'सहिष्णुता है तो अनुपम जैसे आमिर को भी बोलने का हक़ हो'

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- Author, पंकज प्रियदर्शी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पुरस्कार समारोह के दौरान आमिर ख़ान ने कहा कि वे देश के माहौल को लेकर चिंतित हैं.
उन्होंने ये भी कहा कि एक बार तो उनकी पत्नी किरण राव ने देश छोड़ने की सलाह दे डाली थी. इस पर सोशल मीडिया में आमिर के समर्थन में और उनका विरोध करते हुए बहस छिड़ गई है.
वरिष्ठ पत्रकार सीमा चिश्ती का कहना है कि आमिर ख़ान की राय को लेकर लोगों में विभाजन भारतीय समाज की खुबसूरती को दर्शाता है.

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बीबीसी से बातचीत में सीमा चिश्ती ने कहा कि जब कोई भी मसला उठता है तो उसके समर्थन में और इसके विरोध में लोग बोलते हैं.
सीमा चिश्ती के अनुसार आमिर खान के जिस बयान को लेकर विवाद हुआ, उस दौरान उन्होंने हर सवाल का दो टूक जवाब दिया.
आमिर ने बातचीत के दौरान राजनीतिज्ञों का भी ज़िक्र किया और कहा, "बीजेपी असहिष्णुता के मसले पर 1984 की बात करती है. जो चीज़ पहले हो चुकी है उसका दोबारा होना ग़लत है."

असहिष्णुता और देश में माहौल पर कई लोग आरोप लगा रहे हैं कि यह बीजेपी की सरकार को बदनाम करने की साज़िश है.
इस पर सीमा चिश्ती की राय है, "ऐसे मुद्दों पर राजनीति तो होती ही है. गुलज़ार साहब ने कहा था कि लेखक भी थोड़ा-बहुत राजनीतिक रवैया अपनाते ही हैं, भले ही उनका किसी राजनीति दल से कोई संबंध हो या न हो."
उनके मुताबिक़ "दादरी की घटना हो या दिल्ली के पास ही दो दलित बच्चे का जल जाना हो, किसी घटना का होना या ज़्यादा होना मसला नहीं है. सवाल यह है कि इन घटनाओं पर सरकारों का रवैया क्या है?"

सीमा चिश्ती का कहना है, "जब सरकारें इन घटनाओं को नज़रअंदाज़ करती हैं या उनकी राय उत्तेजित भीड़ से मेल खाने लगती है, तो वह ख़तरे की घंटी होती है."
सोशल मीडिया पर तीख़ी प्रतिक्रिया के बारे में सीमा चिश्ती का मानना है, "लोगों को हर तरह की बात करने का अधिकार होना चाहिए. अगर देश में सहिष्णुता पहले जितनी ही है, तो आमिर को भी अपनी बात रखने का वैसा ही अधिकार होना चाहिए जैसा अमुपम खेर को अपनी बात रखने का है."
(वरिष्ठ पत्रकार सीमा चिश्ती का बीबीसी संवाददाता पंकज प्रियदर्शी से साथ बातचीत पर आधारित)
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