छत्तीसगढ़ के सक्ती ज़िले में वेदांता पावर प्लांट में मरने वाले मज़दूरों की संख्या 20 हो गई है.
इस बीच राज्य सरकार ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं. इधर कांग्रेस पार्टी ने भी एक जांच दल बनाया है.
गौरतलब है कि मंगलवार की दोपहर सक्ति ज़िले के वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर फटने से लगभग तीन दर्जन मज़दूर बुरी तरह से झुलस गए थे. इनमें से 9 मज़दूरों की मौत कल हुई थी. जबकि इलाज के दौरान 7 अन्य मज़दूरों की मौत हो गई.
अभी तक मृतकों में से केवल चार की पहचान हो पाई है, जिनमें ठंडाराम, पप्पू कुमार, अमृत पटेल और बृजेश कुमार का नाम शामिल है. प्लांट प्रबंधन का कहना है कि मृतकों के शरीर जलने के कारण उनकी पहचान में मुश्किल हो रही है.
इस दुर्घटना में 36 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 12 छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं. शेष मज़दूर बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के हैं.
लोगों को आरोप है कि इस पावर प्लांट में काम करने वाले कई लोग लापता हैं. प्रबंधन न तो उनकी जानकारी दे रहा है, न ही वे अस्पताल में भर्ती हैं. इसे लेकर कल रात से ही पीड़ित परिवार के सदस्य पावर प्लांट के सामने धरना दे रहे हैं.
इस बीच वेदांता प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपये और नौकरी देने की घोषणा की है. घायलों को 15-15 लाख रुपए दिए जाएंगे. प्रधानमंत्री राहत कोष से भी मृतकों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50 हज़ार रुपये दिए जाएंगे. राज्य सरकार ने भी मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये देने की घोषणा की है.
वेदांता प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपए सहायता राशि और नौकरी देने का एलान किया है और घायलों को 15-15 लाख रुपए दिए जाएंगे.
इससे पहले पीएमओ ने मुआवजे़ की घोषणा की थी. हर मृतकों के परिवार वालों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हज़ार रुपए दिए जाएंगे.