संसद के आगामी विशेष सत्र में
विधायिका में महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर देश की 262
हस्तियों ने एक संयुक्त पत्र लिखकर चिंता जताई है.
इस पत्र के ज़रिए प्रस्तावित
विधेयकों के मसौदे को लेकर केंद्र सरकार पर 'पूरी तरह पारदर्शिता की कमी' के आरोप
लगाए गए हैं और मांग की है कि सरकार इन प्रस्तावित विधेयकों के मसौदे को 'सार्वजनिक करे.'
इन हस्तियों ने यह भी आरोप लगाया कि
देश के नागरिकों को प्रस्तावित विधेयकों के मसौदे, इनके प्रभाव और इसको लाने के पीछे के कारणों के बारे में 'पूरी तरह अंधेरे में रखा गया.'
जिन हस्तियों ने यह पत्र लिखा है, उनमें कई एक्टिविस्ट, पूर्व आईएएस, प्रोफ़ेसर, पूर्व राजनयिक, लेखक, वकील और संगठन शामिल हैं.
पत्र में कहा गया, "ये क़ानून भारत की चुनावी लोकतांत्रिक व्यवस्था
को बुनियादी रूप से बदल देंगे और देश के हर मतदाता को प्रभावित करेंगे."
इसके साथ ही इन 262 हस्तियों ने
केंद्र सरकार के सामने दो मांगें रखी हैं: पहली प्रस्तावित विधेयकों के मसौदे को
सार्वजनिक करना और दूसरी इन पर व्यापक सार्वजनिक परामर्श कराना.
बयान में कहा गया, "केंद्र सरकार की ओर से 2014 में अपनाई गई
प्री-लेजिस्लेटिव कंसल्टेशन पॉलिसी के तहत यह अनिवार्य है कि मसौदा विधेयकों को कम
से कम 30 दिनों के लिए सार्वजनिक किया जाए, आम लोगों से सुझाव मांगे जाएं और मिले फीडबैक का सार संबंधित मंत्रालय
की वेबसाइट पर कैबिनेट की मंज़ूरी से पहले उपलब्ध कराया जाए."
हालांकि, इस हस्तियों ने महिला आरक्षण का समर्थन किया है.
उन्होंने कहा, "हम विधायिका में महिलाओं के आरक्षण का पूरा
समर्थन करते हैं और हममें से कई लोग इसके लिए लंबे समय से चल रहे अभियानों का
हिस्सा रहे हैं. लेकिन गुपचुप और अलोकतांत्रिक तरीके से इन प्रस्तावित विधेयकों को
लाया जा रहा है, उसका हम कड़ा विरोध करते हैं."
"यह एक बड़ा विरोधाभास है और
लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ गंभीर अन्याय है कि महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए
विधेयक लाए जाएं, लेकिन उसी प्रक्रिया से महिलाओं को
बाहर रखा जाए."
केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इस सत्र के दौरान सरकार कुछ विधेयक पेश कर सकती है.
इनमें महिला आरक्षण अधिनियम (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) में संशोधन, एक परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेशों तक इस कोटे को बढ़ाने के लिए एक अलग विधेयक शामिल है.
रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इन मसौदा विधेयकों में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों में एक समान 50% बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी शामिल है, जिससे लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 816 और कुल विधानसभा सीटें 4,123 से बढ़कर 6,186 हो जाएंगी.