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बातचीत क्यों टूटी? अमेरिकी और ईरानी दलों के इस्लामाबाद पहुंचने से लेकर वेंस के एलान तक क्या-क्या हुआ
- Author, रूहान अहमद
- पदनाम, बीबीसी उर्दू, इस्लामाबाद
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
"यह हमारा अंतिम और बेस्ट ऑफ़र है, अब देखना यह है कि क्या ईरानी इसे क़बूल करते हैं. शुक्रिया." इसके साथ ही अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपने सामने रखी मेज़ को दो बार थपथपाया और प्रेस कॉन्फ़्रेस ख़त्म कर दी.
पाकिस्तानी राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे चली बातचीत बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई.
इस बात की जानकारी अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने दी, जो बातचीत के लिए पाकिस्तान आए थे. रविवार सुबह 6 बजे के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेस में जेडी वेंस ने कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच फ़ासला कम करने और समझौता कराने की पूरी कोशिश की, लेकिन "बुरी ख़बर यह है कि हम किसी समझौते तक नहीं पहुंच सके."
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह ख़बर अमेरिका के लिए उतनी बुरी नहीं है जितनी ईरान के लिए है, "कोई समझौता नहीं हुआ है और हम अमेरिका वापस लौट रहे हैं."
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पाकिस्तान के कहने पर अमेरिका और ईरान दो हफ़्ते के संघर्ष विराम पर राज़ी हुए थे और दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए इस्लामाबाद आए थे. दोनों पक्षों के बीच बातचीत इस्लामाबाद के सेरेना होटल में हुई.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने बताया कि बातचीत बेनतीजा रही, लेकिन उन्होंने यह साफ़ नहीं किया कि समझौता न होने का दो हफ़्ते के अस्थायी संघर्ष विराम पर क्या असर पड़ेगा.
प्रेस कॉन्फ़्रेस के क़रीब दो घंटे बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने भी प्रेस कॉन्फ़्रेस की और कहा कि पाकिस्तान अमेरिका-ईरान बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहेगा, "यह ज़रूरी है कि दोनों पक्ष संघर्ष विराम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जारी रखें."
बातचीत क्यों टूटी?
अमेरिका और ईरान शांति वार्ता की नाकामी के लिए अलग-अलग वजहें बता रहे हैं.
बातचीत के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेस में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, "हमने बहुत साफ़ कर दिया था कि हमारी 'रेड लाइन्स' क्या हैं, हम किन बातों पर समझौता कर सकते हैं और किन पर नहीं."
जेडी वेंस के मुताबिक़, "और उन्होंने (ईरान) तय किया है कि वे हमारी शर्तें क़बूल नहीं करेंगे."
इस मौके पर पत्रकारों ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति से पूछा, "कृपया साफ़-साफ़ बताइए कि किन शर्तों को ख़ारिज किया गया?"
जवाब में जेडी वेंस ने कहा कि वह बंद कमरे में 21 घंटे चली बातचीत की पूरी जानकारी नहीं देंगे, लेकिन "सीधी बात यह है कि हम उनसे (ईरान से) यह भरोसा चाहते हैं कि वे परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे और ऐसी क्षमता हासिल करने के लिए ज़रूरी उपकरण भी नहीं जुटाएंगे."
"यह अमेरिकी राष्ट्रपति का मुख्य लक्ष्य है और हमने बातचीत के ज़रिए इसे हासिल करने की कोशिश की."
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि ईरान की यूरेनियम संवर्धन क्षमता पहले ही नष्ट की जा चुकी है, "लेकिन क्या हमें ईरान में यह इच्छा दिख रही है कि वे कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे? अभी तक हमें ऐसी इच्छा नहीं दिखी है."
एक सवाल के जवाब में जेडी वेंस ने कहा कि बातचीत के दौरान ईरान की फ़्रीज़ संपत्तियों पर भी चर्चा हुई, लेकिन हम उस मुकाम तक नहीं पहुंच सके जहां ईरान हमारी शर्तें मान लेता.
"मुझे लगता है कि हमने काफ़ी लचीलापन दिखाया. राष्ट्रपति ने हमें कहा था कि आपको अच्छी नीयत से बातचीत में जाना है और समझौते तक पहुंचने की पूरी कोशिश करनी है. हमने वही किया, लेकिन अफ़सोस कि कोई प्रगति नहीं हुई."
