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भारतीय आईटी सेक्टर में एआई से नौकरियों पर ख़तरा, कितनी तेज़ी से बदल रही है तस्वीर?
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
पिछले हफ़्ते आईटी कंपनी ओरेकल ने भारत में अपने 12,000 कर्मचारियों को मेल भेजकर नौकरी से निकाल दिया. भारत जैसे देश में इस छंटनी ने 50 से 60 हज़ार लोगों को प्रभावित किया है.
सोशल मीडिया पर ऐसी कहानियां साझा की जा रही हैं कि कैसे 14 साल के अनुभव वालों से लेकर कैंसर से पीड़ित 20 साल के अनुभवी कर्मचारी तक को सुबह छह बजे ओरेकल लीडरशिप की ओर से एक ईमेल मिला जिसने उन्हें हैरान कर दिया.
लेकिन इनमें से बहुत से लोग पहले से कुछ हद तक तैयार थे हालांकि जिस पैमाने पर बर्ख़ास्तगी हुई उसने उन्हें हैरान किया.
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की वजह से इस साल मेटा, आईबीएम, अमेज़ॉन समेत अन्य कंपनियों से निकाले गए लोगों की संख्या 85,000 से अधिक बताई जा रही है.
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ओरेकल की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "जब भी कोई नई टेक्नोलॉजी आती है तो इस तरह की चीज़ें अक्सर होती ही हैं. इसके बारे में मैं और मेरी बहन बातें किया करते थे."
इस कर्मचारी को भी वो मेल मिला है और उन्होंने बताया कि ओरेकल में उनके चार साल के काम करने के दौरान वार्षिक मूल्यांकन में उन्हें लगातार पांच में से चार या पूरे पांच अंक मिले थे.
यहां तक कि उन्हें एआई की ट्रेनिंग भी दी गई थी, जोकि इस समय आईटी सेक्टर में काम करने वालों के सामने एक समस्या बन गई है.
इस महिला कर्मचारी ने बताया, "अन्य सहकर्मियों के लिए तो यह दिल तोड़ देने वाला है. बहुत लोगों की बढ़िया रेटिंग थी, वो सदमे में हैं. इनमें से बहुत से लोग हैं जिनके परिवार, उनकी तनख्वाह पर निर्भर हैं. उन्हें ईएमआई चुकानी हैं और सेहत से जूझ रहे बुज़ुर्गों को भी देखना है."
एआई ने जिन्हें विस्थापित किया
उत्तरी कर्नाटक के एक किसान परिवार से आने वाली यह युवा महिला ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं. वह और उनके पति अपने-अपने परिवार में पहले हैं जो खेती किसानी से बाहर काम कर रहे हैं.
इस युवा महिला ने कहा, "मैं मानसिक रूप से मज़बूत हूं. मेरा नज़रिया यह है कि जिस चीज़ पर हमारा नियंत्रण नहीं है, उस पर समय क्यों बर्बाद करें."
उद्योग के जानकार भी उनकी बात से पूरी तरह सहमत हैं.
न्यूयॉर्क स्थित टेक एडवाइज़री और रिसर्च फ़र्म थोलोंस के चेयरमैन और सीईओ अविनाश वशिष्ठ ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "आपको नए लोगों को काम पर रखना होगा. इंडस्ट्री खुद को एआई के साथ नए सिरे से तैयार कर रही है."
'एआई नेटिव' कौन हैं?
अविनाश वशिष्ठ ने कहा, "जिन लोगों ने लैंडलाइन फ़ोन नहीं देखा है वो बचपन से ही मोबाइल और टैबलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे लोग अपनी नौकरी के पहले ही दिन एआई पर काम करते हैं. हम उन्हें एआई नेटिव कहते हैं. जो लोग पिछले तीन साल में उद्योग में आए हैं और पिछले दो साल में एआई सीखने की पहल की है, वे किसी देश के नागरिक बनने जैसे हैं, हम उन्हें एआई फ़र्स्ट कहते हैं."
इसका मतलब यह नहीं है कि उद्योग एक रात में बदल जाएगा. इसमें समय लगेगा, लेकिन यह तय है कि आईटी उद्योग तेज़ी से बदल रहा है.
