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बदबू का आपकी सेहत पर क्या असर पड़ता है?
- Author, क्रिस मार्शल
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
- पढ़ने का समय: 9 मिनट
आपकी ओर आती हुई बदबू सिर्फ आपको उबकाई ही नहीं दिलाती, यह आपके शरीर और दिमाग को भी प्रभावित कर सकती है.
एलेन कॉर्नर के लिए, गर्मियों के दिनों में अपने बगीचे में कदम रखना असहनीय हो सकता है. वह इसे 'खुले कचरा ट्रक के पीछे चलने' जैसा बताती हैं.
इंग्लैंड के वेस्टबरी शहर में अपने घर की सभी खिड़कियां बंद रखने के बावजूद, रिटायर्ड टीचर कॉर्नर कहती हैं कि पास के वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट से आने वाली मतली पैदा करने वाली बदबू से वह अक्सर बच नहीं पातीं.
कॉर्नर ने बताया, "हम अपने बगीचे का इस्तेमाल नहीं कर सकते या टहलने नहीं जा सकते, आपको लगता है जैसे आपको उल्टी हो जाएगी."
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कभी न कभी, हम सभी ने कचरा फेंकते समय सड़ते हुए कचरे की बदबू महसूस की है, कूड़े के ढेर के पास से गुजरते हुए या किसी फैक्ट्री से आने वाली खराब गंध का सामना किया है.
जरा सोचिए, अगर आपको लगातार ऐसी बदबू के साथ रहना पड़े, तो क्या होगा?
फिर भी हम इस तरह के 'गंध प्रदूषण' के सेहत पर असर के बारे में बहुत कम ध्यान देते हैं. ख़राब गंध को अक्सर व्यक्तिगत या मामूली मानकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है.
शोध से पता चलता है कि लोग आमतौर पर अपनी सूंघने की क्षमता को देखने, सुनने, छूने और स्वाद से कम अहमियत देते हैं. अमेरिका के कुछ कॉलेज छात्रों ने तो यह भी माना कि वे अपनी सूंघने की क्षमता खोने के बजाय अपना फोन खोना पसंद करेंगे.
यह सिर्फ असुविधा की बात नहीं है जो लोग खराब गंध के साथ रहने पर महसूस करते हैं. अध्ययन बताते हैं कि शहरी इलाक़ों में अप्रिय गंध सिरदर्द, मतली, सांस लेने में कठिनाई या नींद में बाधा जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी होती हैं.
इनका मानसिक और शारीरिक असर लंबे समय तक रह सकता है.
ख़तरे की गंध
सूंघने की क्षमता आंशिक रूप से एक शुरुआती चेतावनी संकेत के रूप में विकसित हुई है, ताकि हम बीमार या संक्रमित होने से बच सकें. जो चीज सड़ी हुई गंध देती है, उसमें अक्सर हानिकारक बैक्टीरिया होते हैं.
स्वीडन के स्टॉकहोम स्थित कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट में गंध विज्ञान के प्रोफेसर जोहान लुंडस्ट्रॉम कहते हैं कि सूंघने की क्षमता हमारे इम्यून सिस्टम का हिस्सा है.
लुंडस्ट्रॉम कहते हैं, "ये एक बचाव प्रणाली की तरह काम करती है, जो हमें पर्यावरण में ख़तरे के बारे में चेतावनी देना सिखाती है."
उनके शोध से यह भी पता चला है कि गंध के संकेत नाक के ज़रिए अंदर जाने के लगभग 300 मिलीसेकंड के भीतर दिमाग में प्रोसेस हो जाते हैं. शोध के दौरान ख़राब गंध के संपर्क में आए लोगों ने तेज शारीरिक प्रतिक्रिया दिखाई और स्वाभाविक रूप से बदबू वाली जगह से दूर हट गए.
सूंघने की यह रक्षात्मक प्रवृत्ति किसी को यह यक़ीन दिलाना आसान बना देती है कि कोई गंध खराब है, भले ही वह सामान्य रूप से अच्छी मानी जाती हो.
लुंडस्ट्रॉम कहते हैं, "अगर हम किसी गंध को पहचान नहीं पाते, तो वह लगभग हमेशा नकारात्मक अनुभव होती है."
सेहत पर असर
सूंघना सिर्फ ख़तरे का पता लगाने तक सीमित नहीं है. गंध का लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर गहरा असर पड़ सकता है.
वैज्ञानिकों ने दिखाया है कि अच्छी गंध हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि यह दिमाग के उन हिस्सों को सक्रिय करती है जो भावनाओं और यादों से जुड़े होते हैं.
यह भी प्रमाण हैं कि इसके विपरीत, खराब गंध हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है, हालांकि वैज्ञानिक अभी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि 'गंध प्रदूषण' और सीधे शारीरिक प्रभाव के बीच सटीक संबंध क्या है.
2021 के एक अध्ययन में पाया गया कि खराब गंध से सिरदर्द या उल्टी जैसे लक्षणों के पीछे कुछ बायोलॉजिकल कारण हैं. उदाहरण के लिए, खराब गंध 'वेगस नर्व' को सक्रिय कर सकती है, जो दिमाग और आंत को जोड़ने वाली तंत्रिका प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
इससे व्यक्ति को मतली महसूस हो सकती है. लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि स्पष्ट निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए और शोध की ज़रूरत है.
हमारे स्वास्थ्य पर प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करता है कि हम उस गंध को लेकर कितने चिंतित हैं.
अमेरिका के फिलाडेल्फिया स्थित 'मोनेल केमिकल सेंस सेंटर' की मनोवैज्ञानिक पामेला डाल्टन कहती हैं, "स्वास्थ्य पर प्रभाव व्यक्ति की उस गंध के प्रति नापसंद या डर के जरिए होता है."
उन्होंने 32 साल तक गंध के स्वास्थ्य प्रभावों का अध्ययन किया है. जितना अधिक आप किसी गंध को लेकर चिंतित होते हैं, उतना ही यह आपके स्वास्थ्य और जीवन पर असर डालती है.
जीवनशैली में बदलाव
लगातार रहने वाली ख़राब गंध जीवन के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है. यह लोगों को जीवनशैली में बदलाव करने के लिए मजबूर कर सकती है, जो आगे चलकर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं. इन्हें "मैलएडैप्टिव एक्शंस" कहा जाता है.
उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति गर्मियों में भी खिड़कियां बंद रखने या बाहर जाकर व्यायाम करने या दोस्तों के साथ समय बिताने से कतरा सकता है.
फिर भी, कुछ लोगों के लिए हल्की सी बदबू भी असहनीय हो सकती है. लेकिन उम्र, लिंग, एलर्जी और धूम्रपान जैसी जीवनशैली से जुड़े विकल्प भी यह तय करते हैं कि लोग गंध को कैसे महसूस करते हैं. ये संभव है कि लोग समय के साथ खराब गंध के आदी हो जाएं लेकिन लैंडफिल जैसी गंध को सहना जरूरी नहीं कि आसान हो जाए.
इसके विपरीत, सामान्य या अच्छी गंध के प्रति अभ्यस्त होना सामान्य है.
लुंडस्ट्रॉम कहते हैं, "एक बार जब आप किसी गंध को पहचान लेते हैं और समझ जाते हैं कि वह आपको नुकसान नहीं पहुंचाएगी, तो आप उसे महसूस करना बंद कर देते हैं."
यही वजह है कि इंसान की नाक एक ट्रिलियन गंध पहचान सकती है, फिर भी लोग उन चीजों की गंध का नाम बताने में कठिनाई महसूस करते हैं जो खतरनाक नहीं हैं.
शोध से पता चलता है कि हममें से आधे से भी कम लोग कॉफी या वनीला जैसी रोजमर्रा की गंध को सही पहचान पाते हैं.
बदबू से लड़ाई
कभी-कभी अक्सर हवा की दिशा के साथ बदबू आती-जाती रहती है या किसी इलाक़े के कुछ हिस्सों में ही महसूस होती है.
कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया में पर्यावरण मॉडलिंग और नीति की एसोसिएट प्रोफेसर अमांडा जियांग कहती हैं, "गंध बहुत स्थानीय हो सकती है. मैं एक ब्लॉक दूर रह सकती हूं और मुझे पता ही न चले कि पास वाला इलाका सड़ी मछली जैसी गंध दे रहा है."
उन्होंने वैंकूवर में गंध प्रदूषण के प्रभावों का अध्ययन किया है. लेकिन हर कोई इस बदबू को समान रूप से अनुभव नहीं करता. शहरों के कम आय वाले इलाके अक्सर बदबूदार लैंडफिल साइट्स या भारी उद्योगों के पास होते हैं.
यूरोप और ब्रिटेन में किए गए अध्ययन बताते हैं कि कुछ देशों में कचरा जलाने वाले प्लांट, लैंडफिल और ख़तरनाक कचरा स्थलों के पास कम आय वाले लोगों के रहने की अधिक संभावना है.
खराब गंध को लेकर शिकायतें बदलाव ला सकती हैं. सीवेज प्लांट से लेकर मछली प्रोसेसिंग फैक्ट्रियों तक, कई जगहों को स्थानीय लोगों के अभियान के बाद बंद करना पड़ा है.
दुनिया भर में गंध प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रयास बढ़ रहे हैं, हालांकि यह समान रूप से नहीं हैं.
उदाहरण के लिए, चिली में मछली चारे के प्लांट से आने वाली गंध पर नया नियम लागू किया गया है, जबकि लिथुआनिया में आवासीय इलाकों में कंपनियों की पैदा की जाने वाली बदबू की सीमा तय करने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं.
गंध के फ़ायदे
जो लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां खराब गंध होती है, उनके लिए जीवन मुश्किल हो सकता है, लेकिन एक बात सकारात्मक है कि अच्छी तरह काम करने वाली सूंघने की क्षमता अच्छे स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
शोध से पता चलता है कि जिन लोगों की सूंघने की क्षमता तेज होती है, वे खाने और यहां तक कि यौन जीवन का भी अधिक आनंद लेते हैं.
2018 के एक अध्ययन में 70 वयस्कों पर किए गए शोध में पाया गया कि जिन लोगों की सूंघने की क्षमता बेहतर होती है उन्हें सेक्स से अधिक संतुष्टि मिलती है. इसी शोध के मुताबिक महिलाओं ने सेक्स के दौरान अधिक बार ऑर्गैज्म होने की बात मानी.
पामेला डाल्टन कहती हैं, "मुझे खराब गंध से परेशानी नहीं होती क्योंकि इसका मतलब है कि मेरी सूंघने की क्षमता अच्छी तरह काम कर रही है."
दुनिया में पाँच प्रतिशत लोगों में सूंघने की क्षमता नहीं होती. इस स्थिति को एनोस्मिया कहा जाता है. ऐसे लोगों को कई तरह के स्वास्थ्य प्रभावों का सामना करना पड़ता है.
ऐसे लोगों से बातचीत में पता चलता है कि उन्हें भूख कम लगती है और खाने का आनंद न ले पाने के कारण उनका डायट भी गड़बड़ा सकती है.
लुंडस्ट्रॉम कहते हैं, "अगर आप अपनी सूंघने की क्षमता खो देते हैं, तो आपको महसूस होगा कि आपकी भूख कम हो गई है."
शोध से पता चलता है कि बुज़ुर्गों में सूंघने की कमज़ोर क्षमता 10 साल के भीतर मृत्यु के जोखिम को 46% तक बढ़ा सकती है. वैज्ञानिक अभी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसा क्यों होता है, हालांकि इसका संबंध हृदय रोग, अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से जोड़ा जा रहा है.
डाल्टन कहती हैं, "एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जिसने दशकों तक गंध पर शोध किया है, मुझे खराब गंध से परेशानी नहीं होती क्योंकि इसका मतलब है कि मेरी सूंघने की क्षमता अच्छी तरह काम कर रही है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.