हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सऊदी अरब की मदद के लिए क्या अब जंग में उतरेगा तुर्की

मक्का समझौते के मुताबिक़ तुर्की की योजना सऊदी अरब की ज़रूरतों और मांगों के मुताबिक़ मदद का दायरा तय करने की है
इमेज कैप्शन, मक्का समझौते के मुताबिक़ तुर्की की योजना सऊदी अरब की ज़रूरतों और मांगों के मुताबिक़ मदद का दायरा तय करने की है (फ़ाइल फ़ोटो)
    • Author, बीबीसी तुर्की
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सऊदी अरब पर हूतियों के बढ़ते हमलों के बीच तुर्की इस बात पर विचार कर रहा है कि मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत वह सऊदी अरब की मदद के लिए क्या-क्या कर सकता है.

तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ हुए समझौते के तहत दी जाने वाली संभावित सैन्य मदद के विकल्प ज़मीनी ज़रूरतों के मुताबिक़ तय किए जाएंगे.

हालांकि, इससे पहले तुर्की की ग्रैंड नेशनल असेंबली की मंज़ूरी लेनी होगी और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इस सिलसिले में तुर्की की पहली प्राथमिकता मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को संसद से मंज़ूरी दिलाना है.

इसके बाद विदेश में सेना भेजने की अनुमति से जुड़ा प्रस्ताव दोबारा संसद के सामने मंज़ूरी के लिए रखा जाएगा. दूसरी ओर, तुर्की की योजना सऊदी अरब की ज़रूरतों और मांगों के मुताबिक़ मदद का दायरा तय करने की है. फ़िलहाल सबसे अहम विकल्प सऊदी अरब की रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए हवाई सुरक्षा और दूसरी सैन्य रसद क्षमताओं को सक्रिय करना है.

सऊदी अरब को सैन्य मदद

हूतियों और सऊदी अरब के बीच झड़पें ख़ास तौर पर पिछले दो हफ़्तों के दौरान बढ़ी हैं.
इमेज कैप्शन, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने 13 अक्तूबर को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फ़ोन पर बात की थी (फ़ाइल फ़ोटो)

हूतियों और सऊदी अरब के बीच झड़पें ख़ास तौर पर पिछले दो हफ़्तों के दौरान बढ़ी हैं.

इन झड़पों में सऊदी अरब के ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे और हवाई अड्डों के साथ कुछ पवित्र जगहों को भी निशाना बनाया गया है.

ईरान समर्थित हूतियों के हमलों पर तुर्की और पाकिस्तान समेत कई देशों ने प्रतिक्रिया दी है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सात अक्तूबर को व्हाइट हाउस में पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया.

उनसे तुर्की और पाकिस्तान की ओर से "सऊदी अरब को सैन्य मदद देने" के फ़ैसले के बारे में पूछा गया.

इस पर ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि वे सऊदी अरब की मदद करना चाहते हैं और यह अच्छी बात है."

तुर्की ने ख़ास तौर पर मक्का गठबंधन के तहत सऊदी अरब को सैन्य मदद देने के मुद्दे को अपने एजेंडे में शामिल कर लिया है.

राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन और विदेश मंत्री हकान फ़िदान ने अपने बयानों से साफ़ किया है कि इस तरह की मदद देने को लेकर अंकारा में मज़बूत राजनीतिक इच्छा है.

अर्दोआन ने 13 अक्तूबर को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फ़ोन पर बात की थी.

इस दौरान उन्होंने कहा था कि तुर्की, सऊदी अरब के साथ खड़ा रहेगा.

सऊदी अरब को संभावित मदद देने से जुड़ी प्रक्रिया तुर्की के विदेश और रक्षा मंत्रालय मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं.

पहले पूरी होगी क़ानूनी प्रक्रिया

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तुर्की के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में इस बात के संकेत दिए कि सऊदी अरब की मदद करने के लिए क़ानूनी और सैन्य स्तर पर किस रास्ते को अपनाया जाएगा.

मंत्रालय के बयान से पता चलता है कि सऊदी अरब को तुर्की की ओर से संभावित सैन्य मदद और क्षमताएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक़ आगे बढ़ेगी.

इसके लिए पहले तुर्की की संसद से मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को मंज़ूरी मिलना ज़रूरी है.

इसके बाद तुर्की के सशस्त्र बलों को विदेश में तैनात करने से जुड़े प्रस्ताव को भी मंज़ूरी दिलानी होगी.

तुर्की के संविधान के अनुच्छेद 92 में कहा गया है कि तुर्की की सेना को विदेश भेजने या विदेशी सेनाओं को तुर्की में तैनात करने का अधिकार देश की संसद के पास है.

राष्ट्रपति अर्दोआन ने भी 12 अक्तूबर को कहा था कि यह समझौता आने वाले दिनों में संसद के सामने पेश किया जाएगा.

समझौते और प्रस्ताव को संसद से मंज़ूर कराने के लिए साधारण बहुमत काफ़ी है.

क़ानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सैन्य मदद का स्वरूप कैसे तय होगा, इसे लेकर राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने कहा, "संभावित सहयोग का दायरा तय करते समय सऊदी अरब की ज़रूरतों और मांगों, ज़मीनी हालात और सैन्य अभियानों की ज़रूरतों को ध्यान में रखा जाएगा."

"इस बारे में हमारे संबंधित संस्थानों के आकलन और दोनों पक्षों के बीच बनने वाली सहमति के मुताबिक़ नियम तय किए जाएंगे."

हूतियों के साथ सीधे टकराव की उम्मीद नहीं

मक्का समझौता एक रक्षा समझौता है. यह हमला करने का समझौता नहीं है- तुर्की के विदेश मंत्री का बयान
इमेज कैप्शन, तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा है कि मक्का समझौता एक रक्षा समझौता है. यह हमला करने का समझौता नहीं है

तुर्की में हो रहे आकलन के मुताबिक़, मदद करते समय उसका मुख्य ध्यान सऊदी अरब की रक्षा समझौता बढ़ाने पर होगा.

इसमें ख़ास तौर पर हवाई सुरक्षा, रसद और ख़ुफ़िया जानकारी से जुड़ी मदद को प्राथमिकता दी जाएगी.

तुर्की के विदेश मंत्री हकान फ़िदान ने आठ अक्तूबर को जो बयान दिया था, उससे इस मुद्दे पर उनक देश का रुख़ काफ़ी हद तक साफ़ होता है.

फ़िदान ने कहा था, "मक्का समझौता एक रक्षा समझौता है. यह हमला करने का समझौता नहीं है."

"जब समझौते का कोई सदस्य हमले का शिकार होता है, तो आप उसकी रक्षा के लिए उसके साथ खड़े होते हैं."

उन्होंने यह भी कहा, "तुर्की किसी दूसरे देश की ज़मीन पर सेना भेजकर वहां हमला नहीं करेगा."

तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के लिए मक्का गठबंधन में साझा रक्षा और दुश्मन को हमला करने से रोकने की क्षमता अहम प्राथमिकताएं हैं.

हालांकि, तीनों देशों के बीच हुए समझौते में नेटो के अनुच्छेद पांच जैसा एक सिद्धांत भी शामिल है.

इसके मुताबिक़, गठबंधन के किसी एक सदस्य पर हुआ हमला सभी सहयोगी देशों पर हमला माना जाएगा.

मक्का गठबंधन में फ़ैसले लेने वाली सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था 'रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति' यानी एसएसएसके है.

इस समिति ने पांच अक्तूबर को हुई बैठक में सऊदी अरब को तुरंत सैन्य मदद देने का फ़ैसला किया था.

हालांकि, मक्का गठबंधन अभी बहुत नया है और इसे संस्था के रूप में तैयार करने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है.

इस वजह से सैन्य मदद देने से जुड़े क़दमों में समय लगने की बात कही जा रही है.

रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति की अगली बैठक तक सभी पक्षों के बीच सैन्य मदद को लेकर बातचीत और स्पष्ट होने की उम्मीद है.

ज़मीनी हालात से बदल सकता है तुर्की का सहयोग

तुर्की अपनी सैन्य भागीदारी पर अंतिम फ़ैसला लेते समय इन सभी विकल्पों पर विचार कर सकता है.
इमेज कैप्शन, तुर्की अपनी सैन्य भागीदारी पर अंतिम फ़ैसला लेते समय तमाम विकल्पों पर विचार कर सकता है

सऊदी अरब और यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखने वाले हूती विद्रोही के बीच 2014 से समय-समय पर झड़पें होती रही हैं.

अमेरिका और इसराइल की ईरान के साथ लड़ाई के दौरान हूती विद्रोही ने ख़ास तौर पर बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से टैंकरों की आवाजाही सीमित करने की कोशिश की.

इससे सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष का अंतरराष्ट्रीय पहलू और साफ़ दिखाई देने लगा है.

अमेरिकी मीडिया में ऐसी रिपोर्टें प्रकाशित हुई हैं कि वॉशिंगटन, रियाद के साथ मिलकर हूतियों के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई शुरू करने पर विचार कर रहा है.

वहीं, इज़राइल भी इस कार्रवाई में ख़ुफ़िया जानकारी और सैन्य मदद देने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है.

तुर्की के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के बयान में कहा गया कि सहयोग का दायरा तय करते समय "ज़मीनी हालात" को भी ध्यान में रखा जाएगा.

तुर्की अपनी सैन्य भागीदारी पर अंतिम फ़ैसला लेते समय इन सभी विकल्पों पर विचार कर सकता है.

ईरान के साथ बातचीत भी जारी

इस पूरी प्रक्रिया में तुर्की एक और अहम संतुलन का ध्यान रख रहा है.

वह ईरान के साथ अपने रिश्तों में संभावित तनाव से बचना चाहता है.

राष्ट्रपति अर्दोआन ने 12 अक्तूबर को कहा था, "तुर्की का रुख़, उसकी संवेदनशीलता और जिन सिद्धांतों का हम समर्थन करते हैं, वे सभी साफ़ हैं."

"हम कभी भी घटनाओं को नस्लीय या सांप्रदायिक नज़रिए से नहीं देखते."

अर्दोआन ने आगे कहा था, "हम चाहते हैं कि हमारे पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे."

"आगे भी हम क्षेत्रीय ज़िम्मेदारी के आधार पर शांति का समर्थन करते रहेंगे और इसके लिए कोशिशें जारी रखेंगे."

तुर्की के विदेश मंत्री हकान फ़िदान ने 13 अक्तूबर को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची से फ़ोन पर बात की.

इस बातचीत में दोनों नेताओं ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए उठाए जाने वाले ज़रूरी क़दमों पर चर्चा की.

आने वाले समय में भी दोनों देशों के अधिकारियों के बीच क्षेत्रीय घटनाक्रम को लेकर बातचीत जारी रहने की उम्मीद है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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