दलितों की पिटाई मामले में 16 गिरफ़्तार

आनंदीबेन पटेल
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गुजरात में कथित गौ-रक्षकों के हाथों दलित युवकों की पिटाई का मुद्दा तूल पकड़ रहा है.

इससे पहले मंगलवार को राजकोट ज़िले के गोंडल में प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम कार्यालय के बाहर मरी हुई गायें फेंक कर विरोध प्रदर्शन किया.

स्थानीय पत्रकार प्रशांत दयाल के अनुसार प्रदेश में विभिन्न विरोध प्रदर्शनों के दौरान पांच लोगों ने ज़हर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की जबकि अमरेली में दोपहर एक रैली के दौरान पथराव में घायल एक हेड कांस्टेबल की मौत हो गई.

इससे पहले सोमवार को सात लोगों ने ज़हर खाकर आत्महत्या की कोशिश की थी.

इस बीच सात और अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया गया है. मामले में अब तक 16 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं. ये जानकारी खुद आनंदीबेन पटेल ने अपने ट्विटर हैंडल से दी है.

गुजरात दलित

इन पर अपहरण, बंधक बनाने और एसएसी एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए हैं.

दलित संगठनों ने गोंडल, राजकोट, जूनागढ़, अमरेली आदि शहरों में बुधवार को बंद का आह्वान किया है.

विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सौराष्ट्र क्षेत्र में राज्य परिवहन विभाग की आधी बसों को रोक लिया गया है.

सोमवार तक प्रदेश के दो ज़िलों में प्रदर्शन हुए थे जबकि मंगलवार को इनकी संख्या पांच तक पहुंच गई.

गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने ट्वीट कर 'दलित युवाओं से हताशा में आत्महत्या जैसी कोशिशें न करने' की अपील की है.

गुजरात दलित

पुलिस के अनुसार, पिछले सप्ताह चमड़ा उद्योग से जुड़े चार युवकों को एक कार से बांधकर गो रक्षकों ने पिटाई की थी और इसके बाद इसका वीडियो ऑनलाइन पोस्ट कर दिया था.

इसके बाद पूरे देश में गुस्से की लहर दौड़ गई. सोशल मीडिया पर इसकी कड़ी निंदा की गई.

बढ़ते गुस्से को देखते हुए राज्य सरकार ने सीआईडी जांच कराने के आदेश दिए हैं और युवकों के इलाज़ का खर्च उठाने का वादा किया है.

मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है, "मामले की जल्द सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत का गठन किया जाएगा."

मुख्यमंत्री ने कहा है कि हर पीड़ित को एक लाख रुपये देने का फैसला हुआ है. पीड़ितों के साथ हमारा पूरा समर्थन है.

सोशल मीडिया पर लोग पीड़ितों को 50 लाख मुआवज़ा देने और सरकारी नौकरी देने की मांग कर रहे हैं.