एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली इस महिला खिलाड़ी को 'पुरुष' बनकर रहना पड़ा था

शिंशिरो में आयोजित आइची-नागोया एशियाई खेलों की महिला साइकिलिंग रोड रेस में रजत पदक जीतने के बाद फरीबा हाशिमी अफगानिस्तान की दो साथी साइकिल चालकों के बीच खड़ी होकर अपने पदक को काटने का नाटक करती हैं.

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इमेज कैप्शन, हाशिमी (बीच में) 2021 में अफगानिस्तान से भाग गई थीं
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अफ़ग़ानिस्तान की एक महिला साइकिल चालक ने जापान में चल रहे एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीता है. उन्होंने खेल में करियर बनाने के लिए कभी पुरुष का वेष बनाकर ट्रेनिंग ली थी.

फ़रीबा हाशिमी 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद अपना देश छोड़कर चली गई थीं.

वह कहती हैं कि इससे पहले उन्होंने मजबूरी में पुरुष का भेस रखकर प्रशिक्षण लिया था. ऐसा उन्होंने हमले से बचने के लिए किया था. अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं पर कड़े प्रतिबंध हैं.

हाशिमी ने मंगलवार को जापान के नागोया के पास हुई रेस में रजत पदक जीता.

23 साल की हाशिमी रविवार को महिलाओं की व्यक्तिगत टाइम ट्रायल में सातवें स्थान पर रही थीं.

उन्होंने अपने रजत पदक को "बेहद ख़ास" बताया है. उन्हें उम्मीद है कि उनकी यह उपलब्धि अफ़ग़ानिस्तान की दूसरी महिलाओं को भी अपने सपने पूरे करने के लिए प्रेरित करेगी.

उन्होंने कहा, "मेरा जन्म एक ऐसे देश में हुआ है जहां सपने देखने वाली महिलाओं पर हमले होते हैं. मुझे बहुत ख़ुशी है कि मैंने इसके ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी है."

उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि अगली पीढ़ी यहां आएगी और बिना किसी डर के अपने देश का प्रतिनिधित्व करेगी."

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हाशिमी ने अपनी बहन युलदुज के नक़्शेक़दम पर चलते हुए 15 साल की उम्र में साइकिल चलाना शुरू किया. युलदुज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की साइकिल चालक हैं. हालांकि, उनके गृह प्रांत फ़रयाब में साइकिल चलाना ख़तरनाक था.

हाशिमी ने पहले रॉयटर्स को बताया था, "मैं पुरुष बनकर ट्रेनिंग लेती थी. मैं दो या तीन अलग-अलग मास्क पहनती थी, ताकि लोग मुझे पहचान न सकें और मुझ पर हमला न करें."

उन्होंने कहा कि उन्हें डर रहता था कि साइकिल चलाते समय लोग उनकी तरफ़ पत्थर ना फेंके.

इटली की पूर्व विश्व चैंपियन एलेसांद्रा कैपेलोटो की मदद से हाशिमी अब इटली में रहती हैं और वहीं ट्रेनिंग लेती हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में अपने जीवन को याद करते हुए हाशिमी ने कहा कि तालिबान ने "हमारी आज़ादी छीन ली".

उन्होंने कहा, "यह रजत पदक अफ़ग़ान महिलाओं के हौसले को दिखाता है. मैं इससे बहुत ख़ुश हूं."

उन्होंने कहा, "मैं अकेली नहीं हूं. मुझे पता है कि कई देशों की लाखों महिलाएं मेरे पीछे हैं. उनका भी यही सपना है और वे मेरे साथ खड़ी हैं."

हाशिमी और उनकी बहन ने 2024 के पेरिस ओलंपिक में हिस्सा लिया था. अब उनकी नज़रें 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर हैं.

हाशिमी ने कहा, "मैं कभी हार नहीं मानना चाहती. उम्मीद है कि हम लॉस एंजिल्स में फिर देख पाएंगे कि क्या हो सकता है."

हमने इस लेख का अनुवाद करने में एआई की मदद ली है, जिसे मूल रूप से अंग्रेज़ी में लिखा गया था. बीबीसी के एक पत्रकार ने प्रकाशन से पहले इस अनुवाद की जांच की. हम एआई का उपयोग कैसे कर रहे हैं, इसके बारे में और जानें.