ट्विशा शर्मा की सास के मानसिक बीमारी के दावे के बाद, भाई और पिता ने की प्रेस कॉन्फ़्रेंस

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"हम एक बहुत बड़े सिस्टम से लड़ रहे हैं."
भोपाल में 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की मौत के बाद उनके पिता नवनिधि शर्मा का यह आरोप अब इस मामले के केंद्र में है. बीती 12 मई की रात कटारा हिल्स स्थित घर में ट्विशा का शव मिला था. उनके परिवार ने हत्या का आरोप लगाया है तो वहीं ट्विशा के ससुराल पक्ष का दावा है कि उन्होंने ख़ुदकुशी की.
पुलिस ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास गिरिबाला सिंह, जो रिटायर्ड जज हैं, उनके ख़िलाफ़ दहेज के लिए प्रताड़ना और दहेज मांगने से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया है.
ट्विशा के व्हाट्सऐप चैट्स में उन्होंने अपने परिवार से कई मर्तबा ससुराल पक्ष और पति समर्थ सिंह द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत की थी. वहीं ससुराल पक्ष ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है.
(कहानी में दिए गए कुछ विवरण विचलित कर सकते हैं)
आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार की जीवन आस्था हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.
शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह 'दम घुटना' बताई गई है, लेकिन शरीर पर कई चोटों के निशान भी दर्ज किए गए हैं.
मामले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख एसीपी रजनीश कश्यप कौल ने बीबीसी से कहा, "मृतका के परिजनों ने प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों के निशान भी दर्ज हैं, जिनकी जांच की जा रही है."
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उन्होंने कहा, "परिवार ने कई व्हाट्सऐप चैट्स और अन्य जगहों पर ट्विशा द्वारा प्रताड़ना की बातचीत और आरोप के साक्ष्य दिए गए हैं. उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया गया है."
दूसरी ओर, सेवानिवृत्त जज और ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह इन आरोपों को ख़ारिज करती हैं.
उन्हें अग्रिम ज़मानत मिल गई थी और ट्विशा के पति समर्थ सिंह की अग्रिम ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी गई है. वो फ़िलहाल फ़रार हैं.
गिरिबाला सिंह ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "ऐसी परिस्थितियों में किसी आम व्यक्ति को भी ज़मानत मिल जाती," और दावा किया कि ट्विशा मानसिक और चिकित्सकीय समस्याओं से गुज़र रही थीं.
हालांकि एसीपी रजनीश कश्यप कौल ने बीबीसी से यह भी कहा कि कोर्ट ने मुख्य अभियुक्त समर्थ सिंह की अग्रिम ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों के निशान, कथित व्हाट्सऐप चैट्स, परिवार द्वारा लगाए गए सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप और पति समर्थ सिंह के फ़रार होने के बाद इस मामले को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है.
गिरिबाला सिंह के बाद मंगलवार को ट्विशा शर्मा के परिजनों ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके ट्विशा के ससुराल पक्ष पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. ट्विशा के पिता ने उनकी सास गिरिबाला पर इस मामले में अभियुक्त होते हुए खुलेआम बयानबाज़ी को लेकर टिप्पणी की है.

