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रवींद्र जडेजा टेस्ट क्रिकेट के क्या महानतम ऑलराउंडर होने की राह पर हैं?
दिल्ली टेस्ट मैच के प्राइज़ प्रेज़ेंटेशन समारोह में जब रवींद्र जडेजा 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' का ख़िताब लेने आए तो मंझे हुए कमेंटेटर संजय मांजरेकर भी मुश्किल में नज़र आए.
उन्होंने जडेजा से कहा कि 'सबसे बड़ी दिक़्क़त मुझे हो रही है कि आपसे क्या नया पूछूं क्योंकि अभी पिछले मैच में ही तो आपको ये अवॉर्ड मिला था और हमने लंबी बातचीत की थी.'
ख़ैर मांजरेकर ने कुछ सवाल दोहराए जिनका जडेजा ने उतना ही छोटा जवाब दिया जितना छोटा अंतर उनके दो गेंदों के बीच होता है.
कहते हैं कि जीत एक आदत होती है और जीतने का खून रवींद्र जडेजा के मुंह लग गया है. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सिरीज़ के पहले दोनों मैचों में उन्होंने बैट और बॉल से शानदार ऑलराउंडर प्रदर्शन करते हुए 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' के ख़िताब जीते.
भारतीय क्रिकेट में अक्सर रोहित शर्मा, विराट कोहली या रविचंद्रन अश्विन जैसे खिलाड़ियों की गिनती महान क्रिकेटरों में होती है. लेकिन उस लिस्ट में रवींद्र जडेजा को भी शामिल कर लेना चाहिए क्योंकि जिस फ़ॉर्म में वो बैटिंग और बॉलिंग कर रहे हैं, शायद रिटायर होते-होते उनका औसत दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर का हो जाए.
दिल्ली टेस्ट में बेमिसाल रहे जडेजा
दिल्ली टेस्ट में भारत ने ऑस्ट्रलिया को 6 विकेट से हरा दिया और बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी पर दावा मज़बूत कर लिया.
भारत की इस जीत के हीरो रहे रवींद्र जडेजा जिन्होंने पहली पारी में 3 विकेट लिए और अहम 26 रन बनाए. पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया ने 262 रन बनाए थे और भारत पर 1 रन की लीड भी ले ली थी.
पूरे मैच के संदर्भ में जडेजा की 26 रनों की ये छोटी सी पारी कितनी अहम थी, ये कप्तान रोहित शर्मा ने मैच के बाद बताया.
जब उनसे मैच के टर्निंग प्वाइंट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने दो बातें कहीं जिसने मैच पर सबसे ज़्यादा असर डाला - एक अक्षर पटेल और अश्विन की साझेदारी और दूसरा विराट कोहली और जडेजा के बीच की पार्टनरशिप.
इन दोनों पार्टनरशिप की मदद से भारत ऑस्ट्रेलिया की लीड को 1 रन तक ही रोके रखा.
लेकिन भारतीय टीम आख़िरी पारी में बैटिंग करने वाली थी इसलिए उन्हें ऑस्ट्रेलिया को दूसरी पारी में कम से कम रन पर रोकना था क्योंकि आख़िरी पारी में बैटिंग और भी मुश्किल हो जाती.
ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में शानदार शुरुआत की थी और 60 रन सिर्फ़ एक विकेट खोकर बना लिए थे. ऐसे में लग रहा था मेहमान टीम एक बार फिर 250 के आसपास का स्कोर ज़रूर बना लेगी और भारत को रन चेज़ करने में दिक़्क़्तें आएंगी.
लेकिन जडेजा का जादू एक बार फिर चला ऑस्ट्रेलियाई टीम सिर्फ़ 113 रनों पर ऑल आउट हो गई. रवींद्र जडेजा ने दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया के सात विकेट लिए और एक बार फिर 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' का ख़िताब जीता.
इमरान ख़ान को पीछे छोड़ा
रवींद्र जडेजा ने दिल्ली टेस्ट में ऐसा कारनामा कर दिखाया कि पाकिस्तान के इमरान ख़ान जैसे अव्वल ऑलराउंडर भी पीछे छूट गए.
दिल्ली टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने टेस्ट में 250 विकेट पूरे कर लिए. इस तरह टेस्ट मैचों में उनके नाम 250 विकेट और 2500 रन हो गए हैं.
ऐसा करने वाले वो दूसरे सबसे तेज़ क्रिकेटर बन गए हैं. सिर्फ इयान बॉथम ने उनसे कम मैच, यानी 55 टेस्ट में ऐसा करिश्मा दिखाया है.
जडेजा को ये उपलब्धि हासिल करने में 62 मैच लगे जबकि इमरान ख़ान ने इसके लिए 64 मैच लिए थे. जडेजा ज़बरदस्त फ़िट हैं और अभी कई साल और खेल सकते हैं.
कोई आश्चर्य नहीं होगी अगर वो 5000 रन और 500 विकेट के साथ टेस्ट से संन्यास लें और दुनिया के महानतम ऑलराउंडर का तमग़ा हासिल कर लें.
कोहली और रोहित के बाद सबसे अव्वल बल्लेबाज़
जडेजा के आंकड़े बतौर बल्लेबाज़ भी लाजवाब हैं. अब तक उन्होंने 62 मैच की 91 पारियों में 36 की औसत से 2619 रन बनाए हैं जिसमें 3 शतक और 18 अर्धशतक शामिल हैं. लेकिन अगर हम यही आंकड़े साल 2016 से बाद के देखें तो नंबर्स और भी बेहतर हो जाते हैं.
साल 2016 से उन्होंने 2000 से ज़्यादा रन बनाए हैं और इस दौरान उनका औसत 44.16 का है जो कि विराट कोहली और रोहित शर्मा के बाद किसी भी भारतीय बल्लेबाज़ से ज़्यादा है जिसने इस दौरान 2000 से अधिक रन बनाए हों.
यानी नंबर 6 या 7 पर बैटिंग करने वाले जडेजा के रन और औसत केएल राहुल, ऋषभ पंत या चेतेश्वर पुजारा से भी ज़्यादा हैं. इस बैटिंग ऑर्डर में जडेजा की अहमियत कोहली और रोहित के बाद सबसे ज़्यादा है.
उनकी शानदार बैटिंग की वजह से भारत को कई बार विदेशी धरती पर 4 सीमर्स के साथ खेलने का मौका मिला है.
हालांकि गेंदबाज़ी में उनका औसत अश्विन से थोड़ा कम ही है, लेकिन उनका बल्लेबाज़ी का औसत इतना बढ़िया है कि वो नंबर 6 या सात पर बड़े रन बनाने का आत्मविश्वास भारतीय खेमे में देते हैं. इस टीम में जडेजा एक स्पेशलिस्ट बैट्समैन की तरह भी खेल सकते हैं.
अश्विन के साथ बनाई जोड़ी नंबर वन
रवींद्र जडेजा ने ऑफ़ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के साथ बेहतरीन स्पिन की जोड़ी बनाई है. जहां अश्विन ने 90 टेस्ट मैचों में 463 विकेट लिए हैं वहीं जडेजा ने 62 मैचों में 259 शिकार किए हैं.
हालांकि जडेजा का विकेट लेने का औसत और स्ट्राइक रेट अश्विन से कुछ कम है लेकिन उन्हें अश्विन के मुकाबले कम मौके भी मिले हैं.
अश्विन और जडेजा की जोड़ी जब गेंदबाज़ी कर रही होती है तो इसका ज़बरदस्त दबाव विपक्षी बैटिंग पर पड़ता है. दोनों में से कोई भी आसान गेंद नहीं डालते और गेंदबाज़ी में कम से कम ग़लती करते हैं.
जब दोनों ही छोर से दबाव वाली गेंदबाज़ी हो रही हो और बैट्समैन को रन बनाने के मौके ना मिल रहे हों तो उसके पास रिस्क लेने के अलावा कोई दूसरा रास्ता बचा नहीं रहता. और जैसे ही बल्लेबाज़ थोड़ा जोख़िम लेते हैं, ये दोनों गेंदबाज़ बड़ी चालाकी के साथ और भी विकेट्स निकाल ले जाते हैं.
दिल्ली टेस्ट की दूसरी पारी में भी ऐसा ही देखने को मिला जहां अश्विन ने 3 और जडेजा ने 7 विकेट लिए और सभी 10 विकेट इसी जोड़ी के नाम हुए.
फ़िटनेस का फ़ायदा
आख़िर गेंदबाज़ी में जडेजा की सफलता का राज़ क्या है? ऑस्ट्रेलिया के पूर्व बल्लेबाज़ मार्क वॉ मानते हैं कि गेंदबाज़ी को सिंपल रखना ही उनकी ताक़त है.
वो कहते हैं, "जडेजा विकेट-टू-विकेट बॉलिंग करते हैं और हल्का सा टर्न कराते हैं. पिच मदद करे तो उन्हें खेलना असंभव सा हो जाता है. उनकी कंसिसटेंसी ही उनकी गेंदबाज़ी की कुंजी है."
जडेजा भी कहते हैं कि 'वो ज्यादा वेरिएशंस नहीं आज़माते हैं बल्कि सिंपल रखना ही पसंद करते हैं.' यानी जिन एरिया में उन्हें गेंद डालनी होती है वहां वो लगातार लंबे समय तक डालते रहते हैं.
कहने में ये बड़ा आसान लगता हो लेकिन एक ही चीज़ को बार बार सटीक दोहराना भी बेहद मुश्किल काम है. इस तरह की कंसिसटेंसी के लिए फ़िटनेस का बहुत बड़ा रोल होता है जिसके लिए जडेजा कोई कसर नहीं छोड़ते हैं.
वो कहते हैं कि फ़िट रहने के लिए वो संतुलित खान-पान के अलावा वे वर्कआउट कभी नहीं भूलते और परिवार के साथ खाली टाइम बिताते हैं.
जिस तरह विराट कोहली अपनी फ़िटनेस की वजह से बैटिंग को एक लेवल उपर ले जाते हैं, उसी तरह जडेजा भी अपनी फ़िटनेस की वजह से ही लंबे समय तक बिना थके बैटिंग या बॉलिंग करते हैं.
ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने अभी हाल ही में कहा कि उन्हें सर कहलवाना पसंद नहीं है और सर कहकर लोग उनके काफ़ी मीम बनाने लगते हैं.
हालांकि उनके क्रिकेट के एक पहलू पर ज़्यादा चर्चा नहीं होती, और वो है फ़ील्डिंग. लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि जडेजा पिछले 10 साल से भारत के सर्वश्रेष्ठ फ़ील्डर हैं और दुनिया के टॉप 3 में शामिल हैं.
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