मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका के कैसे काम आ रहा है वेनेज़ुएला का तेल

अमेरिका अब बड़ी तादाद में वेनेज़ुएला से तेल आयात कर रहा है

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    • Author, समीरा हुसैन और नैटली जिमेनेज़
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़
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मिनर्वा ग्लोरिया टैंकर मिसिसिपी खाड़ी में एक जगह खड़ा है. वो जगह मेक्सिको की खाड़ी में मौजूद अमेरिका के विशाल तेल भंडारों से ज़्यादा दूर नहीं है.

यह जहाज़ 250 मीटर लंबा है और इसका बाहरी हिस्सा गहरे नीले और गहरे लाल रंग का है. ये वेनेज़ुएला से कीमती माल लेकर आया है. यह ऐसा माल है जिसे महज़ छह महीने पहले तक अमेरिका पहुँचाना नामुमकिन था: चार लाख बैरल कच्चा तेल.

वेनेज़ुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं. राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के शासन के दौरान निवेश की कमी के कारण तेल के निर्यात में भारी गिरावट आई. इसके बाद अमेरिका ने इस लैटिन अमेरिकी देश से होने वाले आयात पर प्रतिबंध लगा दिए.

जब जनवरी में अचानक रात के छापे में अमेरिकी सेना ने निकोलस मादुरो को पकड़ लिया था, तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन भंडारों का इस्तेमाल करने की बात कही थी.

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अब वेनेज़ुएला में तेल फिर से बह रहा है. मार्च में देश का मासिक कच्चा तेल निर्यात सितंबर के बाद पहली बार 10 लाख बैरल प्रतिदिन से ज़्यादा रहा.

दुनिया अभी भी ईरान की होर्मुज़ स्ट्रेट की नाकेबंदी के बाद वैश्विक ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के झटके से उबरने की कोशिश कर रही है. शेवरॉन जैसी बड़ी तेल और गैस कंपनियां अब टैंकरों के ज़रिए वेनेज़ुएला का कच्चा तेल अमेरिका भेज रही हैं.

मिसिसिपी में शेवरॉन की पास्कागौला रिफाइनरी के मैनेजर टिम पॉटर ने कहा, "यह सिर्फ़ शेवरॉन के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे गल्फ़ कोस्ट इलाके के लिए एक बड़ी बात है."

'सॉर ऑयल'

विशाल टैंकर 'मिनर्वा ग्लोरिया' चार लाख बैरल तेल ले जाता है

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पास्कागौला रिफाइनरी अमेरिका में कंपनी की सबसे बड़ी ऑपरेटिंग यूनिट है. शेवरॉन ही एकमात्र ऐसी बड़ी अमेरिकी तेल कंपनी है जो फ़िलहाल वेनेज़ुएला में काम कर रही है.

कुल मिलाकर, इन शर्तों की वजह से शेवरॉन वेनेज़ुएला से तेल निकाल सकता है, उसे खुद ही प्रोसेस कर सकता है, और सीधे अमेरिकी ग्राहकों तक पहुंचा सकता है.

पॉटर कहते हैं, "इस रिफाइनरी को असल में वेनेज़ुएला के तेल जैसे भारी तेलों को प्रोसेस करने के लिए ही डिज़ाइन किया गया था. हमने इसी चीज़ में निवेश किया था."

वेनेज़ुएला का कच्चा तेल काफ़ी सस्ता होता है, क्योंकि इसे प्रोसेस करना बहुत मुश्किल होता है. यह बहुत भारी, गाढ़ा, गहरे रंग का होता है और इसमें सल्फर की मात्रा ज़्यादा होती है.

इसलिए इसे अक्सर 'सॉर ऑयल' कहा जाता है. इस तरह के तेल का इस्तेमाल डीज़ल, गैसोलीन, जेट फ़्यूल और दूसरे प्रोडक्ट बनाने के लिए किया जाता है.

मध्य पूर्व से बहुत कम तेल आयात करता है अमेरिका

शेवरॉन के सीईओ टिम पॉटर का कहना है कि वेनेज़ुएला का तेल अंत में अमेरिका में गैसोलीन की कीमतें कम कर देगा

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शेवरॉन के डाउनस्ट्रीम, मिडस्ट्रीम और केमिकल्स डिवीज़न के प्रेसिडेंट, एंडी वॉल्ट्ज़ का कहना है कि कंपनी अब हर दिन औसतन ढाई लाख बैरल वेनेज़ुएला का कच्चा तेल इंपोर्ट करती है.

वो कहते हैं, "हमें लगता है कि हम इसे और 50 फीसदी तक बढ़ा सकते हैं. इसलिए वेनेज़ुएला में हमारी मौजूदगी में अकेले शेवरॉन का हिस्सा हर दिन लगभग साढ़े तीन से चार लाख बैरल होगा."

वॉल्ट्ज़ का मतलब यह है कि शेवरॉन बेशक एकमात्र ऐसी अमेरिकी कंपनी है जिसके पास उस देश में तेल निकालने की क्षमता है, लेकिन फिर भी दूसरी कंपनियां वेनेज़ुएला का तेल वहां के घरेलू उत्पादकों से खरीदती हैं.

अमेरिकी तेल रिफाइनिंग इंडस्ट्री में शेवरॉन ही एकमात्र खिलाड़ी नहीं है. अमेरिका में 132 रिफाइनरी हैं जो कई तरह के कच्चे तेल को प्रोसेस करती हैं. अमेरिका की रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा ज़्यादा से ज़्यादा एफिशिएंसी के लिए 'हैवी क्रूड' पर निर्भर रहता है.

अमेरिका मध्य पूर्व से बहुत कम तेल आयात करता है. अमेरिका ने 2025 में करीब 8 फीसदी तेल ही वहां से आयात किया. वेनेज़ुएला से आयात बढ़ने का मतलब है कि अमेरिका के पास ज़्यादा तेल उपलब्ध होगा. इससे अमेरिकी ड्राइवरों के लिए गैसोलीन की कीमतें कम हो सकती हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ़्ते कहा, "अमेरिका होर्मुज़ स्ट्रेट से लगभग कोई तेल आयात नहीं करता है और भविष्य में भी इसके ज़रिए कोई तेल आयात नहीं करेगा. हमें इसकी ज़रूरत नहीं है."

लेकिन कम नहीं हो रहीं तेल की कीमतें

मिसिसिपी के पास्कागूला में शेवरॉन की तेल रिफाइनरी को भारी वेनेज़ुएलाई तेल को प्रोसेस करने के लिए डिज़ाइन किया गया है

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शेवरॉन रिफ़ाइनरी से बस कुछ ही किलोमीटर दूर, कंपनी के एक गैस स्टेशन पर ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं.

डेविड मैकक्वीन वियतनाम युद्ध के रिटायर्ड सैनिक हैं और अपनी गुज़र-बसर के लिए सोशल सिक्योरिटी पर निर्भर हैं. वह कहते हैं, "मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं है. कीमतें नीचे आनी ही चाहिए, क्योंकि मैं अब इससे तंग आ चुका हूं."

जब उनसे पूछा गया कि विशाल तेल भंडारों से घिरा होने के बावजूद, अमेरिका को अपना टैंक भरवाने के लिए इतना ज़्यादा पैसा क्यों देना पड़ता है, तो डेविड मैकक्वीन कहते हैं कि सरकार ने इन संसाधनों को 'कीमतें ऊंची बनाए रखने के लिए' बचाए रखना चाहती है.

अगले पंप पर डोना 30 डॉलर में अपनी गाड़ी की टंकी भरवाती है. वह कहती हैं, "मैं गाड़ी कम चलाती हूं और दूसरी चीज़ों पर भी कम खर्च करती हूं."

उनके पोते-पोतियां कुछ घंटे की दूरी पर रहते हैं. चूंकि उनसे मिलने जाना अब बहुत महंगा हो गया है, इसलिए वह उनसे उतनी बार नहीं मिल पाती जितनी पहले मिलती थी. वह कहती हैं, "कोई चारा नहीं है. हमें इसी में गुज़ारा करना होगा."

अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के मुताबिक, मिसिसिपी के इस हिस्से में गैसोलीन की प्रति गैलन औसत कीमत अभी भी राष्ट्रीय औसत से कम है. ईरान युद्ध से पहले गैसोलीन के एक गैलन (3.78 लीटर) की कीमत करीब एक डॉलर थी.

बीते हफ्ते ट्रंप ने अमेरिका की तेल उत्पादन क्षमता की तारीफ़ करते हुए कहा, "हम दुनिया में तेल और गैस के सबसे बड़े उत्पादक हैं. यह तो कहने की ज़रूरत ही नहीं कि हमें वेनेज़ुएला से लाखों बैरल तेल मिल रहा है."

डोना का कहना है कि ईंधन की कीमतों ने उनके लिए अपने पोती-पोतों से मिलना मुश्किल बना दिया है

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तेल के उन विशाल भंडारों तक पहुंच होने के बावजूद, अमेरिकियों के लिए कीमतें अभी तक कम नहीं हुई हैं. इसकी वजह है कि दूसरे देशों की तरह अमेरिका भी वैश्विक तेल बाज़ार में होने वाले उतार-चढ़ाव से प्रभावित होता है.

पॉटर कहते हैं, "यह सच है कि हमारी स्थानीय पहुंच होने के कारण, हम इस रिफाइनरी के लिए ज़रूरी कच्चा तेल अभी भी उपलब्ध करा सकते हैं."

"लेकिन इस कच्चे तेल की कुल कीमत बढ़ गई है, क्योंकि इसकी कीमत वैश्विक बाज़ार के आधार पर तय होती है."

हालांकि शेवरॉन का मानना ​​है कि वेनेज़ुएला के कच्चे तेल में किया गया उसका निवेश अंत में उपभोक्ताओं को ही फ़ायदा पहुंचाएगा. फ़िलहाल, ईरान युद्ध के कारण ये फ़ायदे नज़र नहीं आ रहे हैं.

वॉल्ट्स कहते हैं, "जब हालात सामान्य हो जाएंगे, तो वेनेज़ुएला से मिलने वाली यह अतिरिक्त आपूर्ति, असल में अमेरिकियों के लिए कीमतें कम कर देगी."

"इसलिए, इसका असर भविष्य में दिखाई देगा, लेकिन अभी यह असर दिखाई नहीं देता है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.