जेलर 2: रजनीकांत का जादू 50 साल से कैसे कायम है?

सुपरस्टार रजनीकांत की फ़िल्म 'जेलर 2' 15 अक्टूबर, 2026 को रिलीज़ हुई है
इमेज कैप्शन, सुपरस्टार रजनीकांत की फ़िल्म 'जेलर 2' 15 अक्टूबर, 2026 को रिलीज़ हुई है
    • Author, सिराज
    • पदनाम, बीबीसी तमिल
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

फ़िल्मों में आए रजनीकांत को 50 साल से ज़्यादा हो चुके हैं. इसके बावजूद 75 साल की उम्र में भी वह पर्दे पर 'सोलो हीरो' बने हुए हैं.

उनकी फ़िल्म 'जेलर 2' आज रिलीज़ हुई है. बड़े बजट में बनी इस फ़िल्म में कई बड़े कलाकारों और तकनीकी टीम के जाने-माने लोगों ने काम किया है.

रजनीकांत की पिछली फ़िल्म 'कुली' को मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिली थीं. लेकिन इसका 'जेलर 2' से जुड़ी उम्मीदों पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ा.

आज भी कई नए निर्देशक इंटरव्यू में कहते हैं, "मेरे पास सुपरस्टार रजनी के लिए एक कहानी है."

इन कहानियों में वे रजनीकांत को पिता या किसी दूसरे अहम सहायक किरदार में नहीं, बल्कि हीरो के रूप में ही देखते हैं.

किसी और की फ़िल्म हो तो भी दिखते हैं रजनी

कई युवा अभिनेता पर्दे पर ख़ुद को 'रजनी का प्रशंसक' बताते हैं.

दूसरी भाषाओं की कई फ़िल्मों में जब तमिलनाडु को दिखाया जाता है तो किसी न किसी फ़्रेम में रजनीकांत का पोस्टर या तस्वीर दिखाई दे जाती है.

फ़ोर्ब्स इंडिया ने 2013 में रजनीकांत पर प्रकाशित एक लेख में लिखा था, "फ़िल्मों की एक उम्र होती है, लेकिन उनके सितारों की नहीं. वे ब्रांड बन जाते हैं."

"रजनीकांत के प्रशंसक फ़िल्में देखने नहीं जाते. वे पर्दे पर रजनीकांत को देखने जाते हैं."

'रजनी' नाम का ब्रैंड

केवल उन्हीं फ़िल्मों को चुनते हैं, जो उनके प्रशंसकों को पसंद आएंगी. ऐसा फ़िल्मों के जानकार कहते हैं.
इमेज कैप्शन, "रजनीकांत केवल उन्हीं फ़िल्मों को चुनते हैं, जो उनके प्रशंसकों को पसंद आएंगी"
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
दिनभर
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

एपिसोड

समाप्त

लेखिका जे दीपा कहती हैं, "रजनी कुछ फ़िल्मों की खुले दिल से तारीफ़ करते हैं. वह यह भी कहते हैं कि ऐसी कहानियों में काम करने की उनकी इच्छा है."

"लेकिन वह बहुत सावधानी से केवल उन्हीं फ़िल्मों को चुनते हैं, जो उनके प्रशंसकों को पसंद आएंगी. यही वजह है कि 'रजनी' नाम का ब्रैंड आज भी कायम है."

जे दीपा ने सिनेमा पर 'ओलि विथगर्गल' और 'कथै टू तिरैकथै' समेत कई किताबें लिखी हैं.

वह कहती हैं, "रजनी अपनी ख़ूबियों और कमज़ोरियों को अच्छी तरह जानते हैं. वह हमेशा इस बात को लेकर सावधान रहते हैं कि पर्दे पर ये चीज़ें किस तरह दिखाई देंगी."

"इसका एक उदाहरण उनका स्टाइल है, जो उनकी पहली फ़िल्म से लेकर आज तक नहीं बदला."

'अ बर्ड्स आई व्यू ऑफ़ ब्रांड रजनीकांत' नाम का रिसर्च पेपर बताता है कि रजनीकांत ने अपनी फ़िल्मों से आगे बढ़कर अलग-अलग वर्गों के लोगों को आकर्षित किया है.

इसके पीछे पर्दे पर बोले गए उनके पंच डायलॉग, 'अन्नामलाई', 'उझैप्पाली', 'वीरा' और 'मुथु' जैसी फ़िल्मों में आम आदमी को दिखाने वाले उनके किरदार और सार्वजनिक जीवन में उनका सरल व्यवहार शामिल हैं.

रिसर्च पेपर के मुताबिक़, इन बातों ने 'रजनी' के ब्रैंड को और मज़बूत किया है.

इसमें कहा गया है, "अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ ख़ान, आमिर ख़ान और सलमान ख़ान जैसे भारतीय सुपरस्टार कई विज्ञापन ब्रैंड्स का प्रचार करते हैं. लेकिन रजनीकांत सार्वजनिक रूप से कारोबारी ब्रैंड्स का प्रचार नहीं करते."

हालांकि, कारोबारी फ़ायदे के लिए 'रजनी' की छवि का इस्तेमाल किया गया है.

मिसाल के तौर पर जापान की फ़ूड कंपनी 'टोहाटो' ने जापान में अपने उत्पाद का प्रचार करने के लिए रजनीकांत की तस्वीर का इस्तेमाल किया था.

रजनीकांत 1995 में आई फ़िल्म 'मुथु' के डब वर्ज़न के ज़रिए जापान में भी लोकप्रिय हो गए थे.

फ़िल्मों की कारोबारी कामयाबी

सुपरस्टार रजनीकांत फ़िल्मों से इतर बेहद आम व्यक्ति की तरह पेश आते हैं.
इमेज कैप्शन, सुपरस्टार रजनीकांत फ़िल्मों से इतर बेहद आम व्यक्ति की तरह पेश आते हैं

साल 2023 में आई 'जेलर' की कहानी पर रजनीकांत की फ़िल्म 'बाशा' का असर दिखाई देता है.

इसमें एक रिटायर्ड जेलर अपने बेटे की हत्या करने वालों से बदला लेने के लिए अपने शांत पारिवारिक जीवन से बाहर निकलता है और हिंसा का रास्ता अपनाता है.

वह असल में कौन है और उसने पहले क्या-क्या किया था, यह फ़्लैशबैक और दूसरे किरदारों के ज़रिए बताया जाता है.

मोहनलाल, शिवराजकुमार, विनायकन और जैकी श्रॉफ़ जैसे दूसरी भाषाओं के जाने-माने सितारों ने कहा था कि उन्होंने यह फ़िल्म केवल 'रजनीकांत के लिए' की थी.

रजनीकांत के बोले गए एक पंच डायलॉग को लेकर एक गाना भी तैयार किया गया था, जिसे 'जेलर' में इस्तेमाल किया गया.

किसी फ़िल्म को कला, अच्छी कहानी, पटकथा या समाज के लिए अच्छे संदेश से अलग, कारोबारी कामयाबी के आधार पर भी पहचान मिलती है.

इस नज़रिए से देखें तो 'जेलर' ने 600 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई की थी. फ़िल्म बनाने वाली कंपनी ने ये जानकारी सार्वजनिक की थी.

भारतीय फ़िल्म उद्योग के मौजूदा बड़े सितारों की फ़िल्मों की कारोबारी कामयाबी से तुलना करें तो यह अहम आंकड़ा है.

'सभी फ़िल्में बड़ी कामयाबी हासिल करें ये ज़रूरी नहीं'

हालांकि, 'सुपरस्टार' रजनीकांत की सभी फ़िल्में कारोबार के मामले में बहुत बड़ी कामयाबी हासिल नहीं करतीं.

इसकी एक बड़ी मिसाल साल 2002 में रिलीज़ हुई फ़िल्म 'बाबा' है.

रजनीकांत ने 'बाबा' की पटकथा लिखी थी और इसे प्रोड्यूस भी किया था. ये फ़िल्म नाकाम रही, लेकिन इसकी नाकामी का उनकी अगली फ़िल्म 'चंद्रमुखी' की बड़ी कामयाबी पर कोई असर नहीं पड़ा.

जे दीपा कहती हैं, 'चंद्रमुखी' में इंटरवल से पहले के कई दृश्य रजनीकांत के बिना आगे बढ़ते हैं. फ़िल्म की पटकथा में ज्योतिका के किरदार को काफ़ी अहमियत दी गई थी.

"इसके बावजूद रजनीकांत ने इस फ़िल्म में काम किया. इसकी एक बड़ी वजह अपने 'ब्रांड' पर उनका भरोसा था."

'अपनी कमज़ोरियां जानते हैं रजनीकांत'

अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत में रजनीकांत ने कई फ़िल्मों में विलेन की भूमिका निभाई थी.
इमेज कैप्शन, अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत में रजनीकांत ने कई फ़िल्मों में विलेन की भूमिका निभाई थी

अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत में रजनीकांत ने कई फ़िल्मों में विलेन की भूमिका निभाई थी.

'पथिनारु वयथिनिले', 'मूंद्रु मुदिचु', 'गायत्री' और 'अवर्गल' में निभाए गए उनके किरदार ऐसे थे, जिन्हें ख़ुद को एक 'ब्रांड' के रूप में स्थापित करने की इच्छा रखने वाला कोई अभिनेता शायद स्वीकार करने से हिचकता.

'ग्रैंड ब्रांड रजनी: ब्रांड मैनेजमेंट द रजनीकांत वे' नाम की किताब में लिखा गया है, "रजनीकांत पर्दे पर एक ऐसे विलेन के रूप में उभरे, जिसे लोग पसंद करते थे. उनके नकारात्मक किरदारों ने उन्हें बहुत सकारात्मक नतीजे दिए."

"वह जब भी किसी फ़िल्म में विलेन बनकर दिखाई देते थे, सबसे ज़्यादा तालियां उन्हें ही मिलती थीं. दक्षिण भारतीय फ़िल्म उद्योग के लिए यह एक नई बात थी."

