लोकसभा में नहीं पास हुआ 131वां संविधान संशोधन विधेयक, सरकार बोली-महिलाओं को अधिकार दिलाकर रहेंगे

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

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इमेज कैप्शन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सदन में महिला आरक्षण क़ानून में संशोधन बिल पर वोटिंग के दौरान नतीज़ों का एलान करते हुए
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लोकसभा में शुक्रवार को महिला आरक्षण क़ानून में संशोधन बिल (131वां) वोटिंग के बाद गिर गया.

एनडीए बिल के पक्ष में दो तिहाई वोट हासिल करने में नाकाम रहा.

बिल के पक्ष में 298 वोट मिले जबकि इसके विरोध में 230 वोट मिले.

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बाकी दोनों संशोधन बिलों को आगे नहीं बढ़ाने का फ़ैसला किया गया है.

संसद में महिलाओं को 33 फ़ीसदी आरक्षण देने वाले क़ानून में संशोधन और डीलिमिटेशन से जुड़े बिलों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच बहस के बाद गृह मंत्री ने अमित शाह ने जवाब दिया और फिर इस पर वोटिंग हुई.

केंद्र सरकार के कानून मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक़, महिला आरक्षण अधिनियम 2023 गुरुवार (16 अप्रैल 2026) से लागू हो चुका था.

इस क़ानून में संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है.

लेकिन सरकार के प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026 में कहा गया है कि सीटों में आरक्षण डीलिमिटेशन के आधार पर लागू होगा.

जबकि सरकार के इस कदम का विरोध करने वालों का कहना था कि 33 फ़ीसदी आरक्षण लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों पर ही देना चाहिए ना कि डीलिमिटेशन के आधार पर बढ़ाई गई सीटों पर.

अमित शाह बोले-विपक्ष महिला आरक्षण के ख़िलाफ़

पीएम नरेंद्र मोदी

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इमेज कैप्शन, संसद में महिला आरक्षण क़ानून पर संशोधन बिल पर बहस के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी
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इससे पहले महिला आरक्षण में संविधान संशोधन पर बहस के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के ख़िलाफ़ है.

उन्होंने कहा, ''इंडी अलायंस के सभी सदस्यों ने अगर-मगर, किंतु-परंतु लगाकर स्पष्ट रूप से महिला आरक्षण का विरोध किया है.''

''कई जगह ऐसा दिखाई पड़ा कि विरोध हमारे दृष्टिकोण की जगह हमारे लागू करने के तरीके पर है.''

''देश की जनता के सामने साफ़ करना चाहता हूं. ये विरोध लागू करने के तरीके का नहीं है सिर्फ़ महिला आरक्षण का ही विरोध है. बिल के तत्वों का विरोध है. तरीके का नहीं.''

अमित शाह ने बिल के विरोध पर कहा, ''कई जगह ऐसा दिखाई पड़ा कि विरोध हमारे दृष्टिकोण की जगह हमारे लागू करने के तरीके पर है.''

''देश की जनता के सामने साफ़ करना चाहता हूं. ये विरोध लागू करने के तरीके का नहीं है सिर्फ़ महिला आरक्षण का ही विरोध है. बिल के तत्वों का विरोध है. तरीके का नहीं.''

अमित शाह ने कहा, ''बिल का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण है. किसी-किसी संसदीय क्षेत्र में 39 लाख वोटर हैं. ऐसे में एक सांसद कैसे इतने लोगों पर ध्यान देगा.''

''जो सीटें बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं, वह ये ध्यान में रखें कि एससी-एसटी की सीटें बढ़ाने का भी विरोध कर रहे हैं. संविधान में परिसीमन का प्रावधान है.''

उन्होंने कहा, "कुछ लोग उत्तर-दक्षिण नैरेटिव गढ़ रहे हैं. वो कह रहे हैं कि दक्षिण भारत की सीटें कम हो जाएंगी. जितना संसद पर किसी और हिस्से का अधिकार है उतना ही दक्षिण भारत का. ये लोग बेकार का नैरेटिव फैला रहे हैं.''

किरेन रिजिजू

अमित शाह ने बहस का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस ने एक प्रस्ताव पारित किया,जिससे महिला आरक्षण 2029 के बाद लागू हो.

लेकिन ये आरक्षण 2029 से पहले ही लागू होगा.

उन्होंने कहा, ''विपक्ष के सदस्य यहां हल्ला-हंगामा से बच जाएंगे. लेकिन माता-बहनों के आक्रोश से नहीं बच जाएंगे. जब चुनाव के मैदान में जाएंगे तो रास्ता नहीं मिलेगा.''

उन्होंने कहा, इंडी अलायंस के लोग मुस्लिम आरक्षण की मांग उठा रहे हैं. मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं.''

''जबकि संविधान में धर्म के आधार धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं मिल सकता.''

अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने ओबीसी के साथ भी धोखा किया.

उन्होंने कहा, ''चौधरी चरण सिंह और सीताराम केसरी को कांग्रेस ने काम पूरा नहीं करने दिया.1957 में ओबीसी के लिए आरक्षण के लिए काका कालेलकर कमेटी के सुझावों को ठंडे बस्ते में डाल दिया.''

'' 1980 में मंडल आयोग के सुझावों को ठंडे बस्ते में डाल दिया. वीपी. सिंह के समय मंडल आयोग की सिफारिशें लागू हुईं.''

उन्होंने कहा, "राजीव गांधी ने अपना लंबा भाषण मंडल आयोग के विरोध में दिया। 1951 और 1971 में जाति जनगणना का विरोध किया. अब कांग्रेस हार रही है. कांग्रेस ने एक भी पिछड़ा पीएम नहीं दिया. बीजेपी ने मोदी अति पिछड़ा वर्ग के नेता नरेंद्र मोदी को पीएम बनाया.''

'' नरेंद्र मोदी सरकार में 27 मंत्री ओबीसी समुदाय के हैं जो कुल मंत्रियों के 40 फी़सदी हैं.ओबीसी कमीशन को संवैधानिक मंजूरी दी.''

राहुल गांधी बोले, 'महिला आरक्षण बिल एससी-एसटी, ओबीसी के ख़िलाफ़''

राहुल गांधी

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इमेज कैप्शन, महिला आरक्षण क़ानून में संशोधन के लिए लाए गए संशोधन बिल पर बहस के दौरान बोलते हुए राहुल गांधी

लोकसभा में महिला आरक्षण क़ानून और परिसीमन आयोग से जुड़े बिलों पर लोकसभा में वोटिंग से पहले बहस के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा पहला सच तो ये है कि ये महिला आरक्षण बिल नहीं है.

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल तो 2023 में पारित हो चुका. ये बिल देश का चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश है. यह बिल एससी-एसटी और ओबीसी के खिलाफ है, उनके अधिकार छीनने का एजेंडा है.

राहुल गांधी ने कहा, '' सरकार डरी हुई है. ये काम असम और जम्मू-कश्मीर में कर चुके हैं, अब सरकार यही पूरे देश में करना चाहती है.''

उन्होंने कहा, "इस बिल का महिला सशक्तिकरण से कोई मतलब नहीं है. आप सत्ता हथियाने की कोशिश में हैं. ये बिल राष्ट्रविरोधी है. हम सरकार को ये नहीं करने देंगे. दक्षिण और उत्तर भारत के साथ भेदभाव हो रहा है. दलित और आदिवासी की भागीदारी कम हो रही है.''

राहुल गांधी ने कहा, "महिलाएं हमारी राष्ट्रीय कल्पना की प्रेरक शक्ति हैं. हम सभी अपनी जिंदगी में महिलाओं से बहुत कुछ सीखा है, प्रभावित हुए हैं और उनसे बहुत ज्ञान हासिल किया है."

गांधी ने इसके बाद अपने जीवन से एक क़िस्सा सुनाया जो कुछ यूं था -

'मेरे पैरेंट्स डिनर के लिए गए थे. इसी दौरान मेरी दादी मुझे साथ लेकर गईं और एक अंधेरे गार्डन में मुझे छोड़ दिया फिर वह चली गईं. मुझे दूर से ही उनकी साड़ी दिख रही थी, लेकिन अंधेरे में मेरी तो हवा निकल गई. वह पूरा वाकया दो से तीन मिनट का ही था, लेकिन मेरे लिए तो दो घंटे के बराबर था. फिर मैंने देखा कि मेरी दादी आ रही हैं. उन्होंने पूछा कि मैं किस बात से डर रहा था? मैंने कहा कि मैं उस डॉग से डर रहा था, जिसके बारे में पता तक नहीं कि वह आकर काट लेगा. मुझे उन चीजों से भी डर लग रहा था, जो वहां था ही नहीं. इस पर दादी ने कहा कि तुम्हें अंधेरे से या किसी अन्य चीज से डर नहीं लग रहा था. डर तो वास्तव में तुम्हारे दिमाग के अंदर था.'

राहुल गांधी ने कहा, ''यह सरकार भी ऐसे ही डरी हुई है. यह सरकार अंधेरे में जाना ही नहीं चाहती यानी समस्याओं से बच रही है. अगर आप समाधान चाहते हैं तो समस्याओं के पार जाना होगा.''

'जादूगर' शब्द पर हंगामा

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू

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इमेज कैप्शन, केंद्रीय किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के 'जादूगर' शब्द पर विरोध जताया

राहुल गांधी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'मैजिशियन' यानी 'जादूगर' कहा. इसके बाद सत्ता पक्ष ने उनके इस बयान का कड़ा विरोध किया और माफ़ी की मांग की.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान कहा, "सर सच्चाई ये है कि जादूगर पकड़ा गया है. बालाकोट का जादूगर, नोटबंदी का जादूगर, (ऑपरेशन) सिंदूर का जादूगर अचानक से पकड़ा गया. क्योंकि..."

इसके आगे राहुल गांधी कुछ बोलते कि लोकसभा में हंगामा हो गया. सत्ता पक्ष ने उनके बयानों का कड़ा विरोध किया.

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बीच में खड़े होकर कहा, "बार-बार हमने राहुल गांधी जी से अनुरोध किया कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते आप बोलिए मगर नियम से बोलिए. ये इस देश के 140 करोड़ लोगों के चुने हुए प्रधानमंत्री को अनाप-शनाप बोलकर क्या साबित करना चाहते हैं?"

उन्होंने कहा, "हम लोग उम्मीद करते हैं कि राहुल गांधी मेच्योर हो गए हैं. अफ़सोस की बात है कि नेता प्रतिपक्ष क्या भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं."

इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खड़े होकर राहुल गांधी के बयान का कड़ा विरोध किया.

राजनाथ सिंह ने कहा, "इस देश के प्रधानमंत्री के संबंध में जिस प्रकार के शब्दों का प्रयोग नेता प्रतिपक्ष के द्वारा किया जा रहा है, मैं समझता हूं कि ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. इसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है."

उन्होंने कहा, "इस देश की जनता ने उन्हें प्रधानमंत्री बनाया है... ये बार-बार मैजिशियन कहकर किसी व्यक्ति का अपमान नहीं कर रहे हैं, ये देश की जनता का अपमान कर रहे हैं."

"मैं अनुरोध करता हूं कि जिन शब्दों का इन्होंने इस्तेमाल किया उन्हें सदन की कार्यवाही से बाहर निकाला जाना चाहिए और राहुल गांधी को देशवासियों से क्षमा मांगनी चाहिए."

