एफ़एसएसएआई पर सवाल उठाने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स घेरे में क्यों, पूरा मामला क्या है?

    • Author, उमंग पोद्दार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, द‍िल्‍ली
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

इन द‍िनों भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफ़एसएसएआई) ख़बरों में है. इस संस्‍थान ने द‍िल्‍ली पुल‍िस में आपराध‍िक मानहान‍ि की शिकायत करते हुए एक एफ़आईआर दर्ज कराई है.

इसकी वजह से कई सोशल मीड‍िया इन्फ्लुएंसर न‍िशाने पर आ गए हैं. प‍िछले द‍िनों इन्‍होंने एफ़एसएसएआई से जुड़े पोस्‍ट क‍िए थे.

इन पर आरोप है क‍ि इन्‍होंने ग़ैर क़ानूनी तरीक़ों से एफ़एसएसएआई से जुड़े दस्तावेज़ हासिल किए और इसे बदनाम करने की साज़‍िश रची.

एफ़एसएसएआई एक सरकारी संस्थान है. यह खाद्य सुरक्षा मानकों को तय करता है. उन्हें लागू करता है. खाने-पीने के सामानों में मिलावट की जाँच के ल‍िए निरीक्षण भी करता है.

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एफ़आईआर के बाद पुल‍िस ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफ़ॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) को नोटिस जारी किया और कुछ एकाउंट के बारे में जानकारी माँगी.

इन इन्फ्लुएंसर ने एफ़एसएसएआई की 'रेगुलेटरी कंप्लायंस' की डायरेक्टर स्वीटी बेहरा की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए थे. इन्‍होंने आरोप लगाया था क‍ि उनके पास इस पद के लिए पर्याप्त तजुर्बा नहीं है.

इसके साथ, उन्होंने एफ़एसएसएआई के सीईओ रजित पुनहनी पर सवाल उठाते हुए पोस्‍ट क‍िया था कि देश में मिलावटी दूध और पनीर खुलेआम बिक रहे हैं.

यहाँ समझते हैं क‍ि यह मामला क्या है और सोशल मीड‍िया इन्फ्लुएंसर का इस पर क्या कहना है?

मामले की शुरुआत कैसे हुई

इस साल नौ और 10 मार्च के बीच एक्स के कुछ यूज़र्स ने अपने पोस्‍ट में आरोप लगाया कि एफ़एसएसएआई की डायरेक्टर स्वीटी बेहरा का चयन, नियुक्ति से जुड़े नियमों के ख़िलाफ़ हुआ.

इन यूज़र का दावा है कि पिछले दिसंबर में छह अफ़सरों की नियुक्ति के बारे में व‍िभागीय जाँच हुई थी. इसमें पाँच की नियुक्तियों में दिक़्क़तें पाई गई थीं.

इसके बाद 24 मार्च को दिल्ली पुलिस ने एफ़एसएसएआई के संयुक्‍त न‍िदेशक डॉ. संजय कुमार की शिकायत पर एक एफ़आईआर दर्ज की. बीबीसी के पास इस एफ़आईआर की कॉपी है.

एफ़आईआर में कहा गया है कि कुछ अनजान व्यक्तियों के चलाए जाने वाले सोशल मीडिया हैंडलों ने एक्स और 'लिंक्डइन' पर एफ़एसएसएआई की आपराधिक मानहानि करने की कोशिश की है ताकि लोगों का एफ़एसएसएआई पर भरोसा कम हो जाए.

एफ़आईआर में आगे कहा गया कि यह एक सोची-समझी साज़िश लग रही है. यह साज़‍िश एफ़एसएसएआई के कुछ अफ़सरों के साथ मिलकर रची गई है.

यही नहीं, इसमें यह भी कहा गया है क‍ि इस मामले में भारत के बाहर से फ़ंडिंग भी हो सकती है.

शिकायत में कहा गया कि इंटरनेट पर पोस्ट किए गए कुछ दस्तावेज़ जाली हैं और कुछ दस्तावेज़ गोपनीय हैं. ये ग़लत तरह से हासिल किए गए हैं.

एफ़आईआर के मुताब‍िक़, यह सब करने में एफ़एसएसएआई के अधिकारियों की मदद भी है. इन्होंने विश्वास का आपराधिक उल्लंघन किया है. ऐसे दस्तावेज़ों को इंटरनेट पर डाल कर इन सोशल मीडिया यूज़र ने भी क़ानून का उल्लंघन किया है.

पुलिस ने एफ़आईआर में तीन धाराएँ लगाई हैं. इनमें भारतीय न्याय संहिता की धाराएँ 316 (4) व 3(5) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम यानी इनफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट से जुड़ी एक धारा 72ए है.

ये धाराएँ हैं- आपराधिक विश्वासघात यानी क्रिमिनल ब्रीच ऑफ़ ट्रस्ट, कॉमन इंटेंशन यानी एक ख़ास मक़सद से अपराध करना और किसी समझौते के उल्लंघन में जानकारी को ऑनलाइन प्रस्तुत करना.

एफ़आईआर में अभी किसी अभियुक्त का नाम नहीं है. अभी वह अज्ञात व्यक्तियों के ख़िलाफ़ दर्ज हुई है.

एक्स को दिल्ली पुलिस का नोटिस

इस एफ़आईआर के बाद एक अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स को एक नोटिस भेजा. उसमें कहा गया है कि एक्स के कुछ अकाउंट ने विक्टिम को मानहानि पहुँचाने की कोशिश की है.

पुल‍िस ने उन अकाउंट से जुड़े कई ब्‍योरे माँगे हैं. जैसे- उनका ईमेल, फ़ोन नंबर, आईपी एड्रेस आदि.

