'माथे पर किस' और 'आफ़्टर पार्टी' के ऑफ़र, किराये पर गरबा पार्टनर का सच क्या है?

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- Author, श्याम बख्शी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ गुजराती
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 10 मिनट
नवरात्रि से क़रीब 25 दिन पहले सोशल मीडिया पर शुरू हुआ 'गरबा पार्टनर किराए पर लें' का ट्रेंड खूब चर्चा में रहा. इसमें सबसे महंगे प्लान में माथे पर चुंबन और 'आफ्टर पार्टी' की पेशकश भी शामिल थी.
हो सकता है कि यह ट्रेंड आपके सोशल मीडिया फीड में भी आया हो.
पिछले कुछ दिनों से, नवरात्रि के दौरान गरबा खेलने के लिए 'पार्टनर' किराए पर लेने के प्रस्ताव विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग अकाउंट्स से देखे जा रहे हैं.
इस पोस्ट में 'गोल्ड', 'सिल्वर' और 'प्लैटिनम' जैसे प्लान भी पेश किए गए. इसमें दावा किया गया कि प्लान के अनुसार अलग-अलग सुविधाएं मिलेंगी. सबसे महंगे प्लान में 'माथे पर चुंबन' और 'आफ्टर पार्टी' जैसी सुविधाएं भी शामिल थीं.
यह पता लगाने के लिए कि क्या ये अकाउंट वास्तव में 'गरबा पार्टनर किराये के सौदे' कर रहे थे, बीबीसी न्यूज़ गुजराती के संवाददाता ने ऐसे कुछ सोशल मीडिया खातों को संदेश भेजा.
हमने इस जांच में ऐसे ही 'अकाउंट ऑपरेटर्स' से बात की. 'पैसे देकर गरबा पार्टनर पाने' का दावा करने वाले इन सोशल मीडिया अकाउंट्स और विज्ञापनों की जांच में हमें कुछ चौंकाने वाली बात पता चली.

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ग़ैरज़रूरी प्रचार से बचने और यूजर्स की गोपनीयता बनाए रखने के लिए यहां यूजर के नाम और प्लेटफॉर्म नाम नहीं लिखे गए हैं.
इस तरह की पोस्ट देखकर, बीबीसी गुजराती संवाददाता ने इंस्टाग्राम पर 'गरबा पार्टनर किराए पर' से संबंधित पोस्ट खोजना शुरू कर दिया. उन्होंने ऐसी पोस्ट करने वाले इंस्टाग्राम अकाउंट्स को डायरेक्ट मैसेज करके ऑफर्स की सच्चाई जानने की भी कोशिश की.
'रेंट अ गरबा पार्टनर' पोस्ट करने वालों में कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी शामिल थे, जिनमें से कुछ के हजारों फॉलोअर्स थे. साथ ही, कुछ पेजों को देखकर ऐसा लग रहा था कि एडमिन अनुभवहीन था.

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हमें पता चला है कि कुछ वैवाहिक और डेटिंग ऐप्स ने भी इस चलन का फ़ायदा उठाने के लिए इस तरह के पोस्ट डालकर ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश की थी.
जब इस संवाददाता ने ऐसी वैवाहिक वेबसाइटों से संपर्क किया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका प्लेटफॉर्म वैवाहिक है, यानी विवाह से संबंधित है, और 'गरबा पार्टनर' पोस्ट विवाह के संदर्भ में की गई थी.
साथ ही, डेटिंग ऐप प्लेटफॉर्म की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.
एक खाते ने 'गरबा पार्टनर' के लिए एक विशेष 'शैडो अकाउंट' बनाया था, और संपर्क करने पर, उन्होंने मुख्य खाते का लिंक दिया और उसे फॉलो करने के लिए कहा.
इसका सीधा सा मतलब है कि फॉलोअर्स और रीच बढ़ाने के लिए यह एक तरह का 'हथकंडा' था.
इसी अकाउंट ने गुजरात के लिए 'गरबा पार्टनर' सर्विस देने से इनकार कर दिया और मध्य प्रदेश के एक शहर में सेवाएं देने की बात कही.
वहीं, ज्यादातर इंस्टाग्राम अकाउंट्स की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 'गरबा पार्टनर' किराए पर उपलब्ध कराने के बारे में पोस्ट करने वाले अधिकांश इंस्टाग्राम अकाउंट सितंबर 2026 में बनाए गए थे.
यानी, वे बिल्कुल नए थे. इससे यह संकेत मिलता है कि जो भी इसे संभाल रहा है, उसने यह अकाउंट विशेष रूप से इसी मक़सद से बनाया है, और संभवतः अन्य फर्जी खाते भी हो सकते हैं.
हालांकि, इन सेवाओं के लिए पोस्ट करने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के खाते औसतन तीन से चार साल पहले बनाए गए थे.
लड़कियों के लिए फ़्री रजिस्ट्रेशन