जेडी वेंस से पूछा गया कि बातचीत के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से कितनी बार संपर्क किया और उन्होंने क्या कहा.
इस पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने जवाब दिया, "हम राष्ट्रपति के साथ लगातार संपर्क में थे, पिछले 21 घंटों में हमने कितनी बार बात की, मुझे नहीं पता... शायद दर्जन भर बार."
"हम एडमिरल कूपर (सेंटकॉम कमांडर), मार्को रुबियो (विदेश मंत्री), पीट हेगसेथ (रक्षा मंत्री) और पूरी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के संपर्क में थे. हम लगातार संपर्क में थे क्योंकि हम अच्छी नीयत से बातचीत कर रहे थे."
प्रेस कॉन्फ़्रेंस को ख़त्म करते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, "हम समझ बनाने के एक आसान सा प्रस्ताव दिया है. यह हमारी अंतिम और सबसे बेहतर पेशकश है, अब देखना यह है कि ईरानी इसे क़बूल करते हैं या नहीं."
इस संक्षिप्त प्रेस कॉन्फ़्रेस के बाद जेडी वेंस रावलपिंडी के नूर ख़ान एयर बेस गए और वहां से अमेरिका के लिए रवाना हो गए. उन्हें पाकिस्तान के सेना प्रमुख फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर, विदेश मंत्री इसहाक़ डार और गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने विदा किया.
ईरानी मीडिया- अमेरिका ने लचीलापन नहीं दिखाया
ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक़, अमेरिका की "ग़ैर-वाजिब मांगों" ने युद्ध ख़त्म करने की बातचीत को बाधित किया.
ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने टेलीग्राम पर पोस्ट में कहा, "ईरानी प्रतिनिधिमंडल की तरफ़ से कई कोशिशों के बावजूद, अमेरिकी पक्ष की ग़ैर-वाजिब मांगों ने बातचीत की प्रगति को रोक दिया. इस तरह बातचीत ख़त्म हो गई."
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात इस्लामाबाद पहुंचा, जबकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ़, जेरेड कुशनर और अन्य अमेरिकी अधिकारी शनिवार सुबह पाकिस्तानी राजधानी पहुंचे.
दोनों प्रतिनिधिमंडलों ने अलग-अलग पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, विदेश मंत्री इशाक़ डार और फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर समेत अन्य अधिकारियों से मुलाक़ात की.
इन बैठकों के बाद पाकिस्तानी सरकार के बयानों में कहा गया कि पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका जारी रखेगा और उम्मीद जताई गई कि शनिवार को होने वाली बातचीत विवाद के हल की दिशा में एक क़दम होगी.
पाकिस्तानी अधिकारियों ने बीबीसी उर्दू को बताया कि पहले ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडलों के बीच पाकिस्तान के ज़रिए संदेशों का आदान-प्रदान हुआ, जिसके बाद दोनों पक्षों ने पाकिस्तानी अधिकारियों की मौजूदगी में ढाई घंटे तक बातचीत की.
इसके बाद एक घंटे का विराम लिया गया और पेश की गई मांगों के तकनीकी पहलुओं पर ईरानी और अमेरिकी विशेषज्ञों के बीच चर्चा हुई.
पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक़, तकनीकी मुद्दों पर संदेशों का आदान-प्रदान देर रात तक जारी रहा.
ईरान की तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने दावा किया है कि बातचीत बेनतीजा रहने की वजह अमेरिकी रुख़ में लचीलापन न होना था.
तस्नीम के मुताबिक़, ईरानी संसद अध्यक्ष ग़ालिबाफ़ की अगुवाई में आए प्रतिनिधिमंडल ने सेना प्रमुख से कम से कम दो बार और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से एक बार मुलाक़ात की, "ताकि ज़रूरी इंतज़ाम किए जा सकें और बातचीत की शुरुआत में ही अमेरिका के वादाख़िलाफ़ी के ख़िलाफ़ औपचारिक विरोध दर्ज कराया जा सके."
ईरानी न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत 21 घंटे से ज़्यादा चली. इस दौरान ईरान ने बार-बार अपने प्रस्ताव पेश किए और "अमेरिकी पक्ष को हक़ीक़त की तरफ़ लाने की कोशिश की."
तस्नीम न्यूज़ एजेंसी का दावा है कि "हर चरण पर अमेरिका की ज़्यादा मांगों ने साझा ढांचा बनने में रुकावट डाली. अमेरिकी रुख़ में लचीलापन न होने की वजह से बातचीत बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई."
