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लाइव, भारत में ईरान के राजदूत ने मध्य पूर्व संकट और ब्रिक्स को लेकर क्या कहा?

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फ़थाली ने सोमवार को कहा कि ईरान की प्राथमिकता दुश्मन के आक्रमण और उनके क़दम से देश की रक्षा करना है.

सारांश

लाइव कवरेज

रौनक भैड़ा, चंदन कुमार जजवाड़े

  1. भारत में ईरान के राजदूत ने मध्य पूर्व संकट और ब्रिक्स को लेकर क्या कहा?

    भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फ़थाली ने सोमवार को कहा कि ईरान की प्राथमिकता दुश्मन के आक्रमण और उनके क़दम से देश की रक्षा करना है.

    समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक लिखित इंटरव्यू में फ़थाली से मौजूदा संघर्ष को लेकर अमेरिका से बातचीत पर ईरान के रुख़ के बारे में पूछा गया.

    उन्होंने कहा, "हम 38 दिनों से हमलावरों से अपनी रक्षा कर रहे हैं और पूरी ताक़त के साथ ऐसा करते रहेंगे. हमारा मुख्य ध्यान अमेरिकी और ज़ायोनी हमलावरों के हमलों का उचित जवाब देने पर है."

    उन्होंने कहा, "किसी भी तरह की बातचीत में शामिल होने का फ़ैसला व्यापक नीतियों के दायरे में और फ़ैसले लेने वाली सर्वोच्च संस्थाओं की राय से होते हैं. जब भी यह तय होगा कि कूटनीति के ज़रिए ईरानी लोगों के हितों को सुरक्षित किया जा सकता है, तो ज़रूरी क़दम उठाए जाएँगे."

    उन्होंने आगे कहा, "इस बात पर भी ज़ोर दिया जाना चाहिए कि लड़ाई, संघर्षविराम, बातचीत और फिर से जंग के दोषपूर्ण सिलसिले से जुड़ा हमारा अनुभव बहुत ही बुरा रहा है. हमारे अधिकारी पूरी समझदारी से यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि यह दोहराया न जाए."

    ईरानी राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय तंत्र के रूप में ब्रिक्स के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि ईरान के लिए यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाने और पारंपरिक वैश्विक ढाँचों से स्वतंत्र दृष्टिकोणों को मज़बूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच है.

    उन्होंने कहा, "ईरान का मानना ​​है कि ब्रिक्स अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का समर्थन करने, एकतरफ़ा वर्चस्व का मुक़ाबला करने और तनाव कम करने में एक प्रभावी भूमिका निभा सकता है."

    उनकी यह टिप्पणी पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच आई है, क्योंकि अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच संघर्ष अब अपने दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है.

    इस संघर्ष में क्षेत्र के नागरिक, ऊर्जा और सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमले लगातार जारी हैं.

  2. इसराइली सेना ने हिज़्बुल्लाह नेता की जगह किसी दूसरे शख़्स को मार डाला, डेनियल डि सिमोन, बीबीसी न्यूज़ यरूशलम

    लेबनान में हिज़्बुल्लाह के एक नेता को मारने की कोशिश में इसराइल ने ग़लती से एक दूसरे शख़्स को मार डाला है.

    रविवार को हुई इस घटना में इसराइल ने जिस शख़्स को मारा है वह ऐसे राजनीतिक समूह के वरिष्ठ नेता थे जो हिज़्बुल्लाह का बड़ा विरोधी है.

    आईडीएफ़ ने बीबीसी के संपर्क करने पर माना कि वह अपने लक्ष्य को मारने में नाकाम रहा और उन्हें नागरिकों को हुए "नुक़सान का दुख है."

    लेबनीज़ फोर्सेज पार्टी, जो ज़्यादातर ईसाइयों का एक समूह है, उसका कहना है कि एक अपार्टमेंट ब्लॉक पर हुए इस हमले में उनके वरिष्ठ अधिकारी पियरे मुआवाड और उनकी पत्नी फ्लाविया की मौत हो गई.

    यह अपार्टमेंट ब्लॉक ऐन सादेह में था, जो बेरूत के पूर्व में स्थित एक ईसाई-बहुल कस्बा है.

    लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस हमले में एक पुरुष और दो महिलाओं की मौत हुई है.

    स्थानीय मेयर का कहना है कि जिन लोगों की मौत हुई, वे उस अपार्टमेंट से ठीक एक मंज़िल नीचे रह रहे थे, जिसे निशाना बनाया गया था.

    आईडीएफ़ का कहना है कि "इस हमले के नतीजे में कई ऐसे लोग भी घायल हुए हैं जिनका इससे कोई लेना-देना नहीं था, और इन रिपोर्टों की समीक्षा की जा रही है."

    लेबनीज़ फोर्सेज पार्टी का कहना है कि पियरे मुआवाड "न तो कोई लड़ाके थे और न ही कोई सैन्य लक्ष्य. इस जानलेवा हमले से ठीक पहले उन्होंने अपने परिवार के साथ घर पर ही ईस्टर का त्योहार मनाया था."

    पार्टी ने हिज़्बुल्लाह की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह घटना इस बात का नतीजा है कि सैन्य टकरावों को अब रिहायशी इलाक़ों तक खींचकर लाया जा रहा है.

  3. इसराइल के हाइफ़ा में चार लोगों की मौत के बाद नेतन्याहू ने की ये गुज़ारिश

    इसराइल के हाइफ़ा में रविवार रात एक ईरानी मिसाइल आकर गिरी थी. इस हमले में चार लोगों की मौत हुई है. बीबीसी की टीम ने सोमवार को हमले की ज़द में आई इमारत से चार बॉडी बैग निकलते हुए भी देखा.

    इस हमले पर इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने प्रतिक्रिया दी है.

    उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “मैंने अभी-अभी हाइफ़ा के मेयर योना याहाव से बात की और हाइफ़ा में चार लोगों की मौत की दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया.”

    ''बातचीत में एक महत्वपूर्ण बात जो फिर से सामने आई, वह एक सीधा-सा सिद्धांत है- एक अटल सिद्धांत, वह यह है कि जो कोई भी होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन करता है और किसी सुरक्षित स्थान पर चला जाता है, उसके घायल होने की संभावना लगभग नहीं के बराबर होती है.''

    उन्होंने कहा, ''मैं जानता हूँ कि यह आपके लिए कितना मुश्किल है. मैं आपसे यह कहता हूँ कि हम जिस भी तरह से संभव होगा, आपकी मदद करेंगे. मैं आपसे यह अनुरोध करता हूँ कि आप होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन करें.''

  4. ईरान युद्ध: भारत ने बताया दो दिनों में कितने भारतीय जहाज़ों ने होर्मुज़ स्ट्रेट को पार किया

    भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ़ पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज़ के एडिशनल सेक्रेटरी मुकेश मंगल ने खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाज़ों और नाविकों के बारे में ताज़ा जानकारी दी है.

    सोमवार को एक प्रेस कॉनफ़्रेंस में मुकेश मंगल ने बताया, “इस क्षेत्र में सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं. पिछले चौबीस घंटे में भारतीय झंडे वाले किसी जहाज़ से जुड़ी कोई घटना रिपोर्ट नहीं हुई है.”

    उन्होंने जानकारी दी कि पिछले दो दिनों में भारतीय झंडे के साथ दो जहाज़ ‘ग्रीन सांग्वी’ और ‘ग्रीन आशा’ एलपीजी लेकर सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पार कर चुके हैं.

    प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया गया है कि ग्रीन सांग्वी पर क़रीब 46.5 हज़ार मेट्रिक टन एलपीजी कार्गो और 25 भारतीय नाविक हैं, जबकि ग्रीन आशा पर 15.5 हज़ार टन एलपीजी कार्गो और 26 नाविक हैं.

    अभी पश्चिमी फ़ारस खाड़ी क्षेत्र में भारतीय झंडे के साथ 16 जहाज़ मौजूद हैं, जिन पर 433 भारतीय नाविक हैं.

    डीजी शिपिंग ने अब तक समुद्री जहाज़ों पर काम करने वाले क़रीब 1600 लोगों की वापसी कराई है.

    28 फ़रवरी को इसराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए थे, उसके बाद से इस क्षेत्र में संघर्ष लगातार जारी है.

    ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के अहम समुद्री मार्ग होर्मुज़ स्ट्रेट की नाकेबंदी कर रखी है और इलाक़े में समुद्री जहाज़ भी हमले का निशाना बने हैं.

    ईरान युद्ध के बाद से दुनिया के कई देशों में तेल और गैस की कमी हो गई है और इनकी कीमतों में उछाल भी आया है.

