अमेरिका के साथ समझौते को ईरान क्यों बता रहा है अपनी जीत

    • Author, ख़ाशेयार जोनेदी
    • पदनाम, बीबीसी पर्शियन संवाददाता, व्हाइट हाउस से
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

ईरानी सरकार और सरकारी मीडिया अमेरिका के साथ हुए समझौते को वहां के शासन की एक बड़ी जीत के रूप में पेश कर रहे हैं.

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के जारी बयान में कहा गया है कि ईरान ने इस युद्ध में अपने लगभग सभी लक्ष्य हासिल कर लिए हैं, और दुश्मन एक ऐतिहासिक विफलता का सामना कर रहा है.

युद्ध की शुरुआत में ही इस्लामिक रिपब्लिक के नेता अली ख़ामेनेई और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के वरिष्ठ जनरलों की अमेरिकी-इसराइली हमलों में मौत हो गई थी.

यह लड़ाई वहां के शासन के लिए अस्तित्व का ख़तरा था, एक अस्तित्व की लड़ाई थी.

इसलिए वे ख़ुद को विजयी मान रहे हैं, क्योंकि वे अमेरिका और इसरायल के साथ 30 से अधिक दिनों तक चले इस युद्ध में टिके रहे और बच गए. इसलिए ईरान के इस बयान और ईरान के ख़ुद को विजेता के रूप में पेश करने को अहम माना जा रहा है.

समझौते की राह में ये अड़चनें

बातचीत का एक दौर फिर से शुरू होने के बीच ये बात याद रखनी होगी कि अमेरिका और ईरान के बीच भरोसे की बेहद कमी है.

पिछले एक साल में ईरान और अमेरिका के बीच दो बार बातचीत हुई है. दोनों ही बार बातचीत के बीच में युद्ध शुरू हो गया.

सरकारी मीडिया में ईरान ख़ुद को कितना भी विजयी दिखाए, लेकिन वह बहुत कमज़ोर स्थिति में है.

उसकी सेना को भारी नुकसान पहुंचा है, उसकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है, और सत्ता पक्ष के विपक्ष के साथ बेहद बुरे रिश्ते हैं. साथ ही जनता के भी सरकार को लेकर बहुत अच्छे विचार नहीं हैं.

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पिछले कुछ दिनों में सरकार ने ऐसे कुछ लोगों को फांसी दी जिन्हें जनवरी के प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किया गया था.

ऐसे में सरकार की जनता पर पकड़ कमज़ोर भी हुई है. वह बुरी स्थिति में है, लेकिन साथ ही उसकी मांगें ऐसी हैं जिनको मानना अमेरिका के लिए आसान नहीं है.

अमेरिका का कहना है कि उसने युद्धविराम इस शर्त पर स्वीकार किया है कि होर्मुज़ स्ट्रेट में समुद्री यातायात बिना रुकावट जारी रहेगा.

ईरान कह रहा है कि वह अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से होर्मुज़ पर नियंत्रण चाहता है. यही उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है.

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बहुत कठिन बातचीत होने वाली है.

ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि अमेरिका ने ईरान में यूरेनियम संवर्धन की अनुमति देने पर सहमति जताई है.

लेकिन अमेरिका ने कहा है कि वह चाहता है कि ईरान में किसी भी तरह का यूरेनियम संवर्धन न हो.

आने वाले दो सप्ताह बहुत मुश्किल रहने वाले हैं.

ईरानी लोगों की प्रतिक्रिया

ईरानियों के लिए यह एक बहुत लंबी रात रही है. कई लोगों को लग रहा था कि डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद अमेरिका बिजलीघरों, सड़कों और पुलों पर भारी बमबारी करेगा.

सब लोग उस समय-सीमा का इंतज़ार कर रहे थे, जो तेहरान में बुधवार को सुबह के करीब 03:00 बजे की थी.

युद्धविराम का एलान तेहरान में करीब 01:00 बजे हुआ, लेकिन कई लोग तब भी जाग रहे थे.

समझौते पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं.

पिछले कुछ दिनों में लोग किराना, खाने-पीने का सामान और मोमबत्तियाँ खरीद रहे थे, साथ ही पानी जमा कर रहे थे, क्योंकि उन्हें डर था कि बिजली नहीं रहेगी.

अब उन्हें कुछ हद तक राहत मिली है कि बिजलीघरों पर हमला नहीं होगा.

वहीं दूसरी ओर, शासन के खिलाफ रहने वाले कई लोगों का मानना था कि यह युद्ध, अपनी सारी भयावहता और नुकसान के बीच, सत्ता परिवर्तन का कारण बनेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

अब उन्हें एक ऐसे शासन का सामना करना होगा जो इस युद्ध में घायल हुआ है, और जिसकी अर्थव्यवस्था भी ढह चुकी है.

वहां की सत्ता अब पहले से ज्यादा ग़ुस्से में है, और शायद वो अपने विरोधियों के लिए उदार बिलकुल भी ना हो.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित