पंजाबः 300 फ़ुट ऊंचे टावर पर 18 महीने तक बिताने वाले गुरजीत सिंह को कैसे उतारा गया

गुरजीत सिंह
इमेज कैप्शन, 43 साल के गुरजीत सिंह 12 अक्तूबर, 2024 से ही एक मोबाइल फ़ोन टावर पर बैठे थे और अब उन्हें नीचे उतार लिया गया है
    • Author, सरबजीत सिंह धालीवाल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

चेतावनी: इस स्टोरी में जो विवरण हैं वो ख़तरनाक प्रकृति के हैं.

"मैं 18 महीने और 12 दिन बाद सुरक्षित रूप से धरती पर लौट आया हूं." ये शब्द पटियाला ज़िले के समाना के खेरी नागियां गांव के गुरजीत सिंह के हैं.

43 साल की उम्र के गुरजीत सिंह 12 अक्तूबर, 2024 से समाना शहर के बीच लगे एक मोबाइल फ़ोन टावर पर बैठे थे. उन्हें शुक्रवार 24 अप्रैल को सुबह लगभग 7.45 बजे टावर से नीचे उतारा गया. वह 'बेअदबी की घटनाओं' से सख़्ती से निपटने के लिए एक सख़्त क़ानून की मांग कर रहे थे.

एक दिन पहले उन्होंने कहा था, "12 अक्तूबर, 2024 से 23 अप्रैल, 2026 तक, मुझे भीषण गर्मी, बारिश, हवा, कड़ाके की ठंड और अन्य कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. लेकिन आज मुझे ख़ुशी है कि मेरी मांग स्वीकार कर ली गई है."

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'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026' को पंजाब विधानसभा में 13 अप्रैल, 2026 को पारित किया गया और 17 अप्रैल को राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद यह क़ानून बन गया.

हालांकि, इस अधिनियम को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है. चुनौती याचिका में कहा गया है कि नया क़ानून धर्मनिरपेक्षता और अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है.

गुरजीत सिंह को टावर से उतारने का काम पटियाला प्रशासन, नागरिक सुरक्षा और भारतीय सेना ने संयुक्त अभियान चलाकर किया.

समाना डीएसपी फतेह सिंह बराड़ ने बीबीसी पंजाबी से कहा था कि गुरजीत सिंह को 24 तारीख़ की सुबह गिरफ़्तार कर लिया जाएगा. अब उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया है.

उन्हें नीचे उतारने वाली टीम के सदस्य दमकलकर्मी कृष्ण कुमार ने कहा, "मैंने उन्हें पकड़ा, रस्सियां खोलीं और पिंजरे में डाल दिया. इसके लिए हम कई दिनों से अभ्यास कर रहे थे."

गुरजीत सिंह को नीचे उतारने के बाद, उन्हें जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया.

गुरजीत ने टावर पर कई महीने कैसे बिताए?

टावर से उतारते गुरजीत सिंह की तस्वीर
इमेज कैप्शन, पटियाला प्रशासन, नागरिक सुरक्षा और भारतीय सेना ने मिलकर अभियान चलाया
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पटियाला ज़िले के समाना शहर के बीच में स्थित चिल्ड्रन पार्क के पास का टावर पिछले 18 महीनों से अधिक समय से चर्चा में है.

पहले यहां लोग इकट्ठा होते थे, लेकिन 24 फ़रवरी को धर्म युद्ध मोर्चा ने समाना के बाबा बंदा सिंह बहादुर चौक पर धरना शुरू किया. टावर से मोर्चे की दूरी लगभग एक किलोमीटर है.

समाना में बाबा बंदा सिंह बहादुर चौक संगरूर और पटियाला ज़िलों को हरियाणा से जोड़ने वाला एक अहम राजमार्ग है.

बीबीसी पंजाबी की टीम ने गुरुवार को दोपहर करीब 2 बजे गुरजीत सिंह से फ़ोन पर संपर्क किया, जो समाना कोर्ट के पास चिल्ड्रन पार्क के ठीक बगल में एक टावर पर बैठे थे.

गुरजीत सिंह ने कहा, "मैंने अतीत में बहुत सारी कठिनाइयों का सामना किया है, लेकिन गुरबानी की मदद से आख़िरकार मुझे जीत मिली है."

गुरजीत सिंह पूर्व सैनिक हैं और अब किसान हैं. उन्होंने बताया कि 12 अक्तूबर, 2024 को जब वह टावर पर पहुंचे, तो शुरुआत में उन्हें काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. ख़ासकर कबूतरों और अन्य पक्षियों ने उन्हें बहुत परेशान किया.

उन्होंने कहा, "100 फ़ुट की ऊंचाई पर चढ़ने के बाद मैंने कुछ देर आराम किया. फिर मैं 200 फ़ुट की ऊंचाई पर पहुंचा और अंत में लगभग 300 फीट की ऊंचाई पर, क्योंकि यह जगह सुरक्षित लग रही थी."

गुरजीत ने बताया कि वह पहले टावर पर बनी जगह पर रुके और फिर धीरे-धीरे नीचे से सामान ऊपर ले गए और इसके बाद टावर पर तंबू लगा दिया.

उन्होंने कहा, "एक पूर्व सैनिक होने के नाते, मैं पानी की छोटी बोतलें, कुछ नाश्ता और अन्य छोटी-मोटी चीजें ले गया था, लेकिन वे जल्द ही सारी चीज़ें ख़त्म हो गईं और पांच दिन बाद प्रशासन ने फिर से कुछ सामान भेजा. वह मेरे लिए पर्याप्त था."

