अलास्का में बर्फ़ की पल पल बदलती वादी

    • Author, एरिक गुथ
    • पदनाम, बीबीसी ट्रैवल
  • प्रकाशित

अमरीका के अलास्का प्रांत में स्थित है जोनउ आइस फ़ील्ड. पश्चिमी गोलार्ध में दुनिया का सातवां सबसे बड़ा हिम इलाका है और करीब 1500 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है.

इस इलाके में सालाना बर्फ़बारी 100 फ़ीट होती है. सर्दियों और अत्यधिक उंचाई की वजह से इलाके की बर्फ़ गर्मियों में भी कम पिघलती हैं, लेकिन यहां अब गर्मियों में तापमान बढ़ने लगा है.

इस आइस फ़ील्ड की सबसे बड़ी ख़ासियत है कि मेंडेनहॉल ग्लेशियर. जून, 2013 में यहां का तापमान 32 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंच जाता है. एक सप्ताह तक तापमान इससे ज़्यादा ही रहता है.

अलास्का के तटीय इलाकों के लिए यह नई बात थी. इसकी वजह बर्फ़ पिघलने की गति बढ़ी है. 2005 के बाद से प्रति साल करीब 100 फीट बर्फ़ पिघल रही है, जो 1942 के मुकाबले दोगुनी दर है.

2006 में मेंडेनहॉल के 12 मील लंबा इलाका बेहद शानदार था. पिघलता हुए बर्फ़ को पानी के तौर पर बहते देखना अचरज भरा था.

यहां का ग्लेशियर नीले रंग में नहाया हुआ नजर आता है. पिघला हुआ पानी ग्लेशियर को नया आकार भी देता है. पानी के प्रवाह के चलते ही हिमशिलाओं में गुफाएं जैसी बन जाती हैं.

फोटोग्राफ़र और हिमनद के आंतरिक बनावट और रहस्यों पर लेक्चर देने के चलते, मेरी दिलचस्पी हिमनद मे बनी ऐसी गुफाओं में हुई. यहां हिमनद की गुफाओं को आकार समय के साथ बदलता भी दिख रहा था.

मैंने उसकी ख़ूबसूरती को देखते हुए अपने निकॉन ट्रायपॉड में सेल्फ़ टाइमर लगाकर तस्वीर लीं.

तब एकदम ऐसा भरोसा नहीं था कि मैं साल दर साल बदलती हुई हिम गुफाओं की तस्वीर लेने के लिए आता रहूंगा.

यहां यह समझना जरूरी है कि ग्लेशियर की बनी गुफा, बर्फ़ की गुफा से अलग होती है. बर्फ़ की गुफा ठोस होती है जबकि ग्लेशियर की गुफा बर्फ़ के पानी बनने के दौरान बनती हैं.

यानी बर्फ़ जब पिघल रही होती है, तबकी बात है. इसका आकार बर्फ़ के पिघलने की वजह से बदलता रहता है. अगर लैंडस्कैप के लिए इसकी तस्वीर ली जाए तो हर तस्वीर अलग नज़र आती है.

जुलाई, 2013 की मेंडेनहॉल की यात्रा के दौरान मेरा ध्यान एक ख़ास पहलू पर गया जिसपर पिछली पांच यात्राओं के दौरान ध्यान नहीं गया था. यहां बर्फ़़ की दीवारों पर छोटे पंख वाली दर्जनों मक्खियां मौजूद थीं. करीब एक इंच लंबी और अपनी जगह पर जमी हुई. यह स्टोनफ्लाई प्रजाति की मक्खियां थीं.

इनके बारे में कम ही जानकारी उपलब्ध है लेकिन ऐसी ही प्रजाति की मक्खियां मैंने 2013 के बाद तीन अलग अलग देशों में देखीं, तो मुझे ऐसा लगता है कि बर्फ़़ीले इलाके में गर्मियों के समय में यह मक्खियां वहां पहुंच जाती होंगी, पक्षियों का शिकार होने से बचने के लिए.

गर्मी के महीनों में मेंडेनहॉल ग्लेशियर की सतह कैरेबियाई नीले वाटर पूल जैसी नजर आती हैं. हालांकि इस वाटर पूल का आकार साल भर घटता-बढ़ता रहता है.

ग्लेशियर भी बर्फ़ का टुकड़ा होता है जो गुरुत्व के बल के चलते नीचे की ओर फिसलता है. ऐसे में हिम दरार बनती भी हैं, और तेजी से भर भी जाते हैं.

इस दौरान पिघला हुआ पानी हिम दरार तक पहुंचने के लिए कौन सा रास्ता अपनाता है, यह देखना भी दिलचस्प होता है. कई बार तो वह विंडमिल के वर्टिकल कॉलम के तौर पर गुफा तक पहुंचता हैं. यह सतह से तो नहीं दिखता लेकिन शौकिया खोजबीन करने के दौरान यह नजर आ सकता है.

वैसे हिमनद का आकार और उसकी ख़ूबसूरती हमेशा पर्यटकों को रिझाती है. इस तस्वीर में नजर आ रहे एलन गोर्डन यहां स्थानीय निवासी हैं और मेंडेनहॉल ग्लेशियर में दर्जनों बार उतर चुके हैं. उन्होंने कई फिल्में भी बनाई हैं, जिनमें ब्लू ऑब्सेशन और एपर्चर ऑफ़ आइस शामिल हैं.

<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/travel/story/20150218-inside-alaskas-icy-giant" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी ट्रैवल</caption><url href="http://www.bbc.com/travel" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>

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