शरीर में फ़ैट क्यों ज़रूरी है, जानिए इसकी अहमियत

इस साल विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि बेहद दुबला दिखने का चलन एक बार फिर लौट रहा है.
इमेज कैप्शन, इस साल विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि बेहद दुबला दिखने का चलन एक बार फिर लौट रहा है
    • Author, मेलिसा होगेनबूम
    • पदनाम, सीनियर हेल्थ रिपोर्टर
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 11 मिनट

कई साल से चर्बी को सेहत के लिए बुरा बताया जाता रहा है. डाइट से जुड़ी सलाह में इसे कम करने पर ज़ोर दिया जाता है. कुछ खाद्य कंपनियां कम वसा वाले प्रोडक्ट बेचती हैं और वेटलिफ़्टिंग से जुड़े ऑनलाइन फ़ोरम में शरीर की चर्बी को कम से कम करने के तरीक़े बताए जाते हैं.

शरीर में मौजूद चर्बी हार्मोन बनाने से लेकर शरीर का तापमान नियंत्रित रखने तक कई अहम काम करती है. ऐसे में शरीर की चर्बी बहुत ज़्यादा घटाने की कोशिश सेहत के लिए इतनी ख़राब क्यों हो सकती है?

सोशल मीडिया पर कुछ देर बिताते ही आपको शरीर को 'श्रेडेड' बनाने की सलाह मिलने लगती है. इसका मतलब ऐसा शरीर है, जिसमें मांसपेशियां बहुत साफ़ और उभरी हुई दिखाई देती हैं.

अब विशेषज्ञों इस बात से चितिंत हैं कि बेहद दुबला दिखने का चलन एक बार फिर लौट रहा है. कुछ मामलों में वज़न घटाने वाली दवाओं की बढ़ती लोकप्रियता भी इसे बढ़ावा दे रही है.

शरीर में बहुत कम चर्बी होना हमारे लिए ख़राब क्यों है?
इमेज कैप्शन, शरीर में बहुत कम चर्बी होना हमेशा ठीक नहीं होता

शरीर में बहुत ज़्यादा चर्बी होने से सेहत को नुक़सान हो सकता है और मोटापा बढ़ सकता है. लेकिन बहुत कम चर्बी होना भी हमारे लिए अच्छा नहीं है.

कई विशेषज्ञों ने मुझे बताया कि शरीर से चर्बी पूरी तरह ख़त्म करने की कोशिश जैविक और सामाजिक, दोनों स्तरों पर नुक़सान पहुंचा सकती है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और मेडिसिन की प्रोफ़ेसर एलिफ़ ओरल कहती हैं, "हमें अपनी चर्बी से प्यार करना चाहिए. हमारे शरीर में इसका बहुत अहम जैविक काम है."

लेकिन सवाल है कि हमें वास्तव में कितनी चर्बी की ज़रूरत होती है? शरीर में बहुत कम चर्बी होना हमारे लिए ख़राब क्यों है?

शरीर की चर्बी क्यों ज़रूरी है?

पहले माना जाता था कि शरीर में जमा चर्बी केवल वहीं पड़ी रहती है.
इमेज कैप्शन, पहले माना जाता था कि शरीर में जमा चर्बी केवल वहीं पड़ी रहती है

आम तौर पर चर्बी दो तरह की होती है. पहली, खाने में मौजूद चर्बी और दूसरी, शरीर में जमा चर्बी.

खाने में मौजूद चर्बी वह है, जो हमें भोजन से मिलती है. शरीर में जमा चर्बी उस ऊर्जा को बचाकर रखने का प्राकृतिक तरीक़ा है, जिसकी शरीर को तुरंत ज़रूरत नहीं होती.

जब हम खाना खाते हैं, तो उसमें मौजूद वसा, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन टूटकर ऐसे आसान तत्वों में बदल जाते हैं, जिन्हें शरीर ऊर्जा के लिए इस्तेमाल कर सकता है.

कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज़ में बदलते हैं, प्रोटीन अमीनो एसिड में और वसा फ़ैटी एसिड में बदल जाती है.

