भारत में ईरान के राजदूत ने मध्य पूर्व संकट और ब्रिक्स को लेकर क्या कहा?
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फ़थाली ने सोमवार को कहा कि ईरान की प्राथमिकता दुश्मन के आक्रमण और उनके क़दम से देश की रक्षा करना है.
समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक लिखित इंटरव्यू में फ़थाली से मौजूदा संघर्ष को लेकर अमेरिका से बातचीत पर ईरान के रुख़ के बारे में पूछा गया.
उन्होंने कहा, "हम 38 दिनों से हमलावरों से अपनी रक्षा कर रहे हैं और पूरी ताक़त के साथ ऐसा करते रहेंगे. हमारा मुख्य ध्यान अमेरिकी और ज़ायोनी हमलावरों के हमलों का उचित जवाब देने पर है."
उन्होंने कहा, "किसी भी तरह की बातचीत में शामिल होने का फ़ैसला व्यापक नीतियों के दायरे में और फ़ैसले लेने वाली सर्वोच्च संस्थाओं की राय से होते हैं. जब भी यह तय होगा कि कूटनीति के ज़रिए ईरानी लोगों के हितों को सुरक्षित किया जा सकता है, तो ज़रूरी क़दम उठाए जाएँगे."
उन्होंने आगे कहा, "इस बात पर भी ज़ोर दिया जाना चाहिए कि लड़ाई, संघर्षविराम, बातचीत और फिर से जंग के दोषपूर्ण सिलसिले से जुड़ा हमारा अनुभव बहुत ही बुरा रहा है. हमारे अधिकारी पूरी समझदारी से यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि यह दोहराया न जाए."
ईरानी राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय तंत्र के रूप में ब्रिक्स के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि ईरान के लिए यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाने और पारंपरिक वैश्विक ढाँचों से स्वतंत्र दृष्टिकोणों को मज़बूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच है.
उन्होंने कहा, "ईरान का मानना है कि ब्रिक्स अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का समर्थन करने, एकतरफ़ा वर्चस्व का मुक़ाबला करने और तनाव कम करने में एक प्रभावी भूमिका निभा सकता है."
उनकी यह टिप्पणी पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच आई है, क्योंकि अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच संघर्ष अब अपने दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है.
इस संघर्ष में क्षेत्र के नागरिक, ऊर्जा और सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमले लगातार जारी हैं.