नोट‍िस में पाँच अकाउंट के नाम हैं: @khurpenchh, @YTKDIndia, @gemsofbabus_, @IamTheStory__, and @NalinisKitchen.

एक्स को म‍िले नोटि‍स के बाद 'नलिनीस किचन' (@NalinisKitchen) ने अपने पोस्ट डिलीट कर दिए. बाक़ी चार अकाउंट के पोस्ट के लिंक जो पुलिस ने एक्स को दिए हैं, वे अब भी ऑनलाइन मौजूद हैं.

बीबीसी हिन्‍दी से बात करते हुए 'खुरपेंच' नाम का हैंडल चलाने वाले व्यक्ति ने बताया क‍ि उन्‍हें नोट‍िस के बारे में एक्स के ज़र‍िए पता चला.

इनका कहना है, "हम पिछले दो-चार महीनों से एफ़एसएसएआई में क्या ग़लत चल रहा है, इसकी बात कर रहे हैं. हमें इस बात की जानकारी मिली कि एफ़एसएसएआई की नियुक्तियों में कई ख़ामियाँ है.''

वे सवाल करते हैं, ''ये एफ़आईआर किस बुनियाद पर हुई है? किस तरह के 'वर्गीकृत' या 'अत्यंत गोपनीय' दस्तावेज़ों का हवाला दिया जा रहा है जिसके लिए एफ़एसएसएआई और दिल्ली पुलिस मैसेंजर का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं?"

उनका कहना है कि इस बात पर सवाल उठाने की बजाए क‍ि उनके पास ये जानकारी किस माध्यम से आई, अफ़सरों को आरोपों की पुष्टि करने और उच‍ित कार्रवाई करने पर ध्यान देना चाहिए.

उनका कहना है कि वे भारत में मिलावटी खाने से परेशान होकर इस मुद्दे को उठा रहे हैं. उन्होंने कहा, "इस मुद्दे से हर कोई प्रभावित है. अगर आपको डॉक्टर कोई डाइट लिख कर दे रहा है तो आप आज कौन से पैकेज फ़ूड पर भरोसा करोगे?"

उनका दावा है कि उन्‍होंने ज‍िन दस्तावेज़ों की तस्वीरें पोस्‍ट की हैं, वे सही हैं. उनका यह भी दावा है क‍ि उन्होंने 'विस्तार से जाँच करके' सभी दस्तावेज़ों को प्रस्तुत किया है.

उन्होंने बताया कि वे इस एफ़आईआर के ख़‍िलाफ़ लड़ेंगे और वकील करेंगे. वे 'खुरपेंच' हैंडल साल 2022 से चला रहे हैं. इसमें वे सरकार और नेताओं से जुड़े कई मुद्दे उठाते हैं. वे ही 'YTKDIndia' हैंडल भी चलाते हैं.

बीबीसी उनके क‍िसी आरोप और दावों की स्‍वतंत्र रूप से पुष्‍ट‍ि नहीं करता है.

बीबीसी हिन्‍दी ने एफ़एसएसएआई से फ़ोन और ईमेल पर संपर्क करने की कोशिश की. हमें उनका कोई जवाब अब तक नहीं मिला है.

हमने इस केस की जाँच कर रहे द‍िल्‍ली पुल‍िस के अफ़सर से भी संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनका भी कोई जवाब नहीं मिला. इनका जवाब आते ही हम स्टोरी अपडेट करेंगे.

इस मामले में आगे क्या हो सकता है

इस मामले की अभी जाँच चल रही है. कोर्ट की वेबसाइट पर इस मामले में कोई चार्जशीट नज़र नहीं आ रही है.

'खुरपेंच' चलाने वाले व्यक्ति ने हमसे कहा, "कई लोग मेरे समर्थन में सामने आए हैं. उन्होंने मुझे क़ानूनी और आर्थिक मदद करने का प्रस्ताव भी दिया है."

हालाँकि, 'नलिनीस किचन' ने एक्स पर पोस्ट किया, "भविष्य में आप मुझे चुप देख सकते हैं. मैं अब इस स्तर का तनाव नहीं झेल सकती."

छह अप्रैल को 'खुरपेंच' के एक्स हैंडल ने पोस्ट किया कि उन्होंने एफ़एसएसएआई के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी एनएचआरसी में एक शिकायत दर्ज की है.

इंटरनेट फ़्रीडम फ़ाउंडेशन डिजिटल अध‍िकारों से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाली एक संस्‍था है. उन्होंने इस मुद्दे पर जारी एक बयान में लिखा, "एफ़आईआर, ऑनलाइन अभिव्यक्ति के ख़‍िलाफ़ आपराधिक क़ानून के दुरुपयोग के बारे में गंभीर चिंता पैदा करती है."

बयान में कहा गया है कि अगर नोटिस में दिए गए पोस्ट को प्रथम दृष्टया देखें तो उसमें "जनहित के खुलासे शामिल हैं. निराधार मानहानि से दूर, इनमें आलोचनात्मक टिप्पणी और सार्वजनिक पद पर नियुक्ति में संभावित कदाचार के आरोप प्रतीत होते हैं. (ऐसी टिप्पणी) अभिव्यक्ति के मौलिक आधार के तहत संविधान द्वारा सुरक्षित है."

दूसरी ओर, जब से एक्स को भेजा गया नोटिस इंटरनेट पर आया है, कई लोग भारत में मिलावटी खानों की बात करते द‍िख रहे हैं.

वे नकली पनीर, भारत में मिल रहे कथित तौर पर हानिकारक पैकेज फ़ूड की बड़ी मात्रा में फ़ोटो शेयर करते हुए एफ़एसएसएआई की आलोचना कर रहे हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित

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