जब अकाल का असर फ़सलों पर नहीं होगा...

प्रकाशित

दक्षिण अफ्रीका की केपटाउन यूनिवर्सिटी की प्लांट मॉलिक्यूलर फिजियोलॉजिस्ट जिल फ़ारांट का वास्ता बचपन के दिनों में एक अलग तरह के पौधे से पड़ा था.

वह बताती हैं, “मैं नौ साल की थी, फ्लैक रॉक्स इलाके में मुझे एक सूखा हुआ पौधा दिखा था. उस रात बारिश हुई और अगली सुबह वह पौधा पूरी तरह से हरा भरा नज़र आया.”

जिल फ़ारांट ने जब ये बात अपने किसान पिता को सुनाई तो उन्हें यक़ीन नहीं हुआ था.

लेकिन यह किस्सा एक याद के तौर पर जिल फ़ारांट के साथ बना रहा और अपनी पीएचडी के अध्ययन के बाद वह फिर उसी इलाके में उस ख़ास पौधे की तलाश में पहुंचीं.

दरअसल, उनका वास्ता एक ख़ास तरह के पौधे से पड़ा था, जो पानी के अभाव में सालों तक रह सकता था.

जिल बताती हैं, “यह पौधा अपना 95 फ़ीसदी पानी खोकर भी जीवित रह सकता है, चार साल तक...पानी मिलने के बाद तीन घंटे से लेकर 48 घंटे के बीच यह पूरी तरह से सक्रिय पौधा बन जाता है.”

अब जिल इस पौधे पर एक महत्वपूर्ण अनुसंधान में जुटी हैं. वह कहती हैं, “अगले 20 साल में जलवायु परिवर्तन की समस्या इतनी गंभीर हो जाएगी, इसके चलते खाद्य सुरक्षा का संकट भी बढ़ेगा.”

जिल के मुताबिक यह संकट इतना गंभीर होगा कि इसका असर दुनिया भर के 95 फ़ीसदी अनाज उत्पादन पर पड़ेगा. यही वजह है कि इस पौधे की मदद से वह खाद्यान्न उत्पादन के मौजूदा तौर तरीकों को बदलना चाहती हैं.

उनका कहना है कि वो इस पौधे के जीनोम के अध्ययन से ये पता लगा रही हैं कि वो कौन सा जीन है जो इसे इस हालत में जीवित रखता है.

वह इस ख़ास प्रजाति के पौधे के गुणों का इस्तेमाल गेहूं, चावल और मक्के की बीज़ में करना चाहती हैं ताकि ये पौधे भी सूखे का सामना बखूबी कर पाएं.

वह बताती हैं, “इस ख़ास प्रजाति के जीवों के उन गुणों का पता लगने के बाद, गेंहूं, चावल और मक्का में उसी जीन का पता लगाने से सुनिश्चित किया जा सकेगा कि वो भी पानी के कमी को किस तरह से झेल पाते हैं. फिर किसानों के लिए सूखे और जलवायु परिवर्तन की समस्याओं का सामना करना आसान हो जाएगा.”

<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/future/story/20151220-could-resurrection-plants-be-the-future-of-food" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी फ़्यूचर</caption><url href="http://www.bbc.com/future" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>