जयललिता पर शशिकला का कितना प्रभाव है?

ससिकला
    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

तमिलनाडु में वीके शशिकला को जयललिता का साया कहा जाता है. उन्हें देश की सबसे ताकतवर महिला नेताओं में से एक और मुख्यमंत्री जयराम जयललिता के पीछे की ताकत कहा जाता है.

क़रीब तीन दशक पहले एक वीडियो पार्लर चलाने वाली शशिकला आज जयललिता के समान ताकतवर मानी जाती हैं और इनकी पार्टी में एक अहम जगह है.

ससिकला

ऐसा माना जाता है कि शशिकला ही 'एआईएडीएमके' पार्टी के सभी मामले देखती हैं और क्योंकि ये पार्टी तमिलनाडु में सरकार में है तो इसके मायने हैं कि एक प्रकार से वो सरकार के कामकाज पर भी नज़र रखती हैं.

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ज्ञानी शंकरन ने बीबीसी को बताया, "ज़्यादातर लोग मानते हैं कि वो अब भी राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं और पार्टी को चलाने में जयललिता को सहयोग देती हैं. अमूमन पार्टी में जो भी जयललिता के वफ़ादार हैं, वो शशिकला के भी वफ़ादार माने जाते हैं. मोटे तौर पर उन्हें 'जयललिता की आंखें' कहा जा सकता है."

ससिकला और जयललिता

एक और वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक मालन बताते हैं, "शशिकला कभी भी राजनीति या निजी ज़िन्दगी को लेकर खुलकर सामने नहीं आईं हैं, लेकिन एक साये की तरह वो जयललिता के साथ हर जगह रहती हैं. हालांकि ये कहना मुश्किल है कि उनका जयललिता पर कितना प्रभाव है और किसकी बात को अंतिम माना जाता है."

इन चुनावों में एआईएडीएमके ने अपने कुछ प्रत्याशी बदले. मालन बताते हैं, "जयललिता ने क़रीब 18 से 20 बार पार्टी प्रत्याशियों की सूची में बदलाव किए. अनुमान लगाया जा रहा है कि इसके पीछे एक कारण शशिकला का प्रत्याशियों को बदलना है... वो ही अदृश्य ताक़त हैं."

ससिकला और जयललिता

ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के चेन्नई में मौजूद निदेशक एन सथियामूर्ति कहते हैं, "तांसी केस और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में प्रशासन से लेकर पार्टी के मामलों में उनका हस्तक्षेप साफ़ दिखता है. फ़ैसले लेने के मामले में वो जयललिता के लिए आखिरी द्वारपाल हैं."

शशिकला पहली बार जयललिता के संपर्क में उस वक़्त आईं जब जयललिता एमजी रामाचंद्रन के मुख्यमंत्री रहते हुए पार्टी की प्रचार सचिव थीं.

सरकार में पीआरओ रहे शशिकला के पति एम नटराजन ने आईएएस अधिकारी चंद्रलेखा की मदद से उनकी जयललिता से मुलाकात कराई.

एमजीआर और जयललिता

कहा जाता है कि एमजीआर की मौत के बाद जब जयललिता को पार्टी में दरकिनार कर दिया गया, तब शशिकला उनके क़रीब आईं.

ये नज़दीकियां इतनी बढ़ीं कि शशिकला जयललिता के साथ रहने उनके पोएस गार्डन घर में चली गईं. जल्द ही उनकी बहन, बहनोई और बच्चे भी वहां रहने आ गए. बाद में शशिकला के एक भतीजे को जयललिता ने गोद ले लिया.

अपने इसी गोद लिए बेटे की आलीशान शादी ने उन्हें मीडिया और आयकर विभाग के शक के दायरे में ला खड़ा किया. बाद में उन्होंने इस बेटे से दूरियां बना ली थीं.

आय से अधिक संपत्ति के मामले में जयललिता पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप 1991-96 के दौरान के हैं, जब वो मुख्यमंत्री थीं.

ससिकला और जयललिता

बाद में जब जयललिता की चुनाव में हार हुई तो शशिकला और उनके रिश्तेदारों को घर छोड़ने के लिए कहा गया.

कुछ समय बाद शशिकला वापस पोएस गार्डन लौट आईं, लेकिन अब चीज़ें पहले जैसी नहीं रहीं.

2011 में जयललिता ने शशिकला को इस संदेह पर अपने घर से निकाल दिया कि उनके रिश्तेदार पार्टी की बागडोर अपने हाथों में लेने की साज़िश रच रहे थे.

सथियामूर्ति कहते हैं, "समय-समय पर दोनों के रिश्तों में कुछ दूरियां आईं, लेकिन ज़्यादातर दोनों के रिश्ते काफ़ी अच्छे रहे हैं. जयललिता के बाद शशिकला ही हैं जो पार्टी के लिए नीति निर्धारित करती हैं."

नीति बनाने का तरीका और संवाद के तरीकों ने शशिकला को अदृश्य ताक़त बना दिया है.

ससिकला

मलान कहते हैं, "शशिकला पार्टी और सरकार में किसी पद पर नहीं हैं. लेकिन ये बात किसी से छुपी नहीं है कि वो बेहद ताकतवर हैं."

यही कारण है कि उन पर आरोप लगते रहे हैं कि वो जयललिता को सीमित जानकारी मुहैया कराती हैं.

सथियामूर्ति कहते हैं, "जयललिता के बाद पार्टी की नीतियों को लेकर निर्णय लेने के मामले में वो सबसे प्रमुख आवाज़ हैं. लेकिन कहा जाता है कि वो कभी भी ख़ुद से या जयललिता की जानकारी के बगैर कोई आदेश जारी नहीं करती हैं."

ससिकला और जयललिता

तो क्या शशिकला के ताक़तवर थेवर समुदाय से आने के कारण पार्टी को इस समुदाय का समर्थन मिलता है?

सथियामूर्ति कहते हैं कि ये सही नहीं है. उनके मुताबिक़ "थेवर समुदाय ऐतिहासिक तौर पर कांग्रेस विरोधी रहा है. वो पहले डीएमके को समर्थन देता था और बाद में जब एआईएडीएमके गठित हुआ तो उनकी वफ़ादारी एआईएडीएमके के प्रति हो गई. ये महज़ एक संयोग है कि शशिकला भी इसी समुदाय से आती हैं."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml " platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi " platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)