इस्लामिक स्टेट की बदली रणनीति क्या है?

पेरिस हमला
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    • Author, फ़्रैंक गार्डनर
    • पदनाम, बीबीसी के रक्षा संवाददाता
  • प्रकाशित

शुक्रवार को हुए पेरिस हमलों से स्पष्ट हुआ है कि दुनिया में उन चरमपंथी हमलों की संख्या बढ़ी है जिनकी या तो इस्लामिक स्टेट ने ज़िम्मेदारी ली है या फिर सुरक्षा एजेंसियां जिन हमलों के लिए आईएस को ज़म्मेदार मानती हैं.

इस्लामी स्टेट चरमपंथी
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पिछले साल की बात करें तो इस्लामिक स्टेट की प्राथमिकता मध्य पूर्व में अपनी ज़मीन तलाशने की थी. सीरिया के रक्का और उत्तरी इराक के मोसुल शहर में बैठे इसके आकाओं की अब भी यही प्राथमिकता है. लेकिन उन्हें यूरोप और दूसरे जगहों पर मौजूद जिहादियों के बीच अपने लिए मौजूद हमदर्दी का अहसास है.

गठबंधन सेना के हवाई हमले
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सीरिया में अमरीका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना के हवाई हमलों में इस्लामिक स्टेट के नेता लगातार निशाना बनाए जा रहे हैं. इससे भारी नुकसान के कारण आईएस मध्य पूर्व से दूरदराज़ के इलाक़ों में या तो ख़ुद हमलों की योजना बना रहे हैं या फिर वहाँ बैठे हमदर्द लोगों को ऐसा करने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं.

पेरिस हमला
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ख़तरा 1600 किलोमीटर लंबी तुर्की-सीरियाई सीमा से है क्योंकि पहले जिहादी बनने के इच्छुक यूरोपीय लोग, इस्लामिक स्टेट चरमपंथियों के पास पहुंचने के लिए आसानी से इस रास्ते का इस्तेमाल करते थे. हालांकि ये सीमा अब भी बहुत आसानी से लांघी जा सकती है लेकिन इस सीरियाई सीमा का बड़ा हिस्सा कुर्द चरमपंथियों के कब्ज़े में है जो आईएस के कट्टर विरोधी हैं.

पेरिस हमले

यूरोपीय जिहादियों के सीरिया पहुँचने के लिए इराक़ व्यावहारिक रास्ता नहीं है क्योंकि जॉर्डन का बॉर्डर तो बंद है और लेबनान में सुरक्षा एजेंसियों काफ़ी सतर्क हैं और पकड़ने जाने की संभावन ख़ासी है.

पेरिस हमलों को देखकर इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इन हमलों की योजना और तैयारी, प्रशिक्षण, हथियारों और गोला-बारूद के स्रोत के लिए काफ़ी सोच-समझकर काम किया गया होगा.

जिस तरह टार्गेट चुने गए, जिस प्रकार के हथियार और गोला बारूद इस्तेमाल हुआ और जिस तरह कट्टरपंथी युवा हमलावरों ने अपनी जान की परवाह किए बगैर हमलों को अंजाम दिया, इससे साफ़ है कि पेरिस हमले सुनियोजित थे.

पेरिस हमलों के बाद इस्लामिक स्टेट की रणनीति की अल-कायदा की 2000 के रणनीति से तुलना की जा सकती है. साल 2000 की शुरूआत में अल-कायदा अपनी लोकप्रियता बढ़ाने और सुर्खियों में छाए रहने के लिए बड़े पैमाने पर हमले करता था. उसकी मंशा ज्यादा से ज्यादा जानमाल का नुकसान करना थी.

पेरिस हमला
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आतंकवाद का मुकाबला करने वाले अधिकारियों के मुताबिक भले ही बड़े पैमाने पर हमला करने वाले लोग अब भी मौजूद हों, लेकिन ज्यादा ख़तरा व्यक्तिगत तौर पर योजना बनाने और हमले करने वाले भटके हुए नौजवानों से है, जिस तरह से 2013 में लंदन के पास एक ब्रिटिश सैनिक ली रिगबी की हत्या की गई थी.

इसी साल जून में इस्लामिक स्टेट के चरमपंथियों ने ट्यूनिशिया के बीच रिज़ॉर्ट सोसे में गोलीबारी कर 38 पर्यटकों को मार दिया था जिनमें से 30 ब्रिटिश नागरिक थे.

अंकारा में हमला
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अक्टूबर महीने में तुर्की के अंकारा शहर में हुए आत्मघाती हमले में 102 लोगों की मौत के लिए इस्लामिक स्टेट को ज़िम्मेदार ठहराया गया.

अक्टूबर महीने में ही इस्लामिक स्टेट ने एक रूसी विमान को गिराने का दावा किया जिसमें 224 यात्रियों की मौत हो गई.

बेरूत बम धमाके
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12 नवंबर को सुन्नी चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट ने शिया चरमपंथी संगठन हिज्जबुल्ला के गढ़ दक्षिण बेरूत में बम धमाके कर 44 लोगों को मार दिया था और अब पेरिस हमलों में मृतकों की संख्या 129 हो गई है जबकि 100 से अधिक की हालत गंभीर है.

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