राजस्थान: रानी पद्मिनी के वशंज ने पुलिस तहकीकात पर उठाए सवाल

mahendra singh mewar
    • Author, नारायण बारेठ
    • पदनाम, जयपुर से बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

राजस्थान में उदयपुर के पूर्व राजघराने के प्रमुख महेंद्र सिंह मेवाड़ की गतिविधियों के बारे में पुलिस तहकीकात से विवाद उठ खड़ा हुआ है.

पुलिस प्रशासन ने अपने एक पुलिस थाने से महेंद्र मेवाड़ की आपराधिक और अन्य गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाने को कहा था. इस पर महेंद्र मेवाड़ ने गहरी नाराज़गी ज़ाहिर की और केंद्र सरकार को पत्र भेज कर अपना विरोध दर्ज करवाया है.

पुलिस की इस कार्रवाई से हैरान महेंद्र मेवाड़ ने चिट्ठी में कहा 'ये अराजकता चिंताजनक है.' वे सरकार से पूछते है कि क्या ऐसा ही शासन होता है?

उधर, मेवाड़ के तेवर देख पुलिस ने तुरंत खेद व्यक्त करना ठीक समझा. जैसे ही इस पूर्व राज परिवार के प्रमुख ने अपना गुस्सा ज़ाहिर किया ,एक वरिष्ठ अधिकारी ने फोन कर खेद जताया. महेंद्र मेवाड़ चित्तौड़ गढ़ की रानी पद्मिनी के वंशज हैं.

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पुलिस ने खेद जताने में समझी भलाई

पुलिस के आधिकारिक सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि यह एक प्रक्रियागत कार्रवाई थी. इसके तहत सार्वजिनक जीवन के सभी प्रमुख लोगों की व्यक्तिगत पत्रावली रखी जाती हैं. इसमें प्रमुख लोगों की सुरक्षा का कारण भी निहित है.

उदयपुर के पुलिस अधीक्षक राजेंद्र प्रसाद ने बीबीसी से कहा 'इसे किसी और वजह से नहीं देखा जाना चाहिए. यह एक नियमित कार्रवाई है. इसमें कही भी कोई और मंशा नहीं है.

यह विवाद तब उठा जब ज़िला पुलिस ने उदयपुर में अपने घंटाघर थाने के थाना अधिकारी को गत पांच फरवरी को एक पत्र भेज कर उदयपुर के पूर्व शाही परिवार के मुखिया महेंद्र मेवाड़ के बारे में कुछ सूचनाएं जमा करने को कहा.

इस चिठ्ठी को लेकर पुलिस के दो जवान श्री मेवाड़ के सामोर निवास जा पहुंचे और जानकारी जुटाने लगे. लेकिन चिठ्ठी के मजमून ने महेंद्र मेवाड़ को खफ़ा कर दिया. उनकी नाराज़गी की बात पुलिस अधिकारियों तक पहुंची तो पुलिस ने तुरंत खेद व्यक्त करने में ही भलाई समझी.

mahendra singh mewar writes letter to PM
इमेज कैप्शन, महेंद्र सिंह मेवाड़ ने केंद्र और राज्य सरकार को लिखी चिट्ठी

कौन हैं महेंद्र सिंह मेवाड़

उदयपुर के मेवाड़ राजवंश को भारत में सबसे पुराने राजपरिवारों में माना जाता है. इस पूर्व राजपरिवार में महेंद्र सिंह मेवाड़ 76 वीं पीढ़ी हैं.

वे 1989 में चितौड़ से बीजेपी टिकट पर सांसद चुने गए थे. बाद में बीजेपी से उनके नीतिगत मतभेद हो गए और उन्होंने पार्टी से किनारा कर लिया. इस पूर्व राजपरिवार के राजाओं को 'हिंदुआ सूरज' कहा जाता रहा है.

लेकिन हाल में पद्मनी पर बनी फ़िल्म को लेकर जब विवाद उठा ,इस पूर्व राजपरिवार ने अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई. मगर यह भी कहा कि मेवाड़ में कभी समाज में धर्म के आधार पर बंटवारे की लकीरें नहीं खींची गईं.

पूर्व राजपरिवार ने पद्मिनी फ़िल्म विवाद पर सरकार को लिखी एक चिठ्ठी में कहा था कि मेवाड़ पर जब भी किसी ने हमला किया ,सभी ने मिलजुल कर मुकाबला किया है. यहाँ तक कि बंटवारे के वक्त भी हिंसा की कोई घटना घटित नहीं हुई.

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