होर्मुज़ स्ट्रेट की नाकाबंदी का क्या है अमेरिकी प्लान, ईरान पर क्या होगा असर

अमेरिकी नौसेना

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इमेज कैप्शन, अमेरिका ने कहा है कि वो होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद करने की तैयारी कर रहा है. इस स्ट्रेट से दुनिया की तेल और गैस सप्लाई का 20 फ़ीसदी गुज़रता है (फ़ाइल फ़ोटो)
    • Author, जॉर्ज राइट और रेचल क्लिन
    • पदनाम, बिज़नेस रिपोर्टर
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

अमेरिकी सेना का कहना है कि सोमवार को होर्मुज़ स्ट्रेट पर नाकाबंदी शुरू होने के बाद, ईरानी बंदरगाह से सारा ट्रैफ़िक ब्लॉक कर दिया जाएगा, लेकिन दूसरी जगहों से आने वाले जहाज़ों को वॉटरवे से गुज़रने दिया जाएगा.

लेकिन यह नाकाबंदी कैसे लागू की जाएगी?

अमेरिकी नौसेना की 2022 की हैंडबुक के मुताबिक़, इस तरह की नाकाबंदी के दौरान, सभी तरह के समुद्री ट्रैफिक को दुश्मन के कंट्रोल वाले ख़ास बंदरगाहों, तटीय इलाक़ों या एयर बेस में आने या जाने से रोका जाता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले एलान किया था कि ईरान के साथ बातचीत फ़ेल होने के तुरंत बाद नाकाबंदी लागू कर दी जाएगी, लेकिन रविवार को उन्होंने फ़ॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए कहा कि इसमें कुछ समय लग सकता है.

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बाद में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के मुताबिक़, होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के समय की घोषणा करते हुए कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे ईस्टर्न टाइम (भारतीय समयानुसार शाम 7.30 बजे) से ईरानी बंदरगाहों या तटीय इलाकों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाज़ों पर एक समान रूप से लागू की जाएगी.

इसमें खाड़ी और ओमान सागर में स्थित सभी ईरानी बंदरगाह शामिल हैं.

बयान में आगे कहा गया कि "सेंटकॉम उन जहाज़ों के होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने में रुकावट नहीं डालेगा जो गैर-ईरानी बंदरगाह की ओर जा रहे हैं या उनसे आ रहे हैं."

सेंटकॉम ने कहा कि नाकाबंदी शुरू होने से पहले कमर्शियल शिपिंग कंपनियों को फॉर्मल नोटिस के ज़रिए और जानकारी दी जाएगी.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि दूसरे देश भी नाकाबंदी में शामिल होंगे, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि कौन से देश शामिल होंगे. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भी ऐसे जहाज़ लाएगा जो बारूदी सुरंगें साफ़ करेंगे, जिनमें ब्रिटिश जहाज़ भी शामिल हैं.

अमेरिका होर्मुज़ स्ट्रेट की नाकाबंदी क्यों करना चाहता है?

ईरान में प्रदर्शन

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इमेज कैप्शन, ईरान में अमेरिका के हमले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

ईरान ने युद्ध में होर्मुज़ स्ट्रेट का इस्तेमाल कुछ जहाज़ों को गुज़रने से रोकने के लिए किया, जिससे दुनिया के बाज़ार में तेल की कीमतें बढ़ गईं. ईरान इससे गुज़रने वाले जहाज़ों से पैसे भी वसूल रहा है.

इस वजह से राष्ट्रपति ट्रंप होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद करके ईरानी शासन को आर्थिक रूप से नुक़सान पहुंचा सकते हैं, हालांकि इस बात का ख़तरा है कि तेल और गैस की कीमतें और बढ़ेंगी.

फॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि "हम ईरान को पैसा नहीं बनाने देंगे ताकि वे उन लोगों के लिए तेल बचा सकें जिन्हें वे पसंद करते हैं और उन लोगों के लिए नहीं जिन्हें वे पसंद नहीं करते."

विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप का बयान ईरान पर अमेरिकी शर्तों पर डील करने के लिए दबाव डालने की स्ट्रैटेजी का हिस्सा है.

होमुर्ज़ स्ट्रेट की नाकाबंदी का क्या असर होगा?

शिपिंग विशेषज्ञ लार्स जेनसन ने बीबीसी को बताया कि फ़िलहाल इस नाकाबंदी से बहुत कम जहाज़ प्रभावित होंगे, क्योंकि अभी भी कम ही संख्या में ये जहाज़ होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़र रहे हैं.

उन्होंने कहा, "अगर यह वास्तव में अमेरिकियों के नियंत्रण में रहता है, तो बहुत कम जहाज़ों को रोका जाएगा और इसका ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा."

उनका कहना था, ''ट्रंप के इस एलान का भी ज़्यादा असर नहीं होगा कि ईरान को टोल देने वाले जहाज़ों को रास्ता नहीं दिया जाएगा."

उन्होंने यह भी कहा कि पहले से ही वहां से बहुत कम जहाज़ गुज़र रहे हैं.

उनके मुताबिक़, "ज़्यादातर जहाज़ यह देखने के लिए इंतज़ार करेंगे कि क्या कोई शांति समझौता हो सकता है, और उसके बाद धीरे-धीरे इस रास्ते का इस्तेमाल करने वाले जहाज़ों की संख्या बढ़ेगी.''

होर्मुज़ स्ट्रेट

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इमेज कैप्शन, होर्मुज़ स्ट्रेट बंद हुआ तो तेल की क़ीमतें आसमान छू सकती हैं

क्या अमेरिका ताक़त के दम पर होर्मुज़ स्ट्रेट बंद करेगा?

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एंथनी ज़र्चर

नॉर्थ अमेरिका संवाददाता

फ़िलहाल सवाल ये है कि क्या बारूदी सुरंगों को हटाने के दौरान अमेरिकी नेवी के जहाज़ों को ईरानी हमलों का सामना करना पड़ सकता है?

अगर विदेशी जहाज़ नाकाबंदी को पार करने की कोशिश करें, तो क्या अमेरिका बल का इस्तेमाल करेगा?

और क्या चीन जैसे देश इस पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं, जो ईरानी तेल पर निर्भर हैं. और सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान को आर्थिक नुक़सान पहुंचाने के इरादे से उठाया गया यह क़दम तेल की कीमतों को और बढ़ा देगा?

इन सवालों के स्पष्ट जवाब फ़िलहाल मौजूद नहीं हैं.

अमेरिकी सीनेट की इंटेलिजेंस कमेटी के डेमोक्रेट सदस्य मार्क वार्नर ने सीएनएन से बातचीत में कहा, "मुझे समझ नहीं आ रहा कि होमुर्ज़ स्ट्रेट की नाकाबंदी ईरान को इसे खोलने के लिए कैसे मजबूर करेगी?"

सीबीएस के एक कार्यक्रम में रिपब्लिकन सांसद माइक टर्नर ने कहा, "यह नाकाबंदी होर्मुज़ को ताक़त के दम पर खोलने की एक रणनीति है.''

ईरान के साथ बातचीत टूटने के बाद ट्रंप के सामने मुश्किल हालात हैं. वो या तो ईरान पर हमले शुरू कर सकते हैं या फिर ऐसी जंग से पीछे हट सकते हैं.

सीबीएस के सर्वे के मुताबिक़ 59 फ़ीसदी अमेरिकियों का मानना है कि इस युद्ध के नतीजे अमेरिका के लिए ख़राब हैं.

ज़्यादातर लोगों का ये भी मानना है कि जैसे होमुर्ज़ स्ट्रेट खोलना, ईरानी जनता को अधिक अधिकार दिलाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को स्थायी रूप से बंद करने जैसे अमेरिकी लक्ष्य अभी तक हासिल नहीं हुए हैं.

रविवार को फ़ॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान अमेरिकी शर्तें मान लेगा.

उनका यह भी कहना था कि अगर आने वाले महीनों में तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था इस बोझ को सह सकती है.

यह एक बड़ा दांव है. नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में ट्रंप की पार्टी को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है.

अब देखना यह है कि क्या ईरान अमेरिकी और इसराइली हमलों को ज़्यादा समय तक झेल सकता है या फिर इस युद्ध की राजनीतिक और आर्थिक कीमत सहने का ज़्यादा हौसला ट्रंप में है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित

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