अगर कोई व्यक्ति लगातार अपने शरीर की ज़रूरत से ज़्यादा कैलोरी लेता है, तो वसा कोशिकाएं इन अतिरिक्त पोषक तत्वों को लिपिड के रूप में जमा कर लेती हैं. इन वसा कोशिकाओं को एडिपोसाइट्स कहा जाता है. चर्बी जमा होने के कारण इन कोशिकाओं का आकार बढ़ने लगता है.

पहले माना जाता था कि शरीर में जमा चर्बी केवल वहीं पड़ी रहती है. लेकिन अब हम जानते हैं कि यह एक सक्रिय अंग की तरह काम करती है और शरीर के कई कामों को नियंत्रित करती है.

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
दिनभर
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

एपिसोड

समाप्त

'गोल्डीलॉक्स एंड द थ्री बेयर्स' की कहानी की तरह हमारा शरीर उस समय सबसे अच्छा काम करता है, जब किसी चीज़ की मात्रा न बहुत कम हो और न बहुत ज़्यादा. बहुत ज़्यादा चर्बी की तरह बहुत कम चर्बी भी सेहत के लिए ख़तरनाक है.

स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट में चर्बी के ऊतकों पर क्लिनिकल और प्रायोगिक शोध करने वाले प्रोफ़ेसर मिकाएल रीडेन कहते हैं कि शरीर की चर्बी को पोषक तत्व जमा करने वाली एक ख़ास तिजोरी की तरह समझा जा सकता है.

जब शरीर के पास भरपूर ऊर्जा होती है, तो यह तिजोरी पोषक तत्व जमा कर लेती है. ज़रूरत पड़ने पर यही पोषक तत्व बाहर निकाले जाते हैं. इस व्यवस्था ने हमारे पूर्वजों को भोजन की कमी के दौरान जीवित रहने में मदद की थी.

शरीर में जमा चर्बी का एक और अहम काम शरीर के अलग-अलग हिस्सों के बीच संदेश पहुंचाना है.

वसा कोशिकाएं ऐसे हार्मोन बनाती हैं, जो शरीर के बाक़ी हिस्सों को बताते हैं कि हमारे पास कितनी ऊर्जा है और हमारा पेट कितना भरा हुआ है.

ओरल बताती हैं कि इनमें सबसे ज़्यादा अध्ययन लेप्टिन नाम के हार्मोन पर हुआ है.

वे कहती हैं, "लेप्टिन दिमाग़ को बताता है कि शरीर में पर्याप्त ऊर्जा जमा है. इसके बाद दिमाग़ एक तरह से चिंता करना बंद कर सकता है."

इससे शरीर प्रजनन और संक्रमण से लड़ने जैसी अहम जैविक प्रक्रियाओं पर ध्यान दे पाता है.

लेप्टिन न हो, तो दिमाग़ को शरीर में उपलब्ध ऊर्जा की चिंता होने लगती है. इसके बाद शरीर के ज़रूरी कामों को भी कम प्राथमिकता मिलने लगती है.

शरीर को गर्म रखने के लिए भी चर्बी ज़रूरी है.

सफ़ेद चर्बी अतिरिक्त ऊर्जा जमा करती है और शरीर को ठंड से बचाने वाली परत की तरह भी काम करती है.

वहीं, भूरी और बेज रंग की चर्बी में ऐसी ख़ास कोशिकाएं होती हैं, जो गर्मी पैदा करने के लिए ऊर्जा जलाती हैं. इससे शरीर को अपना तापमान बनाए रखने में मदद मिलती है.

शरीर में बहुत कम चर्बी होने पर क्या होता है?

जब शरीर में चर्बी बहुत कम हो जाती है, तो वह ऊर्जा बचाने की कोशिश करने लगता है.
इमेज कैप्शन, जब शरीर में चर्बी बहुत कम हो जाती है, तो वह ऊर्जा बचाने की कोशिश करने लगता है

शरीर में बहुत ज़्यादा चर्बी होने के नुक़सान के बारे में काफ़ी जानकारी मौजूद है.

इससे दिल और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों, टाइप-2 डायबिटीज़, कुछ तरह के कैंसर और ऑस्टियोआर्थराइटिस का ख़तरा बढ़ सकता है. हालांकि, शरीर में बहुत कम चर्बी होना भी अच्छा नहीं है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन में मेटाबॉलिक बीमारियों पर शोध कर रहीं जेसिका मॉन्ग बताती हैं कि कैलोरी बहुत ज़्यादा कम करने से शरीर की चर्बी बेहद कम हो सकती है. इसका सेहत और शरीर के काम करने के तरीक़े पर गंभीर असर पड़ सकता है.

वे कहती हैं, "शरीर में वसा के ऊतक बहुत कम होने से अंगों और शरीर के काम करने का तरीक़ा बिगड़ जाता है."

जब शरीर में चर्बी बहुत कम हो जाती है, तो वह ऊर्जा बचाने की कोशिश करने लगता है. आसान भाषा में कहें तो शरीर ऐसी स्थिति में पहुंच जाता है, जैसे उसे लंबे समय से पर्याप्त भोजन न मिला हो.

इसके बाद शरीर की कई प्रणालियां काम करना बंद करने लगती हैं. इनमें संक्रमण से लड़ने वाली हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी शामिल है.

जब शरीर में जमा ऊर्जा ख़त्म हो जाती है, तो वह मांसपेशियों को तोड़कर उनसे ऊर्जा लेने लगता है. हड्डियों का बनना और उनकी मरम्मत होना भी बंद होने लगता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ ऑक्सफ़र्ड में मेटाबॉलिक मेडिसिन के प्रोफ़ेसर फ़्रेड्रिक कार्पे कहते हैं कि इससे शरीर कमज़ोर हो जाता है और हड्डियां टूटने का ख़तरा बढ़ता है.

वे कहते हैं, "यह सेहतमंद स्थिति नहीं है."

इसकी एक बड़ी वजह यह है कि गंभीर संक्रमण या किसी दूसरी मेडिकल इमरजेंसी का सामना करने के लिए शरीर के पास ऊर्जा का कोई भंडार नहीं बचता.

मोटापे के साथ जी रहे लोगों में दिल और रक्त वाहिकाओं की बीमारी होने का ख़तरा ज़्यादा होता है.
इमेज कैप्शन, मोटापे के साथ जी रहे लोगों में दिल और रक्त वाहिकाओं की बीमारी होने का ख़तरा ज़्यादा होता है

शरीर में बहुत कम चर्बी होने से हार्मोन और प्रजनन स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकते हैं.

लंबे समय तक ज़रूरत से कम खाना खाने के कारण बेहद दुबले हो चुके पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर गिर सकता है. उनकी ऊर्जा और शारीरिक प्रदर्शन भी कम हो सकता है.

बहुत कम चर्बी वाली कुछ महिला खिलाड़ियों के पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं या पूरी तरह बंद हो सकते हैं.

कई अध्ययनों में पाया गया है कि अधेड़ और अधिक उम्र में थोड़ा अतिरिक्त वज़न गंभीर बीमारी के दौरान जीवित रहने की संभावना बढ़ा सकता है.

उदाहरण के लिए, मोटापे के साथ जी रहे लोगों में दिल और रक्त वाहिकाओं की बीमारी होने का ख़तरा ज़्यादा होता है. लेकिन अगर यह बीमारी हो जाए, तो इसी बीमारी से जूझ रहे दुबले लोगों की तुलना में उनकी मौत का ख़तरा कम हो सकता है. इसे 'ओबेसिटी पैराडॉक्स' कहा जाता है.

ओरल के मुताबिक़, शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी गंभीर हृदय रोग, स्ट्रोक और अचानक होने वाली दूसरी गंभीर बीमारियों का सामना करने में मदद कर सकती है.

बेहद गंभीर मामलों में शरीर में बहुत कम चर्बी से सेहत को लंबे समय तक नुक़सान पहुंच सकता है और मौत भी हो सकती है.

उदाहरण के लिए, एनोरेक्सिया नर्वोसा नाम की मानसिक स्वास्थ्य समस्या के कारण लंबे समय तक अंगों को नुक़सान पहुंच सकता है या व्यक्ति की मौत हो सकती है.

हमें वास्तव में कितनी चर्बी चाहिए?

अपने शरीर में मौजूद चर्बी को सही तरीक़े से मापना उम्मीद से कहीं ज़्यादा मुश्किल है. इसके बारे में आगे विस्तार से बताया गया है.

शरीर में चर्बी का ऐसा कोई एक प्रतिशत नहीं है, जिसे सभी लोगों के लिए सही माना जा सके. हर व्यक्ति की ज़रूरत अलग होती है.

