अरुण जेटलीः छात्र राजनीति और वकालत के रास्ते सत्ता के शिखर तक पहुंचने की कहानी

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पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का शनिवार को निधन हो गया. 28 दिसंबर 1952 को जन्मे जेटली 66 साल के थे.

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उनके पिता महाराज किशन जेटली वकील थे और मां रत्ना प्रभा एक गृहणी और समाजसेविका थीं. दो बहनें और एक बड़े भाई के साथ जेटली ने दिल्ली के नारायणा विहार इलाके में अपना बचपन बिताया. जेटली का परिवार लाहौर से दिल्ली आ कर बसा था.

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बीते 9 अगस्त से अरुण जेटली एम्स में इलाज करा रहे थे. 24 अगस्त दोपहर 12 बजकर सात मिनट पर अंतिम सांस ली.

अरुण जेटली ने अपनी पढ़ाई दिल्ली के सेंट ज़ेवियर्स स्कूल और मशहूर कॉलेज श्रीराम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स से की.

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छात्र राजनीति से वकालत और भारतीय जनता पार्टी की राजनीति की बदौलत सत्ता के गलियारे के शिखर तक पहुंचे अरुण जेटली बीजेपी के दिग्गज नेताओं में शुमार रहे.

अरुण जेटली दिल्ली एवं ज़िला क्रिकेट संघ डीडीसीए के अध्यक्ष भी रहे.

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अरुण जेटली बीजेपी के लिए कितने अहम थे इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लगातार चार ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा कि "मैंने एक अहम दोस्त खो दिया है."

अरुण जेटली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके छात्र राजनीति और आपातकाल की बात की.

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25 जून 1975 को जब देश में आपातकाल लगाया गया था तब अरुण जेटली दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष थे.

इसके अगले ही दिन उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर के दफ़्तर के सामने 200 छात्रों को इकट्ठा कर भाषण दिया और इंदिरा गाँधी का एक पुतला जलाया था. जिसके बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.

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जेटली को तब तिहाड़ के उसी सेल में रखा गया जिसमें अटलबिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी और केआर मलकानी के साथ साथ 11 अन्य राजनीतिक कैदी रह रहे थे. तिहाड़ में 19 महीने कैद रहने के बाद जब वे जेल से निकले तो उन्हें इस बात का साफ़ आभास हो गया कि आगे का उनका करियर राजनीति में है.

जब आपातकाल के बाद जेटली को जनता पार्टी के प्रचार के लिए गठित लोकतांत्रिक युवा मोर्चा का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया.

अरुण जेटली

इसके बाद 1980 में जब भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ तब वो उसमें शामिल हो गए.

अस्सी के दशक में ही जेटली ने दिल्ली में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की और ट्रायल कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. वे सीनियर एडवोकेट बने फिर 37 साल की उम्र में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल.

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इसी दौरान उनकी शादी गिरिधर लाल डोगरा और शकुंतला डोगरा की बेटी संगीता से हुई. 1983 में उनके घर उनकी बेटी सोनाली का जन्म हुआ जो आज एक वकील हैं. 1989 में जेटली के बेटे रोहन का जन्म हुआ.

इसके एक साल बाद ही उन्हें एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बनाया गया. उन दिनों बोफ़ोर्स का मामला बेहद चर्चित था. यह बोफोर्स का मामला ही था जिसमें एक से अधिक देशों में जांच की शुरुआत उसी दौरान हुई जब जेटली एडिशनल सॉलिसिटर जनरल थे.

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1991 में जेटली भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किए गए. 1998 में जेटली को संयुक्त राष्ट्र भेजे गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया गया. संयुक्त राष्ट्र के उस अधिवेशन में ड्रग्स और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित क़ानूनों को अपनाया गया था.

अरुण जेटली 1999 में दिल्ली ज़िला क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष बनाए गए. बाद में 2009 में वे बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (बीसीसीआई) उपाध्यक्ष चुने गए.

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1999 में जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी तब जेटली को सूचना प्रसारण मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दिया गया. उन्हें नवगठित विनिवेश मंत्रालय के राज्य मंत्री का भार भी दिया गया.

जब वाजपेयी सरकार से वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने इस्तीफ़ा दे दिया तो जेटली को क़ानून, न्याय और कंपनी मामलों का मंत्री बना दिया गया.

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वाजपेयी सरकार के कार्यकाल के बाद जेटली 2009 से 2014 तक राज्यसभा में विपक्ष के नेता थे.

फिर जब नरेंद्र मोदी सत्ता में आए तो सबसे पहले अरुण जेटली को सूचना प्रसारण मंत्रालय सौंपा गया फिर उन्हें वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री बनाया गया.

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इस दौरान जेटली अमृतसर से लोकसभा के लिए भी चुनाव मैदान में उतरे लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. हालांकि जेटली साल 2000 से 2018 तक गुजरात से राज्यसभा सदस्य थे फिर अप्रैल 2018 से अपने निधन तक उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य रहे.

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