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भाई मेजर हर्षित शर्मा ने क्या सवाल उठाए?
ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने कहा, "हम यहाँ प्रक्रिया पर सवाल उठाने आए हैं. पुलिस को पहली कॉल हमने की थी, उन्होंने नहीं. उनका दावा है कि वो ट्विशा को बचाने की जल्दी में थे. जो वीडियो सामने आया है वो साफ़ तौर पर दिखाता है कि गिरिबाला सिंह काफ़ी शांत तरीक़े से सीढ़ियों से ऊपर-नीचे जा रही थीं. उनके पास न्यायिक प्रक्रिया की सारी जानकारी थी. वो पुलिस को कॉल कर सकती थीं. उन्होंने पुलिस को कॉल क्यों नहीं किया?"
"हमें यहाँ पहुँच कर एफ़आईआर दर्ज करने में तीन दिन लगे हैं. 15 मई सुबह ढाई बजे हमारी एफ़आईआर लॉज हुई है. उससे पहले ही उनकी एंटीसिपेट्री बेल की अर्ज़ी भी आ चुकी थी."
हर्षित शर्मा ने कहा, "उन्हें इस आधार पर ज़मानत मिलना कि वह 63 साल की प्रतिष्ठित महिला हैं और उन्हें किसी के लिए ख़तरा नहीं माना गया, उनके उन कामों को सही नहीं ठहराता जो साफ़तौर पर उनकी बनाई जा रही छवि के बिल्कुल उलट हैं."
"एक तथाकथित 'नॉन-थ्रेट' महिला कोर्ट परिसर के अंदर मेरे 61 साल के पिता को धमकाने के लिए लोगों को भेज रही है. एक 'नॉन-थ्रेट' महिला लोगों को मेरे परिवार को धमकाने के लिए भेज रही है, यह कहकर कि 30 लोग हमें पीटेंगे."
उन्होंने कहा, "मेरी दिवंगत बहन के बारे में इस तरह की टिप्पणी करने का अधिकार उन्हें किसने दिया? हम यह सवाल क्यों नहीं पूछ रहे कि समर्थ सिंह कहां है? वह फ़रार क्यों है? ये सवाल क्यों नहीं पूछे जा रहे? दूसरे पोस्टमॉर्टम की मांग क्यों नहीं की जा रही?"
ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने कहा, "न्याय प्रक्रिया की ओर ध्यान दीजिए क्योंकि ये न्याय नहीं मिल रहा क्योंकि ये बहुत रसूख़दार लोग हैं. कल पुलिस ने भी अपनी दलील में कहा कि ये बहुत रसूख़दार लोग हैं, इनको बेल नहीं दी जाने चाहिए. इस आधार पर इनके बेटे की बेल रद्द कर दी गई है. एक अभियुक्त एंटिसिपेट्री बेल लेकर घूम रहा है और सरेआम मृतका पर आरोप लगा रहा है, ये अपराध है."
क्या है पूरा मामला

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ट्विशा शर्मा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं. परिवार के मुताबिक़, उनकी मुलाक़ात भोपाल के वकील समर्थ सिंह से 2024 में एक डेटिंग ऐप के ज़रिए हुई थी. दोनों की दिसंबर 2025 में शादी हुई थी.
एफ़आईआर के मुताबिक़, शादी के बाद से ही ट्विशा और उनके ससुराल पक्ष के बीच तनाव शुरू हो गया था.
ट्विशा के परिवार का आरोप है कि शादी में दहेज देने के बावजूद उन्हें लगातार ताने दिए जाते थे कि शादी उनके "स्टैंडर्ड" के हिसाब से नहीं हुई.
एफ़आईआर में परिवार ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद ट्विशा को ख़र्च के लिए पैसे नहीं दिए जाते थे और उनके माता-पिता ऑनलाइन पैसे भेजते थे.
इसी एफ़आईआर के अनुसार, अप्रैल 2026 में ट्विशा गर्भवती थीं. परिवार का आरोप है कि पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह उनके चरित्र पर सवाल उठाते थे.
परिवार का कहना है कि मई के पहले सप्ताह में कथित दबाव के बाद ट्विशा का गर्भपात कराया गया.

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परिवार के मुताबिक़12 मई की रात क़रीब 9:41 बजे ट्विशा ने अपने पिता को व्हाट्सऐप कॉल किया.
उनके पिता नवनिधि शर्मा का कहना है कि उनकी पत्नी ट्विशा से बात कर रही थीं तभी पीछे से समर्थ सिंह की आवाज़ आई और अचानक फ़ोन कट गया.
परिवार का कहना है कि इसके बाद उन्होंने करीब 20 मिनट तक लगातार फ़ोन किए लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया.
बाद में गिरिबाला सिंह ने फ़ोन उठाया और कहा, "शी इज़ नो मोर."
पुलिस के अनुसार, ट्विशा को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना बताया गया. रिपोर्ट में शरीर पर अन्य हिस्सों में कई चोटों का भी ज़िक्र है.
मामले में भोपाल पुलिस ने छह सदस्यीय एसआईटी बनाई है.
ट्विशा के परिजन क्या आरोप लगा रहे हैं

ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा और उनके भाई मेजर हर्षित शर्मा का आरोप है कि 'यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या' का मामला है.
बीबीसी से बातचीत में नवनिधि शर्मा ने कहा, "पुलिस ने खुद अदालत में कहा है कि आरोपी प्रभावशाली लोग हैं और सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं. फिर पहले उन्हें ज़मानत कैसे मिल गई?"
उन्होंने आरोप लगाया कि अभियुक्त परिवार का न्यायपालिका, लोकायुक्त और चिकित्सा क्षेत्र में प्रभाव है.
नवनिधि शर्मा ने कहा, "हम एक बहुत बड़े सिस्टम से लड़ रहे हैं. मेरी ट्विशा बहुत टैलेंटेड थी. शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोगों ने उसे हमेशा प्रताड़ित किया…"
उनका आरोप है कि घटना के बाद सबूतों से छेड़छाड़ की गई.
उन्होंने कहा, "ट्विशा की सास कह रही हैं कि उन लोगों ने ट्विशा को सीपीआर देने की कोशिश की थी, लेकिन मैं ये पूछना चाहता हूँ की जब मेरी बेटी ने कथित तौर पर दूसरी मंज़िल पर ख़ुदकुशी की तो उसे नीचे लाकर कैमरे के सामने सीपीआर देने का क्या मतलब है?"
नवनिधि शर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि घर के पास पुलिस चौकी होने के बावजूद पुलिस को तुरंत सूचना क्यों नहीं दी गई?
उन्होंने कहा, "ये सब लोग क़ानून के जानकार हैं, क्या इन्हें नहीं मालूम कि ऐसे मामले में तुरंत पुलिस को बुलाना चाहिए? जहाँ इनका घर है वहाँ से कुछ ही मीटर दूर पुलिस चौकी है लेकिन पुलिस को उस वक़्त कोई सूचना नहीं दी गई. आख़िर ये लोग क्या छुपाना चाहते थे?"
पोस्टमार्टम पर सवाल

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी परिवार लगातार सवाल उठा रहा है.
नवनिधि शर्मा ने बीबीसी से कहा, "अगर यह आत्महत्या थी तो शरीर पर इतने निशान कैसे आए?"
उन्होंने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा की लंबाई ग़लत दर्ज है और मृत्यु कैसे हुई इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है.
33 वर्षीय ट्विशा शर्मा के परिवार के मुताबिक़, उन्होंने एमबीए की पढ़ाई की थी और मार्केटिंग व कम्युनिकेशन क्षेत्र में काम कर रही थीं. उन्होंने दिल्ली और दूसरे शहरों में कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया था.
ट्विशा की पहचान सिर्फ़ कॉर्पोरेट दुनिया तक सीमित नहीं थी. उनके पिता बताते हैं कि ट्विशा मॉडलिंग, अभिनय और ब्यूटी पेजेंट्स से भी जुड़ी रही थीं.
नवनिधि शर्मा ने कहा, "मेरी बेटी मिस पुणे रह चुकी थी, कई बड़ी कंपनियों के लिए एडवर्टाइज़ भी कर चुकी थी और एक तेलुगु फ़िल्म में भी काम कर चुकी थी. फिर कोविड के बाद उसने कहा कि पापा अब कोई बेहतर स्टेबल जॉब करूँगी. उसने इस क्षेत्र में भी अपनी जगह बना ली थी."
ट्विशा के परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि शादी के बाद ट्विशा को 'मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित' किया गया. उनके मुताबिक़, ट्विशा वापस नोएडा लौटना चाहती थीं.
व्हाट्सऐप चैट्स में ट्विशा ने अपनी मां को लिखा था, "मुझे बहुत ज़्यादा घुटन हो रही है मां." एक अन्य संदेश में उन्होंने कथित तौर पर लिखा, "मेरी ज़िंदगी नरक बन गई है."
परिवार का कहना है कि अभियुक्त पक्ष अब ट्विशा के 'चरित्र और मानसिक स्थिति' को लेकर आरोप लगा रहा है ताकि मामले का रुख़ बदला जा सके.
नवनिधि शर्मा ने कहा, "मेरी बेटी को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है."
सास जज गिरिबाला सिंह ने क्या कहा

