ओपन ऑफ़िस में घट जाती है क्रिएटिविटी?

ओपन ऑफ़िस का वातावरण
    • Author, ब्रायन बोरज़िकोवस्की
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल
  • प्रकाशित

ओपन स्पेस ऑफ़िस के बारे में तो आपने ज़रूर सुना होगा. सुना क्या होगा बल्कि हम में से बहुत से लोग उसी माहौल में काम करते हैं.

कुछ अध्ययन बताते हैं कि अमरीका में क़रीब 70 फ़ीसद लोग ऐसे ही माहौल में काम करते हैं. कंपनियों पर दबाव है कि वो कम वक़्त में ज़्यादा से ज़्यादा काम करें. नए नए कॉन्सेप्ट के साथ काम करें. आस पास कितना ही हंगामा क्यों ना हो आपके काम पर इसका असर नहीं पड़ना चाहिए.

लेकिन कंपनियों के मालिक भूल जाते हैं कि इस तरह के माहौल में काम करना आसान नहीं होता. मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे माहौल में काम करने से कर्मचारियों की क्रिएटिविटी 15 फ़ीसद तक घट जाती है.

ओपन ऑफ़िस का वातावरण

ओपन स्पेस ऑफ़िस में काम करने वाले कर्मचारी को हर तीन मिनट पर काम करने में बाधा आती है. फिर एकाग्रता से काम करने के लिए उस कर्मचारी को 23 मिनट लग जाते हैं.

अमरीकी कंपनी वर्कस्पेस फ़्यूचर्स की वाइस प्रेसिडेंट डोना फ़्लिन का कहना है कि कंपनियाों को अपने कर्मचारियों से ही काम लेना है. लिहाज़ा उन्हें किसी तरह की परेशानी ना हो, इस बात का ख़्याल रखती हैं.

कर्मचारियों का दिमाग़ ना भटके, इसके लिए उन्हें हेडफ़ोन दे दिए जाते हैं. लेकिन इतना काफ़ी नहीं है. ध्यान केंद्रित करके काम करने के लिए ज़रूरी है कि कर्मचारी के आस पास शांति रहे.

इसीलिए बहुत से कर्मचारी सफ़ेद बोर्ड लगा कर छोटी सी दीवार खड़ी कर लेते हैं ताकि उनका दिमाग़ ना भटके. या अपनी काम की जगह पर 'डू नॉट डिस्टर्ब' का बोर्ड लगा लेते हैं, या क़िताबों का ढेर ही जमा करके दीवार बना लेते हैं.

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साल 2017 में स्टील कास्ट कंपनी एक ऐसी डेस्क लेकर आने वाली है, जिस पर लाल और हरी बत्ती लगी होगी. लाल बत्ती जले तो इसका मतलब होगा दूर रहो.

ऐसी ही एक डिवाइस डेनमार्क की कंपनी प्लेनम ने बनाई है, जिस पर लाल और हरी बत्ती लगी है जो आपके कैलेंडर से जुड़ी होती है. आपकी मसरूफ़ियत के मुताबिक़ ये ख़ुद ही जलती और बुझती है, और अपना रंग बदलती है.

इन बत्तियों को बनाने वाली कंपनियों के मुताबिक़ आज क़रीब दस हज़ार कंपनियां इन बत्तियों का इस्तेमाल कर रही हैं और इनकी फ़रोख़्त में दो सौ फ़ीसद का इज़ाफ़ा हुआ है. अकेले फरवरी 2015 में इसकी बिक्री में 33 फ़ीसद का इज़ाफ़ा देखा गया.

बहुत साल पहले कोका कोला कंपनी के मैनेजर की ये ख़्वाहिश थी कि वो अपने सभी कर्मचारियों के लिए अपने दफ़्तर का दरवाज़ा खोले रखें. यह भी पता रहे कि वो काम कर रहे हैं.

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लेकिन उनकी पॉलिसी पूरी तरह से फ्लॉप हो गई. नतीजा ये रहा कि वो कुछ काम ही नहीं कर पा रहे थे. क्योंकि हर वक़्त कोई ना कोई उनके ऑफ़िस में आ धमकता था.

फिर उन्हों ने एक तरीक़ा निकाला कि जब भी वो मसरूफ़ होते थे तो लाल रंग की टोपी पहन लेते थे. यानि उस वक़्त कोई उनके ऑफ़िस में नहीं जा सकता था. लेकिन जब वे लाल टोपी नहीं पहने होते थे तब कोई भी उनसे जाकर मिल सकता था.

ये संकेत कितने कारगर हैं, बदक़िसमती से इस बारे में कोई रिसर्च नहीं हुई है. लेकिन एक ऑफ़िस में काम करने वाले बढ़ई का कहना है कि उसने एक ओपन स्पेस ऑफ़िस में काम किया था, जहां हर वक्त शोर ग़ुल रहता था. वहां कोई सिग्नल सिस्टम नहीं था.

लेकिन इस बढ़ई ने अपने काम की जगह पर बोर्ड बदलने से ही वहां काम करने वालों को यह पैग़ाम दे दिया कि वे अभी व्यस्त हैं.

(अंग्रेज़ी में इस मूल लेख को पढ़ने में के लिए यहां क्लिक करें, जो कि बीबीसी कैपिटल में है.)

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