ज्ञानेश कुमार के बारे में जानें जिन्हें चुनाव आयोग में मतभेद की ख़बरों के बाद विपक्ष ने घेरा

इमेज स्रोत, ANI
विपक्ष ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ महाभियोग चलाने की अपनी मांग और तेज़ कर दी.
यह मांग 'द इंडियन एक्सप्रेस' की उस रिपोर्ट की पृष्ठभूमि में उठाई गई है, जिसमें बताया गया है कि पिछले साल स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न यानी एसआईआर अभियान के दौरान चुनाव आयुक्तों को कई फ़ैसलों की जानकारी नहीं दी गई थी और दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन फ़ैसलों पर बार-बार आपत्ति जताई थी.
इंडियन एक्सप्रेस की जर्नलिस्ट रितिका चोपड़ा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कई फ़ैसलों पर आपत्ति दर्ज की.
मीडिया रिपोर्ट पर चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा है. आयोग ने कहा कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय, सुझाव और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया है. आयोग ने कहा कि एसआईआर समेत पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम फ़ैसले सर्वसम्मति से हुए हैं.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल ख़ासा चर्चित और विवादों में रहा है. अपने कई फ़ैसलों को लेकर वो विपक्ष के निशाने पर रहे हैं.
आइए जानते हैं, कौन हैं ज्ञानेश कुमार जिन्होंने फ़रवरी 2025 में मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पदभार संभाला था.
जब ज्ञानेश कुमार ने फरवरी 2025 में भारत के 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद संभाला था, तब उनके करियर के विवरण में संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और राम मंदिर न्यास की स्थापना से जुड़ी उनकी भूमिका का प्रमुखता से उल्लेख किया गया था.
कौन हैं ज्ञानेश कुमार
ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं. 31 जनवरी, 2024 को ज्ञानेश कुमार यूनियन कोऑपरेशन सेक्रेटरी के पद से रिटायर हुए थे. केंद्रीय मंत्री अमित शाह के अंतर्गत आने वाले मंत्रालय में वह मई 2022 से सेक्रेटरी थे. इसके दो महीने बाद 14 मार्च, 2024 को इन्हें चुनाव आयुक्त बनाया गया था.
15 मार्च को उन्होंने कार्यभार संभाला और उसके अगले दिन ही चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की थी.
चुनाव आयुक्त का पद संभालने के लगभग एक साल बाद ही उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिया.
उन्होंने इससे पहले पांच साल गृह मंत्रालय में काम किया था, जहां वह मई 2016 से लेकर सितंबर 2018 तक संयुक्त सचिव और उसके बाद सितंबर 2018 से लेकर अप्रैल 2021 तक अतिरिक्त सचिव के पद पर थे.

इमेज स्रोत, ANI
कश्मीर से लेकर राम मंदिर कनेक्शन
अतिरिक्त सचिव के पद पर रहते समय ज्ञानेश कुमार जम्मू-कश्मीर के मामलों को देख रहे थे और अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को रद्द करने की घोषणा की गई थी.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, अनुच्छेद 370 को रद्द करने का क़ानून जब लाया जा रहा था उस समय वह गृह मंत्री अमित शाह के साथ लगातार संसद में आते थे.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, नरेंद्र मोदी सरकार का ज्ञानेश कुमार में एक नौकरशाह के तौर पर भरोसा इस तथ्य से ही पता चलता है कि न केवल उन्हें गोपनीय विधेयकों में से एक जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक को तैयार करने की ज़िम्मेदारी दी गई थी बल्कि वह राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन में भी शामिल थे.
इसी रिपोर्ट के मुताबिक़, कोऑपरेशन सेक्रेटरी के उनके कार्यकाल के दौरान मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ (एमएससीएस) (संशोधन) विधेयक, 2023 पास किया गया था, जिसका लक्ष्य कोऑपरेटिव सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाना था.
ज्ञानेश कुमार के चुनाव आयुक्त रहते हुए लोकसभा चुनाव 2024 हुए और साथ ही अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए. इसके अलावा हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र और दिल्ली में विधानसभा चुनाव हुए.
मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक होगा. उनके कार्यकाल में 20 विधानसभा चुनाव होंगे. साथ ही 2027 में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव और 2029 लोकसभा चुनाव की तैयारी भी उन्हीं के कार्यकाल में होगी.
ज्ञानेश कुमार ने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. उन्होंने इंस्टिट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड फ़ाइनैंशियल एनालिस्ट्स ऑफ़ इंडिया से बिज़नेस फ़ाइनैंस में पढ़ाई भी की है.

इमेज स्रोत, Getty Images
विपक्ष का विरोध
ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किए जाने का मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने विरोध किया था.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा था, ''मोदी सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन के लिए 2023 में जो नया क़ानून 'द चीफ़ इलेक्शन कमिश्नर एंड अदर इलेक्शन कमिश्नर एक्ट' लेकर आई है, इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. अभी तक सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर तीन ऑर्डर पास किए हैं और अगली सुनवाई 19 फ़रवरी को होनी है.''
सिंघवी ने कहा, ''इसलिए मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन को लेकर कांग्रेस का रुख़ बड़ा स्पष्ट है. मुख्य चुनाव आयुक्त के चुनाव से जुड़ी जो बैठक हुई है, उसे स्थगित किया जाए."
"मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट से कहे इसकी सुनवाई जल्दी पूरी करे. इसमें कांग्रेस पूरा समर्थन देगी. मोदी सरकार को अपना अहंकार छोड़कर ये मांग माननी चाहिए.''
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को चयन करने वाले पैनल में प्रधानमंत्री अध्यक्ष होते हैं जबकि इसके एक सदस्य गृह मंत्री अमित शाह और दूसरे सदस्य नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हैं.
हालांकि सरकार ने कांग्रेस की आपत्ति को नज़रअंदाज़ करते हुए बैठक की और ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाने का फ़ैसला कर लिया था.

इमेज स्रोत, ANI
पहली बार नए क़ानून से चयन
ये पहली बार था, जब मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 के तहत हुआ. इससे पहले साल 2024 में ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू को नए क़ानून के तहत चुनाव आयुक्त चुना गया था.
इस नए क़ानून से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सरकार की सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति करते थे. ये नया क़ानून सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के उस फ़ैसले के बाद आया है, जिसमें ये अनिवार्य किया गया था कि चयन पैनल में प्रधानमंत्री, लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश होंगे.
कोर्ट ने कहा था कि ये आदेश तब तक रहेगा जब तक कि संसद इस पर क़ानून न बना दे. केंद्र सरकार ने क़ानून लाकर इस पैनल में मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्रीय मंत्री को जगह दे दी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.




