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सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और अदालत में दाख़िल अपनी अग्रिम ज़मानत याचिका में ट्विशा के माता पिता द्वारा लगाए गए आरोपों से इनकार किया है.
उन्होंने कहा कि ट्विशा और समर्थ सिंह ने अपनी मर्ज़ी से शादी की थी और दोनों परिवारों के बीच "काफ़ी अंतर" होने के बावजूद उन्होंने रिश्ते को स्वीकार किया था.
गिरिबाला सिंह ने दावा किया, "ट्विशा मानसिक और चिकित्सकीय समस्याओं से गुज़र रही थीं, उनका इलाज चल रहा था."
ट्विशा के माता-पिता द्वारा लगाए गए ससुराल पक्ष के प्रभावशाली और दबाव बनाने की कोशिश करने के आरोपों को ख़ारिज करते हुए गिरिबाला सिंह ने कहा कि उन्हें 'जो अग्रिम ज़मानत मिली उसका उनके न्यायिक पृष्ठभूमि से कोई संबंध नहीं है.'
पुलिस ने क्या कहा

मामले की जांच के लिए भोपाल पुलिस ने छह सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, जिसकी अगुवाई एसीपी रजनीश कश्यप कौल कर रहे हैं.
पुलिस ने ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के ख़िलाफ़ दहेज मृत्यु, प्रताड़ना और दहेज निषेध क़ानून के तहत मामला दर्ज किया है.
बीबीसी से बातचीत में एसीपी रजनीश कश्यप कौल ने कहा, "क्योंकि शादी के करीब साढ़े पांच महीने के भीतर ही महिला की मौत हुई है, इसलिए मामले की जांच दहेज मृत्यु से जुड़े प्रावधानों के तहत की जा रही है. मृतका के परिजनों ने भी प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं."
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों के निशानों को लेकर एसीपी रजनीश कश्यप कौल ने कहा, "पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों के निशान भी दर्ज हैं, जिनकी जांच की जा रही है."
उन्होंने कहा कि पुलिस ने अदालत में यह भी पक्ष रखा है कि आरोपियों को ज़मानत मिलने की स्थिति में साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका हो सकती है.
उनके मुताबिक़, "मुख्य आरोपी समर्थ सिंह हैं. हमने अदालत में यह पक्ष रखा है कि आरोपियों को ज़मानत मिलने की स्थिति में साक्ष्यों से छेड़छाड़ हो सकती है और इसी आधार पर समर्थ सिंह की ज़मानत की याचिका ख़ारिज की गई है. इसके अलावा घटना के बाद आरोपी पक्ष ने पुलिस को तत्काल सूचना भी नहीं दी, जबकि यह पक्ष क़ानून और प्रक्रिया की जानकारी रखने वाले लोग हैं.".
मामले में शुरुआती जांच पर भी सवाल उठे हैं. परिवार ने आरोप लगाया है कि कथित फंदे को पोस्टमार्टम के दौरान प्रस्तुत नहीं किया गया था.
इस पर एसीपी ने कहा, "तत्कालीन जांच अधिकारी द्वारा सामग्री नहीं भेजने के संबंध में जांच की जा रही है. हालांकि एफ़एसएल टीम ने उस फंदे को घटनास्थल से ही ज़ब्त किया था लेकिन वह कैसे पोस्टमार्टम के लिए नहीं पहुँचा, इसकी भी जांच की जा रही है".
पुलिस ने समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के लिए 10 हज़ार रुपये इनाम की घोषणा की है.
पुलिस का कहना है कि मामले में दहेज प्रताड़ना, शारीरिक हिंसा और सबूत मिटाने के आरोपों समेत सभी पहलुओं की जांच की जा रही है.
ट्विशा के परिवार ने मामले में नए सिरे से पोस्टमार्टम कराने की मांग की है. उनका कहना है कि दूसरा पोस्टमार्टम एम्स दिल्ली या बाहर किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्थान में कराया जाना चाहिए.
ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने कहा, "मैं हार्ट का मरीज़ हूं, लेकिन अपनी बेटी के लिए न्याय मांगने के लिए दिन-रात भागदौड़ कर रहा हूं."
उन्होंने आगे कहा कि, "हमारे लिए तो सबकुछ छूट गया है. मेरी बेटी के साथ बहुत जीते जी भी ग़लत हुआ और अब मृत्यु के बाद भी उसे इंसाफ़ ना मिले इसकी पूरी कोशिश की जा रही है. हम तो सिर्फ़ बेटी को इंसाफ़ मिले इसलिए लड़ रहे हैं और बेटी को न्याय दिलाकर ही मानेंगे."
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