अब तक अनसुलझा है अमेज़न नदी का रहस्य

अमेज़न नदी
    • Author, श्रेया दासगुप्ता
    • पदनाम, बीबीसी अर्थ
  • प्रकाशित

किसी भी नदी की पहचान उसकी धारा, उसके लंबे-चौड़े पाट या किनारे होते हैं. क़ुदरत की सबसे ख़ूबसूरत नेमतों में से एक हैं नदियां. लेकिन बड़ी से बड़ी नदी की शुरुआत भी बहुत छोटी धारा से होती है.

क़िताबें हमें बताती हैं कि फलां नदी, कहीं दूर पहाड़ी से शुरू होती है. जब बारिश होना बंद हो जाती है, तो, बर्फ़ पिघलती है, या ज़मीन के अंदर से कोई झरना फूटता है और पानी की एक धार बहनी शुरू हो जाती है.

कई छोटी-छोटी ऐसी धाराएं आगे जाकर एक दूसरे से मिल जाती हैं. यही धाराएं आगे चलकर बड़ी नदी का रूप ले लेती हैं.

इसका मतलब ये है कि दुनिया की सबसे लंबी या सबसे बड़ी नदियां जैसे नील या फिर अमेज़न की शुरुआत के एक-दो नहीं सैकड़ों शुरुआती बिंदु होते हैं.

लेकिन भूगोल के जानकार, किसी एक ठिकाने को ही नदी की शुरुआत की जगह मानते हैं.

सवाल ये है कि वो ये कैसे तय करते हैं कि कोई नदी कहां से बहना शुरू होती है? और क्या इस फ़ैसले के कुछ ख़ास मायने भी होते हैं?

अमरीका के स्मिथसोनियन नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूज़ियम के एंड्र्यू जॉन्स्टन कहते हैं कि किसी नदी की शुरुआत के अलग-अलग ठिकाने माने जाते हैं.

अमेज़न नदी

लेकिन कुछ बुनियादी नियम हैं जिनसे किसी नदी का शुरुआती ठिकाना तय होता है.

आमतौर पर भूगोल के जानकार, सबसे ज़्यादा पानी वाली धारा के सबसे दूर वाले ठिकाने को ही किसी नदी की शुरुआत मानते हैं.

हालांकि कुछ लोगों को इस परिभाषा पर ऐतरा़ज़ रहा है. कई बार कुछ नदियों की सहायक नदियों की धाराएं, उस नदी की अपनी धारा से ज़्यादा पानी वाले होती हैं.

कई बार कुछ धाराएं, अलग-अलग मौसमों में पानी की अलग मात्रा के साथ बहती हैं.

किसी नदी की शुरुआत कहां से होती है इसका पता लगाने के लिए आपको उसकी अलग धाराओं में पानी की तादाद के कई सालों के आंकड़े चाहिए होंगे.

आम तौर पर ऐसे आंकड़े नहीं मिलते. ऐसे में किसी नदी की उत्पत्ति उसकी सहायक नदियों की धारा में पानी की तादाद देखकर मोटे तौर पर तय की जाती है.

नदियों की दशा दिशा नापने वाले कार्टोग्राफर या नक्शानवीसों ने पूरी नदी और उसकी घाटी का नक्शा बनाना शुरू किया, तो ये तरीक़ा ज़्यादा बेहतर माना गया.

अमेज़न नदी

इस तरीक़े से ये तय पाया गया कि किसी नदी की सबसे मोटी धारा जहां से शुरू होती है वहीं से नदी बहना शुरू होती है.

अब कुछ लोगों ने कहा कि ये परिभाषा नदी की लंबाई पर ज़्यादा भरोसा करती है, उसमें पानी की मात्रा को पैमाना नहीं मानती. इससे पहले पानी की मात्रा के हिसाब से नदियों के नाम तय होते थे.