गुरजीत सिंह करीब 18 महीने से इस टावर पर बैठे थे
इमेज कैप्शन, गुरजीत सिंह करीब 18 महीने से इस टावर पर बैठे थे

उन्होंने बताया कि वह रात भर जागते रहते थे और सुबह सूर्योदय होने के बाद सोते रहते थे.

इसका कारण बताते हुए गुरजीत सिंह ने कहा, "मुझे रात में सुरक्षा का ख़तरा महसूस होता था और इसी वजह से एहतियात के तौर पर मैं रात में जागता रहता था और दिन में सुबह 9 बजे तक सोता था."

उन्होंने कहा कि प्रशासन ने उन्हें नीचे उतारने की बहुत कोशिश की, लेकिन ऊंचाई के कारण वे उन तक नहीं पहुंच सके और वह अपनी मांग पर अड़े रहे.

उन्होंने कहा, "मेरा एक परिचित मुझे रोज़ाना नाश्ता, दवाइयां और पानी पहुंचाया करता था, जिससे मुझे समय धीरे-धीरे गुजारने में मदद मिलती थी."

गुरजीत ने कहा, "सबसे मुश्किल समय तेज़ हवाओं और अंधेरे के दौरान होता था क्योंकि उस समय टावर हिलता था, जिससे काफ़ी परेशानी होती थी. इसके अलावा, सर्दियों में कोहरे के कारण दृश्यता बहुत कम होती थी और ठंड भी काफ़ी दिक्कत पैदा करती थी."

उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में कपड़े गीले हो जाते थे और हवा से ही सूखते थे.

उनका कहना है कि वे दिन में केवल एक बार रोटी खाते थे और ज़्यादातर तरल पदार्थों पर ही जीवित रहते थे और उन्हें दैनिक गतिविधियों के लिए बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता था.

गुरजीत ने बताया कि उनके पैर सूज गए हैं और उन्हें कई बीमारियां भी हो गई हैं. फिर भी वह इस बात से खुश हैं कि बेअदबी के ख़िलाफ़ कानून बन गया है.

गुरजीत सिंह के परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटा है. अपनी मां को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वह उनके दिल के सबसे करीब थीं और वह उनसे लगातार बातें करते रहते थे.

टावर पर ज़रूरत का सामान कैसे पहुंचता था?

टावर से उतरने के बाद मीडिया से बात करते गुरजीत सिंह
इमेज कैप्शन, टावर से उतरने के बाद मीडिया से बात करते गुरजीत सिंह

गुरजीत सिंह लगभग 300 फ़ुट ऊंचे टावर पर थे और सबसे बड़ी चुनौती उन्हें प्रतिदिन भोजन और अन्य ज़रूरी सामग्री पहुंचाना था.

गुरजीत सिंह को प्रतिदिन सामान पहुंचाने की ज़िम्मेदारी गुरजंत सिंह नामक एक युवक की थी. गुरजंत सिंह एक निजी कंपनी में टावर लगाने का काम करते थे और इसलिए वह टावरों की ऊंचाई और बारीकियों से भलीभांति परिचित थे.

इसी कारण वह प्रतिदिन दोपहर एक बजे टावर पर चढ़ते और अपने साथ रोटी, कपड़े, दवाइयां और बैटरी सहित आवश्यक सामान ले जाते.

गुरजंत सिंह के अनुसार, "टावर पर गुरजीत सिंह तक पहुंचने में मुझे हर दिन लगभग 40 मिनट लगते थे. हर सौ फ़ुट की ऊंचाई के बाद, मैं बैठ जाता था और आराम करता था और फिर से चढ़ाई शुरू कर देता था."

"गुरजीत सिंह के पास पहुंचने के बाद, मैं कुछ देर आराम करता था और फिर हम बातें करते थे और लगभग चार घंटे बाद मैं नीचे आ जाता था."

गुरजंत सिंह ने कहा कि टावर के पाइप मौसम के अनुसार कभी ठंडे तो कभी गर्म होते हैं, जिसके कारण उनके हाथों की चमड़ी उतर गई है.

उनका कहना है कि बारिश और कोहरे वाले दिनों में टावर पर चढ़ना बहुत मुश्किल होता था.

300 फ़ुट पर टेंट लगाया

गुरजीत सिंह ने टावर पर करीब 300 फ़ुट की ऊंचाई पर टेंट लगाया था
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जब गुरजीत सिंह टावर पर बैठकर अपनी मांग रख रहे थे, तब कुछ लोग नीचे जमा हो गए और उन्होंने सरकार को यह बात बताई. इनमें कुछ टीवी पत्रकार, फ़िल्म जगत के लोग, मनोवैज्ञानिक और किसान नेता शामिल थे.

गुरदासपुर ज़िले के बटाला तालुक के रहने वाले 53 साल के टीवी पत्रकार गुरप्रीत सिंह तालमेल कर रहे थे.

बीबीसी पंजाबी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "24 फ़रवरी को संगत बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन करने के लिए इकट्ठा हुई. शुरुआत में पंजाब सरकार ने दबाने की हर संभव कोशिश की. लेकिन लोगों ने हार नहीं मानी और बाबा बंदा सिंह बहादुर चौक पर विरोध प्रदर्शन करने में सफल रहे."

ग़ौरतलब है कि 13 अप्रैल को विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद, पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान 14 अप्रैल को प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और वहां मौजूद आयोजकों को 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन विधेयक-2026' की एक प्रति सौंपी थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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