  5. इसराइल के हाइफ़ा में ईरानी हमले में चार लोगों की मौत, लुसी विलियम्सन, हाइफ़ा से बीबीसी की मध्य पूर्व संवाददाता

    बीबीसी ने इसराइल के हाइफ़ा में मलबे से चार बॉडी बैग बाहर निकलते देखे हैं. ये उस इमारत के रहने वाले लोग थे जिस पर रविवार रात एक ईरानी मिसाइल गिरी थी.

    सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि विस्फोटक गिरने के बाद फटा नहीं था और जब बचाव दल के लोग वहाँ पहुँचे, तब भी वह फटा नहीं था, जिससे तलाशी का काम और मुश्किल हो गया.

    ख़बरों के मुताबिक़, तलाशी दलों को अंदर फँसे चार लोगों तक पहुँचने के लिए पास की एक इमारत की कंक्रीट में सुरंग बनानी पड़ी.

    हमले वाली जगह के ठीक सामने वाली इमारत में रहने वाले मोर बारेल ने कहा, “इसराइल की कई-स्तरीय हवाई सुरक्षा होने के बावजूद, ईरानी हमलों के ख़तरे के साथ जीना हर रोज़ "रशियन रूलेट" खेलने जैसा लगता है.”

    सर्वेक्षणों से पता चलता है कि पाँच हफ़्तों से ज़्यादा समय तक चले इस संघर्ष के बाद, इस युद्ध के लिए यहूदी इसराइलियों का ज़बरदस्त समर्थन अब कम होने लगा है.

    इसराइल ने अपनी जीत को ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल साइटों और उसके नेतृत्व पर हमला करने में मिली सफलता के रूप में पेश किया है.

  6. ईरान के विदेश मंत्रालय ने युद्धविराम को लेकर जारी चर्चाओं पर अब क्या कहा

    युद्धविराम की चर्चाओं के बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने कहा है कि 'युद्धविराम का मतलब है कि विरोधियों को नए अपराध के लिए ताक़त जुटाने का मौक़ा देना और कोई भी समझदार व्यक्ति ऐसा नहीं करेगा.'

    बीबीसी फ़ारसी सेवा के मुताबिक़ बग़ाई ने अपनी साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में यह बात कही.

    उन्होंने कहा कि युद्धविराम और इस युद्ध को समाप्त करने के साथ ही ईरान की मांगों को पूरा किया जाना चाहिए.

    ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिका के साथ बातचीत के बारे में कहा, ''मध्यस्थों का आपस में विचारों का आदान-प्रदान करना कोई असामान्य बात नहीं है. ये मुद्दे शुरू से ही मध्यस्थों के माध्यम से उठाए गए थे और संदेशों का आदान-प्रदान करना स्वाभाविक है.''

    उन्होंने कहा, ''अल्टीमेटम और युद्ध अपराधों की धमकियों के साथ बातचीत संभव नहीं है. ऐसी स्थिति में जब हमारा दुश्मन अपने अपराधों की संख्या बढ़ा रहा है, तो सारी ख़ुफ़िया जानकारी और ध्यान देश की रक्षा पर केंद्रित होना चाहिए."

    इस्माइल बग़ाई ने कहा, "जब 15 सूत्रीय अमेरिकी योजना का प्रस्ताव भेजा गया था तो हमने कहा था कि ऐसे प्रस्ताव अत्यंत महत्वाकांक्षी, अनुचित और अतार्किक थे और हमें किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं थे."

    ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ज़ोर देते हुए कहा, "आप नियमित रूप से अलग-अलग अंतरालों पर किसी देश के बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की धमकी देते हैं और नागरिक ठिकानों पर हमला करने की खुली छूट देते हैं. यह युद्ध अपराध का एक उदाहरण है."

  7. क़तर के विदेश मंत्रालय ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बातचीत का ब्यौरा जारी किया

    क़तर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख़ मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी की भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से फ़ोन पर बात हुई है.

    क़तर के विदेश मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया है कि अब्दुलरहमान बिन अल-थानी को भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर का फ़ोन आया.

    इस पोस्ट में कहा गया है, “इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने के घटनाक्रमों, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर इसके गंभीर नतीजों की समीक्षा की. साथ ही सभी विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के तरीक़ों पर भी चर्चा की.”