अब आप धारा की लंबाई को पैमाना मानेंगे तो नदी की शुरुआत अलग होगी. लेकिन, अगर आप धारा में पानी की मात्रा को पैमाना मानेंगे तो नदी की शुरुआत का ठिकाना अलग होगा.

इसीलिए कई बड़ी नदियों की उत्पत्ति को लेकर आज भी मतभेद हैं. जैसे कि दुनिया की सबसे बड़ी नदी अमेज़न को ही ले लीजिए.

इसकी लंबाई 6200 किलोमीटर से लेकर 7,000 किलोमीटर तक मानी जाती है. इसे दुनिया की सबसे लंबी और सबसे बड़ी नदी माना जाता है.

अमेज़न नदी की घाटी दक्षिण अमरीका के आठ देशों में फैली हुई है. ब्राज़ील, बोलीविया, पेरू, इक्वाडोर, कोलंबिया, वेनेज़ुएला, गुयाना और सूरीनाम के अलावा फ्रेंच गुयाना तक अमेज़न की धारा बहती है.

इतनी बड़ी नदी की धारा कहां से शुरू होती है, इस पर अब तक एक राय नहीं बन सकी है. पिछली एक सदी से अमेज़न के उद्गम को चिह्नित करने की कोशिश हो रही है.

रियो मारानॉन

सन् 1707 में भूगोलविद् फ़ादर सैमुअल फ्रिट्ज ने एक नक्शा छपवाया. इसमें अमेज़न का उद्गम लॉरीकोचा झील को बताया गया जो अमेज़न की सहायक नदी, मारानॉन का स्टार्टिंग प्वाइंट है. ये ठिकाना पेरू में है.

फ्रिट्ज का मानना था कि मारानॉन नदी में अमेज़न की सहायक नदियों के मुकाबले सबसे ज़्यादा पानी रहता है.

लेकिन बीसवीं सदी की शुरुआत में कुछ खोजों में ये पाया गया कि अमेज़न की शुरुआत पेरू की एपूरिमैक नदी की शुरुआत से होती है, लेकिन इस पर भी आम राय नहीं बन सकी.

इस सहायक नदी के उद्गम को लेकर ही मतभेद हो गए. किसी ने पेरू की विलाफ्रो झील को एपूरिमैक का उद्गम माना तो किसी ने माउंट हुगारा को.

मिस्मी ज्वालामुखी

फिर, 1960 के दशक में पेरू के भूगोलविद् कार्लोस पेनाहेरारा डेल एगुइला ने दावा कि पेरू की नेवादो मिस्मी नाम की जगह एपूरिमैक नदी की शुरुआती जगह है और यहीं से अमेज़न का उद्गम माना जाना चाहिए.

आज की तारीख़ में ज़्यादातर लोग इसे ही अमेज़न की शुरुआत की जगह मानते हैं.

लेकिन, साल 2000 में इससे भी ऊपर कारहुआसांता नाम की जगह, एपूरिमैक नदी के बहने की शुरुआत मानी गई. फिर अमेज़न की शुरुआत भी यहीं से मानी गई.

लेकिन, 2014 में खोजकर्ता जेम्स कॉन्टोस ने दावा किया कि पेरू की मांतारो नदी को अमेज़न की उत्पत्ति की जगह माना जाना चाहिए.

जेम्स जब 2012 में अमेज़न का शुरुआती ठिकाना तलाश रहे थे तो उन्हें लगा कि मांतारो नदी में एपूरिमैक नदी से ज़्यादा पानी रहता है, वो भी पूरे साल. तो इसे ही अमेज़न की शुरुआत माना जाना चाहिए.

मांतारो नदी

जेम्स न जीपीएस की मदद से एपूरिमैक और मांतारो दोनों की लंबाई-चौड़ाई कई बार नापी, तब जाकर वो इस नतीजे पर पहुंचे.

इस कोशिश में जेम्स को पता चला कि मांतारो नदी, एपूरिमैक से क़रीब 75 से 77 किलोमीटर ज़्यादा लंबी है.

इस नई खोज से ये तय हुआ कि अमेज़न का शुरुआती ठिकाना कॉर्डिलेरा रूमू क्रूज़ नामक की पहाड़ी है.

वैसे, सभी लोग जेम्स के दावे से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते. उनका कहना है कि साल के कई महीने मांतारो नदी सूखी रहती है क्योंकि इसका पानी 1972 में बने एक बांध के चलते दूसरी तरफ़ मोड़ दिया जाता है.

इसीलिए कुछ लोग अभी भी अमेज़न की सहायक एपूरिमैक नदी की शुरुआत को ही अमेज़न की उत्पत्ति का ठिकाना मानते हैं.

वहीं जेम्स ये कहते हैं कि बांध बनने के बावजूद मांतारो नदी में थोड़ा ही सही, पानी तो बहता ही है. इसीलिए उसे ही अमेज़न का उद्गम माना जाना चाहिए.

वैसे सिर्फ़ अमेज़न नदी ही ऐसी नहीं जिसकी शुरुआत को लेकर गफ़लत है.

टेम्स नदी

दुनिया की सबसे बड़ी नदियों में से एक अफ़्रीका की नील नदी की शुरुआत कहां से होती है, इस पर भी आम राय नहीं. यहां तक कि ब्रिटेन की टेम्स नदी की शुरुआत पर भी मतभेद हैं.

1937 में दो ब्रिटिश सांसदों के बीच टेम्स के असली शुरुआती ठिकाने को लेकर अच्छी ख़ासी बहस हो गई थी.

आधिकारिक रूप से टेम्स की शुरुआत, टेम्स हेड नाम की एक जगह को माना जाता है. ये जगह दक्षिण-मध्य इंग्लैंड के केम्बल नाम के गांव के पास पहाड़ियों के बीच है.

लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि टेम्स नदी, सेवेन स्प्रिंग्स नाम की जगह से बहना शुरू होती है. यहीं से टेम्स की सहायक नदी चर्न बहती है.

आज अगर चर्न नदी को टेम्स का शुरुआती ठिकाना माना जाए तो इसकी लंबाई 22 किलोमीटर और बढ़ जाएगी.

इसी तरह एशिया की सबसे बड़ी, चीन की यांग्त्ज़े नदी की शुरुआत को लेकर भी मतभेद हैं.

1985 में वॉन्ग हाउ मैन नाम के पत्रकार ने दावा किया कि उसने यांग्त्ज़े नदी का उद्गम खोज निकाला है. ये इसकी सहायक नदी डाम्क़ू का शुरुआती ठिकाना है.

यांग्त्ज़े नदी

लेकिन, बीस साल बाद ख़ुद हाउ मैन को लगा कि उसका पिछला अंदाज़ा ग़लत था. इसमें तो यांग्त्ज़े की एक और सहायक नदी है जो डाम्क़ू से भी ज़्यादा लंबी है.

हाउ मैन ने ख़ुद अपनी ग़लती सुधारी. कुछ और वैज्ञानिकों ने भी हाउ मैन के दावे पर मुहर लगाई है.

वहीं एक और चीनी वैज्ञानिक ने साल 2008 में पता लगाया कि यांग्त्ज़े नदी की शुरुआती धारा तो दांगला की पहाड़ियों से बहना शुरू होती है.

वैसे आधिकारिक रूप से यांग्त्ज़े की छोटी सहायक नदी ट्यूटुओ की शुरुआत को ही इस नदी का उद्गम माना जाता है.

अब इतने अलग-अलग दावों के बीच किसे सही माना जाए? बेहतर होगा कि जिस जगह पर सरकार की मुहर लगे, उसे ही किसी नदी की उत्पत्ति की जगह माना जाना चाहिए.

लेकिन कई बार सरकारें भी ग़लती करती हैं. और फिर इन्हें जल्दी ठीक भी नहीं किया जाता.

