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ईरान से युद्धविराम: ट्रंप को 'आंशिक जीत' पाने के लिए चुकानी पड़ी भारी क़ीमत
- Author, एंथनी ज़र्चर
- पदनाम, नॉर्थ अमेरिका संवाददाता
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
आख़िरकार, समझदारी ने जीत हासिल की.
वॉशिंगटन समय के मुताबिक मंगलवार शाम 6 बजकर 32 मिनट पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर लिखा कि अमेरिका और ईरान एक "पक्के" शांति समझौते के काफी क़रीब पहुंच चुके हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने दो हफ्तों के युद्धविराम पर सहमति दी है.
यह बिल्कुल आख़िरी पल नहीं था, लेकिन ट्रंप की रात 8 बजे (भारतीय समय के अनुसार बुधवार सुबह साढ़े पांच बजे) की डेडलाइन से काफी करीब था.
ट्रंप के मुताबिक़ इस समय सीमा तक समझौता नहीं होता तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा और परिवहन ढांचे पर बड़े हमले करने वाला था.
यह सब इस शर्त पर निर्भर है कि ईरान भी लड़ाई रोक दे और होर्मुज़ स्ट्रेट को व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खोल दे. ईरान ने कहा है कि वो ऐसा करेगा.
लेकिन यह प्रगति मंगलवार सुबह तक बिल्कुल भी तय नहीं लग रही थी, जब ट्रंप ने ईरानी सभ्यता को "हमेशा के लिए ख़त्म कर देने" की धमकी दी थी.
इस घोषणा के साथ ट्रंप ने अपना सबसे तात्कालिक लक्ष्य हासिल कर लिया, हालांकि ईरान ने कहा है कि होर्मुज़ जलमार्ग पर उसका "नियंत्रण" अभी भी बना हुआ है.
अब अमेरिका और ईरान अगले दो हफ्तों तक बातचीत करेंगे, जिससे स्थाई समझौते तक पहुंचने की कोशिश के लिए कुछ समय मिल गया है.
यह रास्ता आसान नहीं होगा और उतार-चढ़ाव भरा रहने की संभावना है, लेकिन बाजार में इसका सकारात्मक असर दिखा.
आफ्टर-ऑवर्स ट्रेडिंग में कच्चे तेल की कीमत कई दिनों में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स में तेज उछाल देखा गया.
कुल मिलाकर, ऐसा लग रहा है कि बाजार और निवेशकों को उम्मीद है कि सबसे बुरा दौर अब पीछे छूट सकता है.
'पहली बार दिखी किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की ऐसी धमकी'
हालांकि, इतनी प्रगति भी मंगलवार सुबह तक बिल्कुल तय नहीं लग रही थी, जब ट्रंप ने कहा था कि ईरानी सभ्यता को "हमेशा के लिए खत्म कर देंगे, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा" .
यह साफ़ नहीं है कि एक अमेरिकी राष्ट्रपति की इतनी चौंकाने वाली धमकी ने ईरान पर दबाव डाला और उसे उस तरह के युद्धविराम पर सहमत किया, जिसे वह पहले ठुकरा चुका था.
लेकिन यह साफ़ है कि डोनाल्ड ट्रंप का यह हैरान कर देने वाला और भड़काऊ बयान (जो इसी तरह के अपशब्दों वाले एक और संदेश के सिर्फ दो दिन बाद आया) आधुनिक अमेरिकी राष्ट्रपतियों के बयानों से बिल्कुल अलग है. ऐसा पहले कभी देखने या सुनने को नहीं मिला.
और अगर यह दो हफ़्तों का युद्धविराम स्थायी शांति में बदल भी जाता है, तो भी ईरान युद्ध और ट्रंप के हालिया बयान दुनिया के बाकी देशों की नज़र में अमेरिका की छवि को बुनियादी तौर पर बदल सकते हैं.
एक ऐसा देश, जो कभी खुद को दुनिया में स्थिरता बनाए रखने वाली ताकत के रूप में पेश करता था, अब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की बुनियाद को हिला रहा है.
एक ऐसा राष्ट्रपति, जिसने घरेलू राजनीति में परंपराओं और मानकों को तोड़ने में जैसे आनंद लिया है, अब वही काम वैश्विक मंच पर भी कर रहा है.
डेमोक्रेट नेताओं ने मंगलवार को ट्रंप के बयान की तुरंत निंदा की, और कुछ ने तो उन्हें पद से हटाने की मांग तक कर दी.
कांग्रेस सदस्य जोक्विन कास्त्रो ने एक्स पर लिखा, '' यह साफ़ है कि राष्ट्रपति लगातार कमजोर हो रहे हैं और नेतृत्व करने के योग्य नहीं हैं.''
अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेट्स के शीर्ष नेता चक शमर ने कहा कि जो भी रिपब्लिकन ईरान युद्ध ख़त्म करने के लिए वोट नहीं करेगा, वह "इसके हर नतीजे की जिम्मेदारी उठाएगा."
हालांकि ट्रंप की अपनी पार्टी के कई नेताओं ने उनका साथ दिया, लेकिन यह समर्थन वैसा सर्वसम्मत नहीं था जैसा उन्हें अक्सर मिलता है.
जॉर्जिया से रिपब्लिकन सदस्य और हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के वरिष्ठ सदस्य ऑस्टिन स्कॉट ने "सभ्यता के खत्म होने" जैसी ट्रंप की धमकी की कड़ी आलोचना की.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "राष्ट्रपति की टिप्पणियां उल्टा असर डालने वाली हैं, और मैं उनसे सहमत नहीं हूं."
विस्कॉन्सिन के सीनेटर रॉन जॉनसन ( जो आमतौर पर ट्रंप के समर्थक माने जाते हैं) ने कहा कि अगर ट्रंप अपनी बमबारी की योजना को लागू करते हैं, तो यह "बहुत बड़ी गलती" होगी.
टेक्सास के कांग्रेस सदस्य नेथनियल मोरेन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वो "पूरी एक सभ्यता के विनाश" का समर्थन नहीं करते.
उन्होंने लिखा, "यह हम कौन हैं, यह नहीं दिखाता, और यह उन सिद्धांतों के भी ख़िलाफ़ है जिन्होंने लंबे समय तक अमेरिका का मार्गदर्शन किया है."
अलास्का की सीनेटर लिजा मुरकोवस्की, जो अक्सर राष्ट्रपति से अलग रुख़ अपनाती रही हैं, ने भी साफ़ शब्दों में कहा कि राष्ट्रपति की यह धमकी "ईरान के साथ बातचीत में बढ़त हासिल करने की कोशिश कहकर नजरअंदाज नहीं की जा सकती."
हालांकि, व्हाइट हाउस का तर्क यह हो सकता है कि यह दबाव काम कर गया.
'अस्थायी राहत, स्थायी समाधान नहीं'
युद्धविराम की घोषणा करते हुए अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को "पूरा किया और उससे भी आगे बढ़कर हासिल किया."
ईरान की सैन्य क्षमता को काफ़ी हद तक कमजोर कर दिया गया है. हालांकि उसका इस्लामिक कट्टरपंथी शासन अभी भी सत्ता में है, लेकिन उसके कई शीर्ष नेता बमबारी हमलों में मारे जा चुके हैं.
फिलहाल, अमेरिका के कई घोषित लक्ष्यों को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है. ईरान के यूरेनियम इनरिचमेंट पर स्थिति स्पष्ट नहीं है. ये उसके परमाणु हथियार कार्यक्रम की नींव है.
इसके अलावा, ईरान का क्षेत्रीय सहयोगी समूहों पर अब भी प्रभाव बना हुआ है. जैसे कि यमन में सक्रिय हूती विद्रोही.
और अगर ईरान बिना किसी टोल या शुल्क की शर्त के होर्मुज़ स्ट्रेट को पूरी तरह खोल देता है तो भी इस अहम जियोपॉलिटिकल रास्ते पर उसका नियंत्रण पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट हो गया है.
ट्रंप के युद्धविराम संदेश के बाद जारी बयान में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान अपनी "रक्षात्मक कार्रवाई" रोक देगा और होर्मुज़ से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति देगा, जो उसकी सशस्त्र सेनाओं के समन्वय से होगी.
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका ने ईरान की 10-प्वाइंट्स योजना के "सामान्य स्ट्रक्चर" को स्वीकार कर लिया है.
इस योजना में अमेरिका से अपनी सैन्य ताकत क्षेत्र से हटाने, ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाने, युद्ध के नुकसान की भरपाई करने और होर्मुज़ पर ईरान का नियंत्रण बनाए रखने जैसी शर्तें शामिल हैं.
यह कल्पना करना मुश्किल है कि डोनाल्ड ट्रंप इन सभी शर्तों को वास्तव में मान लेंगे. ये संकेत देता है कि आने वाले दो हफ्तों की बातचीत काफी कठिन और जोख़िम भरी हो सकती है.
फ़िलहाल के लिए, यह ट्रंप के लिए एक राजनीतिक जीत की तरह दिखता है.
उन्होंने एक नाटकीय धमकी दी और मनचाहा परिणाम हासिल कर लिया. लेकिन यह युद्धविराम सिर्फ एक अस्थायी राहत है, स्थायी समाधान नहीं.
राष्ट्रपति के बयानों और कदमों की, और पूरे युद्ध की, दीर्घकालिक कीमत क्या होगी. इसका पूरा आकलन अभी होना बाकी है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित