अलग प्रस्ताव दिए, लेकिन दोनों के बीच समझौते पर सहमति नहीं बन सकी.

    हालांकि, चर्चा से यह संकेत मिलता है कि शांति समझौते की संभावना अब भी बनी हुई है और दूसरे दौर की बातचीत हो सकती है.

    बीबीसी ने इस पर टिप्पणी के लिए व्हाइट हाउस से संपर्क किया है.

    अमेरिका मानता रहा है कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं इस विवाद का बड़ा कारण रही हैं.

    रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दोहराया कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके.

  5. अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस बोले- ईरान 'आर्थिक आतंकवाद' कर रहा

    अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ईरानी शासन 'आर्थिक आतंकवाद' कर रहा है, क्योंकि उसने होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों को रोक दिया है.

    जेडी वेंस ने फ़ॉक्स न्यूज़ से कहा, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिखा दिया है कि ये खेल दोनों तरफ़ से खेला जा सकता है."

    उन्होंने कहा, "अगर ईरान आर्थिक आतंकवाद करेगा तो अमेरिका इस सिद्धांत पर चलेगा कि कोई भी ईरानी जहाज़ बाहर नहीं जा पाएगा."

    जेडी वेंस ने इस्लामाबाद में ईरान से हुई बातचीत के बाद कहा है, "काफ़ी प्रगति हुई है, अब गेंद ईरान के पाले में है."

    वेंस ने कहा, "ईरान को फ़्लेक्सिबल होना होगा और अमेरिका की ज़रूरी मांगों को मानना होगा. ईरान के संवर्धित यूरेनियम पर अमेरिका का नियंत्रण होना चाहिए. साथ ही एक जांच व्यवस्था हो जो यह सुनिश्चित करे कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके."

    गौरतलब है कि जेडी वेंस उस बातचीत का भी हिस्सा रहे थे जो पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान से हुई थी. हालांकि, यह बेनतीजा रही और दोनों देशों ने बाद में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए.

  6. लेबनान और इसराइल करेंगे बातचीत, अमेरिकी विदेश मंत्री भी होंगे शामिल

    अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में मंगलवार को लेबनान और इसराइल के राजदूतों की बैठक होनी है. इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो शामिल होंगे.

    इसराइल के अमेरिका में राजदूत येचिएल लीटर और लेबनान की अमेरिका में राजदूत नदा हमादेह मोवाद, रुबियो के साथ विदेश मंत्रालय में बातचीत करेंगे.

    इस बातचीत का मक़सद दक्षिणी लेबनान में चल रहे संघर्ष को ख़त्म करना है.

    लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों से लाखों लोग घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं. 2,000 से ज़्यादा लोग मारे गए और 6,500 से ज़्यादा घायल हुए हैं.

    दूसरी ओर, सोमवार को हिज़्बुल्लाह नेता नाइम क़ासिम ने लेबनान से इसराइल के साथ होने वाली इस बैठक को रद्द करने की अपील की.

    हिज़्बुल्लाह इसराइल के साथ सीधे बातचीत के विचार को ख़ारिज करता है.

  7. नमस्कार!

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