मां-बाप से मिल सकता है औलाद को कैंसर

कैंसर
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वैज्ञानिकों का दावा है कि वो इस बात का पता लगाने में कामयाब रहे हैं कि क्यों कुछ परिवारों में तरह-तरह के कैंसर की बीमारियां पनपती हैं.

ये बात उनके मुताबिक़ आनुवांशिक परीक्षणों या जनेटिक टेस्टिंग में सामने आई.

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कैंसर में दुर्लभ और आसाधारण मानी जाने वाली क़िस्म सारकोमा से ग्रसित 1100 मरीज़ों पर किए गए परीक्षणों में पाया गया कि इनमें से आधे से ज़्यादा मरीज़ कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले जीन म्यूटेशन के साथ पैदा हुए थे.

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शोध में पाया गया कि स्तन, गर्भाशय और आंतों के कैंसर वाले मरीज़ अधिकतर जीन म्यूटेशन का शिकार होते हैं.

लैंसेट ऑनकालाजी पत्रिका में छपे एक अध्ययन के मुताबिक़ जीनों में म्यूटेशन पर हुआ शोध कैंसर के इलाज में मददगार साबित हो सकते हैं.

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प्रमुख शोधकर्ता प्रो. इयान जुडसन के अनुसार, 'विरासत के संबंध में हमें नए तरीक़े से सोचना होगा.'

सारकोमा एक ग़ैरमामूली किस्म का कैंसर है जो हड्डियों, मांसपेशियों और महीन ऊतकों में विकसित होता है.

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इस कैंसर की चपेट में अधिकतर बच्चे और युवा आते हैं.

इससे ग्रसित मरीज़ के बचने की बेहद कम संभावना होती है इसलिए शोधकर्ताओं ने तय किया है वो इससे जुड़े आनुवांशिक कारणों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी हासिल करेंगे.

शोधकर्ताओं ने जिन 1162 मरीज़ों के जीनों की डीएनए संरचना का अध्ययन किया उनमें से 72 को सारकोमा का जोखिम बढ़ाने वाला पाया गया.

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इस शोध में यह भी पता चला कि हर पांच में एक मरीज़ों में एक से अधिक बार जीन म्यूटेशन होने पर कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है.

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