    उन्होंने समुद्री जहाज़ों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने के महत्व पर भी ज़ोर दिया.

    क़तर के विदेश मंत्रालय ने बताया, “प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने क़तर और क्षेत्र के अन्य देशों पर ईरान के अनुचित हमलों को रोकने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाने को लेकर आगाह किया.”

    इस तरह के निशानों में ख़ास तौर पर पानी, भोजन और ऊर्जा ठिकानों से संबंधित ढाँचे शामिल हैं.

    इस बातचीत में दोनों पक्षों को शांति वार्ता की मेज़ पर लौटने पर भी ज़ोर दिया गया.

  8. ईरान युद्ध: आईआरजीसी के इंटेलिजेंस चीफ़ अमेरिकी-इसराइली हमले में मारे गए

    इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के ख़ुफ़िया संगठन के प्रमुख माजिद ख़ादेमी अमेरिका और इसराइल के हमलों में मारे गए.

    आईआरजीसी ने ख़ुद ही एक बयान में इसकी पुष्टि की है, उसने कहा, "माजिद ख़ादेमी की मौत सोमवार सुबह, 6 अप्रैल को हुई."

    इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ और इसराइल डिफेंस फोर्सेज़ (आईडीएफ़) ने माजिद ख़ादेमी को मारने की ज़िम्मेदारी ली है.

    आईडीएफ़ ने टेलीग्राम पर लिखा है कि उनका मारा जाना आईआरजीसी के लिए "एक और बड़ा झटका" है.

    15 जून 2025 को एक इसराइली हमले में मोहम्मद काज़ेमी की हत्या के चार दिन बाद उनकी जगह ख़ादेमी को आईआरजीसी इंटेलिजेंस संगठन का कमांडर नियुक्त किया गया था.

    ईरान के साइबर स्पेस की "संप्रभुता की रक्षा" को ज़रूरी बताते हुए पिछले साल अगस्त में, ख़ादेमी ने संसद से एक घरेलू इंट्रानेट को पूरा करने को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था.

  9. नमस्कार!

    अब तक बीबीसी संवाददाता रौनक भेड़ा आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे.

    अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.

    बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के पन्ने पर लगी कुछ अहम ख़बरें पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.

  10. छत्तीसगढ़: पूर्व सीएम अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को आजीवन कारावास की सज़ा, जानें क्या है मामला, आलोक पुतुल, रायपुर से बीबीसी हिन्दी के लिए

    छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को हाईकोर्ट ने 23 साल पुराने हत्याकांड में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है.

    इस मामले में 2007 में अमित जोगी को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की सुनवाई 1 अप्रैल से शुरू हुई थी, जिसमें सोमवार को सज़ा का एलान किया गया.

    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद वर्मा की स्पेशल डिविज़नल बेंच ने कहा, "जब सभी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ एक जैसे सबूत हों, तो किसी एक को बरी कर देना और बाकी को उन्हीं सबूतों के आधार पर दोषी ठहराना सही नहीं है, जब तक कि उसे छोड़ने का कोई ठोस और अलग कारण साबित न हो."

    हाईकोर्ट ने कहा, "जब सभी अभियुक्तों पर एक ही अपराध में शामिल होने का आरोप हो, तो किसी एक अभियुक्त के साथ जानबूझकर अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता."

    क्या था 23 साल पुराना मामला

    दरअसल, साल 2000 में छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद राज्य में 2003 में पहली बार विधानसभा चुनाव होने वाले थे. उस समय राज्य में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी और अजीत जोगी मुख्यमंत्री थे.

    इसी दौरान कांग्रेस के दिग्गज नेता विद्याचरण शुक्ल ने शरद पवार की पार्टी एनसीपी से चुनाव लड़ने का एलान किया था, जिससे कांग्रेस के वोट बैंक में बिखराव की आशंका जताई जा रही थी.

    इस बीच 4 जून 2003 की रात एनसीपी के प्रदेश उपाध्यक्ष और विद्याचरण शुक्ल के क़रीबी राम अवतार जग्गी की हत्या कर दी गई.

    इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत 31 लोगों को अभियुक्त बनाया गया, जिसमें कई पुलिस अधिकारी भी शामिल थे. 31 मई 2007 को इस मामले में स्थानीय अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था. अन्य 28 लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी.

    अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ राम अवतार जग्गी के बेटे ने पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी. इस दौरान मामले की सीबीआई जांच जारी रही. दूसरी ओर, अमित जोगी चुनाव लड़ कर विधायक भी बने और पिता अजीत जोगी के निधन के बाद, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रमुख भी बन गए.

    पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाईकोर्ट को जल्दी सुनवाई का आदेश दिया, जिसके बाद सोमवार को हाईकोर्ट ने अमित जोगी को आजीवन कारावास का फ़ैसला सुनाया.

  11. राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर कसा तंज, एलपीजी संकट पर ये कहा

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 'एलपीजी संकट' को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं.

    उन्होंने कहा है कि प्रवासी मज़दूरों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई है.

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "मोदी जी ने कहा था कि एलपीजी गैस क्राइसिस को कोविड की तरह हैंडल करेंगे. और सच में वही किया बिल्कुल कोविड के जैसे ही- नीति शून्य, घोषणा बड़ी और बोझ ग़रीबों पर."

    उन्होंने आगे कहा, "500-800 रुपये की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी मज़दूरों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई है. रात को घर लौटते मज़दूर के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं हैं. जिसका नतीजा ये हुआ कि शहर छोड़ो, गांव भागो."

    "जो मज़दूर टेक्सटाइल मिल्स और फ़ैक्ट्रियों की रीढ़ हैं, आज वही टूट रहे हैं. टेक्सटाइल सेक्टर पहले से आईसीयू में है. मैन्युफ़ैक्चरिंग दम तोड़ रही है. यह संकट आया कहां से? कूटनीति की मेज़ पर हुई उस चूक से जिसे सरकार आज तक स्वीकार नहीं करती."

    राहुल गांधी ने आगे कहा, "जब अहंकार नीति बन जाए तो अर्थव्यवस्था चरमराती है, मज़दूर पलायन करते हैं, उद्योग बर्बाद होते हैं और देश दशकों पीछे धकेल दिया जाता है."

    राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, "सवाल एक ही है, हर संकट में सबसे पहले ग़रीब क्यों मरता है? चुप मत रहो. यह सिर्फ़ ग़रीब का नहीं, हम सबका सवाल है."

  12. ईरान-अमेरिका के बीच कहां तक पहुंची बातचीत, अधिकारी ने बीबीसी को ये बताया, टॉम बेटमैन, यूएस स्टेट डिपार्टमेंट संवाददाता

    एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी से कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच सफल बातचीत तब तक मुश्किल है, जब तक युद्धविराम नहीं होता.

    अधिकारी ने कहा, "किसी भी चर्चा के लिए लड़ाई रुकनी चाहिए. अभी लड़ाई जारी है. 'युद्धविराम' ऐसी शर्त है, जिसके पूरे होने के बाद बातचीत हो सकती है."

    सूत्र ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश बीते दो हफ़्तों से चल रही है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा गुप्त रखा गया है.

    अधिकारी ने कहा, "ईरान तक संदेश पहुंचाना और समय पर जवाब लेना संभव नहीं है. औसतन जवाब आने में एक दिन लग जाता है."

    रविवार को ट्रंप ने वेबसाइट एक्सियोस को बताया कि उनके दूत स्टीव विटकॉफ़ और जैरेड कुश्नर ईरानियों के साथ "गंभीर बातचीत" कर रहे हैं.

    उन्होंने और जानकारी नहीं दी, बस इतना कहा कि अगर स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ फिर से खोलने पर समझौता नहीं हुआ तो वह "सब कुछ उड़ा देंगे."

    पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र भी मध्यस्थता की कोशिशों में शामिल रहे हैं. बताया गया कि शनिवार को इन तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने विटकॉफ़ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची से फ़ोन पर बात की.

  13. ईरान की अमेरिका-इसराइल को चेतावनी, 'आम लोगों को निशाना बनाया तो...'

    ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इसराइल ने आम लोगों को निशाना बनाया तो उसका जवाब और भी 'ज़्यादा ख़तरनाक' होगा. यह जानकारी ईरान के सरकारी मीडिया ने दी है.

    ख़ातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर (ईरान की सबसे बड़ी सैन्य कमांड यूनिट) के प्रवक्ता ने कहा, "अगर आम लोगों पर हमले दोहराए गए, तो हमारे अगले हमले और जवाबी कार्रवाई पहले से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक और बड़े पैमाने पर होंगे."

    यह बयान ईरान के इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) पर जारी किया.

