अगर ज़करबर्ग ने मेरी सलाह मानी होती...

मार्क ज़करबर्ग
    • Author, रोरी सैलेन जोन्स
    • पदनाम, टेक्नोलॉजी संवाददाता, लंदन
  • प्रकाशित

जब मैंने सुना कि मार्क ज़करबर्ग ने अपनी 45 अरब डॉलर मूल्य की कंपनी फ़ेसबुक के शेयर अच्छे कामों के लिए देने का ऐलान किया है तो मुझे 2008 की बातें याद आईं.

फ़ेसबुक के संस्थापक तब 24 साल के थे और बीबीसी को साक्षात्कार देने लंदन आए थे. उनके सोशल नेटवर्क के व्यावसायिक ढांचे को लेकर मैंने उन पर कई संशय भरे सवाल दागे और सलाह दी, "आपको जल्द पैसा कमाने के बारे में सोचना शुरू करना चाहिए".

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मार्क ज़करबर्ग

इसके बाद मैं उनसे पिछले साल फ़ेसबुक के टेकओवर के प्रस्तावों पर बात करने लगा. अफ़वाह थी कि माइक्रोसॉफ़्ट ने 10 अरब डॉलर (करीब 6.65 खरब रुपए से अधिक) का प्रस्ताव दिया था- लेकिन ज़करबर्ग ने सभी को नकार दिया था.

मैंने उन्हें कहा था, "अब आपको वह ग़लती लग रही होगी."

ताज्जुब यह कि वे सहमत नहीं हुए और जब मैंने कहा कि वह 24 साल की उम्र में रिटायर हो सकते थे तो उन्होंने कहा, "मैं करूंगा क्या?"

मार्क ज़करबर्ग

तब जींस और स्नीकर्स जूतों में यह किताबी कीड़ा युवा किसी खिलाड़ी व्यावसायिक रणनीतिकार या अगले 10 साल तक दुर्जेय रहने वाली कंपनी के नेता की तरह नहीं दिखता था. मगर उन्होंने ख़ुद को सही साबित किया.

उस इंटरव्यू का उनका आख़िरी जवाब, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी प्रेरणा पैसे नहीं बल्कि वह दुनिया बदलना चाहते हैं, ज़करबर्ग और चान की परोपकारी घोषणा के बाद, सही लगता है.

ध्यान रहे, अगर आप उनकी बेटी को लिखे उनके पत्र को ठीक से पढ़ें, तो साफ़ हो जाता है कि उनके परोपकारी लक्ष्य फ़ेसबुक की व्यावसायिक रणनीति के साथ मिलकर चलने वाले हैं.

ज़करबर्ग

यह 'दुनिया को जोड़ने' के लक्ष्य की बात करता है- जिसका अर्थ ज़रूर यह होगा कि ज़्यादा लोग फ़ेसबुक इस्तेमाल करें. यक़ीनन 'बहसों को आकार देने के लिए नीति और समर्थन' में भागीदारी का कूट अर्थ अवश्य ही फ़ेसबुक की भविष्य की कल्पना में राजनेताओं को शामिल करने के लिए लामबंदी करना होगा.

अगर उन्होंने मेरी सलाह मानी होती तो मार्क ज़करबर्ग अब तक कुछ अरब डॉलर के साथ रिटायर हो गए होते और फ़ेसबुक माइक्रोसॉफ़्ट के मालिकाना हक़ वाली याम्मेर में मिल गया होता.

इससे पता चलता है कि वे दूरदृष्टि वाली प्रतिभा हैं... और मैं नहीं.

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