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आख़िरकार हमें एक ऐसा खाता मिला जिसने 'गरबा पार्टनर' प्रदान करने वाली सेवा से जुड़े होने का दावा किया.
जिस अकाउंट से इस संवाददाता ने बात की और जिसने 'गरबा पार्टनर' उपलब्ध कराने की अपनी तत्परता व्यक्त की.
इस संवाददाता ने एक ऐसे अकाउंट से बात की जो 'गरबा पार्टनर' की तलाश कर रहे एक युवक के रूप में ऐसी सेवा प्रदान करने का दावा करता है. यह खाता भी सितंबर 2026 में बनाया गया था.
नवरात्रि के विषय पर एक आकर्षक तस्वीर इस अकाउंट पर पोस्ट की गई थी.
इसके साथ लिखा था, 'अपना साथी ढूंढो, नए दोस्त बनाओ, साथ में नाचो, लड़कियों के लिए फ़्री रजिस्ट्रेशन...'
अब हम यह जानना चाहते थे कि लड़कों को यह सेवा प्रदान करने के लिए कितनी फीस ली जाती है.
इसके अलावा, इस अकाउंट के पेज पर एक युवक और युवती के बीच अंतरंगता दर्शाने वाली पोस्ट गरबा गीतों के साथ साझा की गई थीं. जिनमें बायो में दिए गए लिंक पर क्लिक करके पंजीकरण करने का अनुरोध किया गया था.

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इस संवाददाता ने उस अकाउंट को मैसेज करके पूछा, 'आप किन शहरों में गरबा पार्टनर दे रहे हैं?', जवाब मिला, 'मुख्य रूप से दिल्ली, नोएडा और अन्य राज्यों में.'
गरबा मुख्य रूप से गुजरात से जुड़ा हुआ है, इसलिए हमने पूछा, 'गुजरात में क्यों नहीं?' जवाब था, 'गुजरात राज्य की कुछ लड़कियों ने भी पंजीकरण कराया है.'
हमने यह समझने की कोशिश की कि वे गुजरात में 'गरबा पार्टनर' के रूप में दिल्ली से लड़कियों को कैसे उपलब्ध कराएंगे.
सामने से जवाब दे रहे शख़्स ने कहा, ''आपको पता है कि लड़कियां भी 'गरबा पार्टनर' ढूंढ रही हैं. वे यहां पंजीकरण कराती हैं और हम उन्हें पंजीकृत लड़कों के साथ भेज देते हैं. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, नोएडा की लड़कियों ने हमारे साथ पंजीकरण कराया है. राजस्थान से भी कुछ लड़कियां हैं.''
उसने कहा, "लड़कों को पंजीकरण के लिए 99 रुपये देने होंगे, जबकि लड़कियों के लिए पंजीकरण निःशुल्क है. पंजीकरण कराने से आपको पता चल जाएगा कि 'गरबा पार्टनर' के रूप में लड़की कैसे मिलेगी?''
हमने पूछा, 'लड़कों और लड़कियों के बीच यह भेदभाव क्यों है?' उसका जवाब था, ''अगर मैंने इसे मुफ्त नहीं रखा होता, तो लड़कियां पंजीकरण नहीं करातीं.''
'पूरी गोपनीयता और सुरक्षा का भरोसा '

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जब हमने 'गरबा पार्टर' की खोज करते समय गोपनीयता के बारे में चिंता व्यक्त की, तो उन्होंने कहा, "आपकी जानकारी 100 प्रतिशत सुरक्षित है. हम केवल आपका नाम, उम्र और संपर्क नंबर लेते हैं जो भी आप बताते हैं."
बातचीत के दौरान, उस व्यक्ति ने बार-बार हमसे पंजीकरण करने के लिए कहा. हालांकि, हमने उससे बात करके और अधिक जानकारी प्राप्त करने का प्रयास जारी रखा.
जैसे, 'क्या यह नवरात्रि के नौ दिनों के लिए 99 रुपये है या सिर्फ एक दिन के लिए? क्या मुझे हर दिन एक ही साथी मिलेगा या वह बदलेगा? अगर मुझे मेरा साथी पसंद नहीं आया तो क्या होगा?'
सामने खड़े व्यक्ति ने जवाब दिया, "हम सिर्फ लड़की का संपर्क नंबर देंगे, हम मध्यस्थ हैं, आप उससे बात कर सकते. अगर आपको दी गई 'गरबा पार्टनर' एक-दूसरे को पसंद नहीं करती हैं, तो हम दूसरी लड़की का नंबर दे देंगे.''
अकाउंट के बायो में दिए गए लिंक में क्या था?