    ईरान ने यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद दी गई है. दरअसल, ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान मंगलवार तक होर्मुज़ को फिर से नहीं खोलता है तो 'अमेरिका ईरान के पावर प्लांट और ब्रिज पर हमला करेगा.'

    ईरान ने ट्रंप की धमकी को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सभी देशों से कहा है कि यह उनकी क़ानूनी ज़िम्मेदारी है कि ऐसे भयानक वॉर क्राइम को रोका जाए.

  14. सीएम हिमंत बिस्वा का आरोप- कांग्रेस ने पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप से ली जानकारी

    कांग्रेस पार्टी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर तीन देशों के पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया था. इस पर सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की प्रतिक्रिया सामने आई है.

    हिमंत बिस्वा का आरोप है कि 'कांग्रेस पार्टी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के लिए पूरी सामग्री एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप ने दी.'

    हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रेस वार्ता में कहा, "कल पवन खेड़ा और गौरव गोगोई ने दो प्रेस कॉन्फ़्रेंस कीं, एक दिल्ली में और एक गुवाहाटी में. जब आप किसी चुनाव के नतीजे या आउटकम को प्रभावित करने के लिए इन आरोपों का इस्तेमाल फ़र्ज़ी डॉक्यूमेंट्स के साथ करते हैं, तो उस पर ज़्यादा सज़ा का प्रोविज़न लगता है और उसकी सज़ा उम्रक़ैद है."

    "कल मेरी पत्नी ने एफआईआर दर्ज कराई है. मुझे यक़ीन है कि पुलिस क़ानून की सही धारा में केस दर्ज करेगी और ज़रूरी कार्रवाई करेगी."

    उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया, "हमारी रिसर्च के दौरान हमने पाया कि कल हुई प्रेस कॉन्फ़्रेंस का पूरा मटेरियल एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप ने दिया था. पिछले 10 दिनों में पाकिस्तान चैनल ने असम चुनाव के बारे में कम से कम 11 टॉक शो किए हैं, जो पहले कभी नहीं हुआ. हर टॉक शो में नतीजा यह निकला कि कांग्रेस को जीतना चाहिए. कल की प्रेस कॉन्फ़्रेंस से पाकिस्तान का लिंक भी अब बहुत साफ़ हो गया है. मुझे भरोसा है कि क़ानूनी एजेंसियां इस पर ध्यान देंगी."

    हिमंत बिस्वा सरमा ने आगे कहा, "कांग्रेस ने एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप से लिए गए पासपोर्ट और डॉक्यूमेंट्स की तस्वीरों का इस्तेमाल किया. गौरव गोगोई की मदद एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप ने की थी. पाकिस्तान असम चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है."

    असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर कहा, "वह हज़ारों झूठ बोल सकते हैं. कांग्रेस पार्टी उनके परिवार की प्रॉपर्टी और विदेश में उनके परिवार के बिज़नेस के बारे में इन सभी झूठों का पर्दाफ़ाश करने जा रही है. उन्हें साफ़ तौर पर डिसक्वालिफ़ाई किया जाना चाहिए, ईडी का केस फ़ाइल किया जाना चाहिए. अगर हमारी सरकार आती है उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी."

  15. तेहरान में यूनिवर्सिटी पर हमला, आसपास के इलाक़ों में गैस सप्लाई बंद

    ईरान की राजधानी तेहरान में सोमवार सुबह शरीफ़ यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी के गैस स्टेशन पर हुआ हमला हुआ.

    तेहरान के ज़िला 9 के मेयर ने यह जानकारी दी है.

    यूनिवर्सिटी के आसपास के इलाक़े की गैस सप्लाई को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया है.

    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यूनिवर्सिटी के कुछ हिस्से, जैसे इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेंटर की बिल्डिंग और यूनिवर्सिटी की मस्जिद भी इस हमले की चपेट में आए.

    सोमवार सुबह जारी तस्वीरों में तेहरान के पश्चिमी इलाक़ों से उठता हुआ घना धुआं भी दिखाई दिया.

    युद्ध शुरू होने के बाद से कई यूनिवर्सिटियों पर हमले हुए हैं, जिनमें तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी भी शामिल हैं.

    गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दी गई डेडलाइन को मंगलवार तक बढ़ा दिया था. उन्होंने कहा था कि मंगलवार को ईरान के पावर प्लांट और ब्रिज पर हमले होंगे.