निशिकांत दुबे और अखिलेश यादव के बीच बहस

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव

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इमेज कैप्शन, अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि यूपी के कन्नौज में एक मंदिर से उनके निकलने के बाद उसे धुलवाया गया था

संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि बीजेपी समाज के सभी वर्गों के साथ समानता के सिद्धांत पर काम करती है।

उन्होंने कहा, '' हमारे यहां अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति , फारवर्ड और बैकवर्ड सभी सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है।

निशिकांत दुबे ने कहा, ''बीजेपी बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग के कल्याण के लिए काम करती है.''

निशिकांत दुबे ने ये कहते हुए एक श्लोक पढ़ा. उन्होंने इसके बारे में कहा कि इसमें सभी की समानता की बात कही गई थी.

बीजेपी के निशिकांत यादव

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इमेज कैप्शन, बीजेपी के निशिकांत यादव ने कहा कि बीजेपी जाति जनगणना की पहल करने में आगे रही है

इस पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव उठे और कहा, '' हम विवाद की नहीं, संवाद की बात कर रहे हैं. मैं कन्नौज में एक मंदिर में गया था, मेरे लौटने के बाद वह गंगाजल से धुलवाया गया. इस पर आप क्या कहेंगे.''

इस पर निशिकांत दुबे ने कहा, ''जिसने भी धुलवाया, वह गलत है. धुलवाने वाला अपराधी है. उसको कानून के हिसाब से सजा मिलनी चाहिए.''

समाजवादी पार्टी की ही प्रिया सरोज ने कहा, '' हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं. हम इसकी अप्रोच के खिलाफ हैं. बिना डेलिमिटेशन के लागू कीजिए और तुरंत आरक्षण दीजिए.'

प्रिया सरोज ने कहा, "पुराने आंकड़ों से नया इतिहास नहीं लिखा जाता। 2011 की जनगणना के आधार पर नया परिसीमन की बात है और परिसीमन का अधिकार भी सरकार को दे दिया गया है. पहले जनगणना के बाद परिसीमन अनिवार्य होता था. अब सरकार जब चाहे, परिसीमन करा सकते हैं.''

दक्षिणी राज्यों के महत्वहीन होने की जताई आशंका

शशि थरूर

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इमेज कैप्शन, शशि थरूर ने डीलिमिटेशन को इतिहास के सबसे विवादित प्रक्रियाओं में से एक बताया

इससे पहले केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने महिला आरक्षण को परिसीमन से बांध देने की आशंका ज़ाहिर की.

थरूर ने डीलिमिटेशन कराए जाने से संघीय ढांचे के प्रभावित होने की बात कही.

इससे पहले डीएमके सांसद कनिमोझी ने भी संघीय ढांचे पर ख़तरे को लेकर आशंका जताई.

लोकसभा में जारी बहस में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि सरकार नोटबंदी की तरह ही डीलिमिटेशन में जल्दबाज़ी कर रही है.

महिला आरक्षण को लेकर कहा कि दशकों तक इस पर बात होती रही लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी, "आज यह स्थिति पैदा हो गई है कि सभी पार्टियां इस पर एकमत है. रस्म अदायगी का युग समाप्त हो गया है और समान साझेदारी का समय आ गया है."

लेकिन उन्होंने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना को जटिलता बढ़ाने वाला बताया और इसे इतिहास की सबसे विवादित प्रक्रियाओं में से एक बताया.

थरूर ने कहा, "प्रधानमंत्री कहते हैं कि सरकार ने नारी शक्ति को इंसाफ़ का तोहफ़ा दिया है. लेकिन इसे कांटेदार तार में लपेट दिया है और महिला आरक्षण को संसद के विस्तार के साथ 2021 की जनगणना के आंकड़ों और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ दिया गया है."

उन्होंने परिसीमन से संघीय ढांचे के प्रभावित होने की आशंका जताई.

शशि थरूर

उन्होंने कहा, "दरअसल भारतीय महिलाओं की आकांक्षाओं को हमारे इतिहास की सबसे विवादित राजनीतिक प्रक्रियाओं में से एक के साथ बंधक बनाना है. भविष्य में होने वाले परिसीमन में वे राज्य, जो जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने में विफल रहे हैं, उन्हें अधिक राजनीतिक महत्व मिलेगा. हमें खुद से पूछना चाहिए कि क्या हम यही संदेश देना चाहते हैं कि बेहतर शासन का परिणाम राजनीतिक महत्वहीनता हो?"

"आपने परिसीमन का प्रस्ताव इतनी जल्दबाज़ी में रखा है, जैसी जल्दबाज़ी आपने नोटबंदी के समय दिखाई थी. दुर्भाग्य से, हम सभी जानते हैं कि उससे देश को कितना नुक़सान हुआ. परिसीमन, राजनीतिक नोटबंदी साबित होगा. इसे मत कीजिए..."

उन्होंने कहा, ''डीलिमिटेशन उन राज्यों को हाशिए पर डाल देंगे जो देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं.

थरूर ने एक और चिंता ज़ाहिर की कि लोकसभा का आकार बढ़ने से राज्य सभा के साथ उसका संतुलन बिगड़ जाएगा और संयुक्त बैठक में उनकी अहमियत क्या होगी.

उन्होंने कहा कि अगर राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व है तो आप समझ सकते हैं कि राज्यों की क्या हालत होगी.

विशेष सत्र पर उठाए सवाल

डीएमके सांसद कनिमोझी

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इमेज कैप्शन, डीएमके सांसद कनिमोझी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने डीलिमिटेशन (परिसीमन) बिल की टाइमिंग और महिला आरक्षण को इससे जोड़ने पर सवाल उठाया.

साथ ही उन्होंने महिला आरक्षण मुद्दे पर बहस के बीच गुरुवार रात में इस बारे में अधिसूचना जारी करने पर भी सवाल खड़ा किया.

उन्होंने कहा, "जब महिला आरक्षण मुद्दे पर संसद में बहस हो रही है तो कल रात में इसे अधिसूचित करने का क्या मतलब है?"

कनिमोझी ने इसे 'ट्रैप' कहा जबकि दक्षिण राज्यों के अन्य विपक्षी सांसदों ने प्रतिनिधित्व घटने की आशंका ज़ाहिर की है.

प्रियंका गांधी

कनिमोझी ने कहा कि 'चुनावों में खलल डालने के लिए इस विशेष सत्र में तीन बिल लाए गए.'

उन्होंने कहा, "बीजेपी की सरकार 2014 में आई थी तब तमाम विपक्षी पार्टियों ने महिला आरक्षण बिल लाने के लिए लिखा था. तब इसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया."

सरकार की क्या है दलील

बिल पर बहस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधा

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इमेज कैप्शन, बिल पर बहस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधा

लोकसभा में चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "मैं ज़िम्मेदारी से कहना चाहता हूँ कि निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगी. किसी के साथ अन्याय नहीं होगा."

"पहले जो परिसीमन हुआ है और जो अनुपात पहले से चला आ रहा है, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा. उसी के अनुसार परिसीमन होगा."

उन्होंने कहा, "अगर गारंटी चाहिए, तो मैं गारंटी भी देता हूँ."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल के पक्ष में बोलते हुए कहा, "जो इस बिल का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी क़ीमत चुकानी पड़ेगी."

उन्होंने कहा, "अब देश की बहनों पर भरोसा करें, 33 फ़ीसदी महिलाओं को यहाँ आने दें और उन्हें निर्णय करने दें."

उन्होंने कहा कि देश की 50 फ़ीसदी आबादी को नीति-निर्माण में शामिल होना चाहिए.

पीएम मोदी ने कहा, "मुझे सबको साथ लेकर चलना है और मुझे संविधान ने यही सिखाया है."

प्रधानमंत्री ने कहा, "हम भ्रम में न रहें कि हम कुछ नारी शक्ति को दे रहे हैं, ये उनका हक़ है. हमने इसे कई दशकों से रोका हुआ है, आज उसका प्रायश्चित कर उस पाप से मुक्ति पाने का अवसर है."

इससे पहले केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में डीलिमिटेशन बिल पर बहस के दौरान कहा कि इस प्रक्रिया के बाद हर राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ जाएगी.

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वीडियो कैप्शन, पीएम मोदी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर कही ये बात

प्रियंका गांधी ने परिसीमन बिल को लेकर बीजेपी पर तंज़ किया.

उन्होंने कहा, "कुछ प्रदेशों की ताक़त कम करके लोकतंत्र की धज्जियाँ उड़ाकर अगले चुनाव के लिए अपनी पार्टी की मज़बूती का ढाँचा बनाया जा रहा है. गृह मंत्री जी हँस रहे हैं. पूरी योजना बना रखी है. चाणक्य आज ज़िंदा होते, तो आपकी राजनीतिक कुटिलता पर वो भी चौंक जाते."

दक्षिण के राज्यों का विरोध

एमके स्टालिन

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इमेज कैप्शन, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने डीलिमिटेशन विधेयक की कॉपी जलाकर अपना विरोध जताया

दक्षिण भारत के राज्यों में इस विधेयक को लेकर गहरी आशंकाएँ हैं.

विपक्षी दलों का आरोप है कि इससे उत्तर भारत के राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ेगी, जहाँ बीजेपी तुलनात्मक तौर पर ज़्यादा ताक़तवर है और इससे उसके लिए केंद्र में सरकार बनाना आसान हो जाएगा.

डीलिमिटेशन का सबसे मुखर विरोध करने वालों में डीएमके शामिल है.

डीएमके का आरोप है कि इससे दक्षिण भारतीय राज्यों की केंद्र की राजनीति में ताक़त कम होगी.

डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को काला झंडा दिखाकर डीलिमिटेशन के फ़ैसले का विरोध किया है.

केंद्र सरकार के इस फ़ैसले का विरोध करने के लिए उन्होंने अपने समर्थकों के साथ काले कपड़े भी पहन रखे थे.

इस दौरान उन्होंने डीलिमिटेशन विधेयक की कॉपी जलाकर अपना विरोध जताया.

वीडियो कैप्शन, देश के अलग-अलग हिस्सों के लोग महिला आरक्षण बिल पर क्या सोचते हैं ?

डीएमके को एक और दक्षिण भारतीय पार्टी बीआरएस (भारत राष्ट्र समिति) का साथ मिला है.

बीआरएस नेता रावुला श्रीधर रेड्डी का कहना है, "बीआरएस ने हमेशा महिला आरक्षण का समर्थन किया है लेकिन केंद्र सरकार महिला आरक्षण की प्रक्रिया को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ने की कोशिश कर रही है, जो ग़लत है."

"हमारे नेता, केटी रामा राव, लगातार परिसीमन प्रक्रिया में दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों की रक्षा करने की बात कह रहे हैं, लेकिन केंद्रीय मंत्री बार-बार दावा कर रहे हैं कि देश भर में संसद और राज्यों के विधायी निकायों दोनों में सीटों में 50% की वृद्धि होगी, जबकि प्रस्तावित विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. यह एक साज़िश जैसी दिखती है. इससे केंद्र की सत्यनिष्ठा और पूरी प्रक्रिया के उद्देश्य पर संदेह पैदा हो रहा है."

उन्होंने डीलिमिटेशन प्रक्रिया पर बुलडोज़र चलाने का आरोप लगाते हुए कहा, "यह ठीक है कि यह बहुत समय से लंबित है लेकिन बिना पर्याप्त चर्चा के, बिना राष्ट्रीय आम राय बनाए एनडीए सरकार पूरी प्रक्रिया पर बुलडोज़र चलाना चाहती है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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