ईरान युद्ध की वजह से कैसे दुनिया मंदी की चपेट में आ सकती है?

13 अप्रैल 2026 की पूर्व बग़दाद में एक ट्रक से सामान उतारता एक मज़दूर
इमेज कैप्शन, ईरान के साथ अमेरिका-इसराइल युद्ध के दौरान इराक़ समेत कई देशों में खाने के दामों में बढ़ोतरी हुई है
    • Author, डीयरबेल जॉर्डन
    • पदनाम, बिज़नेस रिपोर्टर
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका-इसराइल का ईरान के साथ युद्ध जारी रहता है और ऊर्जा की ऊंची क़ीमतें बनी रहती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी का ख़तरा बढ़ जाएगा.

अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में आईएमएफ़ ने कहा कि अगर तेल, गैस और खाने की क़ीमतें इस साल और अगले साल भी बढ़ती रहीं तो दुनिया की ग्रोथ दो प्रतिशत से नीचे गिर सकती है.

उसने कहा, "इसका मतलब वैश्विक मंदी के बेहद क़रीब पहुंचना होगा, जो 1980 के बाद केवल चार बार हुआ है,"

हाल ही में ऐसा कोविड की महामारी के दौरान देखने को मिला था.

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बीबीसी से कहा कि "थोड़ा सा आर्थिक दर्द" उस जोखिम को ख़त्म करने के लिए एक स्वीकार्य क़ीमत है, जिसमें ईरान पश्चिमी राजधानियों पर परमाणु हथियारों से हमला कर सकता है.

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बढ़ सकती है महंगाई और बेरोज़गारी

एक रिफ़ाइनरी
इमेज कैप्शन, कच्चे तेल की क़ीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव आ रहा है

युद्ध शुरू होने के छह सप्ताह से अधिक समय बाद ऊर्जा की क़ीमतें बढ़ गई हैं, क्योंकि होर्मुज़ स्ट्रेट का अहम शिपिंग मार्ग प्रभावी रूप से बंद हो गया. साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल हो गई.

आईएमएफ़ ने कहा, "फ़रवरी 2026 के अंत में मध्य पूर्व में शुरू हुए युद्ध की वजह से फिर एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था का पटरी से उतरने का ख़तरा है."

आईएमएफ़ ने कहा कि जो सबसे गंभीर स्थितियां वैश्विक मंदी का कारण बन सकती हैं, उनमें इस साल तेल की औसत क़ीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचना और 2027 में 125 डॉलर तक जाना शामिल है.

इन अनुमानों के आधार पर आईएमएफ़ ने कहा कि अगले साल महंगाई 6% तक पहुंच सकती है. इससे केंद्रीय बैंकों को क़ीमतों में बढ़ोतरी की रफ़्तार कम करने के लिए ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं.

आईएमएफ़ के मुख्य अर्थशास्त्री पीएरे-ओलिविएर गूरींचा ने बीबीसी से कहा कि लंबा चलने वाला संघर्ष महंगाई और बेरोज़गारी बढ़ाएगा. साथ ही कुछ देशों में खाद्य असुरक्षा पैदा करेगा.

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर संघर्ष आज ही ख़त्म हो जाए, तब भी तेल आपूर्ति पर असर 1970 के दशक के तेल संकट जितना बड़ा होगा.

1970 के दशक में अरब तेल उत्पादकों ने योम किप्पुर की जंग के दौरान इसराइल का समर्थन करने वाले अमेरिका और अन्य देशों पर प्रतिबंध लगाया था.

लेकिन गूरीचां ने कहा कि दुनिया अब तेल और जीवाश्म ईंधन पर कम निर्भर है, इसलिए उपभोक्ताओं पर असर कम गंभीर होगा.

ईरान संघर्ष के दौरान तेल की क़ीमत क़रीब 120 डॉलर तक पहुंच गई थी, लेकिन बाद में गिर गई और मंगलवार को कच्चे तेल का एक बैरल 98.85 डॉलर का था.

ब्रिटेन पर पड़ेगा बड़ा असर

किएर स्टार्मर
इमेज कैप्शन, आईएमएफ़ ने इस साल ब्रिटेन की वृद्धि का अनुमान 1.3% से घटाकर 0.8% कर दिया है

इसके अलावा आईएमएफ़ ने कहा कि मंदी का ख़तरा तभी बढ़ेगा जब गंभीर परिस्थितियां दो साल तक जारी रहें.

उसने कहा कि अगर अगले कुछ हफ्तों में संघर्ष सुलझ जाता है और इस साल के मध्य तक मध्य पूर्व से ऊर्जा उत्पादन और निर्यात सामान्य होने लगते हैं, तो 2026 के लिए वैश्विक वृद्धि 3.1% तक सीमित रहेगी.

यह पहले के 3.3% के अनुमान से कम है. अगले साल के लिए वैश्विक वृद्धि का आईएमएफ़ का अनुमान 3.2% पर रखा गया है.

अगर विकसित देशों की बात करें तो आईएमएफ़ ने अनुमान लगाया है कि ईरान युद्ध से पैदा हुए ऊर्जा झटके का सबसे अधिक असर ब्रिटेन पर पड़ेगा.

आईएमएफ़ ने इस साल ब्रिटेन की वृद्धि का अनुमान 1.3% से घटाकर 0.8% कर दिया है. हालांकि, उसे उम्मीद है कि बाद में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 1.3% की वृद्धि के साथ सुधरेगी.

आईएमएफ़ के अनुसार खाड़ी क्षेत्र के तेल निर्यातक देशों में इस साल आर्थिक वृद्धि में तेज़ गिरावट देखने को मिल सकती है.