  16. भारत ने अफ़ग़ानिस्तान की मदद के लिए क्या-क्या भेजा, विदेश मंत्रालय ने बताया

    भारत ने अफ़ग़ानिस्तान को मदद भेजी है. विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि अफ़ग़ानिस्तान बाढ़ और भूकंप की वजह से मुश्किलों में है.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पोस्ट में लिखा, "अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को हाल ही में आई बाढ़ और भूकंप की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है."

    "इस कठिन समय में भारत ने मदद के लिए मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) सामग्री भेजी है."

    रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत की ओर से भेजी गई मदद में किचन सेट, सफ़ाई का सामान, प्लास्टिक शीट, तिरपाल, स्लीपिंग बैग और अन्य ज़रूरी चीज़ें शामिल हैं.

    उन्होंने कहा, "भारत अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा है और इस चुनौतीपूर्ण समय में मानवीय मदद और सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है."

  17. ईरान ने ट्रंप की धमकी पर संयुक्त राष्ट्र से कहा- 'अगर ज़मीर ज़िंदा होता तो...'

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा था कि वो मंगलवार को पावर प्लांट और ब्रिज पर हमला करेंगे. अब इस पर ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि 'उसे इस पर चुप नहीं रहना चाहिए था.'

    संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी मिशन ने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, "अगर संयुक्त राष्ट्र का ज़मीर ज़िंदा होता, तो वह अमेरिका के युद्ध चाहने वाले राष्ट्रपति की इस खुली और बेशर्म धमकी पर चुप न रहता. ट्रंप इस पूरे इलाक़े को एक अंतहीन युद्ध में घसीटना चाहते हैं."

    "यह सीधे और खुले तौर पर आम लोगों को डराने की कोशिश है. वॉर क्राइम करने की साफ़ नीयत का सबूत है."

    ईरान ने अपील करते हुए कहा, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सभी देशों की क़ानूनी ज़िम्मेदारी है कि ऐसे भयानक वॉर क्राइम को रोका जाए. उन्हें अभी क़दम उठाना होगा. कल बहुत देर हो जाएगी."

  18. इसराइली पीएम नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप को दी बधाई, बोले- साहसी फ़ैसला लिया

    इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की है.

    अमेरिकी सैन्य अफ़सर को बचाने के 'मिशन की सफलता' पर नेतन्याहू ने ट्रंप को बधाई भी दी है.

    बिन्यामिन नेतन्याहू ने एक्स पर लिखा, "मैंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की. उन्हें उनके साहसी फ़ैसले और दुश्मन के इलाक़े में गिरे सैन्य अफ़सर को बचाने के लिए पूरी तरह सफल अमेरिकी मिशन पर व्यक्तिगत रूप से बधाई दी."

    "राष्ट्रपति ट्रंप ने इसराइल की मदद के लिए अपना आभार जताया. मुझे बहुत गर्व है कि मैदान और मैदान से बाहर हमारी साझेदारी अभूतपूर्व है."

    उन्होंने कहा, "इस बात पर भी गर्व है कि इसराइल एक बहादुर अमेरिकी सैनिक को बचाने में योगदान दे सका."

    अमेरिका ने रविवार को यूएस एफ़-15 लड़ाकू विमान के लापता क्रू मेंबर को बचाने की जानकारी दी थी.

    इस विमान को शुक्रवार को दक्षिणी ईरान के ऊपर मार गिराया गया था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार सुबह सोशल मीडिया पर इस रेस्क्यू ऑपरेशन की पुष्टि की.

  19. विदेश मंत्री जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अराग़ची से बात की

    भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जानकारी दी है कि उनकी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची से फ़ोन पर बात हुई है.

    एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "ईरान के विदेश मंत्री अराग़ची का फ़ोन आया. मौजूदा हालात पर बात हुई."

    भारत स्थित ईरानी दूतावास ने एक्स पर बताया कि इस बातचीत में दोनों नेताओं ने आपसी रिश्तों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की.

    इससे पहले जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन ज़ायद अल नाहयान से बातचीत होने की जानकारी दी.

    क़तर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख़ मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से भी उनकी बातचीत हुई.

    एस जयशंकर ने तीनों देशों के विदेश मंत्रियों से मध्य पूर्व के हालात पर चर्चा की.

  20. नमस्कार!

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