फ़िलहाल नौकरियों पर असर पड़ेगा, लेकिन मानव संसाधन विशेषज्ञ और प्रमुख एचआर कंपनी टीमलीज सर्विसेज के संस्थापक मनीष सभरवाल की राय कुछ अलग है.
सभरवाल ने कहा, "भारत में सॉफ़्टवेयर रोज़गार अभी क़रीब 50 लाख है. ये एक एक करोड़ तक पहुंच जाएगा. अभी यह कहना आसान नहीं है कि एआई एक अस्थायी बदलाव है या लंबे समय का बड़ा परिवर्तन. एआई को लागू करने में सभी को काफ़ी मदद की ज़रूरत होती है. आप इसे सिर्फ़ ख़रीदकर लागू नहीं कर सकते."
एआई का नौकरियों पर असर?
आईटी क्षेत्र की अन्य बड़ी कंपनियों के साथ ओरेकल एक उदाहरण है, जिसने एआई लागू करने में बड़े निवेश के बाद नौकरियां कम की हैं.
पिछली तिमाही में ओरेकल का शुद्ध लाभ 6.13 अरब डॉलर तक बढ़ा. एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 30,000 लोगों की छंटनी से कंपनी को 8 से 10 अरब डॉलर की बचत हो सकती है.
जबकि कंपनी ने अपनी एसईसी (अमेरिका प्रतिभूति और विनिमय आयोग) फ़ाइलिंग में 2.1 अरब डॉलर की पुनर्गठन योजना की घोषणा की है.
उद्योग पर नज़र रखने वाले एक जानकार ने पहचान ज़ाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, "एआई में निवेश के कारण कुछ विश्लेषकों ने छंटनी की संभावना जताई थी. संकेत थे कि अन्य कंपनियों की तरह मध्य स्तर के कर्मचारी प्रभावित होंगे. लेकिन लगता है कि दो-तीन साल के अनुभव वाले लोग भी प्रभावित हुए हैं."
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने इन घटनाओं पर ओरेकल से प्रतिक्रिया मांगी और यह भी पूछा कि क्या कंपनी दूसरी बार छंटनी करेगी और एआई प्रशिक्षित कर्मचारियों को क्यों निकाला गया?
इस पर कंपनी ने जवाब दिया, "हम इस पर टिप्पणी करने से इनकार करते हैं."
ब्रिटेन की एक बीमा सॉफ्टवेयर कंपनी के गुरुग्राम दफ़्तर में भी इसी तरह की स्थिति सामने आई, जहां कर्मचारियों को जनवरी में एक बैठक में बताया गया कि ढाई घंटे बाद उनकी सेवाएं ख़त्म हो जाएंगी. एक समय कंपनी में 200 कर्मचारी थे.
नौकरी से निकाले गए एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "समय-समय पर हर विभाग से एक या दो लोगों को निकाला जाता था. ऐसे ही क़रीब 20 लोगों नौकरी से हटाया गया. एआई आने के बाद बेंच रखने की पुरानी व्यवस्था ख़त्म हो गई. एआई पांच दिन में 50 दिन का काम कर रहा था."
यह कर्मचारी प्रोजेक्ट मैनेज कर रहा था. उसे और अन्य कर्मचारियों को बताया गया कि जिनकी नौकरी जाएगी उन्हें नोटिस पीरियड के बदले दो महीने का वेतन, ग्रेच्युटी और 15 दिन का वेतन मिलेगा.
यह ओरेकल कर्मचारियों को दिए गए पैकेज से अलग था. इसमें प्रति वर्ष सेवा के लिए 15 दिन का मूल वेतन, नोटिस पीरियड के बदले एक महीने का वेतन, इस्तीफ़ा देने पर दो महीने का वेतन और जो छुट्टियां बची थीं उसका भुगतान शामिल था.
क्या यह सॉफ़्टवेयर उद्योग के लिए ख़तरा है
कुछ साल पहले ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) स्थापित करने की तेज़ी अब कारोबार को नए तरीक़े से ढालने की कोशिश में बदल गई है.
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) एक ऐसी यूनिट होती है जिसे कोई बहुराष्ट्रीय कंपनी अपने मूल देश से बाहर स्थापित करती है. इसका मकसद बिजनेस के अलग-अलग काम एक ही जगह से संभालना होता है.
यह कंपनी का "ऑफशोर हब" होता है जहां से टेक्नोलॉजी, ऑपरेशन, रिसर्च, फाइनेंस या कस्टमर सपोर्ट जैसे काम किए जाते हैं.
वशिष्ठ ने कहा, "जीसीसी वो काम नहीं कर रहे थे जो ग्राहक चाहते थे. टेस्टिंग अब ऑटोमेटेड हो गई है. कोडिंग भी ऑटोमेटेड हो रही है. मूल रूप से सिस्टम को बनाए रखने की लागत काफ़ी कम हो गई है. यही कारण है कि मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट ज़्यादा उत्पादकता दे सकते हैं."
उन्होंने कहा कि जीसीसी पर ग्राहकों का दबाव बढ़ रहा है कि वे खुद को एआई के साथ नए तरीक़े से तैयार करें. पहले आउटसोर्सिंग मॉडल में 15 प्रतिशत काम ऑनशोर और बाकी ऑफ़शोर होता था. नए मॉडल में ऑनशोर और ऑफशोर की हिस्सेदारी 50-50 हो जाए.
लेकिन सभरवाल का कहना है, "एआई आने से सिस्टम इंटीग्रेशन की ज़रूरत बढ़ेगी. पारंपरिक रखरखाव प्रणाली कम हो सकती है, लेकिन सिस्टम इंटीग्रेशन महत्वपूर्ण रहेगा. सॉफ़्टवेयर सेवाओं में युवाओं के लिए अभी स्थिति ठीक है. यह एआई के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा."
सभरवाल का कहना है, "हां, वेतन वृद्धि धीमी हो सकती है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि रोज़गार में समस्या होगी. हर कोई सॉफ़्टवेयर के ख़त्म होने की बात कर रहा है, लेकिन किसी भी तरह से ऐसा नहीं लगता."
जीसीसी में भर्ती को लेकर क्या संदेश है?
वशिष्ठ ने कहा कि पहले जीसीसी में भर्ती केंद्रीकृत होती थी. लेकिन "5,000 से 10,000 तक विस्तार के लिए केंद्रीय मॉडल के साथ आपको फ्रेंचाइज़ी मॉडल जैसे छोटे समूह बनाने होंगे."
वशिष्ठ ने कहा, "अभी जीसीसी के लिए संदेश है कि वे तुरंत कॉलेजों से जुड़ें और टियर-2 और टियर-3 कॉलेजों में जीसीसी अकादमी स्थापित करें, क्योंकि सबसे अच्छी प्रतिभा अभी भी कॉलेजों में है. इंटर्नशिप प्रक्रिया की जगह अप्रेंटिसशिप को लाना चाहिए. कंपनियों को अंतिम सेमेस्टर में ही छात्रों को नियुक्त करने का अधिकार होना चाहिए. ये वही लोग हैं जो एआई नेटिव हैं."
ओरेकल की पूर्व कर्मचारी के अनुसार, आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका है "लगातार नए हुनर सीखना और आर्थिक रूप से सुरक्षित रहना. हम ऐसे अन्य काम भी कर सकते हैं जिनसे हितों का टकराव न हो."
महिला कर्मचारी ने बताया कि सोशल मीडिया पर साझा किए गए कई अन्य अनुभवों के उलट, "मुझे मेल मिलने के तुरंत बाद मेरे मैनेजर ने फ़ोन किया. वह बहुत मददगार थे. वह भी हमारी तरह हैरान थे. उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि हमें कंपनी से निकालने का फ़ैसला किस स्तर पर लिया गया."
सोशल मीडिया के एक पोस्ट में 'कोल्ड' ऑटोमेटेड ईमेल का ज़िक्र किया गया है और कहा गया कि "इसमें बिल्कुल भी गरिमा नहीं थी."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित