यूपी के बांदा में एक दशक तक कई बच्चों से होती रही यौन हिंसा, कैसे खुला मामला: ग्राउंड रिपोर्ट

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- Author, गौरव गुलमोहर
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
- पढ़ने का समय: 14 मिनट
20 फरवरी, 2026 को उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने करीब एक दशक तक 33 नाबालिग़ों से यौन हिंसा करने के आरोप में राम भवन और उनकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सज़ा सुनाई.
अदालत ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ़ द रेयर' श्रेणी का अपराध माना.
साथ ही कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को सर्वाइवर्स के परिजनों को 10-10 लाख रुपए मुआवज़ा देने का निर्देश भी दिया.
इस मामले की जाँच सीबीआई ने की थी. सीबीआई ने वर्ष 2020 में इस मामले में मुक़दमा दर्ज किया था.
(चेतावनी: इस कहानी के कुछ विवरण आपको विचलित कर सकते हैं.)
सीबीआई को पहली बार कैसे मिली जानकारी?
सीबीआई को 31 अक्तूबर 2020 को एक गुप्त सूचना मिली थी कि चित्रकूट और आसपास के ज़िलों में कुछ नाबालिग बच्चों का संगठित रूप से यौन शोषण किया जा रहा है.
सूचना देने वाले व्यक्ति ने एक पेनड्राइव भी उपलब्ध कराई, जिसमें 34 वीडियो और 679 तस्वीरें थीं.
जाँच एजेंसी ने इन वीडियो और तस्वीरों में राम भवन और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को नाबालिग़ों के साथ यौन हिंसा करते हुए पाया.
सीबीआई ने दिल्ली में 31 अक्तूबर 2020 को रामभवन के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 377, 14 पॉक्सो एक्ट और 67बी आईटी एक्ट में मुक़दमा दर्ज किया और दो नवंबर 2020 को चित्रकूट ज़िले में आकर अभियुक्त राम भवन की जाँच शुरू की.

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सीबीआई की जाँच में यह भी सामने आया कि सिंचाई निर्माण खंड कर्वी चित्रकूट में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात राम भवन का कार्यक्षेत्र चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर और महोबा ज़िले तक फैला हुआ था.
जाँच एजेंसी के मुताबिक़ राम भवन नाबालिग़ बच्चों को पढ़ाने, कंप्यूटर सिखाने, मोबाइल देने या अन्य लालच देकर घर बुलाता था.
वहां उनके साथ यौन अपराध किया जाता था और उसका वीडियो बनाकर सामग्री को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स डार्क वेब, स्काइप और मेल के ज़रिए भारत के अलावा विदेशों में भी शेयर किया जाता था.
सीबीआई के पूर्व पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बीबीसी को बताया, "हमें 31 अक्तूबर 2020 को पहली बार गुप्त सूत्रों से जानकारी मिली. हमने दो नवंबर 2020 को राम भवन के घर पर छापा मारा, बिना अरेस्ट के एग्जामिनेशन किया और फिर अरेस्ट किया. हमने इस केस में अरेस्ट करने में देरी नहीं की."
क्यों बनाता था वीडियो?

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सीबीआई की ओर से दावा किया गया है कि राम भवन नाबालिग़ बच्चों का यौन शोषण करता था और उन बच्चों का फ़ोटो और वीडियो बनाकर ईमेल या अन्य साइट्स के माध्यम से देश-विदेशों में भेजता था.
पूर्व सीबीआई अधिकारी और इस मामले के इंचार्ज रहे अमित कुमार नाबालिग़ बच्चों के अश्लील फ़ोटो और वीडियो की बिक्री से इनकार करते हैं.
अमित कुमार ने बीबीसी हिन्दी को बताया, "इस मामले में यह बात मीडिया में चल रही है कि नाबालिग़ बच्चों का वीडियो राम भवन डार्क साइट के माध्यम से बेच रहा था, लेकिन वीडियो बेचा नहीं जा रहा था. ट्रायल में कहीं यह बात आई नहीं. उसने वीडियो शौक के लिए बनाया और उसे शेयर किया जा रहा था."
अमित कुमार ने यह जानकारी भी दी, "नाबालिग़ बच्चों का अश्लील वीडियो सिर्फ़ राम भवन नहीं भेज रहा था, बल्कि बाहर से इसे भी वीडियो भेजा जा रहा था. यह टू वे प्रोसेस था. वो नाबालिग़ बच्चों का वीडियो यूरोप के लगभग सभी देश, बांग्लादेश, श्रीलंका और देश के अंदर दूसरे राज्यों में भी शेयर कर रहा था."
सीबीआई को छापे के दौरान घर से सेक्स टॉयज और पोर्नोग्राफिक सामग्री भी मिली.
दोषी दंपती कौन है?

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यौन शोषण का दोषी 45 साल का राम भवन एक ग़रीब परिवार में पैदा हुआ था.
नौकरी पाने से पहले राम भवन छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर अपना ख़र्च चलाता था. साल 2009 में सिंचाई निर्माण खंड में राम भवन की नौकरी लग गई. राम भवन मई 2009 से नवंबर 2020 में गिरफ़्तार होने तक नौकरी में रहा.
राम भवन की पत्नी दुर्गावती एक गृहिणी थी. रामभवन के पड़ोसियों के मुताबिक़ दोनों मोहल्ले में लोगों से बहुत कम बात करते थे.
राम भवन के पड़ोस में रहने वाले शिवम त्रिपाठी ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "राम भवन इस मोहल्ले में कई सालों से रह रहा था. उसका व्यवहार अच्छा था. ऑफ़िस कार से आता था और सीधे रूम की तरफ़ चला जाता था और रूम से सीधा ऑफ़िस जाता था. एक तरफा बैग टांगे कार से उतरता था, कहीं रुकता नहीं था. मैं इतना जानता था कि सरकारी जेई है. घर में राम भवन पत्नी और एक बच्चे के साथ रहता था. कार से एक दो बार बच्चों को आते-जाते देखा हूँ, लेकिन वो बच्चे बाहरी थे."
बच्चों का यौन शोषण

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सरकारी कर्मचारी होने के कारण आस-पड़ोस में राम भवन की छवि एक सज्जन व्यक्ति की थी. इसलिए कुछ बच्चों के माँ–बाप उसके पास अपने बच्चों को पढ़ने और कंप्यूटर सीखने के लिए भेजते थे.
वर्ष 2009 से 2012 तक जिस मकान में राम भवन रहता था, उसके मालिक का नाम राम आशरे गौतम था. तब राम आशरे छत्तीसगढ़ में रहते थे.
राम आशरे ने बीबीसी को बताया, "मैंने उसे सिंचाई विभाग के एक बाबू के माध्यम से कमरा दिया था. जब वह यहाँ रहता था, तब हम छत्तीसगढ़ में रहते थे. उससे हमारा साबका ज़्यादा नहीं था. जब हम आते तो उसका कमरा ज़्यादा समय बंद रहता."
बाद में राम भवन सुदामा प्रसाद वर्मा के यहाँ किराए पर रहने लगा. सुदामा प्रसाद वर्मा पेशे से डॉक्टर हैं और उनकी पत्नी गीता वर्मा प्राइमरी में शिक्षक हैं.
दूसरे घर में भी मकान-मालिक दिन भर घर पर नहीं रहते थे. सुबह सुदामा प्रसाद अस्पताल चले जाते थे और पत्नी स्कूल पढ़ाने चली जाती थीं.
गीता वर्मा ने बीबीसी को बताया, "हम ज़्यादा समय घर पर नहीं रहते थे. वह गली से आता-जाता था. उसकी पत्नी से हमारा सामान्य रिश्ता था. उसके यहाँ मोहल्ले के बच्चे आते-जाते थे. हमारे साथ उसका कभी कोई विवाद नहीं हुआ था. हमें इस विषय में अब ज़्यादा बात नहीं करनी है."
राम भवन पर आरोप था कि उसने अपने सगे-संबंधियों या अधिकांश ग़रीब और दलित परिवार के बच्चों का यौन शोषण किया.
सीबीआई के विशेष सरकारी वकील धारा सिंह मीणा ने बीबीसी को बताया, "राम भवन ने जिन नाबालिग़ बच्चों के साथ ग़लत काम किया, उनमें ज़्यादा संख्या दलित परिवार के बच्चों की है."
उन्होंने आगे बताया, "राम भवन किराए का घर उसी लोकेशन पर लेता था, जहाँ मज़दूर परिवार ज़्यादा रहते थे. वह बच्चों को अपने घर तक अपनी मोटर साइकिल और कार से लेकर आता था."
राम भवन को जानने वालों ने उसके बारे में क्या बताया?
राम भवन के गाँव वाले घर में सन्नाटा छाया हुआ है. उसके घर पर आने-जाने वालों को पड़ोसी सशंकित नज़रों से देखते हैं.
हमने जब परिवार के लोगों से बात करने की कोशिश की, तो महिलाओं ने बात करने से इनकार कर दिया.
वहीं पड़ोसियों ने बीबीसी को नाम न ज़ाहिर होने की शर्त बताया, "राम भवन यहाँ नहीं रहता है. वो यहाँ कभी-कभी आता था. वह नाबालिग़ बच्चों का यौन शोषण करता था, इसकी भनक पहले कभी नहीं लगी थी."
गाँव में हमारी मुलाक़ात जनरल स्टोर की दुकान चलाने वाले कमल से हुई. कमल ने बताया, "मेरी उम्र 55 साल से अधिक हो गई है. आज तक राम भवन और उसका परिवार यहाँ कभी नहीं आया. हमने राम भवन को आज तक नहीं देखा है. जब अख़बार में ख़बर पढ़ी कि जिसे फांसी की सज़ा हुई है, वह हमारे गाँव का है तो हम सन्न रह गए."
बीबीसी ने राम भवन का आपराधिक इतिहास तलाशने की कोशिश की, लेकिन कोतवाली में उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला.
राम भवन के बड़े भाई राजा भइया ने बीबीसी हिन्दी को बताया, "राम भवन हम भाइयों में सबसे छोटा है. उसने बांदा से पॉलिटेक्निक की पढ़ाई की है. शादी से पहले उसकी नौकरी लग गई. उससे पहले वो बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था. उसका आस-पड़ोस में कभी किसी से रिश्ता ख़राब नहीं था."
उन्होंने यह भी बताया, "राम भवन बहुत कम बोलता था. उसका किसी से कोई विवाद नहीं था. उसके दोस्त बहुत कम थे. मुझे उसके दोस्तों के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उसका कोई दोस्त यहाँ कभी नहीं आया."
राम भवन के साथ 10 सालों तक काम करने वाले दीपक मौर्य ने बीबीसी को बताया, "उसका (राम भवन) व्यवहार नॉर्मल था. अपने काम से काम रखता था. पब्लिक से मिलता-जुलता नहीं था. आगे रहने वाला आदमी नहीं था. एक्टिव आदमी नहीं था. फ़्रेंडली बिल्कुल नहीं था. उसको न कभी हँसते देखा न ग़ुस्सा करते देखा. उसके व्यवहार से नहीं लगता था कि इतना घिनौना काम करेगा. उसके जीवन का वह दूसरा पहलू था."
सिंचाई निर्माण खंड ऑफ़िस में कार्यरत एक व्यक्ति ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया, "वह हँसता नहीं था. किसी से न मज़ाक करता था और न ही उसका किसी से विवाद होता था. आता था, काम करता था, चला जाता था. बोलता बहुत कम था. उदासीन टाइप आदमी था. किसी के यहाँ कार्यक्रम में आता-जाता नहीं था और न ही अपने घर में किसी को आमंत्रित करता था."
राम भवन की पत्नी को क्यों मिली फांसी की सज़ा?
राम भवन की पत्नी दुर्गावती एक गृहिणी थी. लेकिन सर्वाइवर्स के अदालत के सामने दिए गए बयानों से पता चला कि दुर्गावती वहाँ मौजूद रहती थी, जहाँ राम भवन वीडियो बनाता था और यौन हिंसा करता था.
सीबीआई और कोर्ट के सामने सर्वाइवर्स में से कुछ ने अपने बयान में बताया कि उनके साथ दुर्गावती भी संबंध बनाती थी.
एक सर्वाइवर ने बयान में बताया, "वह राम भवन के घर दूध देने जाता था और उसके पिता राम भवन के घर लैपटॉप सीखने के लिए भेजते थे. राम भवन बच्चों के साथ ग़लत काम करता था. उसके अन्य चार भाइयों के साथ भी ग़लत काम करते थे और उनका फ़ोटो व वीडियो बनाते थे."
सर्वाइवर ने अपने बयान में यह भी बताया, "जब राम भवन उसके साथ ग़लत काम करते थे तो दुर्गावती वहीं पर रहती थी. उसे राम भवन के सभी ग़लत कामों का पता था. राम भवन अंकल ग़लत काम करने के बदले उसे पैसे और दुर्गावती आंटी खाने को अच्छी-अच्छी चीज़ें देती थी. उनके पास वीडियो गेम प्लेयर, सीडी वाली तीन-चार वीडियो गेम थीं. वह हमें खेलने के लिए देती थी. शर्म और डर के कारण यह बात घर में नहीं बताई थी."
सर्वाइवर्स ने सीबीआई को क्या बताया?

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यह मामला उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर ज़िले का है.
सर्वाइवर्स के बयानों से स्पष्ट है राम भवन बच्चों को लालच देकर उनके साथ यौन हिंसा करता था.
एक सर्वाइवर ने कोर्ट में अपने बयान में बताया, "राम भवन अंकल को मैं जानता हूं. राम भवन ने उसके साथ पहली बार एक फ़ंक्शन में रात में संबंध बनाया था. दुर्गावती आंटी ने जब उनका यौन शोषण किया, वह राम भवन अंकल के कहने पर किया था. संबंध के दौरान अंकल, आंटी और मैं था."
दूसरे सर्वाइवर ने कोर्ट को बताया, "मेरे पिता कोई काम नहीं करते. मम्मी किसानी करती हैं. जिस समय राम भवन अंकल से परिचय हुआ था वो सात किलोमीटर दूर रहते थे. जब राम भवन अंकल ने पहली बार ग़लत काम किया था उसे काफ़ी चोट आई थी."
द लैंसेट पत्रिका में प्रकाशित एक नए वैश्विक अध्ययन के अनुसार, लगभग एक तिहाई भारतीय महिलाओं और 10 में से एक से अधिक भारतीय पुरुषों से 18 साल से कम उम्र में यौन हिंसा हुई.
एक सर्वाइवर की माँ ने क्या बताया?

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हमने एक नाबालिग़ सर्वाइवर की माँ से मुलाक़ात की.
माँ रामभवन के घर में साफ-सफाई और खाना बनाने का काम करती थी. इनके मुताबिक़ जब वह खाना बना रही होती थी तब उसके बच्चे के साथ राम भवन ग़लत काम करता था.
सर्वाइवर की माँ ने बीबीसी हिन्दी को बताया, "मैं उसके (राम भवन) के घर में खाना बनाती थी उसके लिए मुझे हर महीने दो हज़ार रुपए मिलते थे. तीन कमरे का घर किराये पर लिया था. आगे मकान मालिक, पीछे दीदी (दुर्गावती), राम भवन और एक बच्चा रहता था. वो एक ग़रीब परिवार का लड़का था जिसे राम भवन पढ़ाने के लिए साथ रखता था. उस घर में आए दिन नए-नए बच्चे आते थे. वह अपनी साइड से बच्चों को लाता था. एक दिन में चार-चार बच्चे रहते थे. उन्हें महंगी-महंगी मोबाइल दे कर रखता था."
हालाँकि लगातार कोशिशों के बाद भी कुछ दूसरे सर्वाइवर्स के परिजनों से संपर्क नहीं हो पाया.
राम भवन ने अपने बचाव में क्या कहा?
दोषी राम भवन ने अपने बचाव में अपने जीजा राम निरंजन और बहन के बीच विवाद को आधार बनाया है.
उसके अनुसार जब वह जीजा और बहन के बीच विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहा था, तब जीजा उससे नाराज़ हो गए. उसने सीबीआई पर भी जीजा राम निरंजन से मिलीभगत का आरोप लगाया है.
राम भवन ने अदालत में अपने बयान में कहा, "मैंने कभी किसी बच्चे कर साथ कोई ग़लत काम नहीं किया न ही उनकी कोई अश्लील फोटो या वीडियो बनाई है और न ही मैंने इंटरनेट पर इसका प्रसारण किया है. मेरे रिश्तेदार राम निरंजन ने कुछ लोगों के साथ मिलकर मुझे झूठा फँसाया है. बच्चों को डरा धमका कर मेरे ख़िलाफ़ ज़बरदस्ती बयान कराए गए हैं."
वहीं दुर्गावती ने भी कोर्ट में दिए अपने बयान में ननद और उसके पति के विवाद की बात कही है.
उन्होंने कहा, "मेरी सगी ननद रामकुमारी की शादी राम निरंजन के साथ हुई थी. मेरे ननद व ननदोई दोनों अध्यापक हैं. दोनों में अक्सर विवाद होता था. उनके एक लड़की और एक लड़का है. उनके बीच के विवाद सुलझाने के लिए मैं और राम भवन उनके घर जाते थे लेकिन विवाद नहीं सुलझा और हमसे रंजिश मानने लगे. जिस कारण राम निरंजन ने धमकी दिया था कि मेरे पढ़ाए दो बच्चे सीबीआई दिल्ली में कार्यरत हैं. उनसे मिलकर मैं तुम दोनों को जेल भिजवा दूँगा."
पॉक्सो कोर्ट के फ़ैसले का अहम बिंदु

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भारत में बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की यौन गतिविधि को प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ़्रॉम सेक्शुअल ऑफ़ेंसेंज एक्ट, 2012 (पॉक्सो) के तहत दंडनीय अपराध माना जाता है.
इसमें कठोर कारावास से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान (विशेष मामलों में) है.
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत ने इस मामले में पति-पत्नी को समान रूप से दोषी पाया.
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, "राम भवन और दुर्गावती ने अपने किराये के घरों में रहकर यह जघन्य अपराध लगभग 10 साल तक किया. जिससे स्पष्ट होता है कि राम भवन और दुर्गावती ने यौन अपराध को किए जाने के दौरान ऐसी व्यवस्था कर रखी थी, जिससे समाज के लोगों को इस बारे में जानकारी न हो पाए."
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "दोषी राम भवन और दुर्गावती का यह अपराध, रेयर ऑफ़ द रेयरेस्ट अपराध की श्रेणी में आता है और ऐसे अपराध के लिए मृत्यु-दंड से दंडित किया जाना ही भारतीय न्याय प्रणाली में लोगों के विश्वास को क़ायम रख सकता है."
क्या है बचाव पक्ष के वकील की दलील?

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अभियुक्त की ओर से न्यायालय में मौजूद वकील भूरा प्रसाद निषाद से इस मामले को झूठा और सीबीआई की मिलीभगत से रचा गया बताया.
उन्होंने न्यायालय में सीबीआई के सौंपे गए वीडियो और फोटो को डीपफ़ेक और बालकों के बयान को ज़बरदस्ती धमकी दे कर दिलवाया गया बयान बताया.
वकील भूरा प्रसाद ने बीबीसी से कहा, "सीबीआई ने दिल्ली में डायरेक्ट एफ़आईआर दर्ज की, जबकि उसे ऐसा करने का अधिकार नहीं है. पहले केंद्र सरकार में अप्लाई किया जाता है और राज्य सरकार मंज़ूरी देती है. सीबीआई 31 अक्तूबर 2020 को केस दर्ज करती है और 02 नवंबर 2020 को राम भवन को पकड़ लेती है. सीबीआई रिकवरी करती है. इतनी जल्दबाज़ी क्यों?"
उन्होंने यह भी दावा किया कि हाईकोर्ट से उन्हें न्याय मिलेगा.
वकील भूरा प्रसाद ने सीबीआई की ओर से साक्ष्य के रूप में उपलब्ध कराए वीडियोज़ को डीपफ़ेक बताते हुए तर्क दिया, "रामानंद सागर ने 90 के दशक में रामायण सीरियल बनाया था उसमें हनुमान पहाड़ लेकर उड़ रहे थे क्या वास्तव में यह संभव है? अगर नहीं तो इसका मतलब है कि एडिटिंग के माध्यम से कुछ भी किया जा सकता है? इसलिए हमें पूरा विश्वास है कि हाई कोर्ट से हमें न्याय मिलेगा."
सीबीआई के विशेष सरकारी वकील धारा सिंह मीणा ने बचाव पक्ष के वकील के तर्क को नकारते हुए बीबीसी से कहा, "हमें जो वीडियो मिले हमने उसकी फ़ॉरेंसिक जाँच कराई और सभी वीडियो सही पाए गए. उसमें कोई छेड़-छाड़ नहीं हुई है. जहाँ तक रही अभियुक्त के रिश्तेदार राम निरंजन के पढ़ाए बच्चे सीबीआई में हैं, तो इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है. अभियुक्तों ने कहानी बनाई है."
प्रशासन ने अपनी भूमिका पर क्या कहा?

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इतने लंबे समय तक नाबालिग़ बच्चों से यौन हिंसा क्यों होती रही, ये पूछे जाने पर चित्रकूट पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बीबीसी से कहा, "यह प्रकरण 2020 से पहले का है. अभियुक्त यहाँ सरकारी कर्मचारी के रूप में तैनात था. हमारी जानकारी के अनुसार वो वीडियोज़ डार्क वेब पर डालता था."
"इंटरपोल को इसकी जानकारी हुई और उन्होंने सीबीआई के साथ साझा किया. सीबीआई ने विश्लेषण कर अभियोग दर्ज किया और सीबीआई ने ही विवेचना की. जिसके बाद कोर्ट में चार्जशीट भेजी गई. कोर्ट में ढेर सारे गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर इस केस को रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर मानते हुए फांसी की सज़ा सुनाई गई है. आज से पाँच से छह साल पहले ज़िलों में साइबर थाने नहीं थे लेकिन अब साइबर अपराधों में प्रशिक्षण, निगरानी और कार्रवाई हो रही है."
वहीं बांदा पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने बीबीसी से कहा, "इस मामले में सीबीआई की विवेचना हुई है. साक्ष्य संकलन करते हुए पीड़ित बच्चे ज़्यादा मिले हैं. जहाँ तक बात रही पुलिस कार्रवाई की, तो अगर कोई कंप्लेन होता तब हम जाँच करते. बिना कंप्लेन हम कोई प्रोसिडिंग नहीं करते हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.



