ख़बर में आगे कहा गया कि अगली बातचीत के दौर के समय, जगह और प्रक्रिया को लेकर अभी तक कोई कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है.
सेरेना होटल से एक किलोमीटर दूर शनिवार को माहौल?
बिरयानी, फ़्राइड राइस, चिकन, कबाब और मिठाइयां भी... ये मेन्यू इस्लामाबाद के सेरेना होटल का नहीं था, जहां शनिवार को ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडलों के बीच सीधी बातचीत हुई.
बल्कि यह नज़ारा एक किलोमीटर दूर जिन्ना कन्वेंशन सेंटर का था, जहां दुनिया भर से आए पत्रकारों के लिए ख़ास इंतज़ाम किए गए थे.
अगर कोई और मौक़ा होता तो पाकिस्तानी सरकार की इन तैयारियों की तारीफ़ होती, लेकिन वहां असल में देशी और विदेशी पत्रकार मौजूद थे, जो 'एक्सक्लूसिव' ख़बर की तलाश में आए थे और पाकिस्तान की मध्यस्थता में हो रही अमेरिका-ईरान बातचीत को कवर कर रहे थे.
होटल के बाहर सड़क पर बसें खड़ी थीं, जो पत्रकारों को जिन्ना कन्वेंशन सेंटर ले जा रही थीं, जहां सुरक्षा कारणों से गाड़ियों और ग़ैर-अधिकृत लोगों के आने पर रोक थी.
बस में विदेशी पत्रकारों का उत्साह साफ़ दिख रहा था.
मैंने एक विदेशी मीडिया संस्थान से जुड़ी महिला पत्रकार को फ़ोन पर यह कहते हुए भी सुना कि "सारी निगाहें पाकिस्तान पर हैं."
जानकारी की कमी लेकिन खाने की भरपूर व्यवस्था
कुछ देर बाद हम जिन्ना कन्वेंशन सेंटर पहुंचे, जहां दर्जनों देशी और विदेशी पत्रकार मौजूद थे. यह एक मेला था जहां हर तरह की भाषाएं सुनाई दे रही थीं. कोई अंग्रेज़ी में, कोई उर्दू में, कोई पश्तो में और कोई दूसरी यूरोपीय भाषाओं में कैमरे और फ़ोन पर रिपोर्टिंग कर रहा था.
मैं सोच रहा था कि यहां काम कैसे चलेगा. मैंने एक विदेशी महिला पत्रकार से पूछा, "क्या आपको पता है कि यहां से एक किलोमीटर दूर सेरेना होटल में ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडलों के बीच बैठकों में क्या हो रहा है?" उसने जवाब दिया, "शायद कन्वेंशन सेंटर के बाहर कुछ पत्रकारों को जानकारी हो, लेकिन यहां किसी को कुछ नहीं पता."
मैंने यही बात अलग-अलग शब्दों में दूसरे पत्रकारों से भी सुनी. पूरा दिन यहां बिताने के बावजूद मैंने कोई ऐसा सरकारी अधिकारी नहीं देखा जो पत्रकारों को बता सके कि अंदर क्या चल रहा है.
स्थानीय और विदेशी पत्रकार एक-दूसरे से बार-बार यही सवाल पूछते रहे कि क्या किसी को बातचीत के बारे में कुछ पता है? जानकारी की कमी और धीमे इंटरनेट ने पूरे दिन पत्रकारों को परेशान किया.
इस बीच सेरेना होटल में पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत जारी थी. उनसे जुड़ी ख़बरें लेते समय मेरा संपर्क भी धीमे इंटरनेट की वजह से कई बार टूट गया.
दुनिया भर से इस्लामाबाद आए पत्रकार यह दुआ करते दिखे कि उन्हें खाली हाथ वापस न लौटना पड़े. यह एक बड़ी ख़बर थी और संघर्ष का ख़त्म होना, इससे बड़ी ख़बर नहीं हो सकती.
इसके लिए कन्वेंशन सेंटर में बैठे पत्रकार बातचीत के स्थल सेरेना होटल पर नज़र बनाए हुए थे.
जिस ख़बर का पत्रकार इंतज़ार कर रहे थे, वह रविवार सुबह 6 बजे के बाद आई, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एलान किया कि बातचीत बेनतीजा रही.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.