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कोलकाता में कुत्ते का मीट अफ़वाह या हक़ीक़त
कोलकाता शहर में इन दिनों चर्चा पंचायत चुनावों या ममता बनर्जी पर नहीं हो रही है.
मुद्दा सिर्फ़ यही है कि अगर आप मीट खा रहे हैं तो 'कौन' सा?
जी हाँ, जिस शहर में 80% लोग मांसाहारी हैं वहां पिछले एक हफ़्ते में मीट खाने वालों में क़रीब 50% की गिरावट आ चुकी है.
वजह है मरे हुए जानवरों के मांस के एक अवैध कारोबार का भंडाफोड़ होना.
इसके बाद गर्म हुआ अफ़वाहों का बाज़ार कि "उन पशुओं में कुत्ते-बिल्ली का मीट भी हो सकता है".
बीबीसी के कोलकाता संवाददाता अमिताभ भट्टासाली ने बताया कि स्थानीय पुलिस को मीट के अवैध रैकेट के बारे में बेहद दिलचस्प अंदाज़ में पता चला.
उन्होंने कहा, "कोलकाता के पास के बजबज इलाक़े के डम्पिंग ग्राउंड से पिछले हफ़्ते एक टैक्सी निकली जिसका टायर कीचड़ में फँस गया. तब टैक्सी की डिक्की में लोड पैकटों को बाहर निकाला गया ताकि वज़न कम हो और टायर कीचड़ से निकाला जा सके. आसपास के लोगों को शक हुआ, गाड़ी पर सवार लोगों से पूछताछ पर पता चला कि पैकटों में डम्पयार्ड से लाया गया मरे जानवरों का मीट था."
ख़बर आग की तरह फैली. पुलिस हरक़त में आई और शहर के मध्य के राजा बाज़ार इलाक़े की एक कोल्ड-स्टोरेज में पड़े छापे में मरे हुए जानवरों का 20 टन मांस बरामद हुआ.
काफ़ी घटी है मीट की मांग
कोलकाता पुलिस ने बीबीसी को बताया, "ये गिरोह मरे हुए जानवरों के मांस को साफ़ करके, केमिकल से धोकर फ़्रेश चिकन और मटन में मिलाया करता था. उसके बाद इसे सस्ते दामों में बाज़ार में बेच दिया जाता था. मामले में कुल 18 लोग गिरफ़्तार किए जा चुके हैं और जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है."
लोगों में मीट के लिए एकाएक विरक्ति पैदा होना स्वाभाविक सा था.
ख़बर फैलने के बाद स्ट्रीट-फ़ूड कोलकाता के नामचीन रेस्तरां और होटलों में नॉन-वेज खाने की मांग काफ़ी घटी है.
कोलकाता अपने नॉन-वेज स्ट्रीट-फ़ूड के लिए मशहूर रहा है.
एग रोल, मोमो, मुग़लई रोल से लेकर बिरयानी तक इस शहर में सस्ते दामों में मिलती रही है.
लेकिन इस ख़बर और उसके बाद पैदा हुई अफ़वाहों से लोगों में डर बैठ गया है.
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ़ ईस्टर्न इंडिया की चिंता लाज़मी है. मामले के तूल पकड़ने के बाद उनकी तरफ़ से सलाह जारी की गई.
एसोसिएशन के उप-महासचिव अतीकराम गुप्ता ने बीबीसी को बताया, "सभी मेम्बर रेस्टोरेंट और होटलों को निर्देश दिया गया है कि वे रजिस्टर्ड मीट वेंडर्स यानी जिनके पास एफ़एसएसआई रजिस्टर्ड या आईएसओ 9000 मानक सर्टिफ़िकेट हों, उन्हीं से मीट ख़रीदें".
स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक़ पिछले कुछ दिनों से लोग मांसाहार के नाम पर मछली और सी-फ़ूड ही खाना पसंद कर रहे हैं.
उनके मुताबिक़ 'डॉग-मीट या बिल्ली के मीट जैसी अफ़वाहों ने व्यापार पर बुरा असर डाला है.'
बालीगंज सर्कुलर रोड पर रहने वाली नीना रॉय ने कहा, "कभी सोचा नहीं था कि कोलकाता के मीट में मिलावट हो सकती है. हमलोग नॉन-वेज स्ट्रीट फ़ूड पैक कराकर घर पर लंच या डिनर के लिए लाते थे. अब तो शाकाहारी ही बेहतर लग रहा है.''
बीबीसी संवाददाता अमिताभ भट्टासाली के मुताबिक़, "शहर के लोगों के मन में स्ट्रीट-फ़ूड को लेकर डर बैठ गया है. पहले भी शक बढ़ रहा था कि गली-गली सस्ती बिरयानी और चिकन-मटन रोल दुकानें कैसे खुलती जा रहीं हैं. मेरे अपने परिवार ने फ़िलहाल बाहर जाकर नॉन-वेज खाना बंद कर दिया है".
कोलकाता की रहने वाली अपर्णा दास ने बताया, "पिछले शनिवार मैं अपने स्कूल की पुरानी दोस्तों के साथ रेस्टोरेंट में खाने गई. हमने पहले ही तय कर लिया था कि ऑर्डर वेज ही करना है."
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