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आईआरजीसी की ख़ुफ़िया विंग के प्रमुख माजिद ख़ादेमी कौन थे?
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के ख़ुफ़िया संगठन के प्रमुख माजिद ख़ादेमी अमेरिका और इसराइल के हमलों में मारे गए हैं.
बीबीसी फ़ारसी की वरिष्ठ संवाददाता ग़ोंचेह हबीबिआज़ाद के मुताबिक़, आईआरजीसी ने ईरानी न्यूज़ आउटलेट्स में प्रकाशित एक बयान में कहा है कि उनके इंटेलिजेंस चीफ़ माजिद ख़ादेमी की मौत हो गई है.
बयान में कहा गया है कि ख़ादेमी आज सुबह (सोमवार) मारे गए और इसमें इसराइल और अमेरिका पर उन्हें निशाना बनाने का आरोप लगाया गया है.
ख़ादेमी ने मोहम्मद काज़ेमी की जगह ली थी, जिन्हें 15 जून 2025 को 12 दिन के ईरान-इसराइल युद्ध के दौरान एक इसराइली हमले में मार दिया गया था.
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इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ और इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेज़ (आईडीएफ़) ने माजिद ख़ादेमी को मारने की ज़िम्मेदारी ली है.
आईडीएफ़ ने टेलीग्राम पर लिखा है कि उनकी मौत आईआरजीसी के लिए 'एक और गंभीर झटका' है.
पिछले साल अगस्त में, ख़ादेमी ने संसद से घरेलू इंट्रानेट को पूरा करने को प्राथमिकता देने की अपील की थी और कहा था कि यह ईरान के साइबर स्पेस की 'संप्रभुता की हिफ़ाज़त' के लिए ज़रूरी है.
फ़रवरी में ख़ादेमी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगाया था कि वह ईरानी अधिकारियों की "स्टेज्ड मर्डर" की रणनीति को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका मक़सद विदेशी सैन्य दख़ल को जायज़ ठहराना है.
ख़ादेमी ने उस समय दावा किया था कि इसराइल की साइबर वॉरफ़ेयर और इंटेलिजेंस यूनिट समेत 10 से ज़्यादा विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसियां जनवरी मे हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल थीं.
नेतन्याहू ने क्या कहा?
ख़ादेमी की मौत पर इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने एक्स पर एक लंबी पोस्ट की है.
उन्होंने लिखा, "ईरानी दहशतगर्द निज़ाम का एक और अहम हिस्सा काट दिया गया है. आज रात, हमने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के इंटेलिजेंस डिविज़न के प्रमुख माजिद ख़ादेमी को मार दिया, जो ईरानी निज़ाम के सीनियर अधिकारियों में से एक थे और जिन्होंने हाल ही में अपने पद को संभाला था."
"इसके अलावा, हमने क़ुद्स फ़ोर्स की यूनिट 840 के कमांडर असग़र बाक़री को भी मार दिया, जो दुनियाभर में यहूदियों और इसराइली लोगों के ख़िलाफ़ हमलों के लिए ज़िम्मेदार थे."
नेतन्याहू ने लिखा, "जो कोई हमारे नागरिकों की हत्या करने की कोशिश करता है, जो कोई इसराइल राज्य के ख़िलाफ़ दहशत फैलाता है, जो कोई ईरानी बुराई के गठजोड़ को खड़ा करता है, उसके ख़ून की ज़िम्मेदारी उसी पर है."
उन्होंने लिखा, "हम मज़बूती और पक्के इरादे के साथ कार्रवाई कर रहे हैं, हम हर उस शख़्स तक पहुंचेंगे जो हमें नुक़सान पहुंचाने की कोशिश करेगा. हम पूरी ताक़त के साथ, हर मोर्चे पर कार्रवाई जारी रखेंगे, जब तक ख़तरा ख़त्म नहीं हो जाता और जंग के सभी मक़सद हासिल नहीं हो जाते."
माजिद ख़ादेमी कौन थे?
बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, माजिद ख़ादेमी मीडिया में दो नामों से दिखाई देते थे- माजिद ख़ादेमी और माजिद हुसैनी.
शीर्ष सुरक्षा पदों पर रहने के कारण वह एक प्रमुख सैन्य चेहरे के रूप में जाने जाते थे.
हालांकि माजिद ख़ादेमी को रक्षा मंत्रालय की ख़ुफ़िया सुरक्षा से आईआरजीसी की इंटेलिजेंस प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइज़ेशन में स्थानांतरित किया गया था. हालांकि इससे पहले भी उनका आईआरजीसी में सेवा करने का इतिहास रहा है.
आईआरजीसी ख़ुफ़िया संगठन की स्थापना के बाद, साल 2014 में ही माजिद ख़ादेमी को आईआरजीसी ख़ुफ़िया संगठन के तत्कालीन प्रमुख हुसैन ताएब के उत्तराधिकारी के रूप में नामित किया गया था.
उन्होंने कुछ समय के लिए आईआरजीसी के ख़ुफ़िया सुरक्षा संगठन के उप निदेशक के रूप में भी कार्य किया और बाद में इसके निदेशक बन गए.
माजिद ख़ादेमी को मई 2018 में रक्षा मंत्रालय में ख़ुफ़िया सुरक्षा के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया था. उसी साल उन्होंने एक अन्य आईआरजीसी अधिकारी असग़र मीर-जाफ़री का स्थान लिया था.
अमेरिका और इसराइल के हमलों से 10 दिन पहले, उन्होंने जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों के बारे में इस्लामिक रिपब्लिक लीडर के कार्यालय के मीडिया से बात की थी.
उन्होंने कहा कि जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों में 'कम से कम 10 ख़ुफ़िया एजेंसियां' शामिल थीं.
"हमारी कुछ दोस्ताना सुरक्षा सेवाओं ने भी इस योजना का ज़िक्र किया था. वे हमें स्पष्ट रूप से बता रहे थे कि दुश्मन ने ईरान पर सैन्य हमले की अपनी योजना नहीं छोड़ी है और वर्तमान में वह सीधे सैन्य हमले पर नहीं, बल्कि ईरान में आंतरिक अराजकता और अस्थिरता पैदा करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है."
इस साक्षात्कार में, ख़ादेमी ने जनवरी के विरोध प्रदर्शनों से पहले अली ख़ामेनेई के साथ अपनी मुलाकात का ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने 12 दिनों के युद्ध पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी.
उन्होंने बताया कि इस बैठक के दौरान इस्लामी गणराज्य के नेता ने उनसे कहा, "ख़ुफ़िया कामों पर ध्यान दें. यह दौर 1960 के दशक जैसा है."
ईरान में 1960 का दशक इस्लामी गणराज्य में युद्ध और असहमति के दमन के दौर के साथ मेल खाता था, जिसके दौरान ईरान में हज़ारों क़ैदियों को फाँसी दी गई थी.
साल 1988 की गर्मियों में ये घटनाएं चरम पर पहुंच गईं और ईरानी जेलों में हज़ारों क़ैदियों को फांसी दे दी गई थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.