वो 140 अक्षर जिन्होंने बदल दी दुनिया

सुमिता और अनुज
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10 साल पहले इन शब्दों के साथ "जस्ट सेटिंग अप माई ट्विटर" जैक डॉर्से ने ट्विटर का सफर शुरू किया.

तब से लेकर अब तक ये माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट करोड़ों लोगों की ज़िंदगी का हिस्सा बन गई है और कुछ की तो पूरी ज़िंदगी ही बदल दी है.

140 शब्दों में शादी के प्रस्ताव से लेकर सोफे में बैठकर क्रांति के लिए लोगों को प्रेरित करना, ऐसी ही कुछ कहानियां 10 साल पूरा होने पर लोग साझा कर रहे हैं.

अपनी गर्लफ्रेंड स्टीफेनी से प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद अमरीकी, ग्रेग रिविस ने ट्विटर के ज़रिए दोबारा शादी का प्रस्ताव भेजा.

ग्रेग और स्टीफेनी

बीबीसी से ग्रेग ने कहा कि ये सब पहले एक मज़ाक के तौर पर शुरू हुआ. फिर उन्होंने ट्वीट कर अपनी गर्लफ्रेंड से शादी का प्रस्ताव रखा.

उनके मुताबिक ट्विटर पर ये पहला शादी का प्रस्ताव था.

ग्रेग कहते हैं कि अगर उन्हें ये बात पहले से पता होती तो वो इसे और प्रभावी तरीके से सामने रखते.

ग्रेग को काफी घूमना पड़ता है और वो ट्विटर के ज़रिए अपनी पत्नी के साथ संपर्क बनाए रखते हैं.

2009 में शादी के प्रस्ताव के बाद दोनों ने साल भर बाद शादी कर ली जिसे उन्होंने लाइव ट्वीट किया था.

अनुज और सुमिता डालमिया

अटलांटा में रहने वाली सुमिता डालमिया ने पिछले कुछ सालों में 10 हज़ार डॉलर से ज्यादा के पुरस्कार जीते हैं.

बीबीसी से इंटरव्यू में सुमिता ने कहा कि ट्विटर ने ही उन्हें उनके प्यार, अनुज पटेल से मिलाया.

सितंबर 2013 में अनुज ने ट्वीट के ज़रिए सुमिता के सामने शादी का प्रस्ताव रखा.

2015 यूके चुनावों के दौरान जब 18 साल की एबी टामलिंसन को लगा कि लेबर नेता एड मिलिबैंड को मीडिया सही तरह से पेश नहीं कर रहा है तब उन्होंने #मिलिफैंडम तैयार करने में मदद की.

एबी टामलिंसन

जल्द ही ये हैश टैग यूके में नंबर वन ट्विटर ट्रेंड बन गया.

भले ही इससे मिलिबैंड के करियर पर ज्यादा असर नहीं पड़ा लेकिन इससे एबी की ज़िंदगी बदल गई.

इसके बाद वो मीडिया में लेख लिखने लगीं और कई चैनलों ने एबी का इंटरव्यू भी लिया.

कुछ हफ्तों बाद एड मिलिबैंड ने खुद एबी को कॉल कर धन्यवाद दिया.

मिस्र की बीबीसी मारवा ममून बीबीसी संवाददाता हैं. लेकिन 2011 में जब वह गर्भवती थीं और क्रांति में सक्रिय नहीं हो सकती थीं तब उन्होंने घर पर बैठकर ट्विटर के ज़रिए मिस्र की क्रांति में हिस्सा लिया.

मारवा ममून

वो अरब जगत में महिलाओं से जुड़ी समस्याओं पर लिखने लगीं और देखते ही देखते वो ट्विटर पर अरब जगत की एक बेहद प्रभावशाली महिला बन गईं.

अगले दिन मिस्र की सभी राजनीति पार्टियां उन्हें अपने पार्टी में शामिल करने का न्यौता भेजने लगीं.

वो पत्रकार नहीं थीं लेकिन बाद में एक अमरीकी वेबसाइट की मुख्य संपादक बन गईं.

इसके कुछ साल बाद मारवा ने संयुक्त राष्ट्र में नौकरी कर ली जिसके बाद उन्होंने रेडियो नीदरलैंड में काम किया और फिर बीबीसी का हिस्सा बन गईं.

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