टाइगर श्रॉफ़ से लेकर सलमान ख़ान तक, बॉलीवुड की इन हस्तियों पर हो चुका है हमला

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बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ़ की कार पर मुंबई में रविवार शाम को अज्ञात हमलावरों ने फ़ायरिंग की. मुंबई पुलिस के मुताबिक़, गोलीबारी में दो लोग घायल हुए हैं, जिनमें टाइगर श्रॉफ़ के ड्राइवर फिरदौस भी शामिल हैं. उनके बाएं हाथ में गोली लगी है.
डीसीपी मोहित गर्ग के मुताबिक़, "टाइगर श्रॉफ़ सुरक्षित हैं. उन्हें गोली नहीं लगी है और वे घायल नहीं हुए हैं."
हालांकि टाइगर श्रॉफ़ से मुलाक़ात के बाद महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मीडिया से बातचीत में कहा, "टाइगर श्रॉफ़ सुरक्षित बच गए. उनके ड्राइवर को चोटें आई हैं, और यह घटना निंदनीय है. मैंने अभिनेता से मुलाक़ात की, उनसे बातचीत हुई. उनके बाएं हाथ पर गन पाउडर और कांच के टुकड़ों से चोटें आई हैं."
इस घटना को लेकर विपक्षी पार्टियों ने राज्य की क़ानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी ने कहा है कि राज्य के मुख्यमंत्री आम लोगों को सुरक्षा देने में नाकाम रहे हैं.
एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने इसे 'क़ानून व्यवस्था की पूरी नाकामी' बताया है.
दरअसल बीते कुछ वर्षों में बॉलीवुड से जुड़ी कई हस्तियों पर जानलेवा हमले की कोशिश की गई और टाइगर श्रॉफ़ पर हुए हमले ने एक बार फिर से ऐसे लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं.
हाल के समय में फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े जिन कलाकारों पर हमले हुए हैं, या जो हमलावरों के निशाने पर रहे हैं, उनमें अभिनेता सलमान ख़ान और राकेश रोशन जैसी हस्तियां भी शामिल हैं.
नज़र डालते हैं बॉलीवुड की उन हस्तियों पर जो हालिया समय में हमलावरों के निशाने पर रहे हैं.
रोहित शेट्टी

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फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के मुंबई के जुहू स्थित घर को 2026 में 31 जनवरी की देर रात गोलीबारी की घटना में निशाना बनाया गया था.
पुलिस ने कहा था कि यह हमला शुभम लोणकर गिरोह ने किया था और गोलीबारी का मकसद रंगदारी वसूलना और डर पैदा करना था. जांचकर्ताओं ने बाद में इस मामले में कई संदिग्धों को गिरफ़्तार किया.
इस मामले में प्रदीप कुमार उर्फ गाथ को अक्तूबर 2026 में आगरा से उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स और मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ़्तार किया था.
दिशा पटनी

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सितंबर 2025 में उत्तर प्रदेश के बरेली में अभिनेता दिशा पटनी के पिता जगदीश पटनी के पैतृक घर के बाहर अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियां चलाई थीं.
इस हमले की ज़िम्मेदारी गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा गिरोह ने सोशल मीडिया पर ली थी. ख़बरों के मुताबिक़ गिरोह ने इस गोलीबारी को दिशा की बहन खुशबू पटनी की ओर से आध्यात्मिक गुरुओं के बारे में कथित तौर पर की गई टिप्पणियों के बाद दी गई चेतावनी बताया था.
इस घटना से जुड़े दो हमलावर बाद में ग़ाज़ियाबाद में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे.
सलमान ख़ान

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अप्रैल 2024 में मुंबई में सलमान ख़ान के घर के बाहर गोली भी चलाई गई थी. इस मामले में पुलिस ने जो चार्जशीट दाख़िल की, उसमें कई बार गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने नाम का ज़िक्र है.
बिश्नोई समुदाय के लोग काले हिरण को पवित्र मानते हैं.
सलमान ख़ान पर क़रीब 20 साल पहले एक फ़िल्म की शूटिंग के दौरान दो काले हिरण के शिकार का आरोप लगा था, पुलिस के मुताबिक़ इससे लॉरेंस बिश्नोई गिरोह नाराज़ था.
राकेश रोशन

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फिल्म निर्माता राकेश रोशन 21 जनवरी, 2000 को हत्या की कोशिश में बच गए थे, जब मुंबई में उनके कार्यालय के बाहर दो अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियां चलाई थीं. उनके हाथ और छाती में गोली लगी थी, लेकिन वह हमले में बच गए.
यह घटना फ़िल्म 'कहो ना प्यार है' की सफलता के बाद हुई थी, जो उनके बेटे ऋतिक रोशन की पहली फिल्म थी. बताया जाता है कि रंगदारी के पैसे देने से इनकार करने के बाद राकेश रोशन को निशाना बनाया गया था.
करण थापर के साथ बीबीसी के एक इंटरव्यू में ऋतिक ने उस सदमे को याद किया, जब उनकी पहली फिल्म चर्चा में आ रही थी और उन्हें गोलीबारी की घटना के बारे में पता चला.
ऋतिक ने कहा, "उनकी छाती और हाथ में गोली लगी थी. मुझे याद है कि उन्होंने मुझे फोन किया था, क्योंकि उन्हें चिंता थी कि मैं ठीक हूं या नहीं." उन्होंने बताया कि उनके पिता को डर था कि परिवार के दूसरे सदस्य भी ख़तरे में हो सकते हैं.
राजीव राय

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'गुप्त' जैसी फिल्मों के निर्देशन के लिए जाने जाने वाले फिल्म निर्माता राजीव राय को 1997 में एक खतरनाक स्थिति का सामना करना पड़ा था, जब अबू सलेम गिरोह से कथित तौर पर जुड़े पांच हमलावरों ने मध्य मुंबई में उन पर हमला किया था.
राय अपने कार्यालय से निकल रहे थे, तभी हमलावरों ने गोलियां चला दीं. पहले मिली धमकियों के कारण उन्हें पुलिस की ओर से सुरक्षा के लिए बॉडीगार्ड दिए गए थे. इन बॉडीगार्ड ने बीच में आकर हमलावरों का सामना किया और उन्हें खदेड़ने में कामयाब रहे. बताया जाता है कि इस दौरान एक हमलावर घायल हो गया था.
गुलशन कुमार
7 मार्च 1997 को फ़िल्म प्रोड्यूसर मुकेश दुग्गल की अंधेरी स्थित उनके कार्यालय में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उनकी हत्या ने फ़िल्म उद्योग को लेकर यह सवाल खड़ा किया था कि इससे जुड़े लोग कितने सुरक्षित हैं.
इसके बाद 12 अगस्त 1997 में मुंबई के एक मंदिर के बाहर टी-सिरीज़ के प्रबंधक गुलशन कुमार की हत्या कर दी गई थी.
ख़बरों के मुताबिक, अंडरवर्ल्ड की ओर से गुलशन कुमार को हर महीने रंगदारी देने को कहा गया था, जिसे देने से उन्होंने इनकार कर दिया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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