सबसे बड़े परमाणु हादसे के 30 साल

परमाणु हादसा
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यूक्रेन के चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र में हुए दुनिया के सबसे बड़े परमाणु हादसे को मंगलवार को 30 साल हो गए लेकिन सयंत्र के चारों ओर एक्सक्लूज़न ज़ोन अब भी क़ायम है.

26 अप्रैल, 1986 को चेर्नोबिल के नंबर चार रिएक्टर में धमाका हुआ था जिसके बाद विकिरण पूरे यूरोप तक फैल गया था.

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घटना के तुरंत बाद कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद विकिरण से हुई बीमारियों में कई लोग मारे गए हालांकि उनकी संख्या को लेकर मतभेद हैं.

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फ़ोटोग्राफ़र जेर्ज़ी वीर्ज़बिकी दो गाइडों को लेकर, जो परमाणु सयंत्र के पूर्व कर्मचारी थे, इस ज़ोन में गए.

वास्तविकता यह है कि इस एक्सक्लूज़न ज़ोन को कभी पूरी तरह से ख़ाली नहीं कराया गया. रेडिएशन के स्तर के अनुरूप नियम अलग-अलग हैं.

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पावर प्लांट में कोई स्थायी आधिकारिक निवासी नहीं है. कर्मचारियों को चेर्नोबिल शहर में रहने की इजाज़त है जो 15 किलोमीटर दूर है और उनमें से एक ख़ास संख्या को ही कुछ हफ़्ते के लिए रहने दिया जाता है.

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प्लांट से कुछ दूर मारिया और इवान सेमीनियुक अपने गांव में खाना खा रहे थे.

दुर्घटना के समय उन्हें चेर्नोबिल से 20 किलोमीटर दूर बसे उनके गांव से हटा दिया गया था.

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अधिकारियों ने उन्हें बताया था कि वह तीन दिन बाद वापस आ सकते हैं लेकिन वह दो साल बाद ही लौट सके.

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उनके घर में रेडिएशन का स्तर डोसिमीटर पर ख़तरे से बहुत कम पाया गया था.

उनके घर के पास के इलाक़े में कुछ और भी लोग रहते हैं लेकिन मोटे तौर पर यह इलाक़ा खाली ही है.

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दुर्घटना के बाद कुल 1,16,000 लोगों को एक्सक्लूज़न ज़ोन से बाहर निकाला गया था.

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