हमने अकाउंट डिटेल्स और बायो में दिए गए लिंक के साथ अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच से संपर्क किया.
एसीपी हार्दिक मकाडिया ने इन खातों की जानकारी ली और अपने कंप्यूटर पर वह लिंक खोला. उसमें एक गूगल फॉर्म था. जिसमें नाम, ईमेल आईडी, इंस्टाग्राम अकाउंट, पुरुष साथी चाहिए या महिला, किस तरह का 'गरबा पार्टनर' चाहिए? जैसी जानकारी पूछी गई थी.
जैसे ही आप इसे सबमिट करेंगे, एक क्यूआर कोड खुल जाएगा. आपको इसे स्कैन करके 99 रुपये का भुगतान करने के लिए कहा जाएगा.
एसीपी हार्दिक मकाडिया ने कहा, "गूगल फॉर्म भरोसेमंद कामों के लिए इस्तेमाल होता है. इसके जरिए कोई भी सर्वे किया जा सकता है. आप कोई भी रिव्यू सबमिट कर सकते हैं. लेकिन यहां दिए गए गूगल फॉर्म को सबमिट करने के बाद असली खेल शुरू होता है."
उन्होंने कहा, "आपसे 99 रुपये की फीस मांगी जाती है. पेमेंट करने के बाद आपको पेमेंट का स्क्रीनशॉट सबमिट करना होता है. इस तरह लोगों से 99 रुपये लेकर धोखाधड़ी की जा रही है. हमने इस प्रोफाइल का पता भी लगाया है. ये पैसे तो ले लेते हैं, लेकिन कोई 'गरबा पार्टनर' नहीं दिया जाता."

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एसीपी हार्दिक मकाडिया ने आगे कहा, "ये लोग जो जानकारी लेते हैं, उसका दुरुपयोग भी किया जा सकता है. वे ऐसे लोगों की तलाश में रहते हैं जो अविवाहित हैं और जीवनसाथी की तलाश में हैं. वे आपको हनीट्रैप में फंसा सकते हैं. आपसे चैट करने के बाद, वे नवरात्रि के मुफ्त पास के नाम पर आपको एक एपीके फाइल भेज सकते हैं. इससे आपका व्हाट्सएप हैक हो सकता है. आपका बैंक खाता खाली हो सकता है."
'गरबा पार्टनर' ढूंढने के बारे में क़ानून क्या कहता है?

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'गरबा पार्टनर' ढूंढने के बारे में कानून क्या कहता है? हमने इस बारे में वकील अमित कचवे से बात की.
वकील अमित कचवे कहते हैं, "अगर दो वयस्क अपनी सहमति से गरबा खेलने जाते हैं और इसमें पैसों का लेन-देन शामिल है, तो यह दोनों के बीच का एक अनुबंध है. चीन और हांगकांग जैसे देशों में ऐसे साथी ढूंढना आम बात है."
"लेकिन भारत में अभी तक ऐसा नहीं हुआ है, इसलिए ऐसे विज्ञापनों को देखकर अजीब लगना स्वाभाविक है." हालांकि, वे आगे कहते हैं, "किसी अजनबी के साथ बाहर जाना जोखिम भरा होता है."
पुलिस में शिकायत क्यों नहीं दर्ज़ कराई जा रही है?

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साइबर विशेषज्ञ अरुण कुमार ने बीबीसी को बताया, "पुलिस किसी भी जगह तभी कार्रवाई कर सकती है जब उसे शिकायत मिलती है. ऐसे मामलों में, लेन-देन की रकम ज्यादातर छोटी होती है. लोग सोचते हैं कि इतनी छोटी रकम के लिए पुलिस के पास क्यों जाऊं. इससे पुलिस को सही जानकारी नहीं मिल पाती है."
उन्होंने आगे कहा, "अगर पुलिस के पास छोटी रकम की शिकायत भी आती है, तो वे उस पर कार्रवाई नहीं कर पाएंगे क्योंकि उनके पास बड़ी रकम की धोखाधड़ी के कई मामले होते हैं. अगर सौ लोग भी छोटी रकम की धोखाधड़ी की शिकायत लेकर पुलिस के पास जाएं, तो पुलिस निश्चित रूप से कार्रवाई करेगी."
गुजरात में साइबर अपराध के कितने मामले दर्ज़

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पीआईबी की ओर से 21 जुलाई, 2026 को जारी एक प्रेस नोट के अनुसार , साल 2021 से 2025 तक साइबर अपराध की शिकायतों की संख्या 65 लाख 89 हजार 201 से अधिक है. जबकि 55 हजार 50 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी हुई है.
ऐसे मामलों में एक लाख 95 हजार 760 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं.
अकेले गुजरात की बात करें तो, साल 2020 से 2024 के बीच गुजरात में साइबर अपराध के तहत 7,923 मामले दर्ज किए गए हैं.
देशभर में ऐसे मामलों में बैंक खातों में 8 हजार 189 करोड़ रुपये से अधिक की राशि फ्रीज़ की जा चुकी है.
नवरात्रि शुरू होते ही गरबा पार्टनर मुहैया कराने वाला अकाउंट बंद हो गया

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इस पेज से कितने लोगों ने 99 रुपये का भुगतान किया है, इसका कोई सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है क्योंकि अभी तक कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है.
लेकिन यह इंस्टाग्राम अकाउंट अब नहीं खुल रहा है. संभव है कि जिन लोगों ने पैसे दिए हैं, वे नवरात्रि शुरू होने के बाद से अपने पार्टनर के बारे में पूछताछ कर रहे हों.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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