फिर भी मोटे तौर पर देखें, तो सेहतमंद वयस्क पुरुषों के शरीर में आमतौर पर 10 से 20 फ़ीसदी चर्बी होती है.

सेहतमंद वयस्क महिलाओं में यह मात्रा आमतौर पर 20 से 29 फ़ीसदी होती है.

मोटापे के साथ जी रहे लोगों के शरीर में आमतौर पर 30 फ़ीसदी से ज़्यादा चर्बी होती है.

रीडेन कहते हैं, "शरीर में चर्बी की सबसे सही मात्रा क्या होनी चाहिए, इसके लिए कोई निश्चित दायरा बताना बहुत मुश्किल है."

वे कहते हैं कि यह मात्रा अलग-अलग लोगों, महिला-पुरुष और अलग-अलग जातीय समूहों में अलग हो सकती है.

खिलाड़ियों के शरीर में आमतौर पर चर्बी की मात्रा दूसरे लोगों के मुक़ाबले कम होती है.

डेट्रॉइट की वेन स्टेट यूनिवर्सिटी में खेल प्रदर्शन पर शोध करने वाली तमारा ह्यू-बटलर और उनके साथियों ने डेक्सा स्कैनर की मदद से 700 से ज़्यादा खिलाड़ियों के शरीर की जांच की.

डेक्सा स्कैन से शरीर की बनावट और अंदर मौजूद चर्बी को मापा जा सकता है.

ह्यू-बटलर कहती हैं, "हमने जिन खिलाड़ियों की जांच की, उनमें किसी पुरुष खिलाड़ी के शरीर में मिली चर्बी की सबसे कम मात्रा 10 फ़ीसदी और किसी महिला खिलाड़ी में 16 फ़ीसदी थी."

उनका कहना है कि कुछ खिलाड़ी यह नतीजा देखकर हैरान रह गए. अध्ययन में शामिल खिलाड़ी नियमित रूप से ट्रेनिंग करते थे और उन्हें लगता था कि उनके शरीर में केवल एक से दो फ़ीसदी चर्बी है.

शरीर में चर्बी की कुल मात्रा के साथ यह भी मायने रखता है कि वह जमा कहां है.

विसरल फ़ैट को पेट के अंदर जमा चर्बी भी कहा जाता है. इसकी मात्रा बहुत ज़्यादा होने पर यह ख़ास तौर पर नुक़सान पहुंचा सकती है.

त्वचा के नीचे जमा चर्बी से अलग विसरल फ़ैट शरीर के महत्वपूर्ण अंदरूनी अंगों के आसपास जमा होती है.

यह ऐसे रसायन छोड़ती है, जो शरीर में सूजन बढ़ाते हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ा सकते हैं. ये रसायन इंसुलिन के काम में भी रुकावट डालते हैं.

इससे शरीर के लिए ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है और टाइप-2 डायबिटीज़ का ख़तरा बढ़ता है.

शरीर में मौजूद चर्बी को कैसे मापा जा सकता है?

घर पर चर्बी मापने का एक और तरीक़ा स्मार्ट वज़न मशीन का इस्तेमाल है.
इमेज कैप्शन, घर पर चर्बी मापने का एक और तरीक़ा स्मार्ट वज़न मशीन का इस्तेमाल है

शरीर में चर्बी की मात्रा मापने के कुछ तरीक़े हैं. सबसे विस्तार से जानकारी डेक्सा फ़ुल बॉडी स्कैन से मिलती है. यह शरीर में जमा चर्बी, बिना चर्बी वाली मांसपेशियों और हड्डियों के भार के बीच अंतर बता सकता है.

हालांकि, इसके लिए विशेषज्ञ उपकरण की ज़रूरत होती है और यह महंगा हो सकता है. घर पर की जाने वाली एक लोकप्रिय जांच 'स्किनफ़ोल्ड टेस्ट' है.

इसमें ख़ास तौर पर बनाई गई चिमटी जैसे एक उपकरण से त्वचा को दबाकर उसके ठीक नीचे मौजूद चर्बी की परत की मोटाई मापी जाती है. इस उपकरण को कैलिपर कहा जाता है.

हालांकि, यह उपकरण शरीर के केवल कुछ ख़ास हिस्सों में ही चर्बी की परत की मोटाई माप सकता है. इससे पेट के अंदर अंगों के आसपास जमा विसरल फ़ैट को सीधे नहीं मापा जा सकता.