ईरान और मध्य पूर्व के देशों का क्या होगा?

स्कॉट बेसेंट
इमेज कैप्शन, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का कहना है कि वह आर्थिक नुक़सान से ज़्यादा वैश्विक सुरक्षा के जोखिम को लेकर चिंतित हैं

संस्था का अनुमान है कि इस साल ईरान की अर्थव्यवस्था 6.1% तक सिकुड़ेगी. हालांकि, 2027 में 3.2% की वृद्धि का अनुमान है, बशर्ते अगले कुछ हफ़्तों में युद्ध समाप्त हो जाए.

क़तर जैसे देशों पर भी ईरान ने हमले किए हैं. क़तर दुनिया में एलएनजी का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है.

क़तर की रास लाफ़ान एलएनजी रिफ़ाइनरी पर भी हमला हुआ है. ये दुनिया की सबसे बड़ी एलएनजी रिफ़ाइनरी है. इसके कुछ समय तक पूरी तरह चालू होने की उम्मीद नहीं है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बीबीसी से कहा कि वह आर्थिक नुक़सान से ज़्यादा वैश्विक सुरक्षा के जोखिम को लेकर चिंतित हैं.

उन्होंने कहा, "अगर लंदन पर परमाणु हथियार से हमला हो जाए तो वैश्विक जीडीपी पर क्या असर होगा. मैं कह रहा हूं कि मैं अल्पकालिक पूर्वानुमानों से कम और दीर्घकालिक सुरक्षा को लेकर ज़्यादा चिंतित हूं."

बीबीसी पहले भी कह चुका है कि लंदन पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल का ख़तरा बहुत कम है.

बेसेंट ने कहा, "सबसे बड़ा जोखिम वही होता है जिसका आपको पता ही नहीं होता."

उन्होंने कहा कि अमेरिका और इसराइल के हमलों ने पश्चिमी देशों पर ईरानी परमाणु हमले के "टेल रिस्क" को ख़त्म कर दिया है.

आईएमएफ़ का अनुमान है कि 2026 में क़तर की अर्थव्यवस्था 8.6% सिकुड़ेगी, लेकिन अगले साल 8.6% की वृद्धि के साथ वापसी करेगी.

उसने यह भी अनुमान लगाया है कि ईरान का पड़ोसी इराक़ इस साल युद्ध के कारण आर्थिक झटका झेलेगा, जिसमें 6.8% की गिरावट होगी.

लेकिन 2027 में इसके 11.3% की वृद्धि के साथ उबरने की उम्मीद है.

कुछ देशों पर नहीं होगा असर

तेल के कुएं
इमेज कैप्शन, सऊदी अरब की वृद्धि 2026 में धीमी होगी, लेकिन अर्थव्यवस्था के 3.1% बढ़ने की उम्मीद है

आईएमएफ़ ने कहा कि किसी देश की आर्थिक मज़बूती कई कारणों पर निर्भर करेगी. इनमें ऊर्जा ढांचे को हुआ नुक़सान, होर्मुज़ पर निर्भरता और वैकल्पिक निर्यात मार्गों की उपलब्धता शामिल है.

उदाहरण के लिए सऊदी अरब के पास ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन है, जो फ़ारस की खाड़ी से लाल सागर तक जाती है और प्रतिदिन 70 लाख बैरल तक तेल पंप कर सकती है.

सऊदी अरब की वृद्धि 2026 में धीमी होगी, लेकिन अर्थव्यवस्था के 3.1% बढ़ने की उम्मीद है, और अगले साल 4.5% वृद्धि का अनुमान है.

आईएमएफ़ ने कहा कि अधिकांश मध्य पूर्व के तेल निर्यातकों में अगले साल सुधार की संभावना है.

आईएमएफ़ की रिपोर्ट के अनुसार, "इस धारणा के आधार पर कि आने वाले महीनों में ऊर्जा उत्पादन और परिवहन सामान्य हो जाएंगे, अगले साल सुधार की संभावना है."

लेकिन उसने चेतावनी दी है कि यह धारणा "संघर्ष की अवधि बढ़ने और नुक़सान के स्तर का पुनर्मूल्यांकन होने पर बदल सकती है."

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आईएमएफ़ ने इस साल चीन की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को भी घटाया है, और कहा है कि 2026 में इसकी वृद्धि 4.4% रहेगी, जो जनवरी के 4.5% के अनुमान से कम है.

2027 के लिए चीन की 4% वृद्धि का उसका अनुमान नहीं बदला गया है.

आईएमएफ़ के अनुसार तेल की क़ीमतों में उछाल से लाभ पाने वाला एक देश रूस है.

रूसी अर्थव्यवस्था के इस साल और अगले साल 1.1% बढ़ने की उम्मीद है, जो पहले के 0.8% और 1% के अनुमानों से अधिक है.

चार साल से अधिक समय पहले यूक्रेन पर पर हमला करने के बाद रूस पर कई प्रतिबंध लगाए गए थे. मार्च में ट्रंप ने वैश्विक क़ीमतें बढ़ने के बीच रूसी तेल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटा दिए.

यूरोपीय आयोग के वित्त आयुक्त ने देशों को रूस पर लगे प्रतिबंधों को कम करने के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है और कहा है कि रूस "इस युद्ध से विजेता बनकर उभर रहा है."

वालडिस डोम्ब्रोव्स्कीस ने वॉशिंगटन में आईएमएफ़ शिखर सम्मेलन के दौरान एक कार्यक्रम में कहा, "ऊर्जा की क़ीमतें बढ़ी हैं, और इससे रूस की वॉर मशीन को अतिरिक्त राजस्व मिल रहा है."

"यह रूस पर दबाव कम करने का समय नहीं है."

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