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लाइव, युद्धविराम पर इसराइल ने कहा, 'पाकिस्तान नहीं है भरोसेमंद'

ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम की मध्यस्थता पाकिस्तान ने की. लेकिन इसराइल का कहना है कि पाकिस्तान एक भरोसेमंद प्लेयर नहीं है.

सारांश

लाइव कवरेज

रौनक भैड़ा

  1. युद्धविराम पर इसराइल ने कहा, 'पाकिस्तान नहीं है भरोसेमंद'

    ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम की मध्यस्थता पाकिस्तान ने की. लेकिन इसराइल का कहना है कि पाकिस्तान एक भरोसेमंद प्लेयर नहीं है.

    भारत में इसराइल के राजदूत रूवेन अज़ार ने एएनआई से बात करते हुए कहा, "हम पाकिस्तान को विश्वसनीय प्लेयर नहीं मानते. मेरा मानना है कि अमेरिका ने अपने कारणों से पाकिस्तान की मदद लेने का फ़ैसला किया है."

    अज़ार ने कहा, "हमने पहले भी देखा है कि अमेरिका ने कैसे क़तर और तुर्की जैसे देशों को इस्तेमाल करके हमास के साथ समझौता करने में फ़ायदा उठाया है. हमारे लिए यह बहुत ज़रूरी है कि जिस नतीजे पर पहुँचना चाहते हैं, उसमें हम अमेरिका के साथ तालमेल बनाए रखें."

    दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फ़ील्ड मार्शल को युद्धविराम के प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया था. अमेरिका ने भी पाकिस्तान की ओर से हुई मध्यस्थता की बात स्वीकारी थी.

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने भी युद्धविराम का एलान होने पर अमेरिका और ईरान का शुक्रिया अदा किया था.

  2. ईरान के राष्ट्रपति ने युद्धविराम के बाद तेल रिफ़ाइनरी पर हुए हमले को लेकर क्या कहा?

    ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने दक्षिणी ईरान की लावान तेल रिफ़ाइनरी पर हुए हमले की निंदा की है.

    यह जानकारी सरकारी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी (आईआरएनए) ने दी.

    सरकारी न्यूज़ एजेंसी ने इसे 'युद्धविराम के कई उल्लंघनों में से एक' बताया. एजेंसी ने आगे कहा, "ईरान हर हमले का सख़्त जवाब देगा."

    दूसरी तरफ़, लेबनान पर भी हमले जारी हैं. इसराइल ने बुधवार को लेबनान में 10 मिनट के अंदर 100 ठिकानों पर हमला करने का दावा किया.

    ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर हमले नहीं रुके तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा.

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इसराइल उसके ईरान समझौते की शर्तें नहीं तोड़ रहा है. उन्होंने लेबनान की स्थिति को 'अलग झड़प' बताया.

    गौरतलब है कि पिछले छह हफ़्तों में लेबनान में 1,500 लोग मारे गए हैं, जिनमें 130 बच्चे शामिल हैं. इसके अलावा 10 लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो गए हैं.

  3. ईरान के विदेश मंत्री ने किस बात पर कहा- 'गेंद अब अमेरिका के पाले में है'

    ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि अमेरिका को चुनना होगा कि वह युद्धविराम चाहता है या युद्ध, क्योंकि दोनों एक साथ नहीं हो सकते हैं.

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "ईरान-अमेरिका युद्धविराम की शर्तें साफ़ हैं- अमेरिका को चुनना होगा, या तो युद्धविराम या फिर इसराइल के ज़रिए जारी युद्ध. दोनों चीज़ें एक साथ नहीं हो सकतीं."

    उन्होंने आगे लिखा कि "दुनिया लेबनान में हो रहे क़त्लेआम को देख रही है. अब गेंद अमेरिका के पाले में है, दुनिया देख रही है कि वह अपने वादों पर चलता है या नहीं."

    गौरतलब है कि सीज़फ़ायर के एलान के बाद इसराइल ने इसका समर्थन किया था. हालांकि, उसने कहा कि युद्धविराम 'लेबनान पर लागू नहीं होता'. वह अब भी लेबनान पर हमलावर है.

    जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा था कि 'लेबनान में भी युद्धविराम' लागू होगा.

  4. नेटो चीफ़ से मुलाक़ात के बाद ट्रंप ने फिर साधा नेटो पर ही निशाना

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में नेटो प्रमुख मार्क रुट से मुलाक़ात के बाद नेटो पर निशाना साधा है. ट्रंप ने कहा है कि नेटो ने न तो पहले साथ दिया और न ही आगे देगा.

    डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा, "नेटो हमारे साथ तब नहीं था जब हमें उनकी ज़रूरत थी, और अगर हमें फिर ज़रूरत पड़ी तो भी वो हमारे साथ नहीं होंगे. याद रखो ग्रीनलैंड को, वो बड़ा सा, ख़राब तरीक़े से चलाया गया बर्फ़ का टुकड़ा."

    ट्रंप यहां अपने पुराने बयान का ज़िक्र कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने डेनमार्क के इलाक़े ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की इच्छा जताई थी. इस क़दम का नेटो के कई सहयोगियों ने विरोध किया था.

    वहीं नेटो प्रमुख मार्क रुट ने सीएनएन को बताया कि उनकी मुलाक़ात खुलकर फ़्रैंक तरीक़े से हुई. उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी तरह यक़ीन है कि अमेरिका और इसराइल के ईरान पर हमलों के बाद दुनिया अब ज़्यादा सुरक्षित है.

  5. नमस्कार!

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