इसी आधार पर जे दीपा कहती हैं कि रजनीकांत अपनी कमज़ोरियों को जानते थे.

वह कहती हैं, "रजनीकांत जानते थे कि जब उन्होंने फ़िल्मों में क़दम रखा था, तब फ़िल्म उद्योग गहरे रंग की त्वचा वाले किसी अभिनेता को आसानी से हीरो के रूप में स्वीकार नहीं करेगा."

"इसलिए उन्होंने अपने हिस्से आए विलेन के किरदारों को अलग अंदाज़ में निभाया. उन्होंने इन किरदारों को इस तरह निभाया कि लोगों को लगे, कोई दूसरा अभिनेता उनकी जगह नहीं ले सकता."

रजनीकांत ने 1980 और 1990 के दशक में कई बॉलीवुड फ़िल्मों में दूसरे हीरो या अहम किरदारों में काम किया था.

इनमें ख़ास तौर पर वे फ़िल्में शामिल थीं, जिनमें अमिताभ बच्चन हीरो थे.

जे दीपा कहती हैं, "उन्होंने दोस्ती के लिए बॉलीवुड की कई फ़िल्मों में काम किया. इससे बॉलीवुड में भी उनके प्रशंसकों का एक वर्ग तैयार हुआ."

"इसके बावजूद उन्होंने वहां मुख्य हीरो बनने की कोशिश नहीं की. वह बॉलीवुड में सुंदरता को लेकर मौजूद नियमों को समझते थे."

"लेकिन बॉलीवुड की फ़िल्मों ने उन्हें 1990 के दशक में ही 'पैन इंडिया' सितारा बना दिया था. इससे उनकी तमिल फ़िल्मों को भी वहां लोगों का ध्यान मिला."

जे दीपा कहती हैं, "रजनीकांत ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत और उसके शिखर पर जिन बातों को बहुत सावधानी से संभाला, बाद में उनके लिए कहानियां लिखते समय निर्देशकों ने भी उन्हीं बातों का ध्यान रखना शुरू कर दिया."

प्रोड्यूसरों का समर्थन

पिछले कुछ वर्षों में रजनीकांत की 'दरबार', 'अन्नात्थे', 'लाल सलाम' और 'वेट्टैयन' जैसी फ़िल्मों को उम्मीद के मुताबिक़ कामयाबी नहीं मिली.

इसके बावजूद रजनीकांत लगातार 'जेलर', 'कुली' और 'जेलर 2' जैसी बड़े स्तर पर बनाई गई फ़िल्मों में हीरो की भूमिका निभा रहे हैं.

फ़िल्म प्रोड्यूसर जी. धनंजयन कहते हैं, "आज भी कई प्रोड्यूसर रजनीकांत की फ़िल्म बनाना चाहते हैं."

"जब तक रजनीकांत ख़ुद इनकार नहीं करते, उनकी 'सुपरस्टार' वाली छवि या 'ब्रैंड' के कारण उनकी फ़िल्में बनती रहेंगी."

धनंजयन कहते हैं, "'जेलर' और 'जेलर 2', दोनों फ़िल्में 'रजनी' नाम के ब्रैंड को सामने रखकर ही बनाई गई हैं."

"फ़िल्म के पहले दिन की कमाई और बॉक्स ऑफ़िस पर होने वाली कुल कमाई के सभी अनुमान रजनीकांत की लोकप्रियता और उनके ब्रांड की क़ीमत को आधार बनाकर लगाए जाते हैं."

"इन फ़िल्मों से जुड़ी उम्मीदें और कमाई के अनुमान तय करने में रजनीकांत सबसे अहम भूमिका निभाते हैं."

वह कहते हैं, "'जेलर 2' निश्चित रूप से पहली फ़िल्म 'जेलर' की कमाई के रिकॉर्ड तोड़ देगी."

फ़िल्म 'कुली' से जुड़े एक कार्यक्रम में रजनीकांत ने कहा था, "अब मेरी उम्र हो गई है. यह 1950 के दशक के मॉडल वाली गाड़ी है, जो कई लाख किलोमीटर चल चुकी है."

"इसलिए मैंने फ़िल्म की टीम से कहा था कि मुझसे बहुत ज़्यादा काम मत कराइए और मुझे सावधानी से संभालिए."

फ़िल्मों और मंच पर रजनीकांत का व्यक्तित्व एक सितारे की तरह नहीं, बल्कि आम आदमी के क़रीब दिखाई देता है.

इसे भी 'रजनी' नाम के ब्रांड के इतने लंबे समय तक कायम रहने की एक अहम वजह माना जाता है.

'ग्रैंड ब्रांड रजनी' किताब में लिखा गया है, "अगर रजनीकांत का परिचय यह कहकर कराया जाता कि 'यही अगले सुपरस्टार हैं' या 'यही स्टाइल किंग हैं', तो 'रजनी' नाम का ब्रांड कभी तैयार नहीं होता."

"किसी ब्रांड को यह साफ़ पता होना चाहिए कि वह क्या कर सकता है और क्या नहीं. रजनीकांत यह बात समझते हैं."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.