You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
वेदांता पावर प्लांट विस्फोट: शुरुआती सरकारी रिपोर्ट में लापरवाही का आरोप, अनिल अग्रवाल पर एफ़आईआर
- Author, आलोक पुतुल
- पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिन्दी के लिए
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
छत्तीसगढ़ के सक्ति ज़िले स्थित वेदांता के पावर प्लांट में हुए विस्फोट के बाद अब समूह के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल समेत 19 लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है.
सक्ति ज़िला पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया प्लांट प्रबंधन की लापरवाही सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है. इस हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है.
सक्ती ज़िले के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने कहा है, "प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में इसे महज एक तकनीकी दुर्घटना नहीं, बल्कि गंभीर प्रबंधन लापरवाही का परिणाम बताया गया है. इसी आधार पर पुलिस ने अनिल अग्रवाल समेत 19 लोगों के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज की है."
इस हादसे की वजह के बारे में राज्य सरकार ने कहा है कि घटना की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक़ कम समय में उत्पादन क्षमता बढ़ाए जाने की कोशिश के दौरान पावर प्लांट का बॉयलर फट गया था.
राज्य सरकार के औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के जांच अधिकारी उज्ज्वल गुप्ता ने बीबीसी से कहा, "आरंभिक तौर पर कहा जा सकता है कि कम समय में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिश की जा रही थी, जिसके कारण पावर प्लांट का बॉयलर फट गया."
उन्होंने यह जानकारी भी दी है कि जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि बॉयलर फटने की इस घटना के दो दिन पहले से ही पावर प्लांट में कुछ तकनीकी समस्या आ रही थी. लेकिन उन तकनीकी समस्याओं को नज़रअंदाज किया गया.
हमने बिजली उत्पादन क्षमता को कम समय में बढ़ाए जाने के कारण दुर्घटना की आशंका को लेकर वेदांता के अधिकारियों से भी संपर्क किया, लेकिन हमें उनका कोई जवाब नहीं मिल पाया.
इस दुर्घटना में 15 मज़दूर घायल भी हुए हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है.
इस घटना के बाद अनिल अग्रवाल ने एक्स पर पोस्ट किए गए मैसेज में लिखा था, "छत्तीसगढ़ के सिंगतिराई प्लांट में हुई अत्यंत दुखद दुर्घटना से मैं बहुत व्यथित हूं. इस हादसे से प्रभावित हर व्यक्ति मेरे परिवार का हिस्सा है. आपके आँसू मेरे हैं, आपका दर्द मेरा अपना है. इस दुख की घड़ी में मैं पूरी तरह आपके साथ खड़ा हूं. हमारी ओर से आपको हर संभव सहायता और पूरा समर्थन मिलेगा. इस घटना की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है. सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया जाएगा. इस मामले की तह तक जाने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे."
इधर, वेदांता प्रबंधन ने दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को 35 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है.
इसके अलावा राज्य सरकार ने मृतक के परिजनों को 5 लाख और केंद्र सरकार ने 2 लाख रुपये देने की घोषणा की है.
'तकनीकी गड़बड़ियों पर ध्यान नहीं दिया गया'
इससे पहले गुरुवार को उद्योग और श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने अस्पतालों में भर्ती पीड़ितों से मुलाकात की थी.
उन्होंने जांच रिपोर्ट में पावर प्लांट प्रबंधन की लापरवाही को लेकर पूछे गए सवाल को लेकर बीबीसी से कहा, "मामले की कई स्तर पर जांच की जा रही है. राज्य शासन ने दंडाधिकारी जांच के भी आदेश दिए हैं. हमारी पहली प्राथमिकता पीड़ितों की हरसंभव मदद करना है. मैं अभी भी घायलों से मिलने जा रहा हूं."
