तिब्बत में लंगूरों की नई प्रजाति का पता चला

    • Author, मिशेल डगलस
    • पदनाम, बीबीसी अर्थ
  • प्रकाशित

तिब्बत के घने जंगलों में मैकाक लंगूर की नई प्रजाति का पता चला है. इन तस्वीरों को जंगल में पहले से ही लगाए गए कैमरों की मदद से लिया है.

इसमें कुछ तस्वीरें हाथ से ऑपरेट किए कैमरों से भी ली गई हैं.

इन तस्वीरों में लंगूरों के बीच आपसी प्यार और उनके बीच की आत्मीयता सहज ढंग से जाहिर होती है.

इन तस्वीरों से ये भी पता चलता है कि ये लंगूर बढ़े होते समय एक दूसरे को काफ़ी मदद करते हैं.

विशेषज्ञ इन लंगूर को सफेद कपोल वाले लंगूर कह रहे हैं, जबकि पहले इनकी पहचान असम के लंगूर के तौर पर की गई थी.

अब चीन के विशेषज्ञों के मुताबिक अपने ख़ास गुणों के चलते ये लंगूर अलग प्रजाति के हक़दार हैं.

सैकड़ों तस्वीरों और उसकी रिकॉर्डिंग के आधार पर इन लंगूरों के बारे में अमरीकी जर्नल ऑफ़ प्राइमटोलॉजी में शोध प्रकाशित हुआ है.

इस रिपोर्ट के लेखक और चीन के यूनान प्रांत के डाली यूनिवर्सिटी के डॉ. पेंग फ़ेई फ़न ने कहा, "फिक्स किए गए कैमरे के आधार पर हमें कुछ बेहतरीन तस्वीरें मिलीं. इन तस्वीरों में उनके ख़ास गुणों का पता चलता है, यही वजह है कि उन्हें नई प्रजाति माना जा सकता है."

पेड़ों में फिक्स किए गए कैमरों के जरिए इन लंगूरों की 738 तस्वीरों का अध्ययन किया गया है.

इस नई प्रजाति के लंगूरों की ख़ास तरह की सफेद मूछें होती हैं जिसके आधार पर ही इन्हें नया नाम दिया गया है.

उम्र बढ़ने के साथ इन लंगूरों की मूछें बढ़ती है. व्यस्क लंगूरों में ये बाल उनके कान को ढक लेते हैं और उनका चेहरा भी बालों से भर जाता है.

इसके अलावा इन लंगूरों के गले में मोटे-मोटे बाल होते हैं. इसके अलावा बालरहित पूंछ भी होती है. नर लंगूरों के पास तीर के आकार का जननांग होता है.

इतना ही नहीं ख़तरा भांपने पर ये अपने साथी को तेज़ आवाज़ में चिल्ला कर संकेत देते हैं.

रिसर्च टीम में शामिल चेंग ली ने पहली बार इन लंगूरों के चीखने की आवाज़ें 2012 में सुनी थीं.

इसके बाद इन लंगूरों पर नज़र रखने के लिए 31 कैमरे लगाए गए. इन कैमरों के पास से किसी जानवर के गुजरने के दौरान इंफ्रारेड मोशन के चलते कैमरा जानवर की तस्वीर ले लेता और 15 सेकेंड का वीडियो भी तैयार कर लेता था.

एक अलग दौरे के दौरान डॉ. फ़ेन और उनके साथियों ने नदी के किनारे स्थित इन लंगूरों की साधारण कैमरों से भी तस्वीरें उतारीं.

डॉ. फ़ेन कहते हैं, "इनकी खोज हमारे लिए बड़ी उपलब्धि है."

फ़ेन के मुताबिक अभी इन लंगूरों के दल के अलग अस्तित्व के बारे में दूसरे वैज्ञानिक दल भी आकेंगे. क्योंकि इनके एकदम अलग होने के पक्के सबूत नहीं मिले हैं.

ये लंगूर देखने में फ़ोटोजेनिक हैं और ऊंचाई पर स्थित सदाबहार जंगलों में रहना पसंद करते हैं. वैसे जंगलों के बड़े पैमाने पर काटे जाने से इस प्रजाति के अस्तित्व पर संकट बढ़ सकता है.

<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/earth/story/20150408-amazing-images-reveal-new-macaque" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी अर्थ</caption><url href="http://www.bbc.com/earth" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>

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