बेअंत हत्याकांड का दोषी 'जत्थेदार'

    • Author, रविंदर सिंह रॉबिन
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

सत्ताधारी अकाली दल का विरोध कर रहे सिख नेताओं ने अमृतसर में बुलाए गए ‘सरबत ख़ालसा’ में पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी जगतार सिंह हवारा को अकाल तख़्त का जत्थेदार नियुक्त किया है जो फिलहाल जेल में बंद हैं.

मंगलवार को हरमंदिर साहिब परिसर से लगभग 20 किलोमीटर दूर इन सिख नेताओं के आहवान पर हज़ारों सिख एकत्र हुए थे.

अकाल तख़्त सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है जिसके मुखिया को जत्थेदार कहते हैं. वो अन्य प्रमुख सिख प्रतिनिधियों के साथ धर्म और मर्यादा से जुड़े फ़ैसले लेते हैं जो सभी सिखों पर बाध्य होते हैं.

ख़ास आह्वान के बाद, सिख पंथ से संबंधित मुद्दों पर फ़ैसले लेने के लिए सरबत ख़ालसा बुलाया जाता है. हालाँकि, इस सरबत ख़ालसा के बारे में ये विवाद है कि इसे मौजूदा अकाल तख़्त जत्थेदार की रज़ामंदी से नहीं बुलाया गया.

अकाल तख़्त के जत्थेदार की नियुक्ति शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी करती है जो सिख गुरुद्वारा एक्ट के तहत ऐतिहासिक सिख गुरुद्वारों की देखरेख करती है.

इस समय एसजीपीसी में सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल को बहुमत मिला हुआ है. अकाल तख़्त के मौजूदा जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को एसजीपीसी ने ही नियुक्त किया था और एसजीपीसी को ही उन्हें हटाने का अधिकार है.

जब से मौजूदा जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह के नेतृत्व में अकाल तख़्त ने डेरा सच्चा सौदा के मुखिया राम रहीम सिंह को एक विवाद में माफ़ी देने का फ़ैसला किया, तब से ‘सरबत ख़ालसा’ बुलाने वाले सिख नेता उनसे नाराज़ हैं और उन्हें हटाने की मांग कर रहे हैं.

राम रहीम सिंह पर सिखों ने कुछ साल पहले दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जैसी वेशभूषा पहन कर लोगों को अमृत पिलाने का आरोप लगाया था. हालाँकि हाल के माफ़ीनामे के बाद सिखों में फैले असंतोष के कारण अकाल तख़्त ने वो फ़ैसला वापस ले लिया था.

सरबत ख़ालसा बुलाने वाले नेताओं में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के राजनीतिक विरोधी सिमरनजीत सिंह मान प्रमुख हैं. इस सरबत ख़ालसा में पंजाब और विदेश की कई सिख संस्थाओं ने भाग लिया जिनमें से अधिकतर प्रकाश सिंह बादल और शिरोमणि अकाली दल का विरोध करती आई हैं.

इस सम्मेलन ने जो फ़ैसले लिए उनमें पंजाब के पुलिस प्रमुख रहे केपीएस गिल को तन्खाइया घोषित करना, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को सिख संस्थाओं की प्रतिष्ठा गिराने का दोषी पाना और अगला सरबत ख़ालसा 13 अप्रैल 2016 को बुलाना शामिल हैं.

फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि सिख गुरुद्वारा एक्ट के तहत एसजीपीसी के अधिकारक्षेत्र में इस सरबत ख़ालसा का दख़ल और इसके लिए गए फ़ैसलों को सिख समुदाय अपनी सहमति देगा या नहीं.

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