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी पावर प्लांट का दौरा किया और प्रबंधन से हादसे के बारे में जानकारी ली.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
सक्ती ज़िले में एथेना छत्तीसगढ़ पावर लिमिटेड की 600-600 मेगावॉट की क्षमता की दो यूनिटों वाले इस निर्माणाधीन बिजली संयंत्र का अधिग्रहण जुलाई 2022 में वेदांता लिमिटेड छत्तीसगढ़ थर्मल पावर प्लांट ने किया था.
इसी बिजली संयंत्र की पहली यूनिट में बिजली उत्पादन का काम पिछले साल जुलाई में शुरू हुआ, जहां यह दुर्घटना हुई.
हालांकि अभी ये सरकार की शुरुआती जांच रिपोर्ट ही है जिसमें कहा गया है कि कम समय में उत्पादन क्षमता बढ़ाए जाने की कोशिश के दौरान पावर प्लांट का बॉयलर फट गया था.
लेकिन ऐसी स्थिति अगर हो तो दुर्घटना होने की आशंका क्यों बढ़ जाती है?
बिजली संयंत्रों के जानकार मनोज त्रिवेदी का कहना है कि किसी भी थर्मल पावर प्लांट में लोड बढ़ाने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से की जाती है, ताकि बॉयलर के भीतर दबाव, तापमान और ईंधन-हवा मिश्रण संतुलित बना रहे.
वो कहते हैं, ''जब बहुत कम समय में लोड तेजी से बढ़ाया जाता है, तो बॉयलर ट्यूब्स, फर्नेस वॉल और प्रेशर पार्ट्स पर अचानक अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे अंदरूनी विस्फोट की आशंका बढ़ जाती है.''
हालांकि इस दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों का आरोप है कि 'दुर्घटना से दो दिन पहले से ही पावर प्लांट में कई गड़बड़ियां सामने आ रही थीं और उन गड़बड़ियों की ओर ध्यान दिया जाता तो यह दुर्घटना नहीं होती.'
इस हादसे में मारे गए उत्तरप्रदेश के सोनभद्र के रहने वाले पप्पू कुमार के जीजा, दीपक कुमार बुधवार को तड़के अस्पताल पहुंचे, लेकिन अपने परिजन के शव का पता उन्हें दोपहर में चल पाया.
उन्होंने पावर प्लांट में काम करने वाले पप्पू कुमार के सहकर्मियों से बातचीत के बाद आरोप लगाया कि काम के दौरान सुरक्षा के इंतजाम अधूरे थे.
उन्होंने दावा किया,"पावर प्लांट में गड़बड़ी की खबर थी, उसके बाद भी प्लांट का काम रोका नहीं गया. अगर इसे समय पर रोक लिया जाता तो यह दुर्घटना ही नहीं होती."
वेदांता पर लापरवाही का आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता और आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका शुक्ला ने मामले की जांच गंभीरता से करने की मांग की है.
उन्होंने कहा, "2009 में कोरबा में वेदांता की चिमनी बन रही थी, जिसमें लापरवाही के कारण 40 मज़दूर मारे गए थे. वह राज्य बनने के बाद की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना थी. उसके बाद अब सक्ती में भी, कंपनी की लापरवाही से 20 मज़दूर मारे गए हैं. अगर ऐसे मामलों की सख्ती से जांच करके दोषियों पर कार्रवाई होती तो मज़दूरों की जान नहीं जाती."
साल 2010 में लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध तमाम कंपनियों की तुलना में वेदांता रिसोर्सेज के अंतर्गत सबसे अधिक 67 मौतें दर्ज की गई थीं.
इसी पृष्ठभूमि में छत्तीसगढ़ के कोरबा चिमनी गिरने की घटना भी सामने आई थी, जिसमें 40 मजदूरों की मौत हुई थी. इन मौतों का उल्लेख नहीं किए जाने के कारण, ब्रिटिश सेफ़्टी काउंसिल ने कंपनी को दिया गया सुरक्षा पुरस्कार वापस ले लिया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित