9 घंटे के धरने के बाद हिरासत में लिए गए राहुल गांधी रिहा, ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ विपक्ष का था प्रदर्शन

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लोकसभा के नेता, प्रतिपक्ष राहुल गांधी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद रिहा कर दिया है.
मौक़े पर मौजूद बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा ने जानकारी दी कि हिरासत में लेने के बाद राहुल गांधी को किंग्सवे कैंप ले जाया गया था जहां मंगलवार रात क़रीब 10 बजे उन्हें रिहा कर दिया गया.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर राजधानी दिल्ली स्थित आकाशवाणी भवन में राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ धरने पर बैठे थे.
मंगलवार देर शाम पुलिस ने वहां पहुंचकर दोनों को हटा दिया है.
कांग्रेस ने राहुल गांधी को 'जबरन' ले जाती पुलिस का वीडियो डालते हुए एक्स पर लिखा है, 'सब याद रखा जाएगा.'
इससे पहले कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट किया, "मोदी-शाह ने आकाशवाणी भवन में पुलिस भेज दी है, जो जबरन नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी और सांसदों को उठा रही है. मोदी पुलिसिया दमन के बल पर आवाज दबाना चाहते हैं, लेकिन याद रखें- अब ये हुंकार दबने वाली नहीं है, गद्दार ज्ञानेश को जाना होगा."
चुनाव आयोग तक मार्च रोके जाने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा क़रीब 9 घंटों तक आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठे रहे.
धरने पर बैठे राहुल गांधी ने अपने फ़ेसबुक पेज पर एक वीडियो डाला जिसमें उनकी और प्रियंका गांधी की एक पुलिस अधिकारी से बातचीत होते दिख रही है.

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पुलिस ने उन्हें वहां से हटने को कहा, लेकिन दोनों वहीं डटे रहे. विपक्षी नेताओं का धरना मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर था.
पुलिस अधिकारी से राहुल गांधी कहते हैं, "मैं तो बस बैठा हूं.", जिस पर पुलिस अधिकारी उनसे कहते हैं, "सर, घर चले जाइए."
राहुल जवाब देते हैं, "क्या मैं सिर्फ़ घर जा सकता हूं. देश में कहीं और नहीं जा सकता. मैं राजनैतिक आदमी हूं. घर में नहीं बैठ सकता. आप एक जगह बता दो मैं जहां जाके बैठ जाऊं.
उनके साथ मौजूद प्रियंका गांधी ने कहा, "इस देश का कोई व्यक्ति अगर प्रोटेस्ट पर बैठना चाहता है तो उसे ऐसा करने का हक़ है. ये सामान्य प्रक्रिया है. आप उस संविधान के लिए लड़ रहे हैं. उन दो व्यक्तियों के लिए नहीं जो गद्दी पर बैठे हैं."
इससे पहले दोनों निर्वाचन आयोग मुख्यालय पहुंचने के लिए आकाशवाणी भवन परिसर में दाखिल हुए.
पुलिस के रोके जाने के बावजूद दोनों नेता वहां पहुंचे.
राहुल गांधी ने कहा, "देश के साथ जो किया गया है, वह देशद्रोह है. चाहे प्रधानमंत्री मोदी हों, अमित शाह हों, आरएसएस प्रमुख हों या ज्ञानेश कुमार, किसी को भी बख़्शा नहीं जाएगा."
राहुल गांधी ने चुनाव आयुक्तों से विपक्षी सांसदों की मुलाक़ात नहीं होने पर भी सवाल उठाया.
उन्होंने कहा, "300 से ज़्यादा विपक्षी सांसद आज संसद से चुनाव आयोग तक मार्च कर चुनाव आयुक्तों से मिलने पहुंचे. हम करोड़ों भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं. चुनाव आयुक्त हमसे मुलाक़ात क्यों नहीं कर रहे हैं? पुलिस हमें रोक क्यों रही है और धमका क्यों रही है?"

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

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चुनाव आयोग ने एक्स पर एक बयान जारी कर कहा कि विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयुक्तों से मिलने के लिए कोई समय नहीं मांगा था.
चुनाव आयोग ने लिखा, "शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के ज़रिए आयोग से मिलने का समय नहीं मांगा था. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने आयोग को बताया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का प्रतिनिधिमंडल मिलना और ज्ञापन सौंपना चाहता है."
आयोग के मुताबिक़, सांसदों के 240 सदस्यीय समूह के साथ संसद भवन एनेक्सी में बैठक का अनुरोध असामान्य था और प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं था. आयोग ने ज्ञापन लेने के लिए अपने सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को भेजने का प्रस्ताव दिया, लेकिन सांसदों ने इसे भी स्वीकार नहीं किया.
आयोग ने कहा कि वह देश की संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करता है. कोई भी राजनीतिक दल आयोग से मिलने का अनुरोध कर सकता है और आयोग अपनी सुविधा के अनुसार मुलाक़ात का समय तय कर सकता है.

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इससे पहले विपक्षी इंडिया ब्लॉक के सांसद संसद से निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे. पुलिस ने उन्हें नीति आयोग कार्यालय के सामने रोक दिया.
यह जगह नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के बीच उस रास्ते पर है, जो निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर जाता है. आगे जाने से रोके जाने के बाद विपक्षी सांसद सड़क पर बैठ गए और प्रदर्शन किया.
राहुल गांधी ने इससे पहले एक्स पर लिखा था, "ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो. अब इस्तीफ़ा देने का समय है."
प्रदर्शन में विपक्षी सांसदों के हाथों में आरएसएस की वर्दी में ज्ञानेश कुमार को दिखाने वाले कटआउट भी थे. उन्होंने "बीजेपी ही मुख्य चुनाव आयुक्त है", "वोट चोर, गद्दी छोड़" और "लोकतंत्र बिकाऊ नहीं है" जैसे नारे लगाए.
बीजेपी ने क्या कहा?

इंडिया ब्लॉक के मार्च और राहुल गांधी के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है.
बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि यह मार्च कांग्रेस और उसके सहयोगियों की ओर से "अराजकता पैदा करने और राहुल गांधी को फिर से लॉन्च करने" की एक और कोशिश है. उन्होंने राहुल गांधी पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को गलत तरीके से पेश करने का आरोप भी लगाया.
पात्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फ़ॉर्म-6 को अवैध नहीं बताया है, बल्कि इस मामले में नोटिस जारी किया है और आगे इसकी जांच होगी. उन्होंने राहुल गांधी पर इस मुद्दे को लेकर देश में "भ्रम" पैदा करने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, " एसआईआर का विरोध करके कांग्रेस 2.8 करोड़ मृतकों के नाम वोटर लिस्ट में बनाए रखना चाहती है? क्या राहुल गांधी और सोनिया गांधी 'वोट चोरी' से सांसद बने? अगर एसआईआर अवैध है, तो क्या कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और हिमाचल की कांग्रेस सरकारें भी अवैध हैं?"

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बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एसआईआर को लेकर "भ्रामक, बेबुनियाद और असंगत" बातें कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "ग़ैर-हाज़िर, अपने पते से शिफ़्ट कर गए लोगों, मृतकों और डुप्लीकेट वोटर्स को बगैर किसी जांच के वोटिंग के अधिकार देकर कांग्रेस किसको फ़ायदा पहुंचाना चाहती है?"
विपक्ष का आरोप क्या है?

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विपक्षी इंडिया ब्लॉक के सांसद मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न यानी एसआईआर में अनियमितताओं का आरोप लगा रहे हैं. उनकी मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और एसआईआर से जुड़े फैसलों की समीक्षा की है.
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव और फ़ॉर्म-6 से जुड़े फैसलों में नियमों का पालन नहीं किया गया.
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में फ़ॉर्म-6 से जुड़े मामले की सुनवाई हुई थी. इसके बाद राहुल गांधी ने दावा किया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फ़ॉर्म-6 में "ग़ैरक़ानूनी और एकतरफ़ा" बदलाव किया है. बीजेपी ने इस दावे को ख़ारिज किया है और कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने फ़ॉर्म-6 को अवैध नहीं बताया है.
संसद से चुनाव आयोग तक मार्च

इंडिया ब्लॉक के सांसद मंगलवार को संसद के मकर द्वार से निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे.
मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और कई अन्य विपक्षी सांसद शामिल हुए.
मार्च को देखते हुए संसद, संसद मार्ग, आकाशवाणी भवन और निर्वाचन आयोग मुख्यालय के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. कई जगह बैरिकेड लगाए गए थे और रैपिड एक्शन फ़ोर्स के जवान भी तैनात किए गए थे.
पुलिस के रोके जाने के बाद विपक्षी सांसदों ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया. बाद में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया गया.
विपक्ष ने यह प्रदर्शन 30 सितंबर को 19 विपक्षी दलों की बैठक के बाद तय किया था.
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 5 अक्तूबर को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फ़ॉर्म-6 को लेकर अहम टिप्पणी की.
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि फ़ॉर्म-6 में किया गया बदलाव सुप्रीम कोर्ट ने मंज़ूर नहीं किया था.
संशोधित फ़ॉर्म-6 में नए वोटर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने वालों से पूछा गया था कि उनका या उनके माता-पिता का नाम पिछली एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न) के बाद तैयार की गई वोटर लिस्ट में था या नहीं.
सीजेआई की यह टिप्पणी चुनाव आयोग के 26 सितंबर के एक प्रेस नोट में किए गए दावे से अलग है.
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर के इस प्रेस नोट में कहा था, "एसआईआर के लिए फ़ॉर्म-6 के साथ लगाए गए डिक्लेरेशन को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है."
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की जिसमें चुनाव आयोग के भीतर, "अभूतपूर्व संवैधानिक दरार और ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों" का आरोप लगाया गया है.
अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद वह देखना चाहती है कि फ़ॉर्म में बदलाव किसने किया.
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