भारत में सर्वे ऑफ इंडिया ही सरकारी नक्शे बनाता है. तो सर्वे ऑफ इंडिया जिस जगह को किसी नदी की शुरुआत मानता है, वो ही आधिकारिक ठिकाना होती है.

गंगा नदी

हालांकि भारत के पूर्व सर्वेयर जनरल स्वर्ण सुब्बा राव कहते हैं कि हम किसी ख़ास ठिकाने को नदी की शुरुआत बताते ही नहीं. वो कहते हैं कि सर्वे ऑफ़ इंडिया, नदी की पूरी घाटी का सर्वे करके नक्शा जारी कर देती है.

कुछ देशों में नक्शों को गोपनीय कहकर जारी नहीं किया जाता. कई इलाक़ों की तो अब तक पैमाइश ही नहीं हो सकी है. इसके लिए सैटेलाइट से रिमोट सेंसिंग तकनीक की मदद से नक्शे तैयार किए जाते हैं. लेकिन, इनके आंकड़ों पर भी पक्के तौर पर यक़ीन नहीं किया जा सकता.

जेम्स कॉन्टोस कहते हैं कि नदियों की धाराएं अक्सर कुछ सालों में दशा-दिशा बदल लेती हैं. ऐसे में सैटेलाइट से मिले आंकड़े भरोसे लायक़ नहीं होते.

ऐसे में सवाल ये है कि क्या किसी नदी की शुरुआत का सही-सही पता होना ज़रूरी है?

इसका जवाब है, हां. सही उद्गम पता होने से नदी के पानी का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है. इसे ख़तरों से बचाने के लिए ज़रूरी इंतज़ाम करने में भी मदद मिलती है.

ये इसलिए भी ज़रूरी है कि हमें धरती के बारे में जानने का कौतूहल होता है. हम जानना चाहते हैं कि फलां पहाड़ कितना ऊंचा है.

इसी तरह हम ये भी जानना चाहते हैं कि कोई नदी कितनी लंबी है. असल में ये दुनिया की खोज की दिशा में उठा एक क़दम है.

नील नदी

जैसे, अमेज़न या नील नदी के उद्गम के तमाम विकल्पों में से जिसे भी आप मानते हैं, उस हिसाब से दुनिया की सबसे लंबी नदी का खिताब दोनों नदियों में से किसी एक को ही मिलेगा.

बात ये मामूली है, मगर है बेहद दिलचस्प. स्थानीय लोग इसमें गौरव महसूस करते हैं.

2012 में भारतीय वैज्ञानिक मलय मुखोपाध्याय ने टेम्स नदी के शुरुआती ठिकाने का दौरा किया. इसके बाद उन्होंने भारत में भी नदियों की उत्पत्ति की जगह पर कोई निशानी लगाने की मुहिम शुरू की.

टेम्स नदी

इसीलिए उन्होंने दिसंबर 2015 में पूर्वी भारत की प्रमुख अजय नदी की शुरुआत का पता लगाया. फिर वहां उन्होंने निशानी के तौर पर बड़ा सा पत्थर लगा दिया. मुखोपाध्याय कहते हैं कि इससे जियो-टूरिज़्म के दरवाज़े खुलते हैं.

वो बताते हैं कि पत्थर लगाने के बाद एक स्थानीय आदमी ने उनसे कहा कि अब बाहर के लोग यहां घूमने आएंगे. इससे उसके बच्चे भी बाहर की दुनिया के बारे में जानने में दिलचस्पी लेंगे.

नदियों का हमारी ज़िंदगी पर गहरा असर पड़ता है. इसलिए इनकी शुरुआत के बारे में पता लगाना एक बड़े राज़ पर से पर्दा उठाने जैसा है.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href=" http://www.bbc.com/earth/story/20160516-why-it-is-hard-to-find-the-source-of-rivers-like-the-amazon" platform="highweb"/></link>, जो बीबीसी <link type="page"><caption> अर्थ</caption><url href="http://www.bbc.com/earth/uk" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)

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