स्किनफ़ोल्ड टेस्ट बहुत सटीक भी नहीं होते. इनसे चर्बी की मात्रा वास्तविक स्तर से कम दिखाई दे सकती है.

घर पर चर्बी मापने का एक और तरीक़ा स्मार्ट वज़न मशीन का इस्तेमाल है. ये मशीनें शरीर में बहुत हल्का विद्युत प्रवाह भेजकर चर्बी की मात्रा का अनुमान लगाती हैं.

लेकिन इनकी रीडिंग इस बात से प्रभावित होती है कि शरीर में कितना तरल मौजूद है. इसलिए चर्बी का स्तर मापने के लिए इन्हें सटीक नहीं माना जाता.

ये मशीनें यह भी नहीं बता सकतीं कि चर्बी शरीर के किस हिस्से में जमा है. ये विसरल फ़ैट और दूसरी तरह की चर्बी के बीच अंतर भी नहीं कर सकतीं.

सेहतमंद शरीर बनाए रखने के लिए आमतौर पर शरीर की चर्बी को इतने विस्तार से मापना ज़रूरी नहीं होता.

हालांकि, दो तरह के माप से आपको सेहतमंद वज़न बनाए रखने और यह समझने में मदद मिल सकती है कि चर्बी शरीर के किस हिस्से में जमा हो रही है.

मापने वाले फ़ीते से इसका एक आसान अंदाज़ा लगाया जा सकता है. कमर और लंबाई का अनुपात बताता है कि किसी व्यक्ति की लंबाई की तुलना में उसके पेट के बीच वाले हिस्से में कितनी चर्बी जमा है.

कमर का घेरा मापने के बाद ऑनलाइन कैलकुलेटर की मदद से यह अनुपात निकाला जा सकता है. इसका सेहतमंद दायरा क़रीब 0.4 से 0.49 माना जाता है. कमर और कूल्हों का अनुपात भी इसकी अच्छी जानकारी दे सकता है.

इसे निकालने के लिए नाभि के पास कमर का घेरा मापें. इसके बाद इस संख्या को कूल्हों के सबसे चौड़े हिस्से की माप से भाग दें. इसे ऑनलाइन कैलकुलेटर से भी निकाला जा सकता है.

पुरुषों में 0.90 से अधिक और महिलाओं में 0.85 से अधिक अनुपात को ऊंचा माना जाता है. कमर के आसपास ज़्यादा चर्बी जमा होना ख़राब मेटाबॉलिक सेहत का संकेत हो सकता है.

बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई से शरीर में चर्बी की सही जानकारी नहीं मिलती. इसकी वजह यह है कि बीएमआई शरीर की चर्बी और मांसपेशियों के बीच अंतर नहीं कर सकता.

बहुत ज़्यादा मांसपेशियों और बहुत कम चर्बी वाले लोगों का बीएमआई भी अधिक हो सकता है.

उम्र बढ़ने के साथ शरीर की बनावट पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत पड़ सकती है.

उम्र बढ़ने पर शरीर में चर्बी आमतौर पर बढ़ने लगती है, जबकि मांसपेशियां और हड्डियां कमज़ोर होने लगती हैं.

इसका सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है. इसलिए अच्छा भोजन करना, नियमित व्यायाम करना और ताक़त बढ़ाने वाली कसरत करना ज़रूरी है.

हालांकि, हमें यह समझना चाहिए कि शरीर की चर्बी हमारे लिए कई ज़रूरी काम करती है. चर्बी को बहुत कम करने के लक्ष्य को लेकर जुनूनी नहीं होना चाहिए.

शरीर में चर्बी को कम से कम करने की कोशिश के बजाय उसकी सही मात्रा होना ज़रूरी है.

ओरल के शब्दों में, "हम मानते हैं कि चर्बी ताक़तवर भी है और ख़ूबसूरत भी."

मेलिसा होगेनबूम बीबीसी की वरिष्ठ स्वास्थ्य संवाददाता हैं. उन्होंने 'ब्रेडविनर्स' और 'द मदरहुड कॉम्प्लेक्स' नाम की किताबें लिखी हैं. इंस्टाग्राम पर उनका अकाउंट melissa_hogenboom नाम से है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.