You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम में कैसे मदद की?
- Author, कैरोलिन डेविस
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ़्ते के युद्धविराम की घोषणा होने से कुछ देर पहले तक पाकिस्तान से उम्मीद के कुछ छोटे-मोटे संकेत मिले थे.
अपना नाम न बताने की शर्त पर बात करते हुए पाकिस्तान के एक सूत्र ने बीबीसी को बताया कि बातचीत 'तेज़ी से जारी' है और पाकिस्तान.. ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा है.
पाकिस्तान की ओर से बातचीत करने वालों का दायरा बहुत छोटा था. बातचीत के दौरान माहौल 'गंभीर और शांत' था.
यह उम्मीद बनी हुई थी कि नतीजा युद्धविराम के रूप में निकलेगा. पाकिस्तानी सूत्र ने कहा, "कुछ घंटे बचे हैं."
उन्होंने यह भी कहा कि वो बातचीत में शामिल उस छोटे समूह का हिस्सा नहीं थे.
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान.. ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और दोनों के बीच संदेश पहुंचा रहा है.
ईरान के साथ उसके ऐतिहासिक रिश्ते हैं. दोनों देशों के बीच लंबी सरहद और अक्सर पाकिस्तान के साथ अपने "भाईचारे" के रिश्ते का ईरान ज़िक्र करता है.
अमेरिका के साथ संबंधों की बात करें तो राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान की सेना के प्रमुख फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर को अपना 'पसंदीदा' फ़ील्ड मार्शल बताया है और कहा है कि वे ईरान को 'ज़्यादातर लोगों से बेहतर' जानते हैं.
पाकिस्तान भी हो चुका था नाराज़
लेकिन समझौता होना तय नहीं था.
मंगलवार रात संसद में बोलते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने कहा, "कल तक हमें काफ़ी उम्मीद थी कि चीज़ें सकारात्मक दिशा में बढ़ रही हैं."
इससे पहले सोमवार को इसराइल ने ईरान पर हमला किया और ईरान ने सऊदी अरब पर हमला किया.
डार ने कहा कि पाकिस्तान "अब भी स्थिति को जितना संभव हो संभालने की कोशिश कर रहा है."
फ़ील्ड मार्शल मुनीर ने और भी कड़ी प्रतिक्रिया दी. मंगलवार को सैन्य अधिकारियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सऊदी अरब पर हमला "शांतिपूर्ण तरीके़ से संघर्ष सुलझाने के ईमानदार प्रयासों को नुक़सान पहुंचाता है."
संघर्ष शुरू होने के बाद से यह ईरान के प्रति पाकिस्तान की सबसे सख़्त टिप्पणियों में से एक थी.
कुछ विश्लेषकों का कहना था कि इससे ईरान पर दबाव बढ़ सकता है. पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता है, जिसे सऊदी अरब पर बार-बार हमलों के बावजूद अभी तक लागू नहीं किया गया है.
आख़िर कैसे बनी बात?
आधी रात के बाद, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक्स पर लिखा कि "कूटनीतिक प्रयास लगातार, मज़बूती से और प्रभावी तरीक़े से आगे बढ़ रहे हैं और निकट भविष्य में ठोस नतीजों तक पहुंच सकते हैं."
उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से दो हफ्ते के लिए समयसीमा बढ़ाने और ईरान से उसी अवधि के लिए स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ खोलने का अनुरोध किया.
पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रज़ा अमीरी मोग़द्दम ने स्थानीय समयानुसार सुबह 03:00 बजे एक्स पर लिखा कि बातचीत 'गंभीर और संवेदनशील चरण से एक कदम आगे बढ़ रही है.'
सुबह 05:00 बजे से ठीक पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि युद्धविराम पर सहमति बन गई है और दोनों पक्षों को शुक्रवार, 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में मिलने का निमंत्रण दिया, ताकि 'अंतिम समझौते के लिए आगे बातचीत की जा सके.'
पाकिस्तान के उस सत्र ने बीबीसी से कहा, "हम अभी भी बहुत सतर्क हैं," और जोड़ा कि स्थिति "लगातार नाज़ुक" बनी हुई है. दोनों पक्षों के बीच अब भी भरोसे की कमी है और उनके रुख़ काफ़ी कठोर बने हुए हैं.
पाकिस्तान भले ही दोनों पक्षों को एक मेज पर ला दे, लेकिन सवाल यह है कि उनके बीच सहमति बन पाएगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित