जय हेमंत कैसे बन गए टाइगर श्रॉफ़, एक्टर ने सुनाई थी दिलचस्प कहानी

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- Author, तुषार कुलकर्णी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ मराठी
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
अभिनेता टाइगर श्रॉफ़ की कार पर मुंबई के जुहू में रविवार शाम गोलीबारी की गई. हालाँकि फ़ायरिंग की इस घटना में टाइगर श्रॉफ़ को किसी तरह की चोट नहीं आई.
टाइगर श्रॉफ़ वरिष्ठ अभिनेता जैकी श्रॉफ़ के बेटे हैं. टाइगर श्रॉफ़ की पहली फ़िल्म 2014 में आई 'हीरोपंती' थी.
टाइगर श्रॉफ़ की डेब्यू के बाद कई फ़िल्में आई हैं. इनमें 'हीरोपंती', 'बागी', 'अ फ़्लाइंग जट्ट', 'मुन्ना माइकल', 'स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर-2', 'बड़े मियां छोटे मियां' और 'वॉर' जैसी फ़िल्में शामिल हैं. इनमें 'बागी' के ही चार पार्ट रिलीज़ हुए हैं.
टाइगर श्रॉफ़ की फ़िल्में अपने एक्शन सीक्वेंस के लिए मशहूर हैं. टाइगर श्रॉफ़ और मार्शल आर्ट्स के प्रति उनका लगाव उनके प्रशंसकों के बीच हमेशा चर्चा का विषय रहा है.
जय हेमंत से ऐसे बने 'टाइगर'
कुल साल पहले कर्ली टेल्स को दिए एक इंटरव्यू में टाइगर श्रॉफ़ ने कहा था, "मेरा नाम जय हेमंत था. पिता का नाम जयकिशन था, जो बाद में फ़िल्मों में जैकी नाम से जाने गए. मेरे चाचा का नाम हेमंत श्रॉफ़ था, इसलिए मेरा बचपन का नाम जय हेमंत श्रॉफ़ था."
अपने इसी इंटरव्यू में उन्होंने अपना नाम 'टाइगर' पड़ने की कहानी भी बताई थी. टाइगर श्रॉफ़ ने बताया था कि बचपन में उन्हें लोगों को काटने की आदत थी. जब वह किसी से मिलते या फिर प्यार जताते तो अक्सर काट लेते थे. इसी वजह से घरवालों और आसपास के लोगों ने उन्हें 'टाइगर' कहना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे यह नाम इतना मशहूर हो गया कि जब वह फिल्मों में आए तो उन्होंने इसे ही अपना स्क्रीन नाम बना लिया.

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कई इंटरव्यू में टाइगर श्रॉफ़ ने मार्शल आर्ट्स के बारे में बात की है. एक पॉडकास्ट में टाइगर श्रॉफ़ ने बताया कि मार्शल आर्ट्स उनके लिए ध्यान करने जैसा है. वो अपनी ज़िंदगी में आए अनुशासन के लिए मार्शल आर्ट्स को क्रेडिट देते हैं.
इसी इंटरव्यू में टाइगर ने बताया कि बचपन में उन्होंने टीवी पर ब्रूस ली की फ़िल्म 'एंटर द ड्रैगन' देखी थी. उन्होंने अपने माता-पिता से कहा कि उन्हें भी ऐसा बनना है. इसके बाद उनके माता-पिता ने उन्हें कराटे क्लास में दाख़िल दिलाया. टाइगर ने बताया कि उन्हें महसूस हुआ कि वह इस चीज़ को बहुत जल्दी सीख रहे थे.
डांस से लगाव
लेकिन टाइगर श्रॉफ़ सिर्फ़ एक एक्शन स्टार ही नहीं हैं, बल्कि उनके डांस मूव्स के भी कई प्रशंसक हैं. उनकी फ़िल्मों में जितना महत्व फाइट सीक्वेंस का होता है, उतना ही डांस का भी होता है. जैसे टाइगर श्रॉफ़ के मार्शल आर्ट्स के आदर्श ब्रूस ली हैं, वैसे ही डांस के क्षेत्र में उनके आदर्श कौन हैं?

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इसका जवाब खुद टाइगर श्रॉफ ने दिया है. फ़िल्म समीक्षक और बिज़नेस एनालिस्ट कोमल नाहटा के साथ इंटरव्यू में टाइगर श्रॉफ़ ने बताया कि उनके घर पर माइकल जैक्सन की एक सीडी थी. उनकी दादी उसे चलाया करती थीं. उसे देखकर उन्हें डांस पसंद आने लगा. एक तरफ़ मार्शल आर्ट्स और दूसरी तरफ़ डांस, इन दोनों के प्रति उनके प्यार ने टाइगर श्रॉफ़ को बनाया.
कोमल नाहटा को दिए इंटरव्यू में टाइगर श्रॉफ़ ने कहा, "इन दो चीज़ों के अलावा मुझे याद ही नहीं कि मैंने उस समय कुछ और किया हो. मैं इनमें हमेशा ख़ुश रहता था और मेरे माता-पिता ने मुझे ऐसा ख़ुशहाल बचपन दिया, इसके लिए मैं उनका बहुत आभारी हूं."
टाइगर श्रॉफ़ ने कहा था, "बचपन में मुझे कौन-सी चीज़ मांगनी पड़ी, यह मुझे याद ही नहीं है. मांगने से पहले ही मुझे वह मिल जाती थी."

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उन्होंने कहा था, "बचपन से मुझे पता था कि मैं एक बड़े कलाकार का बेटा हूं, लेकिन साथ ही मैं चाहता था कि मेरी अपनी भी एक अलग पहचान हो. हालांकि, मैंने फ़िल्मों में आने के बारे में कभी कुछ तय नहीं किया था."
'जैकी दादा यानी तीन बत्ती चॉल वाले'
टाइगर बताते हैं कि उन्हें फ़िल्म इंडस्ट्री में लाने में फ़िल्म निर्माता साजिद नाडियाडवाला की अहम भूमिका रही. टाइगर साजिद नाडियाडवाला के साथ फ़ुटबॉल खेला करते थे. इसी दौरान साजिद नाडियाडवाला ने उनसे फ़िल्म में काम करने के बारे में पूछा. शुरुआत में टाइगर को संदेह था कि वह यह भूमिका निभा पाएंगे या नहीं, लेकिन साजिद नाडियाडवाला ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह यह कर सकते हैं.
इस तरह टाइगर श्रॉफ़ को अपनी पहली फ़िल्म मिली. इस फ़िल्म से टाइगर के साथ कृति सेनन ने भी डेब्यू किया था. फ़िल्म का निर्देशन शब्बीर ख़ान ने किया था. इसके बाद टाइगर ने 'बागी' और 'मुन्ना माइकल' में भी शब्बीर ख़ान के साथ काम किया.
'हीरोपंती' ऐसी फ़िल्म थी, जिसमें उनकी दोनों पसंदीदा चीज़ें, मारधाड़ और डांस, थीं. प्रकाश राज का निभाया विलेन का किरदार भी दर्शकों को पसंद आया था.
टाइगर बताते हैं कि वह जो डांस और फ़ाइट सीक्वेंस करते हैं, उन्हें उनके दर्शक पसंद करते हैं. उनके मुताबिक़, उनके ज़्यादातर दर्शक बच्चे हैं और उन्हें यह बात पसंद है कि उन्हें एक 'मास' एक्टर के तौर पर पहचाना जाता है.

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कोमल नाहटा ने टाइगर से पूछा था, "अक्सर स्टार किड्स की बात आती है तो हमारे मन में एक खास छवि बन जाती है, लेकिन आपके मामले में ऐसा नहीं दिखता." इस पर टाइगर ने कहा कि जब वह अपने पिता को देखते हैं तो उन्हें महसूस होता है कि उनके पिता बेहद विनम्र और ज़मीन से जुड़े हुए हैं.

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उन्होंने कहा था, "इतने सालों बाद भी मैंने अपने पिता को कभी बदलते हुए नहीं देखा. जैकी दादा यानी 'वालकेश्वर की तीन बत्ती चॉल में रहने वाले' की जो उनकी पहचान है, उसे उन्होंने आज भी कायम रखा है. अगर उनमें कभी यह बदलाव नहीं आया, तो मैं कौन हूं? यह सवाल मैं ख़ुद से पूछता हूं."
'मीम्स और टाइगर'
अगर आप सोशल मीडिया पर हैं तो आपने 'छोटी बच्ची हो क्या?' वाला मीम ज़रूर देखा होगा. कई लोग मज़ाक में कहते हैं कि जितने मशहूर टाइगर श्रॉफ ख़ुद नहीं हैं, उससे कहीं ज़्यादा मशहूर उनका यह मीम है.
रणबीर इलाहाबादिया के पॉडकास्ट में टाइगर ने इस मीम के बारे में कहा था, "यह मेरा पसंदीदा मीम है. जब मैंने इसे सर्कुलेट होते देखा तो मुझे बहुत मज़ा आया."

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जब टाइगर की पहली फ़िल्म आई थी, तब कई लोगों ने उनका चेहरा मॉर्फ करके उन्हें करीना कपूर जैसा दिखाया और उनका मज़ाक भी उड़ाया. इस बारे में कोमल नाहटा ने जब उनसे पूछा तो टाइगर ने कहा, "मुझे इस बात पर कभी गुस्सा नहीं आया. बल्कि मुझे लगा कि अगर दर्शक मुझे पहचानने लगे हैं, नोटिस करने लगे हैं तो यह अच्छी बात है. और करीना कपूर तो ख़ूबसूरत हैं, तो इसमें क्या समस्या है?"
कोमल नाहटा ने उनसे पूछा कि आमतौर पर लड़कों को 'हैंडसम' कहलाना पसंद होता है, तो 'ख़ूबसूरत' कहे जाने पर आपको कैसा लगता है? इस पर टाइगर ने कहा, "मैं इसे उल्टा कॉम्प्लिमेंट ही मानता हूं."
पहली दो फ़िल्में हिट, तीसरी 'फ़्लॉप'
टाइगर श्रॉफ की पहली फ़िल्म हिट रही. उनके फ़ाइट और डांस के रातोंरात लाखों प्रशंसक बन गए. इसके बाद उनकी फ़िल्म 'बागी' आई.
'बागी' इतनी लोकप्रिय हुई कि इसके बाद इसके तीन और भाग आए. इस तरह अब तक 'बागी' के कुल चार भाग आ चुके हैं.

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'बागी' के बाद आई फ़िल्म 'अ फ़्लाइंग जट्ट' बॉक्स ऑफ़िस पर नहीं चली. टाइगर बताते हैं कि उन्हें इसका काफ़ी दुख हुआ.
इसके बाद शब्बीर ख़ान के साथ उनकी फ़िल्म 'मुन्ना माइकल' आई. इस फ़िल्म का एक और आकर्षण नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी थे, जिन्होंने इसमें विलेन का किरदार निभाया था. इसे लेकर भी काफ़ी चर्चा हुई.
करण जौहर की फ़िल्म 'स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर 2' में भी टाइगर ने भूमिका निभाई. इसके बाद उन्हें आदित्य चोपड़ा की कंपनी से फ़िल्म का ऑफ़र मिला और अपने पसंदीदा कलाकार ऋतिक रोशन के साथ टाइगर 'वॉर' में नज़र आए.
आदित्य चोपड़ा के प्रोडक्शन हाउस ने 'स्पाई यूनिवर्स' यानी सीक्रेट एजेंट्स पर आधारित फ़िल्मों की जो दुनिया बनाई है, उसमें 'पठान', 'एक था टाइगर' के साथ 'वॉर' भी शामिल है.
इसके बाद टाइगर श्रॉफ 'गणपत: अ हीरो इज़ बॉर्न', अक्षय कुमार के साथ 'बड़े मियां छोटे मियां' और 'सिंघम अगेन' जैसी फ़िल